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हाथरस: कचरा प्रबंधन केंद्र बना तबेला, ग्रामीणों में आक्रोश हाथरस के सासनी विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत दरियापुर में सरकारी अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लाखों की लागत से बना 'रूरल रिसोर्स सेंटर' (RRC) कचरा प्रबंधन के बजाय भेड़-बकरियों का तबेला बन चुका है। एक साल पहले निर्मित इस केंद्र में गांव का कूड़ा डालने के बजाय पशुओं को बांधा जा रहा है, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। स्थानीय निवासी रामगोपाल और सर्वेश वाष्र्णेय ने ग्राम प्रधान और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र का उपयोग कभी कचरे के लिए हुआ ही नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआरओ सुबोध जोशी ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की बात कही है।

8 hrs ago
user_Journalists Sasni
Journalists Sasni
Journalist सासनी, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
8 hrs ago
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हाथरस: कचरा प्रबंधन केंद्र बना तबेला, ग्रामीणों में आक्रोश हाथरस के सासनी विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत दरियापुर में सरकारी अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लाखों की लागत से बना 'रूरल रिसोर्स सेंटर' (RRC) कचरा प्रबंधन के बजाय भेड़-बकरियों का तबेला बन चुका है। एक साल पहले निर्मित इस केंद्र में गांव का कूड़ा डालने के बजाय पशुओं को बांधा जा रहा है, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। स्थानीय निवासी रामगोपाल और सर्वेश वाष्र्णेय ने ग्राम प्रधान और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र का उपयोग कभी कचरे के लिए हुआ ही नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआरओ सुबोध जोशी ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की बात कही है।

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  • सासनी में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत दूसरे चरण की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) नीरज शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 'एसआईआर' कार्यक्रम के अंतर्गत 'नो मैपिंग' वाले मतदाताओं को नोटिस जारी करने का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन मतदाताओं को मौका दिया जा रहा है जिनके नाम तकनीकी कारणों से मैपिंग में नहीं आ पाए हैं, वे अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत कर मतदाता सूची में अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं। एसडीएम नीरज शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में जिन मतदाताओं के नाम अनुपस्थित या शिफ्टेड (ASD) श्रेणी की वजह से हट गए हैं, वे 'फॉर्म-6' भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम उसमें शामिल नहीं रहना चाहिए। इसी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए प्रशासन हर संभव कदम उठा रहा है।
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    सासनी में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत दूसरे चरण की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) नीरज शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 'एसआईआर' कार्यक्रम के अंतर्गत 'नो मैपिंग' वाले मतदाताओं को नोटिस जारी करने का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन मतदाताओं को मौका दिया जा रहा है जिनके नाम तकनीकी कारणों से मैपिंग में नहीं आ पाए हैं, वे अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत कर मतदाता सूची में अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं।
एसडीएम नीरज शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि 6 जनवरी को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में जिन मतदाताओं के नाम अनुपस्थित या शिफ्टेड (ASD) श्रेणी की वजह से हट गए हैं, वे 'फॉर्म-6' भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम उसमें शामिल नहीं रहना चाहिए। इसी पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए प्रशासन हर संभव कदम उठा रहा है।
    user_Journalists Sasni
    Journalists Sasni
    Journalist सासनी, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • हाथरस के सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरदिलनगर स्थित नहर में विशालकाय मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। बताया जा रहा है कि मगरमच्छ धूप सेकते हुए नहर किनारे नजर आया, जिसे देख ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम मगरमच्छ के रेस्क्यू में जुटी हुई है। वन विभाग ने मगरमच्छ के पकड़े जाने तक ग्रामीणों से नहर के आसपास न जाने और सतर्क रहने की अपील की है।
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    हाथरस के सिकंदराराऊ थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरदिलनगर स्थित नहर में विशालकाय मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। बताया जा रहा है कि मगरमच्छ धूप सेकते हुए नहर किनारे नजर आया, जिसे देख ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम मगरमच्छ के रेस्क्यू में जुटी हुई है। वन विभाग ने मगरमच्छ के पकड़े जाने तक ग्रामीणों से नहर के आसपास न जाने और सतर्क रहने की अपील की है।
    user_Sunil kumar
    Sunil kumar
    Journalist हाथरस, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • हसायन कोतवाली में रिंकू ठाकुर ने किये कंबल वितरित।
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    हसायन कोतवाली में रिंकू ठाकुर ने किये कंबल वितरित।
    user_Astro Mahavastu Expert
    Astro Mahavastu Expert
    Vastu consultant हाथरस, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • ignore my mistake please like share comment ek baar jarur sune apna aasirvaad de contact for all devotional or haryanvi ragni program singer praveen suryavanshi 6395408493
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    ignore my mistake  please like share comment  ek baar jarur sune apna aasirvaad de  contact for all devotional or haryanvi ragni program singer praveen suryavanshi 6395408493
    user_Praveen Kumar  Suryavanshi
    Praveen Kumar Suryavanshi
    Artist अलीगढ़, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • यह है सही 🙏
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    यह है सही 🙏
    user_Vishnu kumar
    Vishnu kumar
    Voice of people सिकंदरा राव, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • *बेरनी बिजली घर में शर्मनाक नंगा नाच: सरकारी संपत्ति बनी शराबियों का अड्डा, तथाकथित पत्रकार पुरुषोत्तम यादव सहित नशेड़ियों की महफिल ने सिस्टम की पोल खोल दी, प्रशासन अब भी सो रहा है?* जलेसर ब्लॉक (एटा जिला, उत्तर प्रदेश) के बेरनी बिजली घर का हाल देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सरकारी बिजलीघर, जहां बिजली आपूर्ति और रखरखाव का पवित्र कार्य होना चाहिए, वहां अब नशे की खुली महफिल सज रही है। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है—लोग फर्श पर लेटे-बैठे शराब के नशे में धुत्त, पीला हेलमेट में संदिग्ध पीला तरल भरा पड़ा, बोतलें इधर-उधर बिखरीं, किताबें-कागजात गंदगी में लथपथ, और पूरा कमरा कूड़े-कर्कट का ढेर बना हुआ। एक तरफ काला कोट पहने व्यक्ति लेटा है, दूसरी तरफ लोग नशे में झूमते-झूमते काम कर रहे हैं, जबकि आसपास हरे-भरे कपड़ों वाले लोग भी इस गंदगी में शामिल नजर आ रहे हैं। यह कोई एकाध घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही शर्मिंदगी है। वीडियो में तथाकथित *पत्रकार* एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव सहित कई लोग शराब पीते और नशे की हालत में कैद हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद हैं। सोशल मीडिया पर यह सामग्री तेजी से फैल रही है, और अब जनता का गुस्सा फटने को तैयार है। क्या बिजलीघर अब बिजली सप्लाई का केंद्र है या *शराबियों* का *क्लब* ? यह सवाल पूरे एटा जिले में गूंज रहा है। *वायरल सामग्री का खौफनाक सच* *वीडियो में साफ नजर आ रहा:* लोग फर्श पर लेटे, शराब की बोतलें हाथ में, नशे में बेसुध। एक व्यक्ति काले कपड़ों में लेटा, दूसरा हेलमेट के पास पीला तरल भरा बाल्टी रखा। *तस्वीरों में गंदगी का मंजर:* कमरा कूड़े से भरा, किताबें-नोटबुक बिखरीं, प्लास्टिक की बोतलें, तारें इधर-उधर, और नशेड़ी लोग बेखौफ बैठे। *सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग:* सरकारी बिजलीघर में यह सब चल रहा है, जहां हाई वोल्टेज उपकरण और बिजली के खतरनाक तार हैं। कोई दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन? *प्रशासन के लिए बाध्यकारी मांगें—* *तुरंत कार्रवाई हो* जनता अब सिर्फ शिकायत नहीं, सख्त रूलिंग मांग रही है। ये मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं। *तत्काल जांच और FIR:* पुलिस अधीक्षक एटा द्वारा वायरल वीडियो/तस्वीरों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत FIR दर्ज हो। जांच SIT या एसएसपी स्तर की टीम को सौंपी जाए, जिसमें बिजली विभाग, पुलिस और आबकारी विभाग शामिल हों। जांच 7 दिनों में पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। *शराबबंदी कानून के तहत सख्त मुकदमा:* उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34 (सार्वजनिक स्थान पर नशा), धारा 54 (अवैध शराब) सहित अन्य धाराओं के तहत पुरुषोत्तम यादव और सभी शामिल लोगों पर मुकदमा। IPC की धारा 188 (सरकारी आदेश अवज्ञा) और 269 (सार्वजनिक खतरा) भी जोड़ी जाए। *सरकारी संपत्ति दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई:* UPPCL/UPRVUNL द्वारा बेरनी बिजली घर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। शामिल लोगों पर पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट के तहत मुकदमा और भारी जुर्माना। प्रभारी अधिकारी/कर्मचारियों पर लापरवाही/मिलीभगत के लिए विभागीय जांच, सस्पेंशन/बर्खास्तगी हो। *सुरक्षा-निगरानी की मजबूत व्यवस्था:* तत्काल CCTV कैमरे लगें, सुरक्षा गार्ड तैनात हों, नियमित पुलिस गश्त हो। परिसर साफ कराया जाए, बिखरा सामान हटाया जाए और इसे असली बिजली कार्यालय बनाया जाए। आसपास पुलिस पिकेट स्थापित हो ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। *पत्रकारिता की गरिमा बचाएं:* तथाकथित पत्रकार पुरुषोत्तम यादव की हरकत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ में शिकायत दर्ज हो। यदि किसी मीडिया से जुड़े हैं, तो स्पष्टीकरण मांगा जाए। ऐसे लोगों को पत्रकारिता का दुरुपयोग रोकने की सख्त चेतावनी। *क्षेत्रवासियों की सुनवाई और मुआवजा:* प्रभावित ग्रामीणों की जन सुनवाई हो। यदि नशे से कोई दुर्घटना/असुविधा हुई, तो मुआवजा दिया जाए। प्रशासन लिखित आश्वासन दे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। *जनता की चेतावनी:* अब और नहीं सहेगी! यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अल्टीमेटम है। अन्य जिलों में ऐसे मामलों में जांच, सस्पेंशन और लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई हो चुकी है। यदि एटा प्रशासन 48 घंटे में ठोस कदम नहीं उठाता, तो जनाक्रोश सड़कों पर उतरेगा। *उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग* में याचिका दायर होगी। बेरनी बिजली घर को नशे का अड्डा नहीं, बिजली का घर बनाना होगा—अब समय आ गया है। *प्रशासन जागो! जनता जाग चुकी है।*
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    *बेरनी बिजली घर में शर्मनाक नंगा नाच: सरकारी संपत्ति बनी शराबियों का अड्डा, तथाकथित पत्रकार पुरुषोत्तम यादव सहित नशेड़ियों की महफिल ने सिस्टम की पोल खोल दी, प्रशासन अब भी सो रहा है?* 
जलेसर ब्लॉक (एटा जिला, उत्तर प्रदेश) के बेरनी बिजली घर का हाल देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सरकारी बिजलीघर, जहां बिजली आपूर्ति और रखरखाव का पवित्र कार्य होना चाहिए, वहां अब नशे की खुली महफिल सज रही है। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है—लोग फर्श पर लेटे-बैठे शराब के नशे में धुत्त, पीला हेलमेट में संदिग्ध पीला तरल भरा पड़ा, बोतलें इधर-उधर बिखरीं, किताबें-कागजात गंदगी में लथपथ, और पूरा कमरा कूड़े-कर्कट का ढेर बना हुआ। एक तरफ काला कोट पहने व्यक्ति लेटा है, दूसरी तरफ लोग नशे में झूमते-झूमते काम कर रहे हैं, जबकि आसपास हरे-भरे कपड़ों वाले लोग भी इस गंदगी में शामिल नजर आ रहे हैं। यह कोई एकाध घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही शर्मिंदगी है। वीडियो में तथाकथित *पत्रकार* एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव सहित कई लोग शराब पीते और नशे की हालत में कैद हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद हैं। सोशल मीडिया पर यह सामग्री तेजी से फैल रही है, और अब जनता का गुस्सा फटने को तैयार है। क्या बिजलीघर अब बिजली सप्लाई का केंद्र है या *शराबियों* का *क्लब* ? यह सवाल पूरे एटा जिले में गूंज रहा है।
*वायरल सामग्री का खौफनाक सच* 
*वीडियो में साफ नजर आ रहा:*  लोग फर्श पर लेटे, शराब की बोतलें हाथ में, नशे में बेसुध। एक व्यक्ति काले कपड़ों में लेटा, दूसरा हेलमेट के पास पीला तरल भरा बाल्टी रखा।
*तस्वीरों में गंदगी का मंजर:* कमरा कूड़े से भरा, किताबें-नोटबुक बिखरीं, प्लास्टिक की बोतलें, तारें इधर-उधर, और नशेड़ी लोग बेखौफ बैठे।
*सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग:* सरकारी बिजलीघर में यह सब चल रहा है, जहां हाई वोल्टेज उपकरण और बिजली के खतरनाक तार हैं। कोई दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
*प्रशासन के लिए बाध्यकारी मांगें—* 
*तुरंत कार्रवाई हो* जनता अब सिर्फ शिकायत नहीं, सख्त रूलिंग मांग रही है। ये मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं।
*तत्काल जांच और FIR:* पुलिस अधीक्षक एटा द्वारा वायरल वीडियो/तस्वीरों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत FIR दर्ज हो। जांच SIT या एसएसपी स्तर की टीम को सौंपी जाए, जिसमें बिजली विभाग, पुलिस और आबकारी विभाग शामिल हों। जांच 7 दिनों में पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
*शराबबंदी कानून के तहत सख्त मुकदमा:* उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34 (सार्वजनिक स्थान पर नशा), धारा 54 (अवैध शराब) सहित अन्य धाराओं के तहत पुरुषोत्तम यादव और सभी शामिल लोगों पर मुकदमा। IPC की धारा 188 (सरकारी आदेश अवज्ञा) और 269 (सार्वजनिक खतरा) भी जोड़ी जाए।
*सरकारी संपत्ति दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई:* UPPCL/UPRVUNL द्वारा बेरनी बिजली घर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। शामिल लोगों पर पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट के तहत मुकदमा और भारी जुर्माना। प्रभारी अधिकारी/कर्मचारियों पर लापरवाही/मिलीभगत के लिए विभागीय जांच, सस्पेंशन/बर्खास्तगी हो।
*सुरक्षा-निगरानी की मजबूत व्यवस्था:* तत्काल CCTV कैमरे लगें, सुरक्षा गार्ड तैनात हों, नियमित पुलिस गश्त हो। परिसर साफ कराया जाए, बिखरा सामान हटाया जाए और इसे असली बिजली कार्यालय बनाया जाए। आसपास पुलिस पिकेट स्थापित हो ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
*पत्रकारिता की गरिमा बचाएं:* तथाकथित पत्रकार पुरुषोत्तम यादव की हरकत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ में शिकायत दर्ज हो। यदि किसी मीडिया से जुड़े हैं, तो स्पष्टीकरण मांगा जाए। ऐसे लोगों को पत्रकारिता का दुरुपयोग रोकने की सख्त चेतावनी।
*क्षेत्रवासियों की सुनवाई और मुआवजा:* प्रभावित ग्रामीणों की जन सुनवाई हो। यदि नशे से कोई दुर्घटना/असुविधा हुई, तो मुआवजा दिया जाए। प्रशासन लिखित आश्वासन दे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
*जनता की चेतावनी:* अब और नहीं सहेगी! यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अल्टीमेटम है। अन्य जिलों में ऐसे मामलों में जांच, सस्पेंशन और लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई हो चुकी है। यदि एटा प्रशासन 48 घंटे में ठोस कदम नहीं उठाता, तो जनाक्रोश सड़कों पर उतरेगा। *उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग* में याचिका दायर होगी। बेरनी बिजली घर को नशे का अड्डा नहीं, बिजली का घर बनाना होगा—अब समय आ गया है। *प्रशासन जागो! जनता जाग चुकी है।*
    user_आदित्य कुमार  पत्रकार
    आदित्य कुमार पत्रकार
    Journalist जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *बेरनी बिजली घर में शर्मनाक नंगा नाच: सरकारी संपत्ति बनी शराबियों का अड्डा, तथाकथित पत्रकार एवं पुरुषोत्तम यादव सहित नशेड़ियों की महफिल ने सिस्टम की पोल खोल दी, प्रशासन अब भी सो रहा है?* तहसील प्रतिनिधि एटा/जलेसर - तहसील क्षेत्र के बेरनी बिजली घर का हाल देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सरकारी बिजलीघर, जहां बिजली आपूर्ति और रखरखाव का पवित्र कार्य होना चाहिए, वहां अब नशे की खुली महफिल सज रही है। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है—लोग फर्श पर लेटे-बैठे शराब के नशे में धुत्त, पीला हेलमेट में संदिग्ध पीला तरल भरा पड़ा, बोतलें इधर-उधर बिखरीं, किताबें-कागजात गंदगी में लथपथ, और पूरा कमरा कूड़े-कर्कट का ढेर बना हुआ। एक तरफ काला कोट पहने व्यक्ति लेटा है, दूसरी तरफ लोग नशे में झूमते-झूमते काम कर रहे हैं, जबकि आसपास हरे-भरे कपड़ों वाले लोग भी इस गंदगी में शामिल नजर आ रहे हैं। यह कोई एकाध घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही शर्मिंदगी है। वीडियो में तथाकथित *पत्रकार* एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव सहित कई लोग शराब पीते और नशे की हालत में कैद हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद हैं। सोशल मीडिया पर यह धूल भरी सामग्री तेजी से फैल रही है। अब जनता का गुस्सा फटने को तैयार है। क्या बिजलीघर अब बिजली सप्लाई का केंद्र है या *शराबियों* का *क्लब* ? यह सवाल पूरे एटा जिले में गूंज रहा है। *वायरल सामग्री का खौफनाक सच* *वीडियो में साफ नजर आ रहा:* लोग फर्श पर लेटे, शराब की बोतलें हाथ में, नशे में बेसुध। एक व्यक्ति काले कपड़ों में लेटा, दूसरा हेलमेट के पास पीला तरल भरा बाल्टी रखा। *तस्वीरों में गंदगी का मंजर:* कमरा कूड़े से भरा, किताबें-नोटबुक बिखरीं, प्लास्टिक की बोतलें, तारें इधर-उधर, और नशेड़ी लोग बेखौफ बैठे। *सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग:* सरकारी बिजलीघर में यह सब चल रहा है, जहां हाई वोल्टेज उपकरण और बिजली के खतरनाक तार हैं। कोई दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन? *प्रशासन के लिए बाध्यकारी मांगें—* *तुरंत कार्रवाई हो* जनता अब सिर्फ शिकायत नहीं, सख्त रूलिंग मांग रही है। ये मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं। *तत्काल जांच और FIR:* पुलिस अधीक्षक एटा द्वारा वायरल वीडियो/तस्वीरों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत FIR दर्ज हो। जांच SIT या एसएसपी स्तर की टीम को सौंपी जाए, जिसमें बिजली विभाग, पुलिस और आबकारी विभाग शामिल हों। जांच 7 दिनों में पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। *शराबबंदी कानून के तहत सख्त मुकदमा:* उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34 (सार्वजनिक स्थान पर नशा), धारा 54 (अवैध शराब) सहित अन्य धाराओं के तहत पुरुषोत्तम यादव और सभी शामिल लोगों पर मुकदमा। IPC की धारा 188 (सरकारी आदेश अवज्ञा) और 269 (सार्वजनिक खतरा) भी जोड़ी जाए। *सरकारी संपत्ति दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई:* UPPCL/UPRVUNL द्वारा बेरनी बिजली घर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। शामिल लोगों पर पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट के तहत मुकदमा और भारी जुर्माना। प्रभारी अधिकारी/कर्मचारियों पर लापरवाही/मिलीभगत के लिए विभागीय जांच, सस्पेंशन/बर्खास्तगी हो। *सुरक्षा-निगरानी की मजबूत व्यवस्था:* तत्काल CCTV कैमरे लगें, सुरक्षा गार्ड तैनात हों, नियमित पुलिस गश्त हो। परिसर साफ कराया जाए, बिखरा सामान हटाया जाए और इसे असली बिजली कार्यालय बनाया जाए। आसपास पुलिस पिकेट स्थापित हो ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। *पत्रकारिता की गरिमा बचाएं:* तथाकथित पत्रकार एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव की हरकत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ में शिकायत दर्ज हो। यदि किसी मीडिया से जुड़े हैं, तो स्पष्टीकरण मांगा जाए। ऐसे लोगों को पत्रकारिता का दुरुपयोग रोकने की सख्त चेतावनी। *क्षेत्रवासियों की सुनवाई और मुआवजा:* प्रभावित ग्रामीणों की जन सुनवाई हो। यदि नशे से कोई दुर्घटना/असुविधा हुई, तो मुआवजा दिया जाए। प्रशासन लिखित आश्वासन दे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। *जनता की चेतावनी:* अब और नहीं सहेगी! यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अल्टीमेटम है। अन्य जिलों में ऐसे मामलों में जांच, सस्पेंशन और लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई हो चुकी है। यदि एटा प्रशासन 48 घंटे में ठोस कदम नहीं उठाता, तो जनाक्रोश सड़कों पर उतरेगा। *उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग* में याचिका दायर होगी। बेरनी बिजली घर को नशे का अड्डा नहीं, बिजली का घर बनाना होगा—अब समय आ गया है। *प्रशासन जागो! जनता जाग चुकी है।*
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    *बेरनी बिजली घर में शर्मनाक नंगा नाच: सरकारी संपत्ति बनी शराबियों का अड्डा, तथाकथित पत्रकार एवं पुरुषोत्तम यादव सहित नशेड़ियों की महफिल ने सिस्टम की पोल खोल दी, प्रशासन अब भी सो रहा है?* 
तहसील प्रतिनिधि 
एटा/जलेसर - तहसील क्षेत्र के बेरनी बिजली घर का हाल देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सरकारी बिजलीघर, जहां बिजली आपूर्ति और रखरखाव का पवित्र कार्य होना चाहिए, वहां अब नशे की खुली महफिल सज रही है। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है—लोग फर्श पर लेटे-बैठे शराब के नशे में धुत्त, पीला हेलमेट में संदिग्ध पीला तरल भरा पड़ा, बोतलें इधर-उधर बिखरीं, किताबें-कागजात गंदगी में लथपथ, और पूरा कमरा कूड़े-कर्कट का ढेर बना हुआ। एक तरफ काला कोट पहने व्यक्ति लेटा है, दूसरी तरफ लोग नशे में झूमते-झूमते काम कर रहे हैं, जबकि आसपास हरे-भरे कपड़ों वाले लोग भी इस गंदगी में शामिल नजर आ रहे हैं। यह कोई एकाध घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही शर्मिंदगी है। वीडियो में तथाकथित *पत्रकार* एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव सहित कई लोग शराब पीते और नशे की हालत में कैद हो चुके हैं। क्षेत्रवासियों की बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की आंखें बंद हैं। सोशल मीडिया पर यह धूल भरी सामग्री तेजी से फैल रही है। अब जनता का गुस्सा फटने को तैयार है।  क्या बिजलीघर अब बिजली सप्लाई का केंद्र है या *शराबियों* का *क्लब* ? यह सवाल पूरे एटा जिले में गूंज रहा है।
*वायरल सामग्री का खौफनाक सच* 
*वीडियो में साफ नजर आ रहा:*  लोग फर्श पर लेटे, शराब की बोतलें हाथ में, नशे में बेसुध। एक व्यक्ति काले कपड़ों में लेटा, दूसरा हेलमेट के पास पीला तरल भरा बाल्टी रखा।
*तस्वीरों में गंदगी का मंजर:* कमरा कूड़े से भरा, किताबें-नोटबुक बिखरीं, प्लास्टिक की बोतलें, तारें इधर-उधर, और नशेड़ी लोग बेखौफ बैठे।
*सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग:* सरकारी बिजलीघर में यह सब चल रहा है, जहां हाई वोल्टेज उपकरण और बिजली के खतरनाक तार हैं। कोई दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
*प्रशासन के लिए बाध्यकारी मांगें—* 
*तुरंत कार्रवाई हो* जनता अब सिर्फ शिकायत नहीं, सख्त रूलिंग मांग रही है। ये मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं।
*तत्काल जांच और FIR:* पुलिस अधीक्षक एटा द्वारा वायरल वीडियो/तस्वीरों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत FIR दर्ज हो। जांच SIT या एसएसपी स्तर की टीम को सौंपी जाए, जिसमें बिजली विभाग, पुलिस और आबकारी विभाग शामिल हों। जांच 7 दिनों में पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
*शराबबंदी कानून के तहत सख्त मुकदमा:* उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34 (सार्वजनिक स्थान पर नशा), धारा 54 (अवैध शराब) सहित अन्य धाराओं के तहत पुरुषोत्तम यादव और सभी शामिल लोगों पर मुकदमा। IPC की धारा 188 (सरकारी आदेश अवज्ञा) और 269 (सार्वजनिक खतरा) भी जोड़ी जाए।
*सरकारी संपत्ति दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई:* UPPCL/UPRVUNL द्वारा बेरनी बिजली घर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। शामिल लोगों पर पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट के तहत मुकदमा और भारी जुर्माना। प्रभारी अधिकारी/कर्मचारियों पर लापरवाही/मिलीभगत के लिए विभागीय जांच, सस्पेंशन/बर्खास्तगी हो।
*सुरक्षा-निगरानी की मजबूत व्यवस्था:* तत्काल CCTV कैमरे लगें, सुरक्षा गार्ड तैनात हों, नियमित पुलिस गश्त हो। परिसर साफ कराया जाए, बिखरा सामान हटाया जाए और इसे असली बिजली कार्यालय बनाया जाए। आसपास पुलिस पिकेट स्थापित हो ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
*पत्रकारिता की गरिमा बचाएं:* तथाकथित पत्रकार एवं *एसएसओ* पुरुषोत्तम यादव की हरकत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ में शिकायत दर्ज हो। यदि किसी मीडिया से जुड़े हैं, तो स्पष्टीकरण मांगा जाए। ऐसे लोगों को पत्रकारिता का दुरुपयोग रोकने की सख्त चेतावनी।
*क्षेत्रवासियों की सुनवाई और मुआवजा:* प्रभावित ग्रामीणों की जन सुनवाई हो। यदि नशे से कोई दुर्घटना/असुविधा हुई, तो मुआवजा दिया जाए। प्रशासन लिखित आश्वासन दे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
*जनता की चेतावनी:* अब और नहीं सहेगी! यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अल्टीमेटम है। अन्य जिलों में ऐसे मामलों में जांच, सस्पेंशन और लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई हो चुकी है। यदि एटा प्रशासन 48 घंटे में ठोस कदम नहीं उठाता, तो जनाक्रोश सड़कों पर उतरेगा। *उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग* में याचिका दायर होगी। बेरनी बिजली घर को नशे का अड्डा नहीं, बिजली का घर बनाना होगा—अब समय आ गया है। *प्रशासन जागो! जनता जाग चुकी है।*
    user_Ravendra Jadon पत्रकार
    Ravendra Jadon पत्रकार
    Journalist Jalesar, Etah•
    7 hrs ago
  • हाथरस के सासनी विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत दरियापुर में सरकारी अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लाखों की लागत से बना 'रूरल रिसोर्स सेंटर' (RRC) कचरा प्रबंधन के बजाय भेड़-बकरियों का तबेला बन चुका है। एक साल पहले निर्मित इस केंद्र में गांव का कूड़ा डालने के बजाय पशुओं को बांधा जा रहा है, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। स्थानीय निवासी रामगोपाल और सर्वेश वाष्र्णेय ने ग्राम प्रधान और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र का उपयोग कभी कचरे के लिए हुआ ही नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआरओ सुबोध जोशी ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की बात कही है।
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    हाथरस के सासनी विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत दरियापुर में सरकारी अनदेखी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लाखों की लागत से बना 'रूरल रिसोर्स सेंटर' (RRC) कचरा प्रबंधन के बजाय भेड़-बकरियों का तबेला बन चुका है। एक साल पहले निर्मित इस केंद्र में गांव का कूड़ा डालने के बजाय पशुओं को बांधा जा रहा है, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। स्थानीय निवासी रामगोपाल और सर्वेश वाष्र्णेय ने ग्राम प्रधान और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र का उपयोग कभी कचरे के लिए हुआ ही नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआरओ सुबोध जोशी ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की बात कही है।
    user_Journalists Sasni
    Journalists Sasni
    Journalist सासनी, हाथरस, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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