प्रयागराज में पौराणिक परंपरा का पालन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ को बीमार माना गया है, जिसके चलते वे 15 दिनों के लिए अपनी मौसी के घर आए हैं। भीषण गर्मी के कारण भगवान बीमार बताए गए हैं और 15 जुलाई तक उनके एकांतवास के दौरान उनका उपचार किया जा रहा है। इस अवधि में सुबह-शाम औषधि काढ़ा और दवा का भोग लगाया जा रहा है, और डॉक्टर उनकी नियमित जांच भी कर रहे हैं। इस दौरान केवल पुजारी और वैद्यजी को ही भगवान के पास जाने की अनुमति है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। मंदिर की सेवा से जुड़ीं प्रीति गुप्ता के अनुसार, पुरी के श्रीमंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान पूर्णिमा के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा बीमार होकर 14 दिन के अनवसर काल में विश्राम करते हैं। इस परंपरा के पीछे माधवदास नामक भक्त की कथा प्रचलित है, जिन्हें एक बार अतिसार का गंभीर रोग हो गया था। मंदिर के प्रबंधक गगन गुप्ता के मुताबिक, स्वयं भगवान ने अपने भक्त माधवदास की पीड़ा को साझा करते हुए उनके प्रारब्ध के 15 दिनों के रोग को अपने ऊपर ले लिया था। इसी घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान बीमार होकर विश्राम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को स्वस्थ होने पर भक्तों को दर्शन देने रथ यात्रा पर निकलते हैं।
प्रयागराज में पौराणिक परंपरा का पालन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ को बीमार माना गया है, जिसके चलते वे 15 दिनों के लिए अपनी मौसी के घर आए हैं। भीषण गर्मी के कारण भगवान बीमार बताए गए हैं और 15 जुलाई तक उनके एकांतवास के दौरान उनका उपचार किया जा रहा है। इस अवधि में सुबह-शाम औषधि काढ़ा और दवा का भोग लगाया जा रहा है, और डॉक्टर उनकी नियमित जांच भी कर रहे हैं। इस दौरान केवल पुजारी और वैद्यजी को ही भगवान के पास जाने की अनुमति है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। मंदिर की सेवा से जुड़ीं प्रीति गुप्ता के अनुसार, पुरी के श्रीमंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान पूर्णिमा के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा बीमार होकर 14 दिन के अनवसर काल में विश्राम करते हैं। इस परंपरा के पीछे माधवदास नामक भक्त की कथा प्रचलित है, जिन्हें एक बार अतिसार का गंभीर रोग हो गया था। मंदिर के प्रबंधक गगन गुप्ता के मुताबिक, स्वयं भगवान ने अपने भक्त माधवदास की पीड़ा को साझा करते हुए उनके प्रारब्ध के 15 दिनों के रोग को अपने ऊपर ले लिया था। इसी घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान बीमार होकर विश्राम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को स्वस्थ होने पर भक्तों को दर्शन देने रथ यात्रा पर निकलते हैं।
- प्रयागराज के शंकरगढ़ में 65 वर्षीय रामसखा तिवारी ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर वहां मकान का निर्माण कर लिया गया है। रामसखा तिवारी के अनुसार, इस मामले में कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और राजस्व रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, साथ ही मुकदमा भी दर्ज है। इसके बावजूद अब तक उनकी जमीन को कब्जामुक्त नहीं कराया गया है। न्याय न मिलने से हताश पीड़ित ने अब आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।1
- मानसून के दस्तक देते ही दिल्ली के दक्षिणपुरी में ड्रेनेज व्यवस्था की खामियां खुलकर सामने आ गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नालियों के ओवरफ्लो होने और जलजमाव की समस्या ने जनजीवन को पूरी तरह बाधित कर दिया है। खराब सफाई व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुई इन समस्याओं से इलाके के लोग खासे परेशान हैं और इसे लेकर गंभीर चिंताएं जता रहे हैं। निवासियों के अनुसार, बंद नालियों में जमा पानी अब मच्छरों के पनपने का केंद्र बन चुका है, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। स्वास्थ्य को लेकर उपजी इस दहशत के बीच, स्थानीय लोग सीवर नेटवर्क की तुरंत और प्रभावी सफाई की पुरजोर मांग कर रहे हैं। इस मामले पर दिल्ली नगर निगम का कहना है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। निगम के अनुसार, मानसून के दौरान वेक्टर जनित बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं।1
- प्रयागराज में पौराणिक परंपरा का पालन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ को बीमार माना गया है, जिसके चलते वे 15 दिनों के लिए अपनी मौसी के घर आए हैं। भीषण गर्मी के कारण भगवान बीमार बताए गए हैं और 15 जुलाई तक उनके एकांतवास के दौरान उनका उपचार किया जा रहा है। इस अवधि में सुबह-शाम औषधि काढ़ा और दवा का भोग लगाया जा रहा है, और डॉक्टर उनकी नियमित जांच भी कर रहे हैं। इस दौरान केवल पुजारी और वैद्यजी को ही भगवान के पास जाने की अनुमति है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। मंदिर की सेवा से जुड़ीं प्रीति गुप्ता के अनुसार, पुरी के श्रीमंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान पूर्णिमा के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा बीमार होकर 14 दिन के अनवसर काल में विश्राम करते हैं। इस परंपरा के पीछे माधवदास नामक भक्त की कथा प्रचलित है, जिन्हें एक बार अतिसार का गंभीर रोग हो गया था। मंदिर के प्रबंधक गगन गुप्ता के मुताबिक, स्वयं भगवान ने अपने भक्त माधवदास की पीड़ा को साझा करते हुए उनके प्रारब्ध के 15 दिनों के रोग को अपने ऊपर ले लिया था। इसी घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान बीमार होकर विश्राम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को स्वस्थ होने पर भक्तों को दर्शन देने रथ यात्रा पर निकलते हैं।1
- प्रयागराज के मालवीय नगर वार्ड में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद असलम ने अपने साथियों के साथ 'जन-जन कांग्रेस घर-घर कांग्रेस' अभियान के तहत जनसंपर्क किया। पिछले लगभग दो वर्षों से चलाए जा रहे इस अभियान के क्रम में, श्री असलम ने आज वार्ड के निवासियों के घरों और स्थानीय बाजार में दुकानदारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने लोगों को कांग्रेस पार्टी की नीतियों, विचारधारा और कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मोहम्मद असलम ने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, जिसके कारण आम आदमी के लिए दो समय का भोजन जुटाना भी कठिन हो गया है। उन्होंने महिलाओं के उत्पीड़न और देश की संपत्ति बेचे जाने का उल्लेख करते हुए इसे लोकतंत्र का मजाक बताया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए अब समय आ गया है कि वे कांग्रेस पार्टी का साथ दें और इसे मजबूत करें। इस दौरान उनके साथ सुशील द्विवेदी, दिलावर हुसैन, मोहम्मद अजमल राजू, मोहम्मद नौशाद, असलम वारसी, मोहम्मद साजिद अंसारी, विकास कौशल, शकील अहमद, रईस राईन, अफसर अंसारी, अंकित हेमकर और प्रकाश शर्मा समेत कई अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- प्रयागराज की फूलपुर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा नवादा में एक ऐसा स्थल स्थित है, जो इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस स्थल की लोकप्रियता का आलम यह है कि इसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंच रहे हैं। इस स्थल का निर्माण सभी ग्रामवासियों के सौजन्य से किया गया है। ग्रामीणों ने इसके सुंदरीकरण की मांग को लेकर सरकार से कई बार गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इस मामले की जानकारी ग्रामीण न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर राजेंद्र कुमार द्वारा दी गई है।1
- आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के अर्थमुरु गांव में एक 65 वर्षीय मैकेनिक, सत्ती शिव नारायण रेड्डी ने अपनी पत्नी के लिए घर पर ही एक एस्केलेटर का निर्माण किया है। सत्ती शिव नारायण रेड्डी ने अपनी 58 वर्षीय पत्नी सत्यवेणी को घर की पहली मंजिल तक जाने वाली 21 सीढ़ियां चढ़ने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिए यह पहल की। इस एस्केलेटर को डिजाइन और बनाने का विचार उन्होंने दो साल पहले ही किया था, जिसे उन्होंने हाल ही में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।1
- प्रयागराज के नए यमुना पुल से बृहस्पतिवार शाम को एक 23 वर्षीय युवक ने नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के समय युवक अपनी मां से फोन पर बात कर रहा था। इस घटना के बाद पुल पर भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और युवक की तलाश में करीब डेढ़ घंटे तक अभियान चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों को युवक का शव बरामद हुआ। इस हृदयविदारक घटना के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्होंने बताया कि फोन पर बातचीत के दौरान युवक ने उन्हें अपनी परेशानी के बारे में कुछ भी नहीं बताया था।1