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jagdirsh jagdirsh

5 hrs ago
user_Jagdish Banjara
Jagdish Banjara
सीकर ग्रामीण, सीकर, राजस्थान•
5 hrs ago

jagdirsh jagdirsh

More news from राजस्थान and nearby areas
  • jagdirsh
    1
    jagdirsh
    user_Jagdish Banjara
    Jagdish Banjara
    सीकर ग्रामीण, सीकर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Post by @nilesh Verma-1997
    1
    Post by @nilesh Verma-1997
    user_@nilesh Verma-1997
    @nilesh Verma-1997
    Sikar, Rajasthan•
    14 hrs ago
  • Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    1
    Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    user_RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर
    Sikar, Rajasthan•
    22 hrs ago
  • Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    1
    Post by Pandit Munna Lal Bhargav
    user_Pandit Munna Lal Bhargav
    Pandit Munna Lal Bhargav
    Astrologer धोद, सीकर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • झुंझुनूं जिले में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। मिली जानकारी के अनुसार 27 मार्च से 30 मार्च तक आंधी-तूफान के साथ बारिश व ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई। वहीं पिलानी कस्बे में गुरुवार देर शाम अचानक आए अंधड़ से विवाह समारोह में लगा एक टेंट उखड़ गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।बताया जा रहा है कि तेज अंधड़ से टेंट वाले को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
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    झुंझुनूं जिले में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। मिली जानकारी के अनुसार  27 मार्च से 30 मार्च तक आंधी-तूफान के साथ बारिश व ओले गिरने की चेतावनी जारी की गई। वहीं पिलानी कस्बे में गुरुवार देर शाम अचानक आए अंधड़ से विवाह समारोह में लगा एक टेंट उखड़ गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।बताया जा रहा है कि तेज अंधड़ से टेंट वाले को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • राम नवमी पर झुंझुनूं में परंपरा और शौर्य का संगम: अखाड़ों की भव्य शोभायात्रा में दिखी भारतीय युद्धकला की झलक झुंझुनूं। राम नवमी के पावन पर्व पर झुंझुनूं शहर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और शौर्य प्रदर्शन के अद्भुत संगम का साक्षी बना। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा और पारंपरिक अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत शस्त्र-कला प्रदर्शन ने न केवल श्रद्धालुओं को रोमांचित किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं को भी पुनः सजीव कर दिया। सुबह से लेकर देर शाम तक पूरा शहर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंजता रहा और वातावरण भक्तिमय उत्साह से सराबोर दिखाई दिया। राम नवमी के अवसर पर आयोजित इस भव्य आयोजन की तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू हो गई थीं। शहर के विभिन्न अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर शोभायात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं कीं। निर्धारित समय पर विभिन्न अखाड़ों के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर एकत्रित हुए। उनके हाथों में तलवार, लाठी, भाला, फरसा और अन्य पारंपरिक शस्त्र भारतीय युद्धकला की गौरवशाली परंपरा की याद दिला रहे थे। अखाड़ों ने दिखाया शौर्य और अनुशासन शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण शहर के पारंपरिक अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत शस्त्र-कला प्रदर्शन रहा। कलाकारों ने तलवारबाजी, लाठी संचालन, युद्धक संतुलन और समूह समन्वय की शानदार प्रस्तुति दी। युवाओं ने तेज गति, सटीक नियंत्रण और अनुशासित प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई स्थानों पर कलाकारों ने जोड़ी बनाकर युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया, जिसमें पारंपरिक तकनीकों और आत्मरक्षा कौशल की झलक देखने को मिली। अखाड़ों के वरिष्ठ उस्तादों ने बताया कि यह परंपरा केवल प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मसंयम, शारीरिक दक्षता और मानसिक संतुलन का अभ्यास है। उन्होंने कहा कि अखाड़े भारतीय संस्कृति में युवाओं को अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम की शिक्षा देने का माध्यम रहे हैं। धार्मिक झांकियों ने बढ़ाई शोभा शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान के सजीव स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सुसज्जित रथों पर सवार इन झांकियों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों और युवाओं में इन झांकियों को लेकर खास उत्साह देखा गया। इसके साथ ही श्री साई बाबा की सजीव झांकी ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। झांकियों को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जिससे शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी बन गया। धार्मिक गीतों और भजनों की धुन पर श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल होते रहे। शहरभर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब शोभायात्रा निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए शहर के प्रमुख बाजारों और चौक-चौराहों से निकली। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु बड़ी संख्या में खड़े होकर यात्रा का स्वागत करते दिखाई दिए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने पुष्प वर्षा कर भगवान श्रीराम की झांकियों का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संस्थानों द्वारा स्वागत द्वार बनाए गए थे। श्रद्धालुओं के लिए जलपान, शीतल पेय और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई थी। स्वयंसेवकों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने और यात्रा को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवाओं की सक्रिय भागीदारी आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा में शामिल हुए और अखाड़ों के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कई युवाओं ने महीनों तक अभ्यास कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। दर्शकों ने तालियों और जयघोष के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजकों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और उनमें आत्मविश्वास तथा सामूहिकता की भावना विकसित करते हैं। आधुनिक जीवनशैली के बीच पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। भक्तिमय माहौल और सांस्कृतिक एकता पूरे आयोजन के दौरान शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक नारों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों ने मिलकर आयोजन में भाग लिया, जिससे सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की भावना भी मजबूत होती नजर आई। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि राम नवमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने का अवसर भी है। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भव्य शोभायात्रा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। यात्रा मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। सीसीटीवी निगरानी और स्वयंसेवकों की सहायता से पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने समय-समय पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और आयोजकों के साथ समन्वय बनाए रखा। सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण कार्यक्रम बिना किसी अव्यवस्था के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। परंपरा के संरक्षण का संदेश आयोजकों ने बताया कि अखाड़ों की परंपरा भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इन अखाड़ों के माध्यम से युवाओं को शारीरिक फिटनेस, आत्मरक्षा और अनुशासन की शिक्षा मिलती है। राम नवमी जैसे धार्मिक अवसर इन परंपराओं को समाज के सामने प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय युद्धकला और सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखा जाएगा। समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग इस दिशा में प्रेरणादायक रहा। शहरवासियों में दिखा उत्साह शहरवासियों ने आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बताया। कई परिवार सुबह से ही शोभायात्रा देखने के लिए मार्गों पर पहुंच गए थे। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया, जो झांकियों और शस्त्र-कला प्रदर्शन को उत्सुकता से देख रहे थे। व्यापारियों ने भी दुकानों को सजाकर और प्रसाद वितरण कर उत्सव में सहभागिता निभाई। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा, जिससे राम नवमी का महत्व और भी बढ़ गया। धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक राम नवमी पर निकली इस भव्य शोभायात्रा ने झुंझुनूं की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा प्रदान की। अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन, धार्मिक झांकियों की भव्यता और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि पारंपरिक आयोजन आज भी समाज में उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता की भावना को भी नई दिशा प्रदान की। राम नवमी के अवसर पर आयोजित यह शोभायात्रा शहरवासियों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रहेगी और आने वाले वर्षों में भी इसी उत्साह के साथ आयोजित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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    राम नवमी पर झुंझुनूं में परंपरा और शौर्य का संगम: अखाड़ों की भव्य शोभायात्रा में दिखी भारतीय युद्धकला की झलक
झुंझुनूं। राम नवमी के पावन पर्व पर झुंझुनूं शहर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और शौर्य प्रदर्शन के अद्भुत संगम का साक्षी बना। शहर में निकली भव्य शोभायात्रा और पारंपरिक अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत शस्त्र-कला प्रदर्शन ने न केवल श्रद्धालुओं को रोमांचित किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराओं को भी पुनः सजीव कर दिया। सुबह से लेकर देर शाम तक पूरा शहर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंजता रहा और वातावरण भक्तिमय उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।
राम नवमी के अवसर पर आयोजित इस भव्य आयोजन की तैयारियां कई दिनों पहले से शुरू हो गई थीं। शहर के विभिन्न अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर शोभायात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं कीं। निर्धारित समय पर विभिन्न अखाड़ों के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर एकत्रित हुए। उनके हाथों में तलवार, लाठी, भाला, फरसा और अन्य पारंपरिक शस्त्र भारतीय युद्धकला की गौरवशाली परंपरा की याद दिला रहे थे।
अखाड़ों ने दिखाया शौर्य और अनुशासन
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण शहर के पारंपरिक अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत शस्त्र-कला प्रदर्शन रहा। कलाकारों ने तलवारबाजी, लाठी संचालन, युद्धक संतुलन और समूह समन्वय की शानदार प्रस्तुति दी। युवाओं ने तेज गति, सटीक नियंत्रण और अनुशासित प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई स्थानों पर कलाकारों ने जोड़ी बनाकर युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया, जिसमें पारंपरिक तकनीकों और आत्मरक्षा कौशल की झलक देखने को मिली।
अखाड़ों के वरिष्ठ उस्तादों ने बताया कि यह परंपरा केवल प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मसंयम, शारीरिक दक्षता और मानसिक संतुलन का अभ्यास है। उन्होंने कहा कि अखाड़े भारतीय संस्कृति में युवाओं को अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम की शिक्षा देने का माध्यम रहे हैं।
धार्मिक झांकियों ने बढ़ाई शोभा
शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान के सजीव स्वरूप विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सुसज्जित रथों पर सवार इन झांकियों को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों और युवाओं में इन झांकियों को लेकर खास उत्साह देखा गया। इसके साथ ही श्री साई बाबा की सजीव झांकी ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
झांकियों को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जिससे शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी बन गया। धार्मिक गीतों और भजनों की धुन पर श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल होते रहे।
शहरभर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
शोभायात्रा निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए शहर के प्रमुख बाजारों और चौक-चौराहों से निकली। मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु बड़ी संख्या में खड़े होकर यात्रा का स्वागत करते दिखाई दिए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने पुष्प वर्षा कर भगवान श्रीराम की झांकियों का अभिनंदन किया।
कई स्थानों पर सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संस्थानों द्वारा स्वागत द्वार बनाए गए थे। श्रद्धालुओं के लिए जलपान, शीतल पेय और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई थी। स्वयंसेवकों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने और यात्रा को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवाओं की सक्रिय भागीदारी
आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा में शामिल हुए और अखाड़ों के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कई युवाओं ने महीनों तक अभ्यास कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। दर्शकों ने तालियों और जयघोष के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
आयोजकों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और उनमें आत्मविश्वास तथा सामूहिकता की भावना विकसित करते हैं। आधुनिक जीवनशैली के बीच पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं।
भक्तिमय माहौल और सांस्कृतिक एकता
पूरे आयोजन के दौरान शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक नारों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों ने मिलकर आयोजन में भाग लिया, जिससे सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की भावना भी मजबूत होती नजर आई।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि राम नवमी का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने का अवसर भी है। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं
भव्य शोभायात्रा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। यात्रा मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। सीसीटीवी निगरानी और स्वयंसेवकों की सहायता से पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने समय-समय पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और आयोजकों के साथ समन्वय बनाए रखा। सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण कार्यक्रम बिना किसी अव्यवस्था के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
परंपरा के संरक्षण का संदेश
आयोजकों ने बताया कि अखाड़ों की परंपरा भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इन अखाड़ों के माध्यम से युवाओं को शारीरिक फिटनेस, आत्मरक्षा और अनुशासन की शिक्षा मिलती है। राम नवमी जैसे धार्मिक अवसर इन परंपराओं को समाज के सामने प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय युद्धकला और सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखा जाएगा। समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग इस दिशा में प्रेरणादायक रहा।
शहरवासियों में दिखा उत्साह
शहरवासियों ने आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बताया। कई परिवार सुबह से ही शोभायात्रा देखने के लिए मार्गों पर पहुंच गए थे। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया, जो झांकियों और शस्त्र-कला प्रदर्शन को उत्सुकता से देख रहे थे।
व्यापारियों ने भी दुकानों को सजाकर और प्रसाद वितरण कर उत्सव में सहभागिता निभाई। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा, जिससे राम नवमी का महत्व और भी बढ़ गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक
राम नवमी पर निकली इस भव्य शोभायात्रा ने झुंझुनूं की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा प्रदान की। अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन, धार्मिक झांकियों की भव्यता और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि पारंपरिक आयोजन आज भी समाज में उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता की भावना को भी नई दिशा प्रदान की। राम नवमी के अवसर पर आयोजित यह शोभायात्रा शहरवासियों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रहेगी और आने वाले वर्षों में भी इसी उत्साह के साथ आयोजित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
    user_Jjn good news ( Rakesh Agrawal
    Jjn good news ( Rakesh Agrawal
    Newsagent झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • Post by Shyamsunder prajapat
    4
    Post by Shyamsunder prajapat
    user_Shyamsunder prajapat
    Shyamsunder prajapat
    नावा, नागौर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • Post by @nilesh Verma-1997
    1
    Post by @nilesh Verma-1997
    user_@nilesh Verma-1997
    @nilesh Verma-1997
    Sikar, Rajasthan•
    14 hrs ago
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