मैहर में हुई पहली ही बारिश ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी, जिससे उनके सभी दावे बह गए। महज एक घंटे की बारिश ने वार्ड क्रमांक-1 की तस्वीर बदल दी, जहाँ सड़कों पर जलभराव और गंदगी फैलने से लोगों की परेशानियाँ काफी बढ़ गईं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदहाली उसी वार्ड में सामने आई है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं नगर पालिका अध्यक्ष गीता संतोष सोनी करती हैं। बारिश के बाद वार्ड की गलियों और सड़कों पर पानी भर जाने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलने के बाद रहवासियों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अध्यक्ष के अपने वार्ड की यह स्थिति है, तो अन्य वार्डों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि समय रहते नालियों की उचित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण पहली ही बारिश में वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो गया। अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि नगर पालिका केवल दावों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे और आम लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।
मैहर में हुई पहली ही बारिश ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी, जिससे उनके सभी दावे बह गए। महज एक घंटे की बारिश ने वार्ड क्रमांक-1 की तस्वीर बदल दी, जहाँ सड़कों पर जलभराव और गंदगी फैलने से लोगों की परेशानियाँ काफी बढ़ गईं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदहाली उसी वार्ड में सामने आई है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं नगर पालिका अध्यक्ष गीता संतोष सोनी करती हैं। बारिश के बाद वार्ड की गलियों और सड़कों पर पानी भर जाने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलने के बाद रहवासियों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अध्यक्ष के अपने वार्ड की यह स्थिति है, तो अन्य वार्डों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि समय रहते नालियों की उचित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण पहली ही बारिश में वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो गया। अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि नगर पालिका केवल दावों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे और आम लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।
- मैहर में हुई पहली ही बारिश ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी, जिससे उनके सभी दावे बह गए। महज एक घंटे की बारिश ने वार्ड क्रमांक-1 की तस्वीर बदल दी, जहाँ सड़कों पर जलभराव और गंदगी फैलने से लोगों की परेशानियाँ काफी बढ़ गईं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बदहाली उसी वार्ड में सामने आई है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं नगर पालिका अध्यक्ष गीता संतोष सोनी करती हैं। बारिश के बाद वार्ड की गलियों और सड़कों पर पानी भर जाने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलने के बाद रहवासियों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि यदि अध्यक्ष के अपने वार्ड की यह स्थिति है, तो अन्य वार्डों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि समय रहते नालियों की उचित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण पहली ही बारिश में वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो गया। अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि नगर पालिका केवल दावों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे और आम लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।1
- मैहर में हुई पहली बारिश ने नगर पालिका की मानसून तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। वार्ड क्रमांक 21 में रहने वाले अशोक कुमार सोनी के घर में नाले का गंदा पानी घुस जाने से परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना नगर पालिका के मानसून पूर्व नालों की सफाई और आवश्यक व्यवस्थाओं के दावों की सच्चाई को उजागर करती है। सतना रोड स्थित बाबा तालाब के सामने अशोक कुमार सोनी के मकान में बारिश के दौरान नाले का दूषित पानी घुस गया, जिससे घर के आंगन और कमरों में गंदा पानी भर गया। इससे घरेलू सामान प्रभावित हुए और परिवार के सदस्यों को पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नालों की समय पर सफाई न होने और जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। क्षेत्रवासियों ने चिंता जताई है कि नाले का गंदा पानी घरों में भरने से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे भी पैदा होते हैं। दूषित पानी के संपर्क में आने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है, खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है। निवासियों ने नगर पालिका से तत्काल प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर नालों की सफाई और आवश्यक सुधार कार्य कराने की अपील की है, ताकि आगामी बारिश में लोग ऐसी समस्याओं और संभावित बीमारियों के खतरे से बच सकें। पहली ही बरसात में घरों तक पहुंचे नाले के गंदे पानी ने नगर पालिका की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कितनी तत्परता दिखाते हैं।2
- मैहर में पहली ही बारिश ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, जिसके दावे धुल गए। महज एक घंटे की बारिश ने वार्ड क्रमांक-1 की हालत बिगाड़ दी, जहां सड़कों पर जलभराव और गंदगी से लोगों की परेशानियां बढ़ गईं। यह विशेष रूप से चौंकाने वाली बात है क्योंकि इस वार्ड का प्रतिनिधित्व स्वयं नगर पालिका अध्यक्ष गीता संतोष सोनी करती हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और समय पर नालियों की सफाई न किए जाने के कारण वार्ड की गलियां और सड़कें पानी से लबालब भर गईं। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और उन्होंने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। निवासियों का आरोप है कि जब अध्यक्ष के अपने वार्ड की यह स्थिति है, तो अन्य वार्डों की हालत का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। क्षेत्र के लोगों ने अब मांग की है कि नगर पालिका सिर्फ कागजी दावों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे ताकि ऐसी बदहाली दोबारा न हो।1
- मैहर में एक खुले नाले में गाय गिर जाने से स्थानीय नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह नाला सालों से खुला पड़ा है, जिसके कारण यह घटना हुई और इलाके में लगातार असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। छोटा अखाड़ा महंत श्री गंगा शरण जू महाराज जी के सहयोग से गिरी हुई गाय को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, इस घटना ने सबसे बड़ा प्रश्न यही खड़ा किया है कि इतने लंबे समय से खुले पड़े इस नाले को आखिर अब तक ढका क्यों नहीं गया, जो सीधे तौर पर नगर पालिका की घोर लापरवाही को दर्शाता है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर में चल रहे विकास कार्यों के कारण स्थानीय नागरिक पहले से ही धूल-धक्कड़ से परेशान हैं, और अब पहली बारिश उनकी समस्या को और बढ़ा चुकी है। यह स्थिति मैहर में चल रहे विकास कार्यों और नगर पालिका की घोर उदासीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। जनता में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ये काम कब तक चलेंगे और उन्हें कब तक इस परेशानी से राहत मिल पाएगी, लेकिन इंजीनियर साहब इतने लापरवाह हो चुके हैं कि जवाब देना तो दूर, कड़क धूप में बाहर निकलने के बजाय वे एयर कंडीशनर में आराम फरमाने को अपना काम मानते हैं। मैहर में हुई इस बारिश को लेकर शहर की गलियों में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- मैहर कांग्रेस के भीतर इन दिनों अजब हाल देखने को मिल रहे हैं, जहाँ मैहर ब्लॉक कांग्रेस के सरलानगर मंडलम का अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी के एक कार्यकर्ता डॉ. संतोष सोनी को नियुक्त किए जाने को लेकर जिला अध्यक्ष धर्मेश घई और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रमेश प्रजापति की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस फैसले के बाद डॉ. संतोष सोनी के बयान ने इन दोनों पदाधिकारियों की कार्यशैली को हाशिए पर ला दिया है। इस घटना ने शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे इन जिम्मेवारों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे या उनसे जवाब-तलब किया जाएगा। आरोप है कि मैहर में कांग्रेस के लगातार कमजोर होने की मूल वजह पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं की अनदेखी करके अन्य दलों के लोगों से तालियाँ बजवाना है। कहा गया है कि जब तक कांग्रेस के कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ताओं को अहमियत नहीं दी जाएगी, तब तक पार्टी मजबूत नहीं हो पाएगी। शीर्ष नेतृत्व को समय-समय पर जो सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं, उसे एक बड़ा धोखा बताया गया है। पार्टी का मूल कार्यकर्ता आज भी कांग्रेस के लिए दरी बिछाने और झंडा-बैनर लगाने का काम कर रहा है, और जब तक कांग्रेस उस अंतिम व्यक्ति को नहीं जोड़ेगी, तब तक वह भारतीय जनता पार्टी का कुछ नहीं कर सकती। डॉ. संतोष सोनी, जो बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें मंडलम का अध्यक्ष बनाए जाने पर यह भी सवाल उठाया गया कि क्या सरलानगर क्षेत्र से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है कि उन्हें कार्यकर्ता नहीं मिल रहे और दूसरी पार्टियों से 'हायर' करना पड़ रहा है। डॉ. संतोष सोनी ने अपने जवाबों से यह दिखा दिया कि पार्टी के प्रति निष्ठा क्या होती है, और उन्होंने कांग्रेस के इस प्रस्ताव को मुँह पर ही ठुकरा दिया। चेतावनी दी गई है कि अगर धर्मेश घई ऐसी ही प्रतिनिधित्व करेंगे तो कांग्रेस 'टमसा पार' हो जाएगी, और सवाल पूछा गया है कि घई साहब कब तक शीर्ष नेतृत्व को धोखा देंगे और अन्य दल के लोगों से तालियाँ बजवाते रहेंगे।1
- अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद, अब तृणमूल कांग्रेस के वयोवृद्ध सांसद कल्याण बनर्जी पर जानलेवा हमला किया गया है। इस घटना के कारण राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।1