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पत्रकारों से बदसलूकी पर बवाल: ईख पदाधिकारी की मनमानी के खिलाफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का मीडिया ने किया बहिष्कार मोतिहारी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में समाचार संकलन करने पहुंचे पत्रकारों को प्रवेश के नाम पर कथित तौर पर परेशान किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों और सरकारी मान्यताप्राप्त पत्रकारों ने ईख पदाधिकारी मोतिहारी श्री राम सिंह के कथित दुर्व्यवहार और मनमानी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कवरेज का बहिष्कार कर दिया और कई पत्रकार एवं संपादक कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए। पत्रकारों का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल के गेट पर प्रतिनियुक्त श्री राम सिंह ने मीडिया पास और प्रेस एक्रीडेशन कार्ड होने के बावजूद आधार कार्ड दिखाने की अनिवार्यता पर जोर दिया, जबकि पत्रकारों के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से आधार कार्ड को अनिवार्य किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था। सवाल यह है कि जब पत्रकार के पास विधिवत प्रेस एक्रीडेशन कार्ड और कार्यक्रम का मीडिया पास मौजूद था, तो अचानक आधार कार्ड की शर्त किस आदेश के तहत लागू की गई? अगर जिला प्रशासन का ऐसा कोई लिखित निर्देश था, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और मीडिया को पहले से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? मामले को लेकर पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश व्यवस्था संभाल रहे पदाधिकारी का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पत्रकारों की पहचान जांचने वाले अधिकारी स्वयं अपनी पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रहे थे या नहीं? यदि मीडिया प्रतिनिधियों से पहचान पत्र मांगा जा रहा था, तो नियमों की पारदर्शिता और समानता सभी पर लागू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कोई सामान्य आयोजन नहीं था। ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पत्रकार वहां किसी व्यक्तिगत काम से नहीं, बल्कि जनता तक सरकार और मुख्यमंत्री की गतिविधियों की निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश व्यवस्था के नाम पर कथित मनमानी और अभद्र व्यवहार का आरोप बेहद गंभीर है। यह सिर्फ पत्रकारों के प्रवेश का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों में मीडिया के साथ व्यवहार करने के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल है? क्या अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार नए नियम लागू कर सकते हैं? और अगर कोई विवाद हो, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? पत्रकारों का बहिष्कार इस बात का संकेत है कि मामला केवल गेट पर रोके जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आधार कार्ड की अनिवार्यता का कोई लिखित आदेश था या नहीं। अगर आदेश था तो उसे किसने जारी किया और पत्रकारों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो किस आधार पर पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया? सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्था जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर मनमानी नहीं। सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन अपनी जगह है, लेकिन पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और नियमों की पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि पत्रकारों को कार्यक्रम में प्रवेश मिला या नहीं। सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था में नियम बड़े हैं या किसी अधिकारी की मनमानी?

21 hrs ago
user_Talk On Chair
Talk On Chair
Media company Dinapur-Cum-Khagaul, Patna•
21 hrs ago

पत्रकारों से बदसलूकी पर बवाल: ईख पदाधिकारी की मनमानी के खिलाफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का मीडिया ने किया बहिष्कार मोतिहारी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में समाचार संकलन करने पहुंचे पत्रकारों को प्रवेश के नाम पर कथित तौर पर परेशान किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों और सरकारी मान्यताप्राप्त पत्रकारों ने ईख पदाधिकारी मोतिहारी श्री राम सिंह के कथित दुर्व्यवहार और मनमानी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कवरेज का बहिष्कार कर दिया और कई पत्रकार एवं संपादक कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए। पत्रकारों का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल के गेट पर प्रतिनियुक्त श्री राम सिंह ने मीडिया पास और प्रेस एक्रीडेशन कार्ड होने के बावजूद आधार कार्ड दिखाने की अनिवार्यता पर जोर दिया, जबकि पत्रकारों के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से आधार कार्ड को अनिवार्य किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था। सवाल यह है कि जब पत्रकार के पास विधिवत प्रेस एक्रीडेशन कार्ड और कार्यक्रम का मीडिया पास मौजूद था, तो अचानक आधार कार्ड की शर्त किस आदेश के तहत लागू की गई? अगर जिला प्रशासन का ऐसा कोई लिखित निर्देश था, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और मीडिया को पहले से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? मामले को लेकर पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश व्यवस्था संभाल रहे पदाधिकारी का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पत्रकारों की पहचान जांचने वाले अधिकारी स्वयं अपनी पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रहे थे या नहीं? यदि मीडिया प्रतिनिधियों से पहचान पत्र मांगा जा रहा था, तो नियमों की पारदर्शिता और समानता सभी पर लागू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कोई सामान्य आयोजन नहीं था। ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पत्रकार वहां किसी व्यक्तिगत काम से नहीं, बल्कि जनता तक सरकार और मुख्यमंत्री की गतिविधियों की निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश व्यवस्था के नाम पर कथित मनमानी और अभद्र व्यवहार का आरोप बेहद गंभीर है। यह सिर्फ पत्रकारों के प्रवेश का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों में मीडिया के साथ व्यवहार करने के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल है? क्या अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार नए नियम लागू कर सकते हैं? और अगर कोई विवाद हो, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? पत्रकारों का बहिष्कार इस बात का संकेत है कि मामला केवल गेट पर रोके जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आधार कार्ड की अनिवार्यता का कोई लिखित आदेश था या नहीं। अगर आदेश था तो उसे किसने जारी किया और पत्रकारों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो किस आधार पर पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया? सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्था जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर मनमानी नहीं। सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन अपनी जगह है, लेकिन पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और नियमों की पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि पत्रकारों को कार्यक्रम में प्रवेश मिला या नहीं। सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था में नियम बड़े हैं या किसी अधिकारी की मनमानी?

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  • Goldan Venom Short Movie - Dipawali market .............
    1
    Goldan Venom Short Movie - Dipawali market .............
    user_Mr X
    Mr X
    Business park दीनापुर-कम-खगौल, पटना, बिहार•
    3 hrs ago
  • NEET प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, FIR रद्द होने के बाद 5 सितंबर का मार्च रद्द NEET प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। CJP प्रवक्ता सौरव दास और संगठन के समर्थक सुप्रीम कोर्ट के बाहर जुटे, जहां अदालत के फैसले के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली। जानकारी के मुताबिक, 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए NEET प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदर्शन से जुड़े छात्रों और समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए समूह ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को रद्द करने का ऐलान किया है। समर्थकों का कहना है कि अदालत के फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिली है। अब सभी की नजरें इस मामले में आगे की प्रक्रिया और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर बनी हुई हैं।
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    NEET प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, FIR रद्द होने के बाद 5 सितंबर का मार्च रद्द
NEET प्रदर्शन से जुड़े छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। CJP प्रवक्ता सौरव दास और संगठन के समर्थक सुप्रीम कोर्ट के बाहर जुटे, जहां अदालत के फैसले के बाद छात्रों ने राहत की सांस ली। जानकारी के मुताबिक, 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए NEET प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदर्शन से जुड़े छात्रों और समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए समूह ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को रद्द करने का ऐलान किया है। समर्थकों का कहना है कि अदालत के फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिली है। अब सभी की नजरें इस मामले में आगे की प्रक्रिया और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर बनी हुई हैं।
    user_Chandan Razz
    Chandan Razz
    पटना ग्रामीण, पटना, बिहार•
    8 hrs ago
  • भोजपुर में बाढ़ के पानी में बाइक समेत बह गए तीन युवक, एक का शव बरामद; दूसरा अब भी लापता भोजपुर में बाढ़ के पानी में बाइक समेत बह गए तीन युवक, एक का शव बरामद; दूसरा अब भी लापता आरा। भोजपुर जिले में बाढ़ के पानी के बीच डायवर्सन पार करने की कोशिश तीन युवकों के लिए जानलेवा साबित हुई। शाहपुर-बनाही रोड पर छेर नदी के डायवर्सन को बाइक से पार करने के दौरान तीन युवक तेज धार की चपेट में आकर बाइक समेत नदी के पानी में बह गए। स्थानीय लोगों की मदद से एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि दो युवक लापता हो गए थे। हादसे के बाद शुरू हुई खोजबीन में लापता युवकों में से सचिन रवानी का शव बरामद कर लिया गया है। वहीं, दूसरे युवक संदीप रवानी की तलाश अभी जारी है। घटना के बाद से दोनों युवकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। बाढ़ के पानी में बाइक से डायवर्सन पार करने की कोशिश जानकारी के अनुसार, शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर एक स्थित शोभिटोला निवासी सचिन रवानी (21) और संदीप रवानी (20) मंगलवार दोपहर अपने एक अन्य दोस्त के साथ बाइक से रुद्रनगर गांव गए थे। वहां से वापस लौटने के दौरान तीनों छेर नदी के डायवर्सन पर पहुंचे। डायवर्सन के ऊपर से उस समय बाढ़ का पानी तेज धार के साथ बह रहा था। इसके बावजूद तीनों युवकों ने बाइक से पानी पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान अचानक तेज बहाव ने बाइक समेत तीनों को अपनी चपेट में ले लिया और वे नदी के पानी में बह गए। हादसा होते देख आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन सचिन और संदीप तेज धार में बह गए और उनका पता नहीं चल सका। तलाश के दौरान सचिन का शव बरामद घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों लापता युवकों की तलाश शुरू की गई। नदी में पानी का तेज बहाव होने के कारण रेस्क्यू टीम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार चल रही खोजबीन के दौरान सचिन रवानी का शव बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना के बाद मौके पर मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। संदीप की तलाश में जुटी एसडीआरएफ वहीं, दूसरे लापता युवक संदीप रवानी की तलाश अभी जारी है। प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान तेज करने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है। नदी में तेज बहाव और बाढ़ के पानी के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। हादसे के बाद एक बार फिर बाढ़ के दौरान डायवर्सन और तेज बहाव वाले रास्तों से गुजरने के खतरे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि बाढ़ के पानी में डूबे डायवर्सन या पुलिया को पार करने का जोखिम न उठाएं।
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    भोजपुर में बाढ़ के पानी में बाइक समेत बह गए तीन युवक, एक का शव बरामद; दूसरा अब भी लापता
भोजपुर में बाढ़ के पानी में बाइक समेत बह गए तीन युवक, एक का शव बरामद; दूसरा अब भी लापता
आरा। भोजपुर जिले में बाढ़ के पानी के बीच डायवर्सन पार करने की कोशिश तीन युवकों के लिए जानलेवा साबित हुई। शाहपुर-बनाही रोड पर छेर नदी के डायवर्सन को बाइक से पार करने के दौरान तीन युवक तेज धार की चपेट में आकर बाइक समेत नदी के पानी में बह गए। स्थानीय लोगों की मदद से एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि दो युवक लापता हो गए थे।
हादसे के बाद शुरू हुई खोजबीन में लापता युवकों में से सचिन रवानी का शव बरामद कर लिया गया है। वहीं, दूसरे युवक संदीप रवानी की तलाश अभी जारी है। घटना के बाद से दोनों युवकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
बाढ़ के पानी में बाइक से डायवर्सन पार करने की कोशिश
जानकारी के अनुसार, शाहपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर एक स्थित शोभिटोला निवासी सचिन रवानी (21) और संदीप रवानी (20) मंगलवार दोपहर अपने एक अन्य दोस्त के साथ बाइक से रुद्रनगर गांव गए थे। वहां से वापस लौटने के दौरान तीनों छेर नदी के डायवर्सन पर पहुंचे।
डायवर्सन के ऊपर से उस समय बाढ़ का पानी तेज धार के साथ बह रहा था। इसके बावजूद तीनों युवकों ने बाइक से पानी पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान अचानक तेज बहाव ने बाइक समेत तीनों को अपनी चपेट में ले लिया और वे नदी के पानी में बह गए।
हादसा होते देख आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद एक युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लेकिन सचिन और संदीप तेज धार में बह गए और उनका पता नहीं चल सका।
तलाश के दौरान सचिन का शव बरामद
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों लापता युवकों की तलाश शुरू की गई। नदी में पानी का तेज बहाव होने के कारण रेस्क्यू टीम को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लगातार चल रही खोजबीन के दौरान सचिन रवानी का शव बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना के बाद मौके पर मौजूद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
संदीप की तलाश में जुटी एसडीआरएफ
वहीं, दूसरे लापता युवक संदीप रवानी की तलाश अभी जारी है। प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान तेज करने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है। नदी में तेज बहाव और बाढ़ के पानी के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।
हादसे के बाद एक बार फिर बाढ़ के दौरान डायवर्सन और तेज बहाव वाले रास्तों से गुजरने के खतरे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि बाढ़ के पानी में डूबे डायवर्सन या पुलिया को पार करने का जोखिम न उठाएं।
    user_Munnu Singh
    Munnu Singh
    Voice of people Patna, Bihar•
    11 hrs ago
  • एक मिनट के वीडियो में देखिए, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने सबकुछ साफ-साफ बता दिया है; भागलपुर में बाढ़ की स्थिति पर बोल रहे हैं... Mukhiyajee Reporter | Patna उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने मीडिया से कहा कि भागलपुर के खरीक प्रखंड के शंकरपुर में गंगा के तेज कटाव की स्थिति संवेदनशील है। विभाग पूरी तत्परता और युद्धस्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता मौके पर मौजूद हैं। मैं स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा हूं और आवश्यक सभी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैंI
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    एक मिनट के वीडियो में देखिए, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने सबकुछ साफ-साफ बता दिया है; भागलपुर में बाढ़ की स्थिति पर बोल रहे हैं... 
Mukhiyajee Reporter | Patna 
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने मीडिया से कहा कि भागलपुर के खरीक प्रखंड के शंकरपुर में गंगा के तेज कटाव की स्थिति संवेदनशील है। विभाग पूरी तत्परता और युद्धस्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता मौके पर मौजूद हैं। मैं स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा हूं और आवश्यक सभी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैंI
    user_Mukhiyajee Reporter
    Mukhiyajee Reporter
    Local News Reporter पटना ग्रामीण, पटना, बिहार•
    12 hrs ago
  • राजधानी पटना में जमीन के मामले को लेकर ठोकरे खाता दंपति को इन्साफ कैसे। राजधानी पटना में जमीन के मामले को लेकर दर दर की ठोकरे खाता दंपति को देगा इंसाफ... यह कैसा नियम ये कैसी जाँच जमीन पर है अवैध कब्जा, लेकिन फिर भी चुका रहा नगर निगम टैक्स..???
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    राजधानी पटना में जमीन के मामले को लेकर ठोकरे खाता दंपति को इन्साफ कैसे।
राजधानी पटना में जमीन के मामले को लेकर दर दर की ठोकरे खाता दंपति को देगा इंसाफ...     
यह कैसा नियम ये कैसी जाँच जमीन पर है अवैध कब्जा, लेकिन फिर भी चुका रहा नगर निगम टैक्स..???
    user_Live Bihar News Network
    Live Bihar News Network
    Journalist Patna Rural, Bihar•
    12 hrs ago
  • पत्रकारों से बदसलूकी पर बवाल: ईख पदाधिकारी की मनमानी के खिलाफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का मीडिया ने किया बहिष्कार मोतिहारी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में समाचार संकलन करने पहुंचे पत्रकारों को प्रवेश के नाम पर कथित तौर पर परेशान किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों और सरकारी मान्यताप्राप्त पत्रकारों ने ईख पदाधिकारी मोतिहारी श्री राम सिंह के कथित दुर्व्यवहार और मनमानी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कवरेज का बहिष्कार कर दिया और कई पत्रकार एवं संपादक कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए। पत्रकारों का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल के गेट पर प्रतिनियुक्त श्री राम सिंह ने मीडिया पास और प्रेस एक्रीडेशन कार्ड होने के बावजूद आधार कार्ड दिखाने की अनिवार्यता पर जोर दिया, जबकि पत्रकारों के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से आधार कार्ड को अनिवार्य किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था। सवाल यह है कि जब पत्रकार के पास विधिवत प्रेस एक्रीडेशन कार्ड और कार्यक्रम का मीडिया पास मौजूद था, तो अचानक आधार कार्ड की शर्त किस आदेश के तहत लागू की गई? अगर जिला प्रशासन का ऐसा कोई लिखित निर्देश था, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और मीडिया को पहले से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? मामले को लेकर पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश व्यवस्था संभाल रहे पदाधिकारी का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पत्रकारों की पहचान जांचने वाले अधिकारी स्वयं अपनी पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रहे थे या नहीं? यदि मीडिया प्रतिनिधियों से पहचान पत्र मांगा जा रहा था, तो नियमों की पारदर्शिता और समानता सभी पर लागू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कोई सामान्य आयोजन नहीं था। ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पत्रकार वहां किसी व्यक्तिगत काम से नहीं, बल्कि जनता तक सरकार और मुख्यमंत्री की गतिविधियों की निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश व्यवस्था के नाम पर कथित मनमानी और अभद्र व्यवहार का आरोप बेहद गंभीर है। यह सिर्फ पत्रकारों के प्रवेश का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों में मीडिया के साथ व्यवहार करने के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल है? क्या अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार नए नियम लागू कर सकते हैं? और अगर कोई विवाद हो, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? पत्रकारों का बहिष्कार इस बात का संकेत है कि मामला केवल गेट पर रोके जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आधार कार्ड की अनिवार्यता का कोई लिखित आदेश था या नहीं। अगर आदेश था तो उसे किसने जारी किया और पत्रकारों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो किस आधार पर पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया? सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्था जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर मनमानी नहीं। सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन अपनी जगह है, लेकिन पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और नियमों की पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि पत्रकारों को कार्यक्रम में प्रवेश मिला या नहीं। सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था में नियम बड़े हैं या किसी अधिकारी की मनमानी?
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    पत्रकारों से बदसलूकी पर बवाल: ईख पदाधिकारी की मनमानी के खिलाफ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का मीडिया ने किया बहिष्कार

मोतिहारी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में समाचार संकलन करने पहुंचे पत्रकारों को प्रवेश के नाम पर कथित तौर पर परेशान किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। मीडिया प्रतिनिधियों और सरकारी मान्यताप्राप्त पत्रकारों ने ईख पदाधिकारी मोतिहारी श्री राम सिंह के कथित दुर्व्यवहार और मनमानी से क्षुब्ध होकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कवरेज का बहिष्कार कर दिया और कई पत्रकार एवं संपादक कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए।

पत्रकारों का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल के गेट पर प्रतिनियुक्त श्री राम सिंह ने मीडिया पास और प्रेस एक्रीडेशन कार्ड होने के बावजूद आधार कार्ड दिखाने की अनिवार्यता पर जोर दिया, जबकि पत्रकारों के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से आधार कार्ड को अनिवार्य किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था।

सवाल यह है कि जब पत्रकार के पास विधिवत प्रेस एक्रीडेशन कार्ड और कार्यक्रम का मीडिया पास मौजूद था, तो अचानक आधार कार्ड की शर्त किस आदेश के तहत लागू की गई? अगर जिला प्रशासन का ऐसा कोई लिखित निर्देश था, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और मीडिया को पहले से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

मामले को लेकर पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश व्यवस्था संभाल रहे पदाधिकारी का व्यवहार सम्मानजनक नहीं था। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पत्रकारों की पहचान जांचने वाले अधिकारी स्वयं अपनी पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रहे थे या नहीं? यदि मीडिया प्रतिनिधियों से पहचान पत्र मांगा जा रहा था, तो नियमों की पारदर्शिता और समानता सभी पर लागू होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कोई सामान्य आयोजन नहीं था। ऐसे कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पत्रकार वहां किसी व्यक्तिगत काम से नहीं, बल्कि जनता तक सरकार और मुख्यमंत्री की गतिविधियों की निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रवेश व्यवस्था के नाम पर कथित मनमानी और अभद्र व्यवहार का आरोप बेहद गंभीर है।

यह सिर्फ पत्रकारों के प्रवेश का मामला नहीं है। यह सवाल है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों में मीडिया के साथ व्यवहार करने के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल है? क्या अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार नए नियम लागू कर सकते हैं? और अगर कोई विवाद हो, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

पत्रकारों का बहिष्कार इस बात का संकेत है कि मामला केवल गेट पर रोके जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

जिला प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आधार कार्ड की अनिवार्यता का कोई लिखित आदेश था या नहीं। अगर आदेश था तो उसे किसने जारी किया और पत्रकारों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? और अगर ऐसा कोई आदेश नहीं था, तो किस आधार पर पत्रकारों को प्रवेश से रोका गया?

सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्था जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर मनमानी नहीं। सुरक्षा जांच और पहचान सत्यापन अपनी जगह है, लेकिन पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और नियमों की पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है।

सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि पत्रकारों को कार्यक्रम में प्रवेश मिला या नहीं। सवाल यह है कि सरकारी व्यवस्था में नियम बड़े हैं या किसी अधिकारी की मनमानी?
    user_Talk On Chair
    Talk On Chair
    Media company Dinapur-Cum-Khagaul, Patna•
    21 hrs ago
  • Goldan Venom Short Movie - Ganesh puja ................
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    Goldan Venom Short Movie - Ganesh puja ................
    user_Mr X
    Mr X
    Business park दीनापुर-कम-खगौल, पटना, बिहार•
    4 hrs ago
  • शवयात्रा को लेकर कल हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील, न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शामिल होंगे लोग शवयात्रा को लेकर कल हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील, न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शामिल होंगे लोग हिसुआ, नवादा। हिसुआ में हुई गोलीबारी की घटना में 22 वर्षीय प्रणय कुमार भारती की मौत के बाद बुधवार को प्रस्तावित शवयात्रा को लेकर हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील की गई है। सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से स्वेच्छा से अपनी-अपनी दुकानें बंद कर शवयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया है। इस संबंध में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, राजद प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुशवाहा, वार्ड पार्षद उदय बाला एवं उप चेयरमैन टिंकू चौधरी ने लोगों से शवयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। ऐसी घटना दोबारा किसी के साथ न हो, इसके लिए समाज के सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी इच्छा के अनुसार दुकानें बंद कर शवयात्रा में शामिल हों और मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि मृत युवक के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो। आयोजकों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से शवयात्रा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि एकजुटता और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग ही मृतक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी
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    शवयात्रा को लेकर कल हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील, न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शामिल होंगे लोग
शवयात्रा को लेकर कल हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील, न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शामिल होंगे लोग
हिसुआ, नवादा। हिसुआ में हुई गोलीबारी की घटना में 22 वर्षीय प्रणय कुमार भारती की मौत के बाद बुधवार को प्रस्तावित शवयात्रा को लेकर हिसुआ बाजार बंद रखने की अपील की गई है। सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से स्वेच्छा से अपनी-अपनी दुकानें बंद कर शवयात्रा में शामिल होने का आग्रह किया है।
इस संबंध में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, राजद प्रखंड अध्यक्ष मनोज कुशवाहा, वार्ड पार्षद उदय बाला एवं उप चेयरमैन टिंकू चौधरी ने लोगों से शवयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। ऐसी घटना दोबारा किसी के साथ न हो, इसके लिए समाज के सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी इच्छा के अनुसार दुकानें बंद कर शवयात्रा में शामिल हों और मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
उन्होंने कहा कि मृत युवक के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
आयोजकों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से शवयात्रा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि एकजुटता और शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग ही मृतक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी
    user_Munnu Singh
    Munnu Singh
    Voice of people Patna, Bihar•
    11 hrs ago
  • चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित दुष्कर्म, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही। इसके बाद दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया। घटना के सामने आने के बाद सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों, खासकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस आरोपों की पुष्टि और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। नाबालिग की पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
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    चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित दुष्कर्म, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार
चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही। इसके बाद दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया। घटना के सामने आने के बाद सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों, खासकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस आरोपों की पुष्टि और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। नाबालिग की पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
    user_Chandan Razz
    Chandan Razz
    पटना ग्रामीण, पटना, बिहार•
    15 hrs ago
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