*एटा जिले में तहसीलदार की गुंडागर्दी: लोधी समाज की महिलाओं पर पुलिसिया बर्बरता, एक बेहोश-जिंदगी की जंग, दूसरी की हड्डियां तोड़ी, किसानों पर जुल्म की इंतेहा* =========================== *पंकज सिंह जिलाध्यक्ष एटा* *भारतीय किसान यूनियन (भानु)* ========================== एटा (जलेसर), 09 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के एटा जिले की तहसील जलेसर अंतर्गत गांव नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर में 8 जनवरी 2025 को तहसीलदार संदीप सिंह द्वारा कराई गई पैमाइश ने प्रशासन की क्रूरता की नई मिसाल कायम कर दी है। कृषि प्रधान देश में अन्नदाता लोधी समाज के किसानों और उनकी महिलाओं पर पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में ऐसी बर्बर लाठीचार्ज और मारपीट की कि एक महिला अभी तक बेहोश होकर जिंदगी-मौत से जूझ रही है, दूसरी महिला की हड्डी टूटने से वह स्थायी दिव्यांग बन गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुष गंभीर रूप से घायल हैं। यह पूरी कार्रवाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर अवैध रूप से पैमाइश करने के नाम पर की गई, जो स्पष्ट रूप से दादागीरी और षड्यंत्र का हिस्सा लगती है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस जघन्य अत्याचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और शासन-प्रशासन से कड़े सवाल उठाए हैं। भाकियू का कहना है कि विवादित भूमि पर कमिश्नर अलीगढ़ न्यायालय में वाद विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को निर्धारित है। *घटना का क्रमवद्ध विवरण:* *पृष्ठभूमि:* पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर दबंगों द्वारा कथित दादागीरी से कब्जा करने की कोशिश। भूमि विवाद कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में लंबित। *8 जनवरी 2025 की घटना:* तहसीलदार संदीप सिंह पुलिस बल के साथ नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर पहुंचे। किसानों के विरोध पर पुलिस ने महिलाओं सहित लोधी समाज के लोगों पर बर्बर मारपीट की। *परिणाम:* एक महिला बेहोश (जिंदगी की जंग), दूसरी की हड्डियां तोड़ कर दिव्यांग किया, दर्जनों घायल। तहसीलदार पर पुलिस को उकसाने का आरोप। *एकपक्षीय कार्रवाई:* पीड़ितों का मेडिकल नहीं कराया गया, जबकि तहसीलदार ने जलेसर थाने में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। वीडियो में तहसीलदार की कार सुरक्षित दिखने के बावजूद तोड़फोड़ के झूठे आरोप लगाए गए। *भाकियू ने उठाए सटीक सवाल👇 –* *प्रशासन की पोल खोलते 13 बिंदु👉* 1.पीड़ित किसान गीतम सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख) की पैतृक जमीन पर बिना सरकारी बंटवारे (कुराबंदी) के किस न्यायालय के आदेश पर पैमाइश की गई? 2.कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में वाद लंबित और सुनवाई की तारीख 16 जनवरी 2026 निर्धारित होने पर न्यायालय पर भरोसा क्यों नहीं दिखाया? 3.पूरे यूपी में SIR प्रक्रिया चल रही है, फिर पैतृक जमीनों की पैमाइश के लिए समय कैसे निकला? 4.यदि समय था तो जलेसर क्षेत्र में हजारों बीघा सरकारी जमीन पर माफियाओं का कब्जा क्यों नहीं हटवाया? 5.पैमाइश के लिए उपजिला मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिवत आदेश लेकर टीम क्यों नहीं गठित की गई? 6.मौके पर संबंधित लेखपाल क्यों अनुपस्थित था? 7.आवश्यक उपकरण जरीब न होने पर इंचटेप से पैमाइश क्यों की गई? 8.बिना लेखपाल और जरीब के सरकारी दस्तावेज कहां से आए, जिन्हें फाड़ने के झूठे आरोप लगाए गए? 9.वीडियो में तहसीलदार की कार साफ-सुरक्षित खड़ी दिख रही है, फिर कार तोड़ने का आरोप पीड़ितों पर क्यों ठोंका? 10.पीड़ितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन उनका मेडिकल क्यों नहीं कराया? 11.कैमरों के सामने पूरी घटना हुई, फिर एकपक्षीय मदद क्यों की गई? 12.तहसीलदार संदीप सिंह की जलेसर तैनाती पर हमेशा गैर-कानूनी पैमाइश और किसानों के खिलाफ साजिश क्यों रची जाती है, जिससे दर्जनों गांवों में एफआईआर हो चुकी हैं? 13.लोधी समाज के किसानों पर हो रहे *इन अत्याचारों के खिलाफ भाकियू बड़ा जनआंदोलन, धरना-प्रदर्शन करेगी – किसी क्षति की पूरी जिम्मेदारी तहसीलदार संदीप सिंह और उपजिलाधिकारी पर होगी।* भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने तत्काल न्याय नहीं किया तो तहसीलदार पर मुकदमा, पीड़ितों का पूरा इलाज और क्षतिपूर्ति नहीं की तो पूरे जलेसर क्षेत्र में विशाल आंदोलन होगा। यह घटना यूपी प्रशासन की किसान-विरोधी और लोधी समाज विरोधी साजिश की नंगी तस्वीर उजागर करती है। अन्नदाताओं की महिलाओं पर पुलिसिया जुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – शासन जागे, वरना किसान सड़कों पर उतरेंगे।
*एटा जिले में तहसीलदार की गुंडागर्दी: लोधी समाज की महिलाओं पर पुलिसिया बर्बरता, एक बेहोश-जिंदगी की जंग, दूसरी की हड्डियां तोड़ी, किसानों पर जुल्म की इंतेहा* =========================== *पंकज सिंह जिलाध्यक्ष एटा* *भारतीय किसान यूनियन (भानु)* ========================== एटा (जलेसर), 09 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के एटा जिले की तहसील जलेसर अंतर्गत गांव नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर में 8 जनवरी 2025 को तहसीलदार संदीप सिंह द्वारा कराई गई पैमाइश ने प्रशासन की क्रूरता की नई मिसाल कायम कर दी है। कृषि प्रधान देश में अन्नदाता लोधी समाज के किसानों और उनकी महिलाओं पर पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में ऐसी बर्बर लाठीचार्ज और मारपीट की कि एक महिला अभी तक बेहोश होकर जिंदगी-मौत से जूझ रही है, दूसरी महिला की हड्डी टूटने से वह स्थायी दिव्यांग बन गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुष गंभीर रूप से घायल हैं। यह पूरी कार्रवाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर अवैध रूप से पैमाइश करने के नाम पर की गई, जो स्पष्ट रूप से दादागीरी और षड्यंत्र का हिस्सा लगती है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस जघन्य अत्याचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और शासन-प्रशासन से कड़े सवाल उठाए हैं। भाकियू का कहना है कि विवादित भूमि पर कमिश्नर अलीगढ़ न्यायालय में वाद विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को निर्धारित है। *घटना का क्रमवद्ध विवरण:* *पृष्ठभूमि:* पूर्व ब्लॉक प्रमुख गीतम सिंह की पैतृक जमीन पर दबंगों द्वारा कथित दादागीरी से कब्जा करने की कोशिश। भूमि विवाद कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में लंबित। *8 जनवरी 2025 की घटना:* तहसीलदार संदीप सिंह पुलिस बल के साथ नगला गोधी मजरा मढ़ई प्रहलाद नगर पहुंचे। किसानों के विरोध पर पुलिस ने महिलाओं सहित लोधी समाज के लोगों पर बर्बर मारपीट की। *परिणाम:* एक महिला बेहोश (जिंदगी की जंग), दूसरी की हड्डियां तोड़ कर दिव्यांग किया, दर्जनों घायल। तहसीलदार पर पुलिस को उकसाने का आरोप। *एकपक्षीय कार्रवाई:* पीड़ितों का मेडिकल नहीं कराया गया, जबकि तहसीलदार ने जलेसर थाने में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। वीडियो में तहसीलदार की कार सुरक्षित दिखने के बावजूद तोड़फोड़ के झूठे आरोप लगाए गए। *भाकियू ने उठाए सटीक सवाल👇 –* *प्रशासन की पोल खोलते 13 बिंदु👉* 1.पीड़ित किसान गीतम सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख) की पैतृक जमीन पर बिना सरकारी बंटवारे (कुराबंदी) के किस न्यायालय के आदेश पर पैमाइश की गई? 2.कमिश्नर अलीगढ़ कोर्ट में वाद लंबित और सुनवाई की तारीख 16 जनवरी 2026 निर्धारित होने पर न्यायालय पर भरोसा क्यों नहीं दिखाया? 3.पूरे यूपी में SIR प्रक्रिया चल रही है, फिर पैतृक जमीनों की पैमाइश के लिए समय कैसे निकला? 4.यदि समय था तो जलेसर क्षेत्र में हजारों बीघा सरकारी जमीन पर माफियाओं का कब्जा क्यों नहीं हटवाया? 5.पैमाइश के लिए उपजिला मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिवत आदेश लेकर टीम क्यों नहीं गठित की गई? 6.मौके पर संबंधित लेखपाल क्यों अनुपस्थित था? 7.आवश्यक उपकरण जरीब न होने पर इंचटेप से पैमाइश क्यों की गई? 8.बिना लेखपाल और जरीब के सरकारी दस्तावेज कहां से आए, जिन्हें फाड़ने के झूठे आरोप लगाए गए? 9.वीडियो में तहसीलदार की कार साफ-सुरक्षित खड़ी दिख रही है, फिर कार तोड़ने का आरोप पीड़ितों पर क्यों ठोंका? 10.पीड़ितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन उनका मेडिकल क्यों नहीं कराया? 11.कैमरों के सामने पूरी घटना हुई, फिर एकपक्षीय मदद क्यों की गई? 12.तहसीलदार संदीप सिंह की जलेसर तैनाती पर हमेशा गैर-कानूनी पैमाइश और किसानों के खिलाफ साजिश क्यों रची जाती है, जिससे दर्जनों गांवों में एफआईआर हो चुकी हैं? 13.लोधी समाज के किसानों पर हो रहे *इन अत्याचारों के खिलाफ भाकियू बड़ा जनआंदोलन, धरना-प्रदर्शन करेगी – किसी क्षति की पूरी जिम्मेदारी तहसीलदार संदीप सिंह और उपजिलाधिकारी पर होगी।* भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने तत्काल न्याय नहीं किया तो तहसीलदार पर मुकदमा, पीड़ितों का पूरा इलाज और क्षतिपूर्ति नहीं की तो पूरे जलेसर क्षेत्र में विशाल आंदोलन होगा। यह घटना यूपी प्रशासन की किसान-विरोधी और लोधी समाज विरोधी साजिश की नंगी तस्वीर उजागर करती है। अन्नदाताओं की महिलाओं पर पुलिसिया जुल्म बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – शासन जागे, वरना किसान सड़कों पर उतरेंगे।
- *पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* एटा, 09 जनवरी 2026: जनपद एटा के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजीवीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है।इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।कठोर कार्रवाई की मांग: पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा?1
- प्रजापति समाज से ही भारत का मंगल प्रारम्भ होता है माहनवई जलेसर गिरीश दक्ष सेनाध्यक्ष जलेसर1
- हाथरस के हसायन थाना क्षेत्र के गांव अंडौली में एक बुजुर्ग व्यक्ति की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाका पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। मृतक की पहचान अमरनाथ उर्फ अमरपाल निवासी अंडौली के रूप में हुई है। बताया गया है कि अमरनाथ अपनी मौसी के मकान में अकेले रहते थे। उनकी पत्नी का काफी समय पहले देहांत हो चुका था। परिवार में उनकी एक बहन है, जिसकी शादी पहले ही हो चुकी है। वह ब्याज पर पैसा देने का काम भी करते थे, जिसको लेकर पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है।1
- फिरोज़ाबाद में स्मार्ट सिटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम फिरोज़ाबाद द्वारा सेंट्रल बैंक से लेकर विनस ऑटो तक सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना पर ₹24 करोड़ से अधिक की लागत आएगी। इस कार्य के अंतर्गत विद्युत विभाग की सभी ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा। साथ ही फुटपाथ निर्माण, स्ट्रीट लाइट, कैरिजवे सुदृढ़ीकरण, लो-ओवर ब्रिजों के नीचे विकास कार्य और प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। नगर निगम की मेयर श्रीमती कामिनी राठौर के नेतृत्व में हुए इस शिलान्यास कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मेयर ने शहरवासियों से अपील की कि वे विकास कार्यों में सहयोग करें, तभी फिरोज़ाबाद पूरी तरह स्मार्ट सिटी बन पाएगा।1
- अग्निवीर सूरज यादव का पार्थिव शरीर फिरोजाबाद पहुंचा: परिजन प्राइवेट वाहन से शव ले जाने पर नाराज, सरकारी एंबुलेंस की मांग फिरोजाबाद। अग्निवीर सूरज यादव सिंह (23) का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह फिरोजाबाद पहुंचा। पश्चिम बंगाल में ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया था। उनका शव एक निजी एंबुलेंस से जरौली कट, एनएच-19, थाना टूंडला क्षेत्र में लाया गया। सूरज यादव सिंह पुत्र गंगा सिंह, ठार दंगल सिंह, थाना लाइनपार के निवासी थे। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अग्निवीर का पार्थिव शरीर सरकारी एंबुलेंस से लाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन मौके पर सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी बात को लेकर परिजन और ग्रामीण सरकारी एंबुलेंस की मांग पर अड़े हैं। निजी एंबुलेंस फिलहाल जरौली कट पर खड़ी है। पार्थिव शरीर के पहुंचने पर क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मौके पर लगभग 4 से 5 हजार लोग मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी टूंडला अमरीश कुमार और प्रभारी निरीक्षक टूंडला अनिल कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद हैं। वे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। शहीद के सम्मान में अंतिम यात्रा की तैयारी के बीच पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।1
- "पहली बार दलित समाज द्वारा 'जय संविधान, जय मनुस्मृति' के नारों के साथ जागरूकता अभियान निकाला गया।" Trand News India #viral #news #trending #video #viralvideo #breakingnews1
- महाराज योगी आदित्यनाथ सरकार के झूठे दावे की फिर खुली पोल! लोक निर्माण विभाग कर रहा करीब 92 फीसदी सड़कों को भरने का दावा! लेकिन अभी भी गड्ढा मुक्त नहीं हो सकी ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें यूपी के सभी जिलों की सड़कों का है यही हाल! उबड़ खाबड़ सड़कें बनी माननीय योगी आदित्यनाथ सरकार की पहचान आज हमारे क्षेत्र में माननीय उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी के आगमन से पूर्व अधिकारियों द्वारा सड़क के गड्ढों को मिट्टी से भरकर अपनी कार्यशैली को छुपाने का कार्य किया गया और सरकार की योजनाओं (गड्ढा मुक्त सड़क) को पलीता लगाने का काम किया गया है1
- एटा Big ब्रोकिंग ग्राम सचिवालय पर बच्चों को खेलने को लेकर हुआ विवाद बच्चों को खेलने को लेकर दो पक्षों में चले लाठी डंडे, पथराव लाठी डंडे का पथराव का वीडियो हुआ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में युवक पथराव करते हुए दिख रहा है दो समुदायों में चले लाठी डंडे और पथराव थाना कोतवाली अवागढ़ ग्राम तिसार पंचायत सचिवालय को लेकर हुआ था विवाद1