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बहुत ही सुंदर और बहुत ही अच्छे देसी जुगाड़ का आनंद लिया गया है, जो बेहद आकर्षक और उत्कृष्ट अनुभव रहा।
Rohit nishad Rohit Kumar
बहुत ही सुंदर और बहुत ही अच्छे देसी जुगाड़ का आनंद लिया गया है, जो बेहद आकर्षक और उत्कृष्ट अनुभव रहा।
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- संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में आज मंगलवार को एक भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा। मंदिर के महंत बाबा अवधेश दास के सान्निध्य में प्रातः 10:00 बजे से एक विशाल वृहद भंडारे का शुभारंभ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इस अवसर पर भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी की कृपा प्राप्ति हेतु सुंदरकांड पाठ का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरा मंदिर परिसर राममय और भक्तिमय हो उठेगा। बाबा अवधेश दास ने यह भी बताया कि धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। मंदिर प्रशासन की ओर से सभी श्रद्धालुओं, क्षेत्रवासियों एवं धर्मप्रेमियों से अपील की गई है कि वे इस आयोजन में शामिल होकर सुंदरकांड पाठ का श्रवण करें तथा प्रसाद स्वरूप आयोजित भंडारे का लाभ प्राप्त करें। बाबा अवधेश दास ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया है।1
- संतकबीरनगर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिले के बिजली कर्मियों ने समझौतों के पालन में हो रही देरी तथा आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर लिखित समझौतों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बिजली कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और संघर्ष समिति के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, लेकिन उसके अधिकांश बिंदुओं का आज तक क्रियान्वयन नहीं किया गया। इसी के चलते कर्मचारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है और मार्च 2023 में कर्मचारियों को सांकेतिक आंदोलन करना पड़ा। पदाधिकारियों ने कहा कि इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के बजाय कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न प्रकार की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी बताया कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री के साथ हुए एक अन्य समझौते में आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने, दर्ज एफआईआर समाप्त करने तथा हटाए गए संविदा कर्मचारियों को बहाल करने का निर्देश दिया गया था, मगर इन निर्देशों का भी अब तक पालन नहीं हुआ है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि समझौतों के क्रियान्वयन में लापरवाही और कर्मचारियों के प्रति अपनाए गए रवैये से पूरे प्रदेश के बिजली कर्मियों में गहरा रोष है। इसके बावजूद कर्मचारी भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों ने मांग की है कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित और उसके बाद की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए, साथ ही 3 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 के समझौतों के सभी बिंदुओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इस प्रदर्शन में सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, दिलीप सिंह, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद, नारायण चंद्र चौरसिया, संजय यादव, विजय कुमार, अशोक कुमार, रंजन कुमार, संतोष गुप्ता, आर्यन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, रमेश प्रजापति, प्रिंस गुप्ता, रितेश कुमार सहित बड़ी संख्या में विद्युत कर्मचारी मौजूद रहे।1
- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु हुए लिखित समझौतों के पूर्ण पालन न होने और आंदोलन के दौरान की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस न लेने पर व्यापक असंतोष और गहरी नाराजगी व्यक्त की है। समिति ने इस स्थिति को पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी सुनील प्रजापति ने बताया कि बिजली कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा और संघर्ष समिति के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जिसकी अध्यक्षता माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार श्री अवनीश अवस्थी, आई ए एस (से नि) ने की थी। हालांकि, समिति ने खेद जताया कि इस समझौते के अधिकांश बिंदुओं को आज तक लागू नहीं किया गया। इसी देरी के कारण कर्मचारियों को मार्च 2023 में सांकेतिक आंदोलन करना पड़ा, जिसके बाद समस्याओं के समाधान के बजाय कर्मचारियों के विरुद्ध विभिन्न उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की गईं। पदाधिकारी संतोष गुप्ता ने स्मरण कराया कि 19 मार्च 2023 को पुनः माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा के साथ एक और समझौता हुआ था। उस समय ऊर्जा मंत्री ने तत्कालीन अध्यक्ष, पावर कॉरपोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, दर्ज एफआईआर समाप्त की जाएं और हटाए गए सभी संविदा कर्मचारियों को सेवा में बहाल किया जाए। दुर्भाग्यवश, समिति ने कहा कि इन निर्देशों का भी आज तक समुचित पालन नहीं किया गया है। पदाधिकारी दिलीप सिंह ने जोर दिया कि न तो 03 दिसंबर 2022 और न ही 19 मार्च 2023 के समझौतों का पूर्ण क्रियान्वयन हुआ है, जिससे पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में गहरा असंतोष और निराशा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के बिजली कर्मी माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व और निर्देशों पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों का सामना करने के बावजूद, वे भीषण गर्मी में प्रदेश की जनता को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। पदाधिकारी सूरज प्रजापति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि वह अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने और औद्योगिक सौहार्द कायम रखने के लिए मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से वापस ले। साथ ही, 03 दिसंबर 2022 और 19 मार्च 2023 के समझौतों के सभी बिंदुओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि समझौतों का सम्मान और कर्मचारियों की जायज समस्याओं का समाधान ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों और प्रदेश की बेहतर विद्युत व्यवस्था की आधारशिला है। इसी क्रम में, आज संत कबीर नगर में सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, दिलीप सिंह, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद, नारायण चंद्र चौरसिया, सूरज प्रजापति, संजय यादव, विजय कुमार, अशोक कुमार, रंजन कुमार, संतोष गुप्ता, आर्यन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, रमेश प्रजापति, प्रिंस गुप्ता, रितेश कुमार समेत अन्य विद्युत कर्मी विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे।1
- आकाशवाणी की ओर से 8 जून, 2026 को सोमवार के दिन एक विशेष आह्वान जारी किया गया है। इस घोषणा के अनुसार, इस शुभ दिन पर सभी भक्तों से भगवान शिव जी और उनके संपूर्ण परिवार की एक साथ ऑनलाइन आरती करने का आग्रह किया गया है। इस दौरान उनका वंदन करने, श्रवण करने और कीर्तन करने का निमंत्रण भी दिया गया है।1
- संतकबीरनगर जिले के थाना महुली क्षेत्र से ग्राम मुखलिसपुर के प्रधान पति श्यामसुन्दर उर्फ बिरेन्द्र कुमार प्रजापति पिछले चार दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता हैं। उनकी पत्नी और ग्राम प्रधान सविता प्रजापति ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपने पति की तलाश कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, श्यामसुन्दर उर्फ बिरेन्द्र कुमार प्रजापति बीते 3 जून 2026 की शाम करीब 6 बजे ट्रेन पकड़ने के लिए अपने घर से निकले थे। इसके बाद 4 जून को लगभग 12 बजे फोन पर उनकी बातचीत हुई, लेकिन उस संपर्क के बाद से उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और तब से उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है। परिजनों का कहना है कि वे बीते चार दिनों से लगातार श्यामसुन्दर की खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिवार अनहोनी की आशंका से बेहद परेशान है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। ग्राम प्रधान सविता प्रजापति ने पुलिस अधीक्षक से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है, क्योंकि अब परिवार की सभी उम्मीदें पुलिस की जांच और खोजबीन पर टिकी हुई हैं।1
- बहुत ही सुंदर और बहुत ही अच्छे देसी जुगाड़ का आनंद लिया गया है, जो बेहद आकर्षक और उत्कृष्ट अनुभव रहा।1
- राष्ट्रवादी पार्टी द्वारा जल्द ही 'मुख्य क्रिएटर सम्मान' प्रदान किया जाएगा।1
- संतकबीरनगर जिले के दुधारा थाना क्षेत्र के पचपोखरिया गांव में एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित अफजलुर्रहमान, जो स्वर्गीय अब्दुल करीम के पुत्र हैं, ने आरोप लगाया है कि गाँव के ही बाबूजना पुत्र यार मोहम्मद के खिलाफ उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 की धारा 3 के तहत 30 मार्च 2026 को एक आदेश पारित किया गया था। आरोप के अनुसार, बाबूजना कथित तौर पर इस आदेश का पालन नहीं कर रहा है और लगातार गाँव में घूम रहा है, जबकि वह रात में अपने घर पर निवास करता है और दिन में खुलेआम घूमता है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के कारण आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रार्थना पत्र में यह भी बताया गया है कि आरोपी स्वयं को प्रभावशाली बताकर लोगों के बीच शासन-प्रशासन को चुनौती देने जैसी बातें करता है। पीड़ित ने इस स्थिति को समाज के लिए खतरा बताते हुए पुलिस प्रशासन से इस आदेश का अनुपालन कराने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।1