चुनावी राजनीति और जातिवाद पर जगद्गुरु शंकराचार्य का तीखा प्रहार सिद्धांतहीन हैं पार्टियां नरसिंहपुर। भारत में चुनावी सरगर्मी के बीच अक्सर जातिगत राजनीति का मुद्दा गरमाया रहता है। हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र के मीडिया के सवालों पर राजनीतिक दलों को सिद्धांतहीन करार दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि पिछले 78 वर्षों से देश में जाति-पाति मिटाओ के नारे गूंज रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। उन्होंने सरकारों और राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ पार्टियां जातिवाद खत्म करने की बात करती हैं, तो दूसरी तरफ जाति के आधार पर ही आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों का चयन भी योग्यता के बजाय उनकी जाति और क्षेत्र के समीकरणों को देखकर किया जाता है। नगर पालिका के पार्षद से लेकर मेयर और चेयरमैन तक के पदों पर जातिगत राजनीति का गहरा प्रभाव है। शंकराचार्य ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जब हम शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो उनका एक निश्चित अर्थ होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर कोई कहे कि बगीचे को आग से सींच दो, तो बगीचा सींचेगा नहीं बल्कि जल जाएगा। इसी प्रकार, जब पार्टियां जातिवाद मिटाने का नारा देकर उसी के आधार पर नीतियां बनाती हैं, तो यह उनके वैचारिक दिवालियेपन को दर्शाता है। मीडिया के स्वाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जातिवाद देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर असहमति जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कई ऐसे देश हैं जहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान, लेकिन क्या वे विकसित हो गए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के विकास में जाति-पाति बाधक नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बाधा है। शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर बहस तेज है। उनके अनुसार, जब तक राजनीतिक दल अपने कथनी और करनी में अंतर रखेंगे, तब तक सामाजिक सुधार के नारे केवल चुनावी जुमले ही बने रहेंगे।
चुनावी राजनीति और जातिवाद पर जगद्गुरु शंकराचार्य का तीखा प्रहार सिद्धांतहीन हैं पार्टियां नरसिंहपुर। भारत में चुनावी सरगर्मी के बीच अक्सर जातिगत राजनीति का मुद्दा गरमाया रहता है। हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र के मीडिया के सवालों पर राजनीतिक
दलों को सिद्धांतहीन करार दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि पिछले 78 वर्षों से देश में जाति-पाति मिटाओ के नारे गूंज रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। उन्होंने सरकारों और राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ पार्टियां जातिवाद खत्म करने की बात करती हैं, तो दूसरी तरफ जाति के आधार पर ही आरक्षण
दिया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों का चयन भी योग्यता के बजाय उनकी जाति और क्षेत्र के समीकरणों को देखकर किया जाता है। नगर पालिका के पार्षद से लेकर मेयर और चेयरमैन तक के पदों पर जातिगत राजनीति का गहरा प्रभाव है। शंकराचार्य ने एक उदाहरण देते हुए समझाया
कि जब हम शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो उनका एक निश्चित अर्थ होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर कोई कहे कि बगीचे को आग से सींच दो, तो बगीचा सींचेगा नहीं बल्कि जल जाएगा। इसी प्रकार, जब पार्टियां जातिवाद मिटाने का नारा देकर उसी के आधार पर नीतियां बनाती हैं, तो यह उनके वैचारिक दिवालियेपन को दर्शाता है। मीडिया
के स्वाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जातिवाद देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर असहमति जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कई ऐसे देश हैं जहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान, लेकिन क्या वे विकसित हो गए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश
के विकास में जाति-पाति बाधक नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बाधा है। शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर बहस तेज है। उनके अनुसार, जब तक राजनीतिक दल अपने कथनी और करनी में अंतर रखेंगे, तब तक सामाजिक सुधार के नारे केवल चुनावी जुमले ही बने रहेंगे।
- कलेक्टर महोदय ने किया मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान1
- सिद्धांतहीन हैं पार्टियां नरसिंहपुर। भारत में चुनावी सरगर्मी के बीच अक्सर जातिगत राजनीति का मुद्दा गरमाया रहता है। हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी ने इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र के मीडिया के सवालों पर राजनीतिक दलों को सिद्धांतहीन करार दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि पिछले 78 वर्षों से देश में जाति-पाति मिटाओ के नारे गूंज रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। उन्होंने सरकारों और राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ पार्टियां जातिवाद खत्म करने की बात करती हैं, तो दूसरी तरफ जाति के आधार पर ही आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में उम्मीदवारों का चयन भी योग्यता के बजाय उनकी जाति और क्षेत्र के समीकरणों को देखकर किया जाता है। नगर पालिका के पार्षद से लेकर मेयर और चेयरमैन तक के पदों पर जातिगत राजनीति का गहरा प्रभाव है। शंकराचार्य ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि जब हम शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो उनका एक निश्चित अर्थ होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर कोई कहे कि बगीचे को आग से सींच दो, तो बगीचा सींचेगा नहीं बल्कि जल जाएगा। इसी प्रकार, जब पार्टियां जातिवाद मिटाने का नारा देकर उसी के आधार पर नीतियां बनाती हैं, तो यह उनके वैचारिक दिवालियेपन को दर्शाता है। मीडिया के स्वाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि जातिवाद देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर असहमति जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कई ऐसे देश हैं जहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान, लेकिन क्या वे विकसित हो गए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के विकास में जाति-पाति बाधक नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बाधा है। शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत जनगणना और आरक्षण को लेकर बहस तेज है। उनके अनुसार, जब तक राजनीतिक दल अपने कथनी और करनी में अंतर रखेंगे, तब तक सामाजिक सुधार के नारे केवल चुनावी जुमले ही बने रहेंगे।6
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- चलती स्कार्पियो में भडकी आग,कूदकर बची 5 जिदगिया1
- करेली में सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह के मंच से बिगड़े बोल पर मंचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है आज बुधवार गोटेगांव के कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग के पदाधिकारियों ने एक जुट होकर एसपी ऑफिस पहुंचकर एसपी को लिखित आवेदन देते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कर मंत्री से इस्तीफा देने की मांग की है।1
- जिले की वरीयता सूची को लेकर भ्रम, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सम्मान की आवश्यकता साईंखेड़ा। नगर परिषद साईंखेड़ा के सेंट्रल पब्लिक एकेडमी स्कूल की कक्षा 12वीं की छात्रा प्रियंका पटेल ने 479 अंक प्राप्त कर जिले की वरीयता सूची में प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं आदित्य कुशवाहा ने 485 अंक अर्जित कर प्रदेश स्तर पर आठवां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम गौरवान्वित किया। दोनों ही विद्यार्थियों की उपलब्धियां सराहनीय हैं, लेकिन हाल ही में प्रकाशित कुछ समाचारों और सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारी के कारण जिले की वरीयता को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई। कुछ माध्यमों में आदित्य कुशवाहा को न केवल प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त करने वाला, बल्कि जिले में भी प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला बताया गया। इससे वास्तविक रूप से जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा प्रियंका पटेल हतोत्साहित हुईं और मानसिक रूप से प्रभावित हुईं। इस विषय में नगर के वरिष्ठ समाजसेवी नागेंद्र शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुशवाहा से चर्चा की। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा दो प्रकार की वरीयता सूचियां जारी की जाती हैं—एक प्रदेश स्तर की और दूसरी प्रत्येक जिले की अलग-अलग सूची। प्रदेश स्तर पर स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के बाद, जिले में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जिला स्तर की सूची में प्रथम, द्वितीय स्थान दिया जाता है। इस आधार पर प्रियंका पटेल ही जिले की प्रथम स्थान प्राप्त छात्रा हैं। सेंट्रल पब्लिक एकेडमी स्कूल के संस्थापक राकेश शर्मा ने बताया कि उनकी जिला शिक्षा अधिकारी से इस विषय में चर्चा हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि भविष्य में माननीय मंत्री जी की उपस्थिति में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें जिले एवं प्रदेश स्तर के सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। यह घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी से विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धियों पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि सभी प्रतिभाओं का निष्पक्ष रूप से सम्मान हो, ताकि उनका उत्साह और मनोबल बना रहे।1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1