शिवालयों में शाहाबाद के टेढ़ेश्वर नाथ बाबा के मन्दिर की शोभा का वर्णन शब्दों में किया जाना सम्भव नहीं — जयकारों की अद्भुत गूंज से गुंजायमान हो उठा पर्यटनस्थल हरदोई | शाहाबाद से विशेष रिपोर्ट👇 यूँ तो हरदोई जनपद के गाँव-गाँव नगर-नगर आज के इस पावन पौराणिक महापर्व पर सजे-धजे नजर आए किन्तु इसी जिले के सकाहा मन्दिर की जहाँ एक ओर शोभा अपरम्पार है, वहीं दूसरी ओर शाहाबाद क्षेत्र में स्थित नर्मदा तीर्थ तालाब आश्रम स्थल पर महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन गया जिसकी शोभा का वर्णन शब्दों में कर पाना ही कठिन है, हालांकि यहाँ आस्था, भक्ति और पौराणिक परंपराओं का ऐसा संगम देखने को मिला, मानो त्रेता युग की झलक एक बार फिर वर्तमान में उतर आई हो। महाशिवरात्रि की रात्रि होते ही टेढ़ेश्वर नाथ मन्दिर से लेकर नर्मदा तीर्थ स्थल तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और जय माता पार्वती जय जय भोले जय बम भोले के गगनभेदी उद्घोष से पूरा पर्यटनस्थल ही नहीं तथापि परिपूर्ण क्षेत्र ही शिवमय हो गया। मंदिर प्रांगण में रात भर दीपों की ज्योति, घंटा-घड़ियाल, डमरू और शंखनाद की ध्वनि गूंजती रही, युवाओं और युवतियों का थिरक -थिरक कर प्रफुल्लित होना और उन्हें देख-देखकर वृद्ध व्यक्तियों तथा माताओं का भी आल्हादित होना अद्भुत है, टेढ़ेश्वरनाथ बाबा का यह मन्दिर और मन्दिर में अद्भुत शिवलिंग और भक्तों द्वारा भव्य खाटू श्याम बाबा का अद्भुत स्वरूप अत्यंत मनभावन दृष्टव्य है। महाशिवरात्रि में मन्दिर के बाहर से भीतर तक का मनोरम दृश्य और रमणीक पर्यटन स्थल की अपरम्पार शोभा निरख-निरखकर भक्तगण भावनात्मक रूप से समर्पित दिखाई दिए। इस मन्दिर में शिव-पार्वती विवाह की जीवंत प्रस्तुति देखकर लोग फूले नहीं समा रहे हैँ। महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव-पार्वती विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव के दूल्हा स्वरूप और माता पार्वती की दिव्य झांकी को देखकर भक्त भाव-विभोर हो उठे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसी स्मृति में यह पर्व उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताएं और रामचरितमानस की गूंज पूरे आयोजन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाइयों का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण परिलक्षित हुआ। विशेषकर निम्नलिखित पंक्तियां वातावरण में वर्णित प्रतीत हुईं जिससे ह्रदयों में आध्यात्मिक ऊर्जा से भरती रहीं—👇 बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥ हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥ इन चौपाइयों की तरह ही ऐसा प्रतीत हुआ मानो देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा कर दी हो और सम्पूर्ण सृष्टि शिव-पार्वती विवाह के आनंद में मग्न हो उठी हो। माँ काली की गूंज और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहा हो। आज की रात्रि में यह आयोजन देखकर इसी मन्दिर में गत बर्ष का वह दृश्य स्मरण हो आया जब धूमधाम के मध्य एक क्षण ऐसा भी आया था, जब एक महिला श्रद्धालु ने अचानक माँ काली का स्वरूप धारण कर इतनी जोर से जयकारा लगाया। कि वह दृश्य इतना अप्रत्याशित था कि कुछ पल के लिए माताएं, बहनें और बच्चे सहम गए थे। यद्वपि इस बार वह दृश्य देखने को नहीं मिला किंतु आज भी भोलेनाथ के मंदिर में माँ काली की मूर्ति के बराबर में बजरंगबली की मूर्ति से जहाँ मंदिर के भीतर तेहरी शक्ति और बाहर शनिदेव का मन्दिर मिलाकर चौहरी शक्ति का प्रतीक मानकर श्रद्धालुओं ने जयकारों से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। रात भर चलेगा भक्तों का ताँता—करेंगे लोग जगराता विभिन्न मदिरों में आज पूरी रात भजन-कीर्तन, कथा-वाचन और आरती का क्रम चलेगा जबकि इधर दूर-दराज़ के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने नर्मदा तीर्थ स्थल पर दिन में स्नान भी किया और लोगों ने भी पुण्य लाभ अर्जित किया और भगवान शिव से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। मन्दिर स्थल पर आस्था और संस्कृति का संगम शाहाबाद का यह महाशिवरात्रि आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि यह भारतीय सनातन संस्कृति, पौराणिक आस्थाओं और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी बना। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास उन्हें वर्षों बाद अनुभव हुआ। कुल मिलाकर, शाहाबाद के नर्मदा तीर्थ स्थल पर मनाई गई महाशिवरात्रि ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था, परंपरा और भक्ति एक साथ आती हैं, तो साधारण आयोजन भी दिव्य उत्सव में परिवर्तित हो जाता है।
शिवालयों में शाहाबाद के टेढ़ेश्वर नाथ बाबा के मन्दिर की शोभा का वर्णन शब्दों में किया जाना सम्भव नहीं — जयकारों की अद्भुत गूंज से गुंजायमान हो उठा पर्यटनस्थल हरदोई | शाहाबाद से विशेष रिपोर्ट👇 यूँ तो हरदोई जनपद के गाँव-गाँव नगर-नगर आज के इस पावन पौराणिक महापर्व पर सजे-धजे नजर आए किन्तु इसी जिले के सकाहा मन्दिर की जहाँ एक ओर शोभा अपरम्पार है, वहीं दूसरी ओर शाहाबाद क्षेत्र में स्थित नर्मदा तीर्थ तालाब आश्रम स्थल पर महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन गया जिसकी शोभा का वर्णन शब्दों में कर पाना ही कठिन है, हालांकि यहाँ आस्था, भक्ति और पौराणिक परंपराओं का ऐसा संगम देखने को मिला, मानो त्रेता युग की झलक एक बार फिर वर्तमान में उतर आई हो। महाशिवरात्रि की रात्रि होते ही टेढ़ेश्वर नाथ मन्दिर से लेकर नर्मदा तीर्थ स्थल तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और जय माता पार्वती जय जय भोले जय बम भोले के गगनभेदी उद्घोष से पूरा पर्यटनस्थल ही नहीं तथापि परिपूर्ण क्षेत्र ही शिवमय हो गया। मंदिर
प्रांगण में रात भर दीपों की ज्योति, घंटा-घड़ियाल, डमरू और शंखनाद की ध्वनि गूंजती रही, युवाओं और युवतियों का थिरक -थिरक कर प्रफुल्लित होना और उन्हें देख-देखकर वृद्ध व्यक्तियों तथा माताओं का भी आल्हादित होना अद्भुत है, टेढ़ेश्वरनाथ बाबा का यह मन्दिर और मन्दिर में अद्भुत शिवलिंग और भक्तों द्वारा भव्य खाटू श्याम बाबा का अद्भुत स्वरूप अत्यंत मनभावन दृष्टव्य है। महाशिवरात्रि में मन्दिर के बाहर से भीतर तक का मनोरम दृश्य और रमणीक पर्यटन स्थल की अपरम्पार शोभा निरख-निरखकर भक्तगण भावनात्मक रूप से समर्पित दिखाई दिए। इस मन्दिर में शिव-पार्वती विवाह की जीवंत प्रस्तुति देखकर लोग फूले नहीं समा रहे हैँ। महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव-पार्वती विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान शिव के दूल्हा स्वरूप और माता पार्वती की दिव्य झांकी को देखकर भक्त भाव-विभोर हो उठे। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसी स्मृति में यह पर्व उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताएं और रामचरितमानस की गूंज पूरे आयोजन के दौरान
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाइयों का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण परिलक्षित हुआ। विशेषकर निम्नलिखित पंक्तियां वातावरण में वर्णित प्रतीत हुईं जिससे ह्रदयों में आध्यात्मिक ऊर्जा से भरती रहीं—👇 बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥ हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥ इन चौपाइयों की तरह ही ऐसा प्रतीत हुआ मानो देवताओं ने आकाश से पुष्पवर्षा कर दी हो और सम्पूर्ण सृष्टि शिव-पार्वती विवाह के आनंद में मग्न हो उठी हो। माँ काली की गूंज और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहा हो। आज की रात्रि में यह आयोजन देखकर इसी मन्दिर में गत बर्ष का वह दृश्य स्मरण हो आया जब धूमधाम के मध्य एक क्षण ऐसा भी आया था, जब एक महिला श्रद्धालु ने अचानक माँ काली का स्वरूप धारण कर इतनी जोर से जयकारा लगाया। कि वह दृश्य इतना अप्रत्याशित था कि कुछ पल के लिए माताएं, बहनें और बच्चे सहम गए थे। यद्वपि इस बार वह दृश्य देखने को नहीं मिला किंतु आज भी भोलेनाथ के मंदिर में माँ काली की मूर्ति के बराबर में बजरंगबली की मूर्ति
से जहाँ मंदिर के भीतर तेहरी शक्ति और बाहर शनिदेव का मन्दिर मिलाकर चौहरी शक्ति का प्रतीक मानकर श्रद्धालुओं ने जयकारों से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। रात भर चलेगा भक्तों का ताँता—करेंगे लोग जगराता विभिन्न मदिरों में आज पूरी रात भजन-कीर्तन, कथा-वाचन और आरती का क्रम चलेगा जबकि इधर दूर-दराज़ के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने नर्मदा तीर्थ स्थल पर दिन में स्नान भी किया और लोगों ने भी पुण्य लाभ अर्जित किया और भगवान शिव से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। मन्दिर स्थल पर आस्था और संस्कृति का संगम शाहाबाद का यह महाशिवरात्रि आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि यह भारतीय सनातन संस्कृति, पौराणिक आस्थाओं और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी बना। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास उन्हें वर्षों बाद अनुभव हुआ। कुल मिलाकर, शाहाबाद के नर्मदा तीर्थ स्थल पर मनाई गई महाशिवरात्रि ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था, परंपरा और भक्ति एक साथ आती हैं, तो साधारण आयोजन भी दिव्य उत्सव में परिवर्तित हो जाता है।
- यूजीसी और आरक्षण की लड़ाई खत्म कर राष्ट्र एकता हेतु भी भक्तों ने की मन ही मन में आराधना की जिन्होंने बाद में बताया कि देश की इस त्रासदी को भगवान भोलेनाथ ही रोंक सकते हैँ, अन्यथा न जाने अब देश में क्या होने बाला है, लोगों ने सबसे ज्यादा नाराजगी मोदी को लेकर जाहिर करते हुए कहा कि इन्होने देश में ऐसे हालात पैदा कर दिए कि जिससे देश को भगवान के अलावा अब और कोई नहीं बचा सकता है। महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर बहुत से बुद्धिजीवी भक्तों ने भोलेनाथ से यूजीसी और आरक्षण की लड़ाई खत्म कर राष्ट्र एकता हेतु आराधना करते हुए कहा कि हे भोलेनाथ देश बचा लो अन्यथा यह नेतागण लोकतंत्र के नाम पर इसे गुलाम बनाए बिना नहीं मानेंगे।4
- हरदोई:महाशिवरात्रि का पावन पर्व बेनीगंज नगर में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर के पश्चिमी महादेव मंदिर पर भक्तों द्वारा रूद्राभिषेक भी किया गया।4
- जिला हरदोई थाना अतरौली ब्लाक कोटवा तहसील संडीला पोस्ट औरैया ग्राम सभा bhaisadha शंभू नाथ मंदिर1
- RSS और BJP द्वारा लगाए गए ये मनुवादी लोग कैसे हर ओबीसी/एससी/एसटी द्वारा चलाए गए आंदोलन में घुस रहे हैं और दलित को अपमानित कर रहे हैं... “आपको कितने साल से पानी नहीं मिला… आपको भी पानी नहीं मिला… आपको भी पानी नहीं मिला1
- हरदोई। होली के पावन और उल्लासमय अवसर पर प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के तत्वावधान में भक्त प्रहलाद जी की प्रथम भव्य शोभा यात्रा दिव्यता, आस्था और सांस्कृतिक गरिमा के अनुपम समन्वय के साथ संपन्न हुई। आवास विकास कॉलोनी स्थित सामुदायिक पार्क से वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और श्रद्धा के पवित्र अनुष्ठानों के मध्य प्रारंभ हुई इस शोभा यात्रा का शुभारंभ काशी विश्वनाथ से पधारे पूज्य डमरू बाबा तथा समिति के सचिव शत्रुघ्न द्विवेदी के करकमलों द्वारा हुआ। भक्त प्रहलाद जी की सुसज्जित एवं मनोहारी झांकी, भजन-कीर्तन की मधुर स्वर-लहरियां और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि से संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। नगर के प्रमुख मार्गों से प्रवाहित होती यह शोभा यात्रा मानो श्रद्धा की एक सजीव सरिता बनकर जनमानस के अंतर्मन को पावन करती चली गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अपनी अगाध आस्था और समर्पण का भावपूर्ण प्रकटीकरण किया। आयोजक प्रहलाद नगरी अध्यक्ष शिवम द्विवेदी ने इस आयोजन को सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सतयुग के पश्चात कलयुग में इस प्रकार की शोभा यात्रा का यह प्रथम आयोजन है। उन्होंने यह भी संकल्प व्यक्त किया कि यह पावन परंपरा अब प्रतिवर्ष निरंतर इसी श्रद्धा, भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आयोजित की जाती रहेगी। इस पावन अवसर पर एडवोकेट कुमुदनी देवी तिवारी, समिति की कोषाध्यक्ष समता शर्मा (एडवोकेट), सुमित द्विवेदी, अभिषेक तिवारी (एडवोकेट), डॉ. के.के. तिवारी, महिला जिला अध्यक्ष सरोज सिंगल, जिला महामंत्री ज्योति बघेल उर्फ हर्षिता, पूजा गुप्ता, रानी अग्निहोत्री, दिवाकर मिश्रा, सुनील त्रिपाठी, अभिनेता सनी पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमवती तथा डॉ. चित्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति ने इस आयोजन को दिव्यता, भव्यता और ऐतिहासिक गौरव से मंडित कर दिया।4
- बि.ख.बावन जिला हरदोई सचिवालय भवन डहेलिया में स्थित है और यहां कोई देखरेख नहीं होती है ग्रामीणो का कहना हैं कि इस सचिवालय भवन को पुनः किया जाना चाहिए जो लोग इसे हानि पहुंचाते हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए धन्यवाद मैं Rahul Kumar1
- Post by Ragini rai3
- शाहाबाद का यह महाशिवरात्रि आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि यह भारतीय सनातन संस्कृति, पौराणिक आस्थाओं और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी बना। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास उन्हें वर्षों बाद अनुभव हुआ।3