जनप्रतिनिधि रहे मौन, ग्रामीण बने मिसाल: जंगल के बीच सालभर से बंद चापाकल को खुद ठीक कराने जुटे लोग चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के चिनीयां-गढ़वा मुख्य सड़क पर जंगली घाटी स्थित शिव स्थान के पास लगभग एक वर्ष से बंद पड़े चापाकल को लेकर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर दी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चिनीयां और तसरार गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से मिस्त्री बुलवाकर चापाकल खुलवाया। जांच के दौरान पता चला कि चापाकल के पाइप समेत कई जरूरी पुर्जे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिन्हें बदलने में हजारों रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मरम्मत कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क काफी व्यस्त है, जहां हर दिन हजारों लोग पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से आवागमन करते हैं। भीषण गर्मी में इस सुनसान जंगल के बीच यही चापाकल यात्रियों के लिए जीवनरेखा था। इसके बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोगों—चरितर पासवान, अभिषेक सिंह, वकील ठाकुर, विजय सिंह, विजय ठाकुर और शाहिद—ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक साल से चापाकल खराब पड़ा था, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर अब ग्रामीण खुद ही आगे आए हैं।
जनप्रतिनिधि रहे मौन, ग्रामीण बने मिसाल: जंगल के बीच सालभर से बंद चापाकल को खुद ठीक कराने जुटे लोग चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के चिनीयां-गढ़वा मुख्य सड़क पर जंगली घाटी स्थित शिव स्थान के पास लगभग एक वर्ष से बंद पड़े चापाकल को लेकर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर दी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चिनीयां और तसरार गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से मिस्त्री बुलवाकर चापाकल खुलवाया। जांच के दौरान पता चला कि चापाकल के पाइप समेत कई जरूरी पुर्जे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिन्हें बदलने में हजारों रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मरम्मत कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क काफी व्यस्त है, जहां हर दिन हजारों लोग पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से आवागमन करते हैं। भीषण गर्मी में इस सुनसान जंगल के बीच यही चापाकल यात्रियों के लिए जीवनरेखा था। इसके बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोगों—चरितर पासवान, अभिषेक सिंह, वकील ठाकुर, विजय सिंह, विजय ठाकुर और शाहिद—ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक साल से चापाकल खराब पड़ा था, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर अब ग्रामीण खुद ही आगे आए हैं।
- चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के चिनीयां-गढ़वा मुख्य सड़क पर जंगली घाटी स्थित शिव स्थान के पास लगभग एक वर्ष से बंद पड़े चापाकल को लेकर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर दी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चिनीयां और तसरार गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से मिस्त्री बुलवाकर चापाकल खुलवाया। जांच के दौरान पता चला कि चापाकल के पाइप समेत कई जरूरी पुर्जे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिन्हें बदलने में हजारों रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मरम्मत कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क काफी व्यस्त है, जहां हर दिन हजारों लोग पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से आवागमन करते हैं। भीषण गर्मी में इस सुनसान जंगल के बीच यही चापाकल यात्रियों के लिए जीवनरेखा था। इसके बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोगों—चरितर पासवान, अभिषेक सिंह, वकील ठाकुर, विजय सिंह, विजय ठाकुर और शाहिद—ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक साल से चापाकल खराब पड़ा था, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर अब ग्रामीण खुद ही आगे आए हैं।1
- #समुदायों के बीच पीने की पानी को लेकर बहुत बड़ी संकट खड़ी हो चुकी है। साथ ही कुछ दबंगों के द्वारा भी जनजाति को दबाया जा रहा है। जो बिल्कुल गलत है। आजाद भारत में रहने चलने और हक सबको है।1
- रमना के रामगड मोर के पास घटित घाटना में पंकज कुमार जो अपनी लूना से रोज की तरह आज भी दुकान लगाने जा रहा था l अचानक एक तेज रफ्तार से आई चरपहिया वहांन ने इतना जोरदार तकर मारा कि पंकज कुमार का मौत हो गया l1
- गढ़वा में मजार से चोरी करने वाले 4 चोर गिरफ्तार #garhwa #garhwanews #garhwanewstoday #garhwabreakingnews #todaygarhwanews1
- गढ़वा जिला के रमना हाइवे सड़क हादसे में एक युवक के घटना स्थल पर मौत1
- नालंदा के नूरसराय में बीच सड़क पर एक महिला के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे बिहार को शर्मसार कर दिया है। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की पूरी तरह विफलता का प्रमाण है। आज हालात इतने भयावह हैं कि बिहार में महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है। हैरानी की बात यह है कि जब नीतीश कुमार के अपने गृह जिले में ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो बाकी प्रदेश का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। बिहार ने ऐसी बदहाली शायद पहले कभी नहीं देखी। अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है और प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है। अब वक्त आ गया है कि सरकार जवाब दे आखिर कब तक बिहार की माँ-बहनों की अस्मिता यूँ सड़कों पर तार-तार होती रहेगी? कब जागेगा प्रशासन ?1
- Post by Samaj seva1
- अभिभावक अपने बच्चे को बेहतर सिखाते हैं सरकारी स्कूल को छोड़ कर पब्लिक में भेजते हैं लेकिन काई वीडियो देखे होगे की बच्चे को लात, मुका, डंडा मारा जाता है l यहा हसा खेला कर बच्चों को सिखाया जाता है l3