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डुमरखी तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला सेखुआ पेड़ से जा टकराई वहां बलरामपुर जिला मुख्यालय के n h 343 राष्ट्रीय राजमार्ग में तेज रफ्तार का कर देखने को मिला टेलर वाहन धू-धू कर जलने लगा फायर विकेट के टीम ने आग पर पाया काबू
Ali Khan
डुमरखी तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला सेखुआ पेड़ से जा टकराई वहां बलरामपुर जिला मुख्यालय के n h 343 राष्ट्रीय राजमार्ग में तेज रफ्तार का कर देखने को मिला टेलर वाहन धू-धू कर जलने लगा फायर विकेट के टीम ने आग पर पाया काबू
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- ब्रेकिंग बलरामपुर बलरामपुर जिला मुख्यालय के समीप एन एच 343 राष्ट्रीय राजमार्ग बड़ी दुर्घटना डूमरखी बैरियर के पास एक ट्रेलर वाहन अनियंत्रित होकर साल पेड़ से जा टकराया टेलर मे देखते ही देखते पूरी ट्रेलर वहन में आग लग गई टेलर को आग अपने चपेट में ले लिया वह मौके पर अफरा तफरी मच गाई ट्रेलर वाहन चालक मौके से फरार बताया जा रहा है वही राहगीरो की मदद से तत्काल बलरामपुर फायर विकेट कि टीम को सुचना दिया तत्काल मौके पर पहुंची और आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया पूरा मामला बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है1
- Post by Sunil singh1
- चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के चिनीयां-गढ़वा मुख्य सड़क पर जंगली घाटी स्थित शिव स्थान के पास लगभग एक वर्ष से बंद पड़े चापाकल को लेकर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर दी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चिनीयां और तसरार गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से मिस्त्री बुलवाकर चापाकल खुलवाया। जांच के दौरान पता चला कि चापाकल के पाइप समेत कई जरूरी पुर्जे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिन्हें बदलने में हजारों रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मरम्मत कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क काफी व्यस्त है, जहां हर दिन हजारों लोग पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से आवागमन करते हैं। भीषण गर्मी में इस सुनसान जंगल के बीच यही चापाकल यात्रियों के लिए जीवनरेखा था। इसके बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोगों—चरितर पासवान, अभिषेक सिंह, वकील ठाकुर, विजय सिंह, विजय ठाकुर और शाहिद—ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक साल से चापाकल खराब पड़ा था, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर अब ग्रामीण खुद ही आगे आए हैं।1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड के चैनपुर में निर्माणाधीन पावर प्लांट स्थल पर करंट लगने से बैल की मौत के मामले में ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गुरुवार को पावर प्लांट स्थल पर आंदोलन शुरू कर दिया।ग्रामीणों के अनुसार पावर प्लांट निर्माण स्थल पर फैले खुले बिजली तार की चपेट में आने से एक बैल की मौत हो गई। आरोप है कि घटना के बाद बैल को बिना ग्रामीणों को सूचना दिए दफना दिया गया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण पावर प्लांट स्थल पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पावर प्लांट प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मृत बैल के मालिक को उचित मुआवजा देने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं दिया जाता और घटना की जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।वहीं मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।2
- गढ़वा पुलिस की पहल से चोरो का पलता लगा कर, गिरफ़्तार कर लिया गया l और आगे की जच परकिरिया जारी है कि किसी बड़े लोगो की तो, इसघाटना को करने में सहयोग तो नहीं है l जच के बाद खुलासा किया जाएगा l1
- मां ऐसी भी होती है क्या, मां त्याग, प्रेम और सुरक्षा की मिसाल है फिर इस मां ने बेटी की बलि कैसे दे दी1
- बलरामपुर जिले के रामानुजगंज विकासखंड पशुधन विभाग में एक घूस लेने का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया में घूम रहा है जिसको लेकर के आरोपी ने बताया कि अपने उच्च अधिकारियों के लिए मैं इस तरीके से कमीशन मांग रहा था1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ स्थित संत जेवियर कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के तत्वावधान में “टीबी मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम एवं शपथ ग्रहण समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षय रोग (टीबी) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी के प्रति समाज को सचेत रहने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं को “टीबी मुक्त भारत” की शपथ दिलाई गई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहेंगे, समय पर जांच कराएंगे तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा— टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता की कमी का भी परिणाम है। जब तक हम इसके लक्षणों, कारणों और उपचार के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होंगे, तब तक इसे जड़ से समाप्त करना संभव नहीं है। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। हमारा उद्देश्य केवल शपथ लेना नहीं, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारना है। एन.एस.एस. स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे समाज में परिवर्तन के वाहक होते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने गांव, परिवार एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षण—जैसे लगातार खांसी, वजन घटना, बुखार आदि—के बारे में जागरूक करें तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और सरकार द्वारा इसके लिए निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो टीबी मुक्त भारत का सपना अवश्य साकार होगा। कार्यक्रम के दौरान एन.एस.एस. कॉर्डिनेटर विक्रम रजत डुंगडुंग ने भी अपने संबोधन में कहा— “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें निभाना भी है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, सेवा भाव और उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। एन.एस.एस. के स्वयंसेवकों को चाहिए कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” इस कार्यक्रम में उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित अन्य शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी सिद्ध हुआ।4
- हनुमान जयंती के अवसर पर अंबिकापुर के हनुमान मंदिरों में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचने लगे और देर रात तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा। मंदिरों को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर जगमगा उठा। भक्तों ने भगवान हनुमान को सिंदूर, नारियल और लड्डू अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान कई जगहों पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा और यातायात व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित की गई। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। पूरे शहर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला, और "जय श्री राम" व "बजरंगबली की जय" के जयकारों से अंबिकापुर गूंज उठा।4