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नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
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नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।
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- नरसिंहपुर जिले के श्रीधाम रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां जबलपुर से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर गोटेगांव अपने घर वापस लौट रही एक महिला का अचानक पैर फिसल गया। इस दौरान वह ट्रेन के नीचे आ गई, जिससे उसके एक पैर का पंजा कट गया। हादसे के बाद डॉक्टरों ने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और फिर उसे जबलपुर रेफर कर दिया।2
- रमन रेती को ब्रजभूमि (गोकुल, मथुरा) के अत्यंत पवित्र, शांत और अनूठे धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह स्थान सीधे भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की अठखेलियों और उनकी बाल-लीलाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।1
- झारखंड के हजारीबाग जिले में इंसान और जानवर के अटूट प्रेम की एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ अपने मालिक की मृत्यु के बाद एक वफादार बछड़ा रस्सी तुड़ाकर श्मशान घाट पहुँच गया और अंतिम संस्कार की रस्मों में एक पुत्र की तरह शामिल हुआ। इस मार्मिक दृश्य को देख वहाँ मौजूद सभी लोगों की आँखें नम हो गईं। यह घटना चौपारण प्रखंड के चैथी गांव की है, जहाँ निवासी मेवालाल ठाकुर का हाल ही में निधन हो गया था। मेवालाल नि:संतान थे और अपने पशुओं से बच्चों जैसा प्यार करते थे। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने करीब तीन महीने पहले अपने एक बछड़े को दूसरे गांव के एक व्यक्ति को बेच दिया था। मेवालाल की अंतिम यात्रा जैसे ही श्मशान घाट पहुँची, वह बछड़ा, जिसे तीन महीने पहले बेचा गया था, अचानक वहाँ आ गया। बताया जा रहा है कि बछड़ा खूंटे से अपनी रस्सी तुड़ाकर सीधे श्मशान घाट तक पहुँचा। शुरुआत में उपस्थित लोगों ने उसे आवारा पशु समझकर भगाने का प्रयास किया, लेकिन बछड़ा बार-बार शव के पास आने लगा। जब लोगों ने बछड़े को शव के पास जाने दिया, तो उसने मृतक के चेहरे को चूमा और जोर-जोर से रंभाने (रोने) लगा। ग्रामीणों ने बताया कि बछड़े ने न केवल अर्थी की परिक्रमा की, बल्कि मुखाग्नि के समय भी वह चिता के पास अडिग खड़ा रहा। जब तक पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन नहीं हो गया, वह बेजुबान वहीं मौजूद रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेवालाल ठाकुर के निस्वार्थ प्रेम का ही नतीजा है कि एक पशु तीन महीने बाद भी अपने मालिक को नहीं भूला और उन्हें अंतिम विदाई देने सही समय पर पहुँच गया।1
- नर्मदा नदी में दो युवक डूब गए थे, जिसके बाद स्थानीय नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें सकुशल बाहर निकाला। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- नरसिंहपुर जिले के बरमान स्थित बरमान घाट पर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब नर्मदा नदी में नहाने आए एक युवक को डूबते समय स्थानीय नाविकों ने समय रहते बचा लिया। इस घटना का एक लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नाविकों की तत्परता स्पष्ट दिखाई दे रही है, और यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया गया है कि रविवार होने के कारण घाट पर भारी भीड़ थी। युवक उथले पानी में नहा रहा था, लेकिन कुछ ही कदम आगे बढ़ते ही वह अचानक गहराई में चला गया और डूबने लगा, जिसके बाद आसपास मौजूद नाविकों ने तुरंत रेस्क्यू कर उसकी जान बचाई। चिंता की बात यह है कि पिछले 12 दिनों में बरमान घाट पर यह छठी घटना है। इन पूर्व की घटनाओं में अब तक दो युवकों की मौत भी हो चुकी है, जबकि अन्य मामलों में लोगों को समय रहते बचा लिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, घाट पर पानी की गहराई अचानक बढ़ जाती है, जिसका अंदाजा बाहरी लोगों को नहीं लग पाता, और इसी वजह से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद न तो प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और न ही लोग सावधानी बरत रहे हैं।1
- भेरुंदा नगर में विश्वकर्मा युवा वाहिनी चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपने चौथे स्थापना दिवस के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का संयोजन ट्रस्ट के प्रदेश अध्यक्ष दीपक विश्वकर्मा और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती माधवी विश्वकर्मा द्वारा किया गया।1
- नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट पर पिछले मात्र 12 दिनों के भीतर यह छठवां हादसा है, जहाँ एक युवक को नर्मदा नदी में डूबने से बचाया गया। यह घटना रेत घाट पर हुई, जब एक युवक नदी में नहाने आया और डूबने लगा। उसकी जान बचाने के लिए नाविकों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पानी से बाहर निकाला।1
- गोटेगांव के समीप भड़री में श्रीमद् भागवत कथा की एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया। यह शोभा यात्रा गोटेगांव बाईपास से शुरू होकर गोटेगांव नगर देवता ठाकुर बाबा से भड़री चौराहा तक पहुंची। इस दौरान ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और डीजे के साथ 'जय श्री राम' के नारों से महाराज श्री का स्वागत सत्कार किया गया। यात्रा गांव के खेड़ापति प्रांगण पहुंची, जहाँ महाराज श्री ने पूजन अर्चन किया और फिर गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए कथा स्थल पर पहुंचे। कथा स्थल पर कन्या पूजन और ब्राह्मण पूजन के साथ महाराज श्री ने प्रथम दिन श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताया। अपने प्रवचन में महाराज श्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर गहरा विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी को अपने धर्म और कर्तव्य के मार्ग से कभी भटकना या कमजोर नहीं होना चाहिए, क्योंकि हिंदू सनातन धर्म एक राष्ट्रीय धर्म है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है। इसके साथ ही, महाराज श्री ने 'वीआईपी कल्चर' की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने भ्रष्टाचार का कारण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सिस्टम को खत्म करना चाहिए, चाहे वह मंदिरों में हो या साधु-संतों से मिलने में। महाराज श्री के अनुसार, भगवान की नजरों में सभी भक्त बराबर हैं और उनकी चौखट पर कोई अमीर या गरीब नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि वीआईपी कल्चर से गरीब लोगों में गलत संदेश जाता है, क्योंकि वे पैसे देकर वीआईपी पंक्ति में शामिल होकर भगवान के दर्शन नहीं कर पाते, जबकि दूसरे धर्मों में वीआईपी कल्चर न होने के कारण आसानी से दर्शन हो जाते हैं, जिससे धर्मांतरण को बढ़ावा मिलता है। महाराज श्री ने भड़री गांव को भाग्यशाली बताया कि उसे परसोत्तम माह (पुरुषोत्तम मास) में भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य मिला, जबकि यह कथा मूल रूप से 2027 में होनी थी। यह भगवान की कृपा और पूर्वजों के आशीर्वाद से संभव हुआ है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान चौधरी यशवंत सिंह ने महाराज श्री का तिलक और फूलमाला से स्वागत किया। आयोजन समिति भड़री मनकवारा भाड़ी ने सभी से कथा में शामिल होने की अपील की है। प्रवचन प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक होंगे और यह आयोजन 30 मई तक चलेगा।2