कार्रवाई के अभाव में बेखौफ माफिया! जारी प्रखंड में अवैध खनन और ईंट भट्ठों का कारोबार तेज कार्रवाई के अभाव में बेखौफ माफिया! जारी प्रखंड में अवैध खनन और ईंट भट्ठों का कारोबार तेज अट्ठाईस जनवरी दो हजार छब्बीस को अवैध खनन और ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद भी जारी प्रखंड में स्थिति जस की तस बनी हुई है। उल्टा, प्रशासन की चुप्पी ने अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। न जांच, न छापेमारी और न ही किसी भट्ठे पर सील की कार्रवाई—इससे साफ है कि जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता का सीधा लाभ उठाया जा रहा है। जानकारी देते हुए शाम छह बजे स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण माफियाओं का मनोबल बढ़ गया है। उनका कहना है कि पहले जहां सीमित स्तर पर खुदाई हो रही थी, अब खुलेआम बड़े पैमाने पर मिट्टी की कटाई और ट्रैक्टरों से ढुलाई की जा रही है। भट्ठों का संचालन दिन-रात जारी है और धुआं लगातार वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी को तेजी से हटाया जा रहा है, जिससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही सरकार को राजस्व की हानि भी हो रही है। सवाल यह है कि जब मामला सार्वजनिक रूप से उजागर हो चुका है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जनआक्रोश का इंतजार कर रहा है? या फिर अवैध खनन पर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? यदि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकराल हो सकती है। जारी प्रखंड की जनता अब सीधे जवाब की मांग कर रही है—अवैध खनन और ईंट भट्ठों पर कार्रवाई कब होगी? दोषियों पर शिकंजा कब कसेगा? प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है, और जवाब देना अब अनिवार्य हो गया है।
कार्रवाई के अभाव में बेखौफ माफिया! जारी प्रखंड में अवैध खनन और ईंट भट्ठों का कारोबार तेज कार्रवाई के अभाव में बेखौफ माफिया! जारी प्रखंड में अवैध खनन और ईंट भट्ठों का कारोबार तेज अट्ठाईस जनवरी दो हजार छब्बीस को अवैध खनन और ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद भी जारी प्रखंड में स्थिति जस की तस बनी हुई है। उल्टा, प्रशासन की चुप्पी ने अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। न जांच, न छापेमारी और न ही किसी भट्ठे पर सील की कार्रवाई—इससे साफ है कि जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता का सीधा लाभ उठाया जा रहा है। जानकारी देते हुए शाम छह बजे स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण माफियाओं का मनोबल बढ़ गया है। उनका कहना है कि पहले जहां सीमित स्तर पर खुदाई हो रही थी, अब खुलेआम बड़े पैमाने पर मिट्टी की कटाई और ट्रैक्टरों से ढुलाई की जा रही है। भट्ठों का संचालन दिन-रात जारी है और धुआं लगातार वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी को तेजी से हटाया जा रहा है, जिससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही सरकार को राजस्व की हानि भी हो रही है। सवाल यह है कि जब मामला सार्वजनिक रूप से उजागर हो चुका है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जनआक्रोश का इंतजार कर रहा है? या फिर अवैध खनन पर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? यदि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकराल हो सकती है। जारी प्रखंड की जनता अब सीधे जवाब की मांग कर रही है—अवैध खनन और ईंट भट्ठों पर कार्रवाई कब होगी? दोषियों पर शिकंजा कब कसेगा? प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है, और जवाब देना अब अनिवार्य हो गया है।
- शहर के जशपुर रोड स्थित रैन हॉस्पिटल में एक मरीज को जबरन सवा लाख भुगतान का दबाव बनाकर तीन दिनों तक बंधक बनाए रखने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जाता है तीर्रा गुमला निवासी सोमा उरांव एक सड़क हादसे में घायल हो गया था, जिसे रिम्स में भर्ती कराया था, कई हॉस्पिटल में इलाज करने के बाद भी सुधार नहीं हुआ। इसपर सोमा का दोस्त अमर उसे गुमला स्थित रैन अस्पताल लेकर आया और आईसीयू में भर्ती करा दिया। परिजनों का आरोप है कि आईसीयू में भर्ती करने लायक मरीज की स्थिति नहीं थी लेकिन जानबूझकर तीन दिनों तक आईसीयू में रखा गया और कहा गया कि दिल्ली से डॉक्टर बुलाया गया है इसके अलावा महंगे मेडिसिन भी लगे हैं, सवा लाख भुगतान करना होगा। इसके बाद पत्नी लक्ष्मी ने डिस्चार्ज की मांग की, तब अस्पताल का खेल शुरू हुआ। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि सवा लाख रुपए जमा किए बिना मरीज को नहीं छोड़ा जाएगा। गरीब पत्नी हाथ जोड़कर रोती बिलखती रही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन में नहीं सुना। इसके बाद पूरे मामले की सूचना पर डीसी ने सिविल सर्जन को जांच का आदेश दिया। सीएस ने पूरे मामले की जांच की और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा कि मरीज का दिल्ली एम्स में इलाज कराया जाएगा। बाइट, लक्ष्मी देवी, पीड़िता की पत्नी4
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- रांची में डॉगी लवर पाया गया अब देख सकते हैं डॉगी नीचे भाग गया था काफी दूर से वह लोग वापस आए उसे ले जाने के लिए काफी देर नखरा करने के बाद डॉगी गाड़ी पर बैठकर गया1
- सिसई प्रखंड के बसिया रोड में धूम धाम के द्वारा होलिका दहन कर फागुन काटा गया। इस अवसर पर लोगो ने माथे पर राख का तिलक लगाया और फगुआ गीत में झूमे1
- भाजपा समर्थित प्रत्याशी अनिल उरांव जीत के बाद बोले मेरा पहला प्राथमिकता होगा बांग्लादेशी घुसपैठियों...#jharkhandupdates #viralnews #viralnewsupdate #NewsUpdate #bjpnews #jharkhandupdates #bjp #NagarNigam1
- जशपुर टाइम्स की टीम ने भाजयुमो जिलाध्यक्ष विजय आदित्य सिंह जूदेव से कांसाबेल आगमन के दौरान खास बातचीत की। इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने संगठन की आगामी रणनीति, युवाओं की भूमिका, जिले के विकास और अपनी प्राथमिकताओं पर खुलकर विचार साझा किए।1
- *नारे 'पढ़ेगा इंडिया' के, काम 'मजदूरी' के चैनपुर के स्कूलों में पढ़ाई छोड़ मिड-डे मील बना रहे मासूम* चैनपुर: सरकार एक तरफ 'पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया' जैसे नारों पर करोड़ों रुपये खर्च कर शिक्षा का स्तर सुधारने का दावा कर रही है, वहीं चैनपुर प्रखंड में धरातल पर हकीकत बेहद शर्मनाक है। यहाँ के दो विद्यालयों राजकीय उत्क्रमिक उच्च विद्यालय भठौली और राजकीयकृत मध्य विद्यालय सिलफरी में शिक्षा के अधिकार की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रसोइया संयोजिका का हड़ताल जाते ही। बच्चों से खाना बनवाया जा रहा है । *कलम छोड़ चूल्हा फूंक रहे नौनिहा* ताजा मामले के अनुसार, रसोइया संयोजिका के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय मासूम बच्चों को ही रसोई के काम में झोंक दिया है। जिस उम्र में बच्चों को क्लासरूम में होना चाहिए, वहां वे धुएं के बीच मिड-डे मील तैयार करते नजर आए। *मीडिया को देख मची अफरा-तफरी, सच छिपाने की कोशिश* जब मीडिया की टीम विद्यालय पहुंची, तो वहां का नजारा देख प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। कैमरे को देखते ही आनन-फानन में बच्चों को रसोई घर से बाहर निकाला गया। सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों ने बच्चों को मीडिया के सामने मुँह न खोलने की सख्त हिदायत भी दी, जो स्पष्ट रूप से मामले को रफा-दफा करने की कोशिश दर्शाता है।हैरानी की बात यह है कि विद्यालय प्रशासन अपनी गलती मानने के बजाय इसे 'मदद' का नाम दे रहा है।म.वि. सिलफरी शिक्षिका नीलप्रभा इनका कहना है कि बच्चों से खाना नहीं बनवाया जा रहा था, बल्कि केवल "सहायता" ली जा रही थी।भठौली की शिक्षिका का तर्क था कि ब्रेक के दौरान बच्चों को केवल कुछ काम के लिए बुलाया गया था।1
- Post by AAM JANATA1
- बांस काटने को लेकर हुआ विवाद जांच के विषय, व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोप को हमारा चैनल पुष्टि नहीं करता हैं जांच का विषय है #shotrs #trendingreels #viralshorts #viralreelsシ #jharkhand1