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चुरू जिले के राजगढ़ स्थित जसवंतपुरा इलाके में भारी बारिश का कहर देखने को मिला है। यह स्थिति प्रकृति के उस विरोधाभासी स्वरूप को दर्शाती है जहाँ एक ओर कहीं सूखा है तो कहीं कहर बरपाती बारिश, जिसे ‘ईश्वर की मेहर’ के रूप में देखा जा रहा है।
Bhajan lal sharma
चुरू जिले के राजगढ़ स्थित जसवंतपुरा इलाके में भारी बारिश का कहर देखने को मिला है। यह स्थिति प्रकृति के उस विरोधाभासी स्वरूप को दर्शाती है जहाँ एक ओर कहीं सूखा है तो कहीं कहर बरपाती बारिश, जिसे ‘ईश्वर की मेहर’ के रूप में देखा जा रहा है।
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- सूत्रों से मिली खबर के अनुसार, भारत में गौ रक्षकों को सजा मिल रही है, जबकि गौ हत्या करने वालों को कथित तौर पर कभी दंडित नहीं किया जाता। इसी संदर्भ में, चौदह गौ रक्षकों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, जिससे मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। इस घटना ने लोगों के बीच यह सवाल पैदा कर दिया है कि यह किस प्रकार का कानून है, जहाँ गौ रक्षकों को कठोर दंड मिलता है और न्याय का संतुलन बिगड़ा हुआ प्रतीत होता है।1
- चूरू के मुख्य वीआईपी मार्ग पर "विकास रूपी गंगा" दिखाई दी है, जो खराब बुनियादी ढांचे और जलभराव की स्थिति पर एक तीखा व्यंग्य है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस समस्या के बीच जिम्मेदार "दोनों विकास फोर्स" अभी तक लापता हैं। यह दृश्य चूरू के लोगों द्वारा बनाए गए एक वीडियो में कैद किया गया है, जो उनकी नाराजगी को दर्शाता है।1
- झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल की इमरजेंसी फार्मेसी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस वीडियो में एक स्टाफ नर्स दवा वितरित करते हुए दिख रहा है, जिस पर परिजनों ने मरीज को गलत दवा देने और नशे की हालत में ड्यूटी करने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, वायरल वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटना रविवार रात की है, जब एक बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे बीडीके अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा के बजाय उन्हें कोई दूसरी दवा दी गई। स्टाफ नर्स के व्यवहार पर संदेह होने पर परिजनों ने उसका वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने तत्काल प्रभाव से संबंधित संविदा स्टाफ नर्स रविंद्र सिंह को फार्मेसी ड्यूटी से हटा दिया है। इसके साथ ही, डॉ. संदीप नेमीवाल, डॉ. नवीन और नर्सिंग अधिकारी प्यारेलाल की तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है, जिससे रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- झुंझुनू के सरकारी अस्पताल से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहाँ अस्पताल में प्रदान की जा रही सेवाओं पर एक गंभीर और तीखी टिप्पणी की गई है। इस टिप्पणी में सीधे तौर पर कहा गया है कि "जिसको खुद को होश नहीं है, वह क्या दवाई देगा?"1
- 11 जून 2004 को झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया, जिसने शेखावाटी के रेल विकास आंदोलन को एक नई दिशा दी। शेखावाटी रेल विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल के नेतृत्व में, बड़ी रेल लाइन की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए यह अनोखा आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में एक छात्र को लालू प्रसाद यादव और दूसरे को उनके निजी सहायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, केक काटा गया और पटाखों व "हैपी बर्थडे टू यू" के संगीत से पूरा स्टेशन परिसर गूंज उठा। इस दौरान "रेल मंत्री जिंदाबाद" के नारे लगे, मिट्टी के सिकोरे में चाय परोसी गई, लड्डू बांटे गए और बच्चों को पुरस्कार दिए गए। इस आयोजन पर लगभग 40 हजार रुपये खर्च हुए। इस अद्वितीय पहल की खबर राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर प्रसारित हुई, जिससे प्रभावित होकर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को रेल भवन आमंत्रित किया। प्रतिनिधिमंडल अपने साथ चिड़ावा के प्रसिद्ध पेड़े, काकड़ी, मतीरा, कैर-सांगरी और राजस्थानी साफा लेकर पहुंचा। बैठक में यह खुलासा हुआ कि शेखावाटी की मीटरगेज लाइन को हेरिटेज लाइन घोषित कर उसकी फाइल बंद कर दी गई थी। चर्चा के बाद, बड़ी रेल लाइन की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई और अंततः रेल बजट 2007 में इस परियोजना को स्वीकृति मिल गई। यह संघर्ष 7 सितंबर 2015 को तब साकार हुआ, जब पहली बार बड़ी रेल लाइन पर सीकर से दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। इसे शेखावाटी के लंबे संघर्ष की एक बड़ी जीत के रूप में देखा गया, जो दर्शाता है कि सकारात्मक सोच, मजबूत इच्छाशक्ति और अनोखे प्रयास किस तरह इतिहास रच सकते हैं।1
- मंडावा के मुकुंदगढ़ मार्ग पर कामधेनु निराश्रित गौ सेवा समिति द्वारा संचालित गौशाला भामाशाहों और जनसहयोग के दम पर चल रही है। यहाँ के स्थानीय और प्रवासी दानदाता चारे, पानी, दवा, टीन शेड तथा बीमार गायों के इलाज के लिए लगातार आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। करीब सात साल पहले, पशु प्रेमी रविंद्र शर्मा ने सड़कों पर घूम रहे गोवंश की दुर्दशा देखकर उनकी सेवा का बीड़ा उठाया। उन्होंने युवाओं की एक टीम बनाकर छोटे स्तर पर इस गौशाला की शुरुआत की और निराश्रित गोवंश के लिए चारे-पानी की व्यवस्था शुरू की। पशु चिकित्सक किशोर चौहान के नेतृत्व में गौशाला में बीमार और हादसों में घायल हुए पशुओं का निशुल्क इलाज किया जाता है। गौशाला टीम को जैसे ही किसी घायल या बीमार पशु के पड़े होने की सूचना मिलती है, वे तुरंत मौके पर पहुँचकर उसे गौशाला में लाकर इलाज शुरू करते हैं। युवाओं की यह टीम रात के समय होने वाले हादसों से गोवंश को बचाने के लिए उन्हें रिफ्लेक्टर बेल्ट पहनाने जैसा पुनीत कार्य भी करती है। छोटे स्तर पर शुरू हुई यह गौशाला अब बड़े पैमाने पर संचालित की जा रही है, जहाँ लोग अपने जन्मदिन भी आकर मनाने लगे हैं। प्रशासनिक अधिकारी भी गौ सेवा के लिए यहाँ आते हैं और खुलकर सहयोग करते हैं। हाल ही में, नगर पालिका ईओ लोकेंद्र सिंह शेखावत ने अपने खर्चे से गौशाला में एक पशु चिकित्सालय का निर्माण करवाया है। गर्मी के मौसम में पशुओं के लिए कूलर और पंखों की भी व्यवस्था की गई है। हर साल गोपाष्टमी पर गौशाला में रक्तदान शिविर भी लगाया जाता है, और जरूरत पड़ने पर गौशाला टीम निशुल्क रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान में यहाँ लगभग 300 छोटे-बड़े गाय व गोवंश हैं, जिनकी सेवा के लिए लगातार जन सहयोग मिल रहा है।1
- जयपुर में हुई घटना के बाद अभिजीत दीपके सोशल मीडिया के ज़रिए सामने आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी है।1
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