साहित्य को किताबों से निकालकर समाज तक पहुंचाना होगा : अनिल सक्सेना ‘ललकार’ अमर दीप सेन डीग साहित्यिक संवाद–2026 में ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत’ पर साहित्यकारों, युवाओं और रचनाकारों ने किया संवाद डीग, 13 सितंबर। ‘21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन’ की श्रृंखला के तहत रविवार को विमल वाटिका मैरिज गार्डन, कामां गेट, डीग में ‘डीग साहित्यिक संवाद–2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत : साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा का नवजागरण’ रहा। इसमें युवाओं में पठन संस्कृति विकसित करने, साहित्य को समाज से जोड़ने तथा भारतीय ज्ञान परम्परा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर संवाद हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने की। मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर, भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली, साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’, सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना, चंद्रपाल सिंह वहज एवं गिरिजाशंकर शर्मा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसमें साहित्यकारों, रचनाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सहभागिता की। अध्यक्ष अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने कहा कि साहित्य को केवल पुस्तकों और सभागारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे गांवों, कस्बों और युवाओं के बीच ले जाना होगा। सूचना और तकनीक के दौर में युवाओं के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत उस जानकारी को ज्ञान, विवेक और संवेदना में बदलने की है। उन्होंने कहा, “सूचना व्यक्ति को जानकार बनाती है, जबकि साहित्य उसे विचारवान और संवेदनशील बनाता है।” पढ़ने वाला युवा केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करता, बल्कि समाज को समझने और देश के भविष्य को दिशा देने की तैयारी करता है। सक्सेना ने कहा कि राजस्थान के गांवों और कस्बों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें पहचानने और अवसर देने की है। साहित्यिक आंदोलन का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज को सुनना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और साहित्य को जनचेतना से जोड़ना है। डीग की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास, लोकभाषा, लोक साहित्य, लोककथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है। भारतीय ज्ञान परम्परा के श्रेष्ठ मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ पुस्तकों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “शब्द समाज से जुड़ें, युवा संस्कृति से जुड़ें, तभी साहित्य आंदोलन बनेगा।” मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन व्यक्ति के व्यक्तित्व और विचारों को समृद्ध करता है। पढ़ने की आदत से विचार करने, सही-गलत में अंतर समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में युवाओं के सामने सूचनाओं की भरमार है। ऐसे में अच्छी पुस्तकों और साहित्य का अध्ययन उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ समाज को दिशा देने का माध्यम भी है। उन्होंने डीग जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में साहित्यिक संवाद को महत्वपूर्ण पहल बताया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है। भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली ने कहा कि युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे संवाद निरंतर आयोजित होने चाहिए। साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ ने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को आवाज देने के साथ युवाओं में रचनात्मक सोच विकसित करती है। सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह ने कहा कि साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव युवाओं में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करता है। वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना ने कहा कि साहित्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। साहित्यकार चंद्रपाल सिंह वहज ने कहा कि युवाओं में पढ़ने की रुचि बढ़ाकर ही ज्ञान, विचार और संस्कार की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है। साहित्यकार गिरिजाशंकर शर्मा ने कहा कि साहित्यिक संवाद स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और युवाओं को रचनात्मक दिशा देने का माध्यम बन सकते हैं। 2010 से जारी है साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान कार्यक्रम के समन्वयक एवं भरतपुर संभाग प्रभारी मोरध्वज सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से जारी इस साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य साहित्य को आमजन तक पहुंचाने के साथ युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अब अभियान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्थानीय साहित्यकारों, रचनाकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रदेश की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। काव्यपाठ से साहित्यिक माहौल हुआ जीवंत कार्यक्रम में कवि मनोज मनु पाराशर, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, जगत पाराशर, पंकज ‘प्रखर’, गोविंद ‘ब्रजवासी’, चंद्रभान ‘चंचल’, सुनील ‘सरल’, जितेंद्र पाराशर, चंद्रभान ‘चंद्र’, प्रकाश चंद पाराशर और सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ सहित अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, समाज, संस्कृति और समसामयिक विषयों को अभिव्यक्ति दी। 18 साल के युवा अंकित मीणा की पुस्तक 'अल्फाज ए रंगरेज' का अतिथियों ने लोकार्पण किया कार्यक्रम के आयोजन में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं यूथ मूवमेंट, राजस्थान का सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
साहित्य को किताबों से निकालकर समाज तक पहुंचाना होगा : अनिल सक्सेना ‘ललकार’ अमर दीप सेन डीग साहित्यिक संवाद–2026 में ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत’ पर साहित्यकारों, युवाओं और रचनाकारों ने किया संवाद डीग, 13 सितंबर। ‘21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन’ की श्रृंखला के तहत रविवार को विमल वाटिका मैरिज गार्डन, कामां गेट, डीग में ‘डीग साहित्यिक संवाद–2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत : साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा का नवजागरण’ रहा। इसमें युवाओं में पठन संस्कृति विकसित करने, साहित्य को समाज से जोड़ने तथा भारतीय ज्ञान परम्परा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर संवाद हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने की। मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर, भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली, साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’, सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना, चंद्रपाल सिंह वहज एवं गिरिजाशंकर शर्मा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसमें साहित्यकारों, रचनाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सहभागिता की। अध्यक्ष अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने कहा कि साहित्य को केवल पुस्तकों और सभागारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे गांवों, कस्बों और युवाओं के
बीच ले जाना होगा। सूचना और तकनीक के दौर में युवाओं के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत उस जानकारी को ज्ञान, विवेक और संवेदना में बदलने की है। उन्होंने कहा, “सूचना व्यक्ति को जानकार बनाती है, जबकि साहित्य उसे विचारवान और संवेदनशील बनाता है।” पढ़ने वाला युवा केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करता, बल्कि समाज को समझने और देश के भविष्य को दिशा देने की तैयारी करता है। सक्सेना ने कहा कि राजस्थान के गांवों और कस्बों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें पहचानने और अवसर देने की है। साहित्यिक आंदोलन का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज को सुनना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और साहित्य को जनचेतना से जोड़ना है। डीग की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास, लोकभाषा, लोक साहित्य, लोककथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है। भारतीय ज्ञान परम्परा के श्रेष्ठ मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ पुस्तकों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “शब्द समाज से जुड़ें, युवा संस्कृति से जुड़ें, तभी साहित्य आंदोलन बनेगा।” मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन व्यक्ति के व्यक्तित्व और विचारों को समृद्ध करता है। पढ़ने की
आदत से विचार करने, सही-गलत में अंतर समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में युवाओं के सामने सूचनाओं की भरमार है। ऐसे में अच्छी पुस्तकों और साहित्य का अध्ययन उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ समाज को दिशा देने का माध्यम भी है। उन्होंने डीग जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में साहित्यिक संवाद को महत्वपूर्ण पहल बताया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है। भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली ने कहा कि युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे संवाद निरंतर आयोजित होने चाहिए। साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ ने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को आवाज देने के साथ युवाओं में रचनात्मक सोच विकसित करती है। सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह ने कहा कि साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव युवाओं में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करता है। वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना ने कहा कि साहित्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। साहित्यकार चंद्रपाल सिंह वहज ने कहा कि युवाओं में पढ़ने की रुचि बढ़ाकर ही ज्ञान, विचार और संस्कार की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है। साहित्यकार गिरिजाशंकर शर्मा
ने कहा कि साहित्यिक संवाद स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और युवाओं को रचनात्मक दिशा देने का माध्यम बन सकते हैं। 2010 से जारी है साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान कार्यक्रम के समन्वयक एवं भरतपुर संभाग प्रभारी मोरध्वज सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से जारी इस साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य साहित्य को आमजन तक पहुंचाने के साथ युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अब अभियान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्थानीय साहित्यकारों, रचनाकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रदेश की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। काव्यपाठ से साहित्यिक माहौल हुआ जीवंत कार्यक्रम में कवि मनोज मनु पाराशर, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, जगत पाराशर, पंकज ‘प्रखर’, गोविंद ‘ब्रजवासी’, चंद्रभान ‘चंचल’, सुनील ‘सरल’, जितेंद्र पाराशर, चंद्रभान ‘चंद्र’, प्रकाश चंद पाराशर और सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ सहित अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, समाज, संस्कृति और समसामयिक विषयों को अभिव्यक्ति दी। 18 साल के युवा अंकित मीणा की पुस्तक 'अल्फाज ए रंगरेज' का अतिथियों ने लोकार्पण किया कार्यक्रम के आयोजन में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं यूथ मूवमेंट, राजस्थान का सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
- साहित्य को किताबों से निकालकर समाज तक पहुंचाना होगा : अनिल सक्सेना ‘ललकार’ अमर दीप सेन डीग साहित्यिक संवाद–2026 में ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत’ पर साहित्यकारों, युवाओं और रचनाकारों ने किया संवाद डीग, 13 सितंबर। ‘21वीं सदी का राजस्थान साहित्यिक आंदोलन’ की श्रृंखला के तहत रविवार को विमल वाटिका मैरिज गार्डन, कामां गेट, डीग में ‘डीग साहित्यिक संवाद–2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘पढ़ता युवा, सशक्त भारत : साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परम्परा का नवजागरण’ रहा। इसमें युवाओं में पठन संस्कृति विकसित करने, साहित्य को समाज से जोड़ने तथा भारतीय ज्ञान परम्परा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर संवाद हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने की। मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया थे। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर, भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली, साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’, सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना, चंद्रपाल सिंह वहज एवं गिरिजाशंकर शर्मा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसमें साहित्यकारों, रचनाकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवाओं ने सहभागिता की। अध्यक्ष अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने कहा कि साहित्य को केवल पुस्तकों और सभागारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे गांवों, कस्बों और युवाओं के बीच ले जाना होगा। सूचना और तकनीक के दौर में युवाओं के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत उस जानकारी को ज्ञान, विवेक और संवेदना में बदलने की है। उन्होंने कहा, “सूचना व्यक्ति को जानकार बनाती है, जबकि साहित्य उसे विचारवान और संवेदनशील बनाता है।” पढ़ने वाला युवा केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करता, बल्कि समाज को समझने और देश के भविष्य को दिशा देने की तैयारी करता है। सक्सेना ने कहा कि राजस्थान के गांवों और कस्बों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें पहचानने और अवसर देने की है। साहित्यिक आंदोलन का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज को सुनना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और साहित्य को जनचेतना से जोड़ना है। डीग की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय इतिहास, लोकभाषा, लोक साहित्य, लोककथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना जरूरी है। भारतीय ज्ञान परम्परा के श्रेष्ठ मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ पुस्तकों को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “शब्द समाज से जुड़ें, युवा संस्कृति से जुड़ें, तभी साहित्य आंदोलन बनेगा।” मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री गजेंद्र सिंह तेनगुरिया ने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन व्यक्ति के व्यक्तित्व और विचारों को समृद्ध करता है। पढ़ने की आदत से विचार करने, सही-गलत में अंतर समझने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में युवाओं के सामने सूचनाओं की भरमार है। ऐसे में अच्छी पुस्तकों और साहित्य का अध्ययन उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ समाज को दिशा देने का माध्यम भी है। उन्होंने डीग जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में साहित्यिक संवाद को महत्वपूर्ण पहल बताया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश चंद पाराशर ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है। भरतपुर नगर निगम की पूर्व प्रथम महापौर सुमन कोली ने कहा कि युवाओं को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे संवाद निरंतर आयोजित होने चाहिए। साहित्यकार सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ ने कहा कि कविता समाज की संवेदनाओं को आवाज देने के साथ युवाओं में रचनात्मक सोच विकसित करती है। सेवानिवृत्त आरपीएस नत्थी सिंह ने कहा कि साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव युवाओं में संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करता है। वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सिंह जघीना ने कहा कि साहित्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। साहित्यकार चंद्रपाल सिंह वहज ने कहा कि युवाओं में पढ़ने की रुचि बढ़ाकर ही ज्ञान, विचार और संस्कार की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है। साहित्यकार गिरिजाशंकर शर्मा ने कहा कि साहित्यिक संवाद स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और युवाओं को रचनात्मक दिशा देने का माध्यम बन सकते हैं। 2010 से जारी है साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान कार्यक्रम के समन्वयक एवं भरतपुर संभाग प्रभारी मोरध्वज सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 से जारी इस साहित्यिक-सांस्कृतिक अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान का उद्देश्य साहित्य को आमजन तक पहुंचाने के साथ युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अब अभियान को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्थानीय साहित्यकारों, रचनाकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रदेश की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। काव्यपाठ से साहित्यिक माहौल हुआ जीवंत कार्यक्रम में कवि मनोज मनु पाराशर, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, जगत पाराशर, पंकज ‘प्रखर’, गोविंद ‘ब्रजवासी’, चंद्रभान ‘चंचल’, सुनील ‘सरल’, जितेंद्र पाराशर, चंद्रभान ‘चंद्र’, प्रकाश चंद पाराशर और सोहन लाल शर्मा ‘प्रेम’ सहित अन्य कवियों ने काव्यपाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, समाज, संस्कृति और समसामयिक विषयों को अभिव्यक्ति दी। 18 साल के युवा अंकित मीणा की पुस्तक 'अल्फाज ए रंगरेज' का अतिथियों ने लोकार्पण किया कार्यक्रम के आयोजन में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं यूथ मूवमेंट, राजस्थान का सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।4
- रिपोर्टर मुकेश धोबी एसीबी टीम की बड़ी कार्रवाई,, सांभर थाना अधिकारी राममिलन मीणा को किया ट्रैप, 50 हजार की राशि लेते किया ट्रैप, DG गोविंद गुप्ता के निर्देश में कार्रवाई, एडिशनल SP भूपेंद्र ,सीआई मनोज ने की ट्रैप की कार्रवाई, SHO ने ठेकेदार से माँगी थी 50 हज़ार की रिश्वत, उनके इलाक़े में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, इसी को लेकर माँगी आरोपी SHO ने रिश्वत, DIG ओमप्रकाश की सुपर विजन में कार्रवाई रिपोर्टर मुकेश धोबी एसीबी टीम की बड़ी कार्रवाई,, सांभर थाना अधिकारी राममिलन मीणा को किया ट्रैप, 50 हजार की राशि लेते किया ट्रैप, DG गोविंद गुप्ता के निर्देश में कार्रवाई, एडिशनल SP भूपेंद्र ,सीआई मनोज ने की ट्रैप की कार्रवाई, SHO ने ठेकेदार से माँगी थी 50 हज़ार की रिश्वत, उनके इलाक़े में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, इसी को लेकर माँगी आरोपी SHO ने रिश्वत, DIG ओमप्रकाश की सुपर विजन में कार्रवाई1
- जतीपुरा मुखारविंद मंदिर का वीडियो वायरल - लड़की की हालत देख लोग हैरान जतीपुरा, गोवर्धन - गोवर्धन के प्रसिद्ध श्री गिरिराज मुखारविंद मंदिर, जतीपुरा से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक लड़की मंदिर परिसर में जमीन पर गिरी हुई दिख रही है और परिजन उसे संभाल रहे हैं। मंदिर में मौजूद अन्य श्रद्धालु भी वहां इकट्ठा हो गए। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार लड़की पिछले कुछ समय से परेशान चल रही थी और वो गोवर्धन परिक्रमा करने आई थी। परिजनों का कहना है कि गिरिराज जी की 3 परिक्रमा करने और ब्रज रज माथे पर लगाने के बाद उसे पहले से आराम मिलता है। श्रद्धालुओ का दावा है कि - गिरिराज जी के दरबार में आकर सबको आराम मिलता है, ये ब्रज रज की महिमा है1
- अजान गांव में जलभराव से परेशान ग्रामीणों ने छह घंटे जाम की सड़क प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने खोला जाम कुम्हेर की ग्राम अजान में बारिश और नहर से आए पानी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। अजान सहित छोटे-बड़े नगला करीब दो महीने से जलभराव करीब 600 घरों के रास्ते अवरुद्ध हैं और कई घरों आसपास पानी भरा हुआ है। जरीले कीड़ों के निकलने से ग्रामीणों में डर बना हुआ है। स्थायी समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अनिल अजान के नेतृत्व भरतपुर-सौख रोड लकड़ियां पत्थर रखकर 6 घंटे तक जाम लगाया। अजान गांव में जलभराव से परेशान ग्रामीणों ने छह घंटे जाम की सड़क प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने खोला जाम कुम्हेर की ग्राम अजान में बारिश और नहर से आए पानी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। अजान सहित छोटे-बड़े नगला करीब दो महीने से जलभराव करीब 600 घरों के रास्ते अवरुद्ध हैं और कई घरों आसपास पानी भरा हुआ है। जरीले कीड़ों के निकलने से ग्रामीणों में डर बना हुआ है। स्थायी समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अनिल अजान के नेतृत्व भरतपुर-सौख रोड लकड़ियां पत्थर रखकर 6 घंटे तक जाम लगाया। जाम के कारण सड़क के दोनों र वाहनों की लंबी कतार लग । ग्रामीणों का कहना है कि छ दिन पहले पानी निकासी के एक ट्रैक्टर-ट्रॉली वाला पंप गाया गया था। इससे पानी कम नहीं हुआ, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं होने से नहर में कटाव से दोबारा गांव में पानी भर लोगों इस जलभराव से परेशानियों का समाना बना पड रहा है। ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि पहले पंप लगाकर पानी निकालने की कोशिश की गई, लेकिन पानी की स्थायी निकासी का इंतजाम नहीं हुआ। नहर में कटाव और बारिश के बाद दोबारा पानी आने से समस्या जस की तस हो गई। करीब छह घंटे के जाम के बाद तहसीलदार ने टूटी नहर को दुरुस्त कराने और गांव से पानी की निकासी का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोलकर आवागमन शुरू किया। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि आश्वासन के बाद पानी की निकासी कब तक हो पाती है और गांव को जलभराव से स्थायी राहत मिलती है या नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि दो महीने से गलियों और घरों के सामने पानी भरा होने के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हैं। महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। स्कूली बच्चे जलभराव के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र तक जाने वाले रास्ते में भी पानी भरा है, जिससे बीमार ग्रामीणों को उपचार के लिए पहुंचने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने जलभराव के कारण बीमारी और महामारी फैलने की आशंका भी जताई है। महिलाओं ने कहा कि चुनाव के समय वोट मांगने सभी आते हैं और सरकार कई योजनाएं चलाती है, लेकिन गांव को जलभराव से राहत दिलाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो रही। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग की।1
- छाता शुगर मिल आंदोलन में चौधरी लक्ष्मी नारायण को खुली चुनौती छाता शुगर मिल आंदोलन बीजेपी और गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की बन गले की फांस छाता शुगर मिल आंदोलन में चौधरी लक्ष्मी नारायण को खुली चुनौती छाता शुगर मिल आंदोलन बीजेपी और गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की बन गले की फांस1
- मथुरा के गरीब लोगो के लिए चार गुना कमाई का वरदान है। 2027 एक गरीब ही गरीब के वारे मै सोच सकता है। मथुरा के गरीब लोगो के लिए चार गुना कमाई का वरदान है। 2027 एक गरीब ही गरीब के वारे मै सोच सकता है।1
- 🔥 “2027 में सवर्ण समाज देगा सरकार को जवाब!” पंडित रामगोपाल शर्मा ने बैठक में भरी हुंकार, वोट की चोट की चेतावनी ।। #UGC #SCSTAct 🔥 “2027 में सवर्ण समाज देगा सरकार को जवाब!” पंडित रामगोपाल शर्मा ने बैठक में भरी हुंकार, वोट की चोट की चेतावनी #rprnewstv #brajkiawaaz मथुरा में सवर्ण समाज की बड़ी बैठक, 2027 को लेकर बनी रणनीति! 🔥 मथुरा जनपद के एक स्थानीय होटल में सर्व ब्राह्मण महासभा की मथुरा इकाई द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। बैठक में विभिन्न प्रदेशों से आए ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार भी पुराने सरकारों की तरह अपनी दिशा से भटकती नजर आ रही है और समाज से जुड़े कई मुद्दों को लेकर लोगों में नाराजगी है। बैठक में एससी-एसटी एक्ट, UGC से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध की बात कही गई। साथ ही वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 2027 के चुनाव में वोट की चोट के जरिए जवाब दिया जाएगा। बैठक को संबोधित करते हुए पंडित रामगोपाल शर्मा ने कहा कि समाज अब अपने अधिकारों और सम्मान के मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेगा। अब सवाल यही—क्या 2027 का चुनाव सवर्ण समाज के मुद्दों पर नई राजनीतिक दिशा तय करेगा? 📍 मथुरा | उत्तर प्रदेश #Mathura #BrahminSamaj #SarvBrahminMahasabha #RamGopalSharma #2027Election #UPPolitics #Brahmin #SavarnSamaj #VoteKiChot #MathuraNews #UPNews #BreakingNews #ViralNews #RPRNEWSTV1
- बृहद गौ संरक्षण केंद्र ग्राम पेठा के सामने गड्ढे में फसी गो माता, ग्राम प्रधान का कहना हमारी गाय नहीं है मामला गोवर्धन तहसील के ग्राम पंचायत पेठा का है जहां बृहद को संरक्षण केंद्र बना हुआ है जिसके सामने एक गए गड्ढे में गोबर और कीचड़ में फंसी हुई है और बेहद गंभीर स्थिति में है जब इस बारे में गौशाला कर्मचारी और ग्राम प्रधान से बात की तो उनका कहना यह हमारी गौशाला की गाय नहीं है यदि कोई गाय गौशाला के सामने है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है क्या योगी सरकार में गायों को यही प्राथमिकता मिल रही है आप खुद देखिए गाय की हालत1