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Quit Baby boy and girl Utkarsh International school Kujapi Gaya Bihar

21 hrs ago
user_Pintu kumar
Pintu kumar
Video Creator गया टाउन सी.डी.ब्लॉक, गया, बिहार•
21 hrs ago

Quit Baby boy and girl Utkarsh International school Kujapi Gaya Bihar

More news from Bihar and nearby areas
  • महात्मा गणिनाथ जयंती जयंती समारोह गयाजी में आए आइसक्रीम विक्रेता का ठेला रुक्मिणी सरोवर में पलटा। स्थानीय लोगों के मदद से निकाला गया ठेला।
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    महात्मा गणिनाथ जयंती जयंती समारोह गयाजी में आए आइसक्रीम विक्रेता का ठेला रुक्मिणी सरोवर में पलटा। स्थानीय लोगों के मदद से निकाला गया ठेला।
    user_Uma Shanker singh
    Uma Shanker singh
    Gaya Town C.D.Block, Bihar•
    6 hrs ago
  • मैंने लाल किले से होम्योपैथी की गोली दी थी... पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा... सुनिए... मैंने लाल किले से होम्योपैथी की गोली दी थी... पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा... सुनिए...
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    मैंने लाल किले से होम्योपैथी की गोली दी थी...

पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा... सुनिए...
मैंने लाल किले से होम्योपैथी की गोली दी थी...
पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा... सुनिए...
    user_Ashutosh kumar
    Ashutosh kumar
    Lawyer Lakhibag, Manpur•
    15 hrs ago
  • किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती - डा मनीष पंकज मिश्रा  भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन  की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया  गया जी।देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन  की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  के नूतन नगर स्थित कार्यालय में किया गया है। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक सम्मानित शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही है।इस समारोह के दौरान डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  ने उपस्थित सभी शिक्षकों का गर्मजोशी से स्वागत किया है तथा उन्हें पेन, डायरी, अंगवस्त्र एवं फूलों का बुके भेंट कर सम्मानित किया है। शिक्षकों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था।इस अवसर पर डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन जी का पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों मेंअनुशासन, संस्कार, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षक को समाज में सदैव सम्मानजनक स्थान प्राप्त रहा है।डॉ. मिश्रा जी ने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देतेरहेंकार्यक्रम में सम्मानित हुए शिक्षकों ने डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के कार्यालय में शिक्षकों को सम्मानित किया जाना उनके लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार का सम्मान उन्हें अपने दायित्वों के प्रति और अधिक उत्साह एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। सम्मानित शिक्षकों मे डॉ प्रमोद कुमार अभिषेक कुमार अतहर इकबाल एमडी शाहिद रागीव हसन  सुधीर कुमार विनय कुमार आलोक कुमार राजेश कुमार डॉ राजेश चौधरी डॉ अनुज सर रामानुज जी मनोज कुमार आशुतोष कुमार राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता राणा रणजीत सिंह संतोष ठाकुर संजय यादव  सुनील बंबईया संतोष सिंह सुनील सिन्हा मंटू कुमार बबलू गुप्ता रामप्रवेश सिंह कुंदन सिंह सहित
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    किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती - डा मनीष पंकज मिश्रा 


भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन  की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया 
गया जी।देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन  की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  के नूतन नगर स्थित कार्यालय में किया गया है। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक सम्मानित शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही है।इस समारोह के दौरान डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  ने उपस्थित सभी शिक्षकों का गर्मजोशी से स्वागत किया है तथा उन्हें पेन, डायरी, अंगवस्त्र एवं फूलों का बुके भेंट कर सम्मानित किया है। शिक्षकों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज एवं राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था।इस अवसर पर डॉ. मनीष पंकज मिश्रा  ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन जी का पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों मेंअनुशासन, संस्कार, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षक को समाज में सदैव सम्मानजनक स्थान प्राप्त रहा है।डॉ. मिश्रा जी ने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देतेरहेंकार्यक्रम में सम्मानित हुए शिक्षकों ने डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के कार्यालय में शिक्षकों को सम्मानित किया जाना उनके लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार का सम्मान उन्हें अपने दायित्वों के प्रति और अधिक उत्साह एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। सम्मानित शिक्षकों मे डॉ प्रमोद कुमार अभिषेक कुमार अतहर इकबाल एमडी शाहिद रागीव हसन  सुधीर कुमार विनय कुमार आलोक कुमार राजेश कुमार डॉ राजेश चौधरी डॉ अनुज सर रामानुज जी मनोज कुमार आशुतोष कुमार राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता राणा रणजीत सिंह संतोष ठाकुर संजय यादव  सुनील बंबईया संतोष सिंह सुनील सिन्हा मंटू कुमार बबलू गुप्ता रामप्रवेश सिंह कुंदन सिंह सहित
    user_Dhiraj KumarGupta repoter
    Dhiraj KumarGupta repoter
    Local News Reporter गया टाउन सी.डी.ब्लॉक, गया, बिहार•
    20 hrs ago
  • देश के पूर्व राष्ट्रपति महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ मनीष पंकज मिश्रा के द्वारा शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया l देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिdक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के नूतन नगर स्थित कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक सम्मानित शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।समारोह के दौरान डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी ने उपस्थित सभी शिक्षकों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें पेन, डायरी, अंगवस्त्र एवं फूलों का बुके भेंट कर सम्मानित किया। शिक्षकों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज और राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था।इस अवसर पर डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन जी का पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों मेंअनुशासन, संस्कार, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षक को समाज में सदैव सम्मानजनक स्थान प्राप्त रहा है।डॉ. मिश्रा जी ने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देतेरहेंकार्यक्रम में सम्मानित हुए शिक्षकों ने डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के कार्यालय में शिक्षकों को सम्मानित किया जाना उनके लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार का सम्मान उन्हें अपने दायित्वों के प्रति और अधिक उत्साह एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। सम्मानित शिक्षकों मे डॉ प्रमोद कुमार अभिषेक कुमार अतहर इकबाल एमडी शाहिद रागीव हसन श्री सुधीर कुमार विनय कुमार आलोक कुमार राजेश कुमार डॉ राजेश चौधरी डॉ अनुज सर रामानुज जी मनोज कुमार आशुतोष कुमार राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता राणा रणजीत सिंह संतोष ठाकुर संजय यादव सुनील बंबईया संतोष सिंह सुनील सिन्हा मंटू कुमार बबलू गुप्ता रामप्रवेश सिंह कुंदन सिंह सहित
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    देश के पूर्व राष्ट्रपति महान दार्शनिक, शिक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ मनीष पंकज मिश्रा के द्वारा शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया l 
देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिdक्षाविद एवं भारत रत्न से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के नूतन नगर स्थित कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक सम्मानित शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।समारोह के दौरान डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी ने उपस्थित सभी शिक्षकों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथा उन्हें पेन, डायरी, अंगवस्त्र एवं फूलों का बुके भेंट कर सम्मानित किया। शिक्षकों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज और राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना था।इस अवसर पर डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस महान शिक्षाविद एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन जी का पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करती है।उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों मेंअनुशासन, संस्कार, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करता है। यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज और देश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षक को समाज में सदैव सम्मानजनक स्थान प्राप्त रहा है।डॉ. मिश्रा जी ने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, सभ्यता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देतेरहेंकार्यक्रम में सम्मानित हुए शिक्षकों ने डॉ. मनीष पंकज मिश्रा जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के कार्यालय में शिक्षकों को सम्मानित किया जाना उनके लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार का सम्मान उन्हें अपने दायित्वों के प्रति और अधिक उत्साह एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। सम्मानित शिक्षकों मे डॉ प्रमोद कुमार अभिषेक कुमार अतहर इकबाल एमडी शाहिद रागीव हसन  श्री सुधीर कुमार विनय कुमार आलोक कुमार राजेश कुमार डॉ राजेश चौधरी डॉ अनुज सर रामानुज जी मनोज कुमार आशुतोष कुमार राजेंद्र प्रसाद अधिवक्ता राणा रणजीत सिंह संतोष ठाकुर संजय यादव  सुनील बंबईया संतोष सिंह सुनील सिन्हा मंटू कुमार बबलू गुप्ता रामप्रवेश सिंह कुंदन सिंह सहित
    user_त्रिलोकी नाथ
    त्रिलोकी नाथ
    गया टाउन सी.डी.ब्लॉक, गया, बिहार•
    20 hrs ago
  • Quit Baby boy and girl Utkarsh International school Kujapi Gaya Bihar
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    Quit Baby boy and girl Utkarsh International school Kujapi Gaya Bihar
    user_Pintu kumar
    Pintu kumar
    Video Creator गया टाउन सी.डी.ब्लॉक, गया, बिहार•
    21 hrs ago
  • करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत, सड़क जाम करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत, सड़क जाम कोंची थाना क्षेत्र के बड़गांव में रविवार को खेत में पानी देखने जाने के दौरान बिजली करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। मृतक की पहचान बड़गांव निवासी सुबोध कुमार के पुत्र इंद्रजीत कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि, इंद्रजीत कुमार खेत में पानी देखने के लिए गया था। इसी दौरान वह बिजली के करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर टिकारी-कुर्था मार्ग को कैलाशपुर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर आगजनी कर विरोध जताया। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और बिजली विभाग की लापरवाही की जांच कराने की मांग की। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। थानाध्यक्ष आलोक रंजन ने मौके पर पहुंचे और समझा बुझाकर मामले को शांत कराया।
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    करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत, सड़क जाम
करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत, सड़क जाम
कोंची थाना क्षेत्र के बड़गांव में रविवार को खेत में पानी देखने जाने के दौरान बिजली करंट की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। मृतक की पहचान बड़गांव निवासी सुबोध कुमार के पुत्र इंद्रजीत कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों ने बताया कि, इंद्रजीत कुमार खेत में पानी देखने के लिए गया था। इसी दौरान वह बिजली के करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर टिकारी-कुर्था मार्ग को कैलाशपुर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर आगजनी कर विरोध जताया। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और बिजली विभाग की लापरवाही की जांच कराने की मांग की। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। थानाध्यक्ष आलोक रंजन ने मौके पर पहुंचे और समझा बुझाकर मामले को शांत कराया।
    user_नौलेश कुमार
    नौलेश कुमार
    कोंच, गया, बिहार•
    9 min ago
  • *तबाही के बीच फरिश्ते की तरह उड़ रही नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट, जानें कौन हैं प्रिया अधिकारी* *नेपाल :* नेपाल में भारी तबाही के बीच कई पायलट अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं, इनमें प्रिया अधिकारी भी शामिल हैं. प्रिया नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट हैं. *नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट* नेपाल में तबाही के बीच एक महिला पायलट की खूब चर्चा हो रही है, जिन्होंने अपने हेलीकॉप्टर से कई उड़ानें भरते हुए सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू किया है. पायलट प्रिया अधिकारी ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है. प्रिया को बाढ़ में फंसे लोग किसी फरिश्ते से कम नहीं समझ रहे हैं, जब भी उनका हेलीकॉप्टर हवा में उड़ान भरता है तो बाढ़ के चलते भूखे-प्यासे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं. इस तरह के हालात में रेस्क्यू काफी मुश्किल काम है, जिसे प्रिया अधिकारी बखूबी निभा रही हैं. *100 से ज्यादा रेस्क्यू* हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पायलट्स की कड़ी परीक्षा होती है. एक साथ कई हेलीकॉप्टर हवा में होते हैं, ऐसे में तमाम पायलट्स के साथ तालमेल बिठाना और सुरक्षित उड़ान भरना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में 40 साल की प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय मे 100 रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया है. CNN के साथ एक इंटरव्यू के दौरान प्रिया ने बताया कि तबाही का ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. प्रिया ने कहा, "हममें से ज्यादातर लोग लगातार उड़ानों की वजह से बेहद थक चुके हैं. लेकिन हमें इसी काम के लिए ट्रेनिंग दी गई है. पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क करना पड़ता है. कई बार जिंदा बचे लोगों को निकालने के लिए एक ही जगह पर पांच से छह हेलीकॉप्टर उतर रहे होते हैं." अधिकारी ने बताया कि खतरा तो लोगों को हेलीकॉप्टर में बैठाने से पहले ही शुरू हो जाता है. कुछ इलाके इतने गहरे और खतरनाक कीचड़ से ढके हैं कि वहां हेलीकॉप्टर को सुरक्षित तरीके से उतारकर उसका इंजन बंद नहीं किया जा सकता. *शवों को देखना बेहद मुश्किल* प्रिया अधिकारी ने तिमुरे के ऊपर से उड़ान भरने के मंजर को याद करते हुए बताया कि अचानक आई इस बाढ़ के बाद चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे. इस इलाके में चले ऑपरेशन के पहले दो दिनों के भीतर 200 से ज्यादा बचे हुए लोगों को बाहर निकाला गया. बिखरे पड़े शवों को देखना काफी मुश्किल और दर्दनाक था. प्रिया ने इवीएस की पढ़ाई की और केबिन क्रू के तौर पर काम किया. फिर एक दिन हेलीकॉप्टर की एक सैर ने उनके करियर का रुख हमेशा के लिए बदल दिया. प्रिया ने ठान लिया कि वो पायलट बनेंगीं. इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस की यात्रा की और कैप्टन बनने के लिए कई घंटों की उड़ान भरी. आखिरकार, 2017 में प्रिया अधिकारी फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं. इसके साथ ही उन्होंने उस धारणा को तोड़ दिया, जिसमें महिला के हेलीकॉप्टर कैप्टन बनने पर शक किया जाता है. ऐसा नहीं है कि प्रिया अधिकारी ने पहले इतने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किए हैं. उन्होंने इससे पहले हिमालय के दुर्गम इलाकों में सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन चलाए और माउंट एवरेस्ट से घायल पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाला. प्रिया लगभग 6,200 मीटर तक की ऊंचाई पर रेस्क्यू मिशन पूरा कर चुकी हैं. *तबाही के बीच फरिश्ते की तरह उड़ रही नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट, जानें कौन हैं प्रिया अधिकारी* *नेपाल :* नेपाल में भारी तबाही के बीच कई पायलट अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं, इनमें प्रिया अधिकारी भी शामिल हैं. प्रिया नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट हैं. *नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट* नेपाल में तबाही के बीच एक महिला पायलट की खूब चर्चा हो रही है, जिन्होंने अपने हेलीकॉप्टर से कई उड़ानें भरते हुए सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू किया है. पायलट प्रिया अधिकारी ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है. प्रिया को बाढ़ में फंसे लोग किसी फरिश्ते से कम नहीं समझ रहे हैं, जब भी उनका हेलीकॉप्टर हवा में उड़ान भरता है तो बाढ़ के चलते भूखे-प्यासे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं. इस तरह के हालात में रेस्क्यू काफी मुश्किल काम है, जिसे प्रिया अधिकारी बखूबी निभा रही हैं. *100 से ज्यादा रेस्क्यू* हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पायलट्स की कड़ी परीक्षा होती है. एक साथ कई हेलीकॉप्टर हवा में होते हैं, ऐसे में तमाम पायलट्स के साथ तालमेल बिठाना और सुरक्षित उड़ान भरना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में 40 साल की प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय मे 100 रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया है. CNN के साथ एक इंटरव्यू के दौरान प्रिया ने बताया कि तबाही का ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. प्रिया ने कहा, "हममें से ज्यादातर लोग लगातार उड़ानों की वजह से बेहद थक चुके हैं. लेकिन हमें इसी काम के लिए ट्रेनिंग दी गई है. पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क करना पड़ता है. कई बार जिंदा बचे लोगों को निकालने के लिए एक ही जगह पर पांच से छह हेलीकॉप्टर उतर रहे होते हैं." अधिकारी ने बताया कि खतरा तो लोगों को हेलीकॉप्टर में बैठाने से पहले ही शुरू हो जाता है. कुछ इलाके इतने गहरे और खतरनाक कीचड़ से ढके हैं कि वहां हेलीकॉप्टर को सुरक्षित तरीके से उतारकर उसका इंजन बंद नहीं किया जा सकता. *शवों को देखना बेहद मुश्किल* प्रिया अधिकारी ने तिमुरे के ऊपर से उड़ान भरने के मंजर को याद करते हुए बताया कि अचानक आई इस बाढ़ के बाद चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे. इस इलाके में चले ऑपरेशन के पहले दो दिनों के भीतर 200 से ज्यादा बचे हुए लोगों को बाहर निकाला गया. बिखरे पड़े शवों को देखना काफी मुश्किल और दर्दनाक था. प्रिया ने इवीएस की पढ़ाई की और केबिन क्रू के तौर पर काम किया. फिर एक दिन हेलीकॉप्टर की एक सैर ने उनके करियर का रुख हमेशा के लिए बदल दिया. प्रिया ने ठान लिया कि वो पायलट बनेंगीं. इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस की यात्रा की और कैप्टन बनने के लिए कई घंटों की उड़ान भरी. आखिरकार, 2017 में प्रिया अधिकारी फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं. इसके साथ ही उन्होंने उस धारणा को तोड़ दिया, जिसमें महिला के हेलीकॉप्टर कैप्टन बनने पर शक किया जाता है. ऐसा नहीं है कि प्रिया अधिकारी ने पहले इतने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किए हैं. उन्होंने इससे पहले हिमालय के दुर्गम इलाकों में सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन चलाए और माउंट एवरेस्ट से घायल पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाला. प्रिया लगभग 6,200 मीटर तक की ऊंचाई पर रेस्क्यू मिशन पूरा कर चुकी हैं.
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    *तबाही के बीच फरिश्ते की तरह उड़ रही नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट, जानें कौन हैं प्रिया अधिकारी*

*नेपाल :* नेपाल में भारी तबाही के बीच कई पायलट अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं, इनमें प्रिया अधिकारी भी शामिल हैं. प्रिया नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट हैं.

*नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट*
नेपाल में तबाही के बीच एक महिला पायलट की खूब चर्चा हो रही है, जिन्होंने अपने हेलीकॉप्टर से कई उड़ानें भरते हुए सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू किया है. पायलट प्रिया अधिकारी ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है. प्रिया को बाढ़ में फंसे लोग किसी फरिश्ते से कम नहीं समझ रहे हैं, जब भी उनका हेलीकॉप्टर हवा में उड़ान भरता है तो बाढ़ के चलते भूखे-प्यासे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं. इस तरह के हालात में रेस्क्यू काफी मुश्किल काम है, जिसे प्रिया अधिकारी बखूबी निभा रही हैं.
 
*100 से ज्यादा रेस्क्यू*
हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पायलट्स की कड़ी परीक्षा होती है. एक साथ कई हेलीकॉप्टर हवा में होते हैं, ऐसे में तमाम पायलट्स के साथ तालमेल बिठाना और सुरक्षित उड़ान भरना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में 40 साल की प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय मे 100 रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया है. CNN के साथ एक इंटरव्यू के दौरान प्रिया ने बताया कि तबाही का ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. 

प्रिया ने कहा, "हममें से ज्यादातर लोग लगातार उड़ानों की वजह से बेहद थक चुके हैं. लेकिन हमें इसी काम के लिए ट्रेनिंग दी गई है. पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क करना पड़ता है. कई बार जिंदा बचे लोगों को निकालने के लिए एक ही जगह पर पांच से छह हेलीकॉप्टर उतर रहे होते हैं." अधिकारी ने बताया कि खतरा तो लोगों को हेलीकॉप्टर में बैठाने से पहले ही शुरू हो जाता है. कुछ इलाके इतने गहरे और खतरनाक कीचड़ से ढके हैं कि वहां हेलीकॉप्टर को सुरक्षित तरीके से उतारकर उसका इंजन बंद नहीं किया जा सकता.

*शवों को देखना बेहद मुश्किल*
प्रिया अधिकारी ने तिमुरे के ऊपर से उड़ान भरने के मंजर को याद करते हुए बताया कि अचानक आई इस बाढ़ के बाद चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे. इस इलाके में चले ऑपरेशन के पहले दो दिनों के भीतर 200 से ज्यादा बचे हुए लोगों को बाहर निकाला गया. बिखरे पड़े शवों को देखना काफी मुश्किल और दर्दनाक था. प्रिया ने इवीएस की पढ़ाई की और केबिन क्रू के तौर पर काम किया. फिर एक दिन हेलीकॉप्टर की एक सैर ने उनके करियर का रुख हमेशा के लिए बदल दिया. प्रिया ने ठान लिया कि वो पायलट बनेंगीं. इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस की यात्रा की और कैप्टन बनने के लिए कई घंटों की उड़ान भरी. आखिरकार, 2017 में प्रिया अधिकारी फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं. इसके साथ ही उन्होंने उस धारणा को तोड़ दिया, जिसमें महिला के हेलीकॉप्टर कैप्टन बनने पर शक किया जाता है. 

ऐसा नहीं है कि प्रिया अधिकारी ने पहले इतने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किए हैं. उन्होंने इससे पहले हिमालय के दुर्गम इलाकों में सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन चलाए और माउंट एवरेस्ट से घायल पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाला. प्रिया लगभग 6,200 मीटर तक की ऊंचाई पर रेस्क्यू मिशन पूरा कर चुकी हैं.
*तबाही के बीच फरिश्ते की तरह उड़ रही नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट, जानें कौन हैं प्रिया अधिकारी*
*नेपाल :* नेपाल में भारी तबाही के बीच कई पायलट अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं, इनमें प्रिया अधिकारी भी शामिल हैं. प्रिया नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर पायलट हैं.
*नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर पायलट*
नेपाल में तबाही के बीच एक महिला पायलट की खूब चर्चा हो रही है, जिन्होंने अपने हेलीकॉप्टर से कई उड़ानें भरते हुए सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू किया है. पायलट प्रिया अधिकारी ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला है. प्रिया को बाढ़ में फंसे लोग किसी फरिश्ते से कम नहीं समझ रहे हैं, जब भी उनका हेलीकॉप्टर हवा में उड़ान भरता है तो बाढ़ के चलते भूखे-प्यासे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं. इस तरह के हालात में रेस्क्यू काफी मुश्किल काम है, जिसे प्रिया अधिकारी बखूबी निभा रही हैं.
*100 से ज्यादा रेस्क्यू*
हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पायलट्स की कड़ी परीक्षा होती है. एक साथ कई हेलीकॉप्टर हवा में होते हैं, ऐसे में तमाम पायलट्स के साथ तालमेल बिठाना और सुरक्षित उड़ान भरना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में 40 साल की प्रिया अधिकारी ने एक हफ्ते से भी कम समय मे 100 रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया है. CNN के साथ एक इंटरव्यू के दौरान प्रिया ने बताया कि तबाही का ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. 
प्रिया ने कहा, "हममें से ज्यादातर लोग लगातार उड़ानों की वजह से बेहद थक चुके हैं. लेकिन हमें इसी काम के लिए ट्रेनिंग दी गई है. पायलटों को रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे से संपर्क करना पड़ता है. कई बार जिंदा बचे लोगों को निकालने के लिए एक ही जगह पर पांच से छह हेलीकॉप्टर उतर रहे होते हैं." अधिकारी ने बताया कि खतरा तो लोगों को हेलीकॉप्टर में बैठाने से पहले ही शुरू हो जाता है. कुछ इलाके इतने गहरे और खतरनाक कीचड़ से ढके हैं कि वहां हेलीकॉप्टर को सुरक्षित तरीके से उतारकर उसका इंजन बंद नहीं किया जा सकता.
*शवों को देखना बेहद मुश्किल*
प्रिया अधिकारी ने तिमुरे के ऊपर से उड़ान भरने के मंजर को याद करते हुए बताया कि अचानक आई इस बाढ़ के बाद चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे. इस इलाके में चले ऑपरेशन के पहले दो दिनों के भीतर 200 से ज्यादा बचे हुए लोगों को बाहर निकाला गया. बिखरे पड़े शवों को देखना काफी मुश्किल और दर्दनाक था. प्रिया ने इवीएस की पढ़ाई की और केबिन क्रू के तौर पर काम किया. फिर एक दिन हेलीकॉप्टर की एक सैर ने उनके करियर का रुख हमेशा के लिए बदल दिया. प्रिया ने ठान लिया कि वो पायलट बनेंगीं. इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस की यात्रा की और कैप्टन बनने के लिए कई घंटों की उड़ान भरी. आखिरकार, 2017 में प्रिया अधिकारी फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं. इसके साथ ही उन्होंने उस धारणा को तोड़ दिया, जिसमें महिला के हेलीकॉप्टर कैप्टन बनने पर शक किया जाता है. 
ऐसा नहीं है कि प्रिया अधिकारी ने पहले इतने मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं किए हैं. उन्होंने इससे पहले हिमालय के दुर्गम इलाकों में सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन चलाए और माउंट एवरेस्ट से घायल पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाला. प्रिया लगभग 6,200 मीटर तक की ऊंचाई पर रेस्क्यू मिशन पूरा कर चुकी हैं.
    user_Ashutosh kumar
    Ashutosh kumar
    Lawyer Lakhibag, Manpur•
    15 hrs ago
  • रील बनाने का जुनून पड़ा भारी! नदी में समाया युवक, चार माह पहले हुई थी शादी!
    1
    रील बनाने का जुनून पड़ा भारी! नदी में समाया युवक,
चार माह पहले हुई थी शादी!
    user_SATISH KUMAR (पत्रकार)
    SATISH KUMAR (पत्रकार)
    स्थानीय समाचार रिपोर्टर Gaya Town C.D.Block, Bihar•
    18 hrs ago
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