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आज के रतलाम की दुर्घटना प्रताप नगर ब्रिज के यहां पर एक बोरवेल के साथ में कंटेनर में रहता है उसके समक्ष आग लगने से मिशन आप फ्री हो गई
संतोष खारोल
आज के रतलाम की दुर्घटना प्रताप नगर ब्रिज के यहां पर एक बोरवेल के साथ में कंटेनर में रहता है उसके समक्ष आग लगने से मिशन आप फ्री हो गई
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- महाकुंभ की वायरल मॉडल हर्षा रिछारिया ने अब संन्यास ले लिया है। उज्जैन में हर्षा रिछारिया अपना पिंडदान कर दिया है। अब वह स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएगी। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने संन्यास दीक्षा दी है। संन्यास परंपरा के अनुसार, उन्हें शिखा और दंड त्याग की विधि कराई गई। साथ ही पिंड दान और श्राद्ध कर्म भी कराए गए। पूर्व जीवन के त्याग और नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत है। उज्जैन में इसके लिए हर्षा ने धार्मिक अनुष्ठान किया है। उन्होंने अपने गुरुदेव के मार्गदर्शन में संन्यास का मार्ग अपनाया है। साथ ही वह संन्यास की मर्यादा का पालन करेगी। इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने कहा कि संन्यास दीक्षा एक गहन और अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति अपने पूर्व जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक पथ पर चलता है। मेरा आग्रह है कि वे संन्यास की गरिमा को कभी कलंकित नहीं होने दें।1
- धारः मध्यप्रदेश में धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में एक पिता द्वारा अपनी ही मासूम बेटी से दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। मां ने आरोपी को गलत काम करते हुए पकड़ा और पड़ोसियों की मदद से थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को महज चार घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार आरोपी राजित राम, जो मूलत: इलाहाबाद (उ.प्र.) का निवासी है, वर्तमान में घाटाबिल्लौद के सेक्टर-3 स्थित मालती चौराहा पर किराए के मकान में रहकर मजदूरी करता है। उसकी मासूम बेटी दो साल पहले अपनी नानी के घर से पिता के पास आई थी और पिछले दो महीनों से यहां रह रही थी। पीड़िता की मां ने बताया कि आरोपी पिता रात में जब वह सो जाती थी, तब अपनी ही बेटी के साथ दुष्कर्म करता था। दो दिन पहले मां की आंख अचानक खुल गई तो उसने पति की दरिंदगी देखी। विरोध करने पर आरोपी ने पत्नी को धमकाया और घर से निकालने की धमकी दी। डरी-सहमी मां ने बेटी से बात की तो मासूम ने बिलखते हुए पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद महिला ने पड़ोसियों की मदद से थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत हरकत में आकर मासूम का मेडिकल परीक्षण कराया और आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। प्राथमिकी दर्ज होने के महज चार घंटे के भीतर पुलिस ने आरोपी राजित राम को गिरफ्तार कर लिया।2
- Post by Shamshuddin Sheikh1
- अक्षय तृतीया पर नालछा में 33 जोड़ों का सामूहिक विवाहः पटेलिया आदिवासी समाज ने गृहस्थी का सामान दिया, मेहमानों के लिए खाने की व्यवस्था रही राहुल सेन मांडव मो 9669141814 नालछा न्यूज/धार जिले के नालछा ब्लॉक में स्थित जीरापुर के 64 योगिनी 52 भैरव माता मंदिर में अक्षय तृतीया सोमवार को पटेलिया आदिवासी समाज का समागम हुआ। यहां पटेलिया आदिवासी समाज सेवा संघ के आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में 33 जोड़े एक-दूजे के हमसफर बने। जीरापुर मंडल समिति हर साल यह आयोजन करती है। शादी के बंधन में बंधे जोड़ों को समाज की ओर से नई गृहस्थी शुरू करने के लिए जरूरी सामान भेंट किया गया। इनमें मंगलसूत्र के साथ-साथ थाली, गिलास, बर्तन, पलंग, गद्दा और रजाई जैसी कई चीजें शामिल थीं। पंडित निर्मल इंदुरकर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फेरे करवाकर विवाह की रस्में पूरी करवाईं। इंतजामों में समाज ने दिखाई एकजुटता विवाह सम्मेलन को सफल बनाने के लिए पटेलिया समाज ने व्यवस्था की थी। मंदिर परिसर में टेंट, लाइट और सजावट के साथ-साथ मेहमानों के लिए खाने-पीने का भी अच्छा प्रबंध किया गया था। समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालकर कार्यक्रम को भव्य बनाया।इनका रहा विशेष योगदान विवाह समिति के अध्यक्ष हरिओम पटेल ने बताया कि इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में बाबूलाल पटेल, नानूराम गोयल, ओम गोयल, देवा, प्रेम हटिला, चंपालाल पटेल और भगवान सिंह पटेल सहित समाज के कई लोगों ने दिन-रात मेहनत की। राकेश पटेल, तोलाराम हटिला और मोहन पटेल जैसे समाज बंधुओं के सहयोग से यह सामूहिक विवाह समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ।4
- Post by Parmeshvar redash1
- Post by 𝕄ℝ 𝕂𝔸ℝ𝕋ℍ𝕀𝕂 𝔻𝔸𝕎𝔸ℝ 𝕁1
- Bundelkhand क्षेत्र में केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। Chhatarpur में “चिता आंदोलन” और “पंचतत्व सत्याग्रह” जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन सामने आए हैं, जहां लोग अलग-अलग तरीकों से अपनी बात रख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन और पहचान को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह, मिट्टी आंदोलन और उपवास जैसे माध्यमों से वे अपनी मांगों को सामने ला रहे हैं। विवाद का बड़ा कारण मुआवजा और पुनर्वास है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजे को लेकर स्पष्टता नहीं है और वे “जमीन के बदले जमीन” तथा “गांव के बदले गांव” की मांग कर रहे हैं। वहीं पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है कि इस परियोजना का असर Panna Tiger Reserve जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। यह पूरा मुद्दा अब विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन चुका है, जिस पर सभी की नजर बनी हुई है।1
- Post by Parmeshvar redash1
- Pani ki dikat koi sarpanch mantri koi bhi dekhne nahin aate1