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मेजा क्षेत्र के खौर गांव में किसान के खेत में लगी आग लगभग तीन बीघे गेहूं के गट्ठर में लगी आग ग्रामीणों व फायरकर्मियों की सहयोग से बुझाई गई आग। फिलहाल आग कैसे लगी यह पता नहीं चल पाया प्रशासन जांच पड़ताल में जुटी। मेजा क्षेत्र के खौर गांव में किसान के खेत में लगी आग लगभग तीन बीघे गेहूं के गट्ठर में लगी आग ग्रामीणों व फायरकर्मियों की सहयोग से बुझाई गई आग। फिलहाल आग कैसे लगी यह पता नहीं चल पाया प्रशासन जांच पड़ताल में जुटी।
Umesh chandra patrkar
मेजा क्षेत्र के खौर गांव में किसान के खेत में लगी आग लगभग तीन बीघे गेहूं के गट्ठर में लगी आग ग्रामीणों व फायरकर्मियों की सहयोग से बुझाई गई आग। फिलहाल आग कैसे लगी यह पता नहीं चल पाया प्रशासन जांच पड़ताल में जुटी। मेजा क्षेत्र के खौर गांव में किसान के खेत में लगी आग लगभग तीन बीघे गेहूं के गट्ठर में लगी आग ग्रामीणों व फायरकर्मियों की सहयोग से बुझाई गई आग। फिलहाल आग कैसे लगी यह पता नहीं चल पाया प्रशासन जांच पड़ताल में जुटी।
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- बारा तहसील क्षेत्र के लालापुर अंतर्गत मौजा मंदूरी में बिना जल निकासी के बनी आरसीसी सड़क से गलियों में गंदा पानी भर गया है। आज गुरुवार सुबह करीब 08:00 के मीडिया से जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि बदबू और जलभराव के कारण बीमारी का खतरा बढ़ गया है। जिस सड़क से सुविधा की उम्मीद थी, वही अब परेशानी का कारण बन गई है।1
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- *नगर पंचायत असोथर की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों का कहर* *एसटीएफ की कार्यवाही के बाद भी बेलगाम अवैध खनन और परिवहन जारी* नगर पंचायत असोथर क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। *बांदा जिले के मर्का घाट खंड संख्या 03 व 04 अवैध खनन और फतेहपुर जिले की सीमा में ओवरलोडिंग का खेल लगातार जारी है*। हैरानी की बात यह है कि एसटीएफ की पूर्व कार्रवाई के बावजूद अवैध परिवहन का यह सिलसिला खुलेआम चल रहा है। ➡️_*सूत्रों के अनुसार*, कृषि क्षेत्र के परमिट की आड़ में सैकड़ों ट्रैक्टरों द्वारा मोरम का अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिससे सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। 📷*लाइव तस्वीरें और वीडियो इस पूरे खेल में जिम्मेदार अधिकारियों की कथित लापरवाही की पोल खोल रही हैं*। ‼️*अंतरजनपदीय अवैध परिवहन बना चुनौती* बांदा जिले से होकर फतेहपुर की ओर मोरम से लदे ओवरलोड वाहन दिन-रात बेरोकटोक गुजर रहे हैं। रामनगर कौहन, सिंघुतारा, नागा बाबा मंदिर(कस्बे अंदर), नगर पंचायत असोथर और प्रतापनगर झाल जैसे इलाकों से प्रतिदिन और प्रतिरात्रि भारी वाहन निकलते देखे जा रहे हैं। 📍*स्थानीय लोगों का कहना है* कि एसडीएम और स्थानीय पुलिस की कार्यवाही के बावजूद इन वाहनों पर कोई प्रभावी रोक देखने को नहीं मिल रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ❓*सीधे सवाल* ➡️__आखिर क्यों जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यवाही बार-बार फेल हो रही है? ➡️___क्या खनन माफियाओं का लोकेटर और सूचना नेटवर्क प्रशासनिक गतिविधियों से ज्यादा तेज है? ➡️__क्या सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है? 😡*स्थानीय लोगों में आक्रोश* ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके, कार्यवाही तो होती है परंतु जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत कम दिखाई देता है। 💥*अब सख्ती की जरूरत* कुल मिलाकर हालात बहुत कुछ बयां कर रहे हैं। यदि समय रहते *अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर कड़ी कार्रवाई* नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जरूरत है कि उच्च अधिकारी मामले का संज्ञान लें और जिम्मेदारों पर ठोस कार्यवाही करें, ताकि कानून का भय दोबारा स्थापित हो सके।1