प्रभु श्रीराम के मंदिर में हुई कथित 'डाकाजनी' और 'चढ़ावा चोरी' की घटना के बाद, सभी देशवासियों और राम भक्तों से अयोध्यावासियों को बदनाम न करने की अपील की गई है। पोस्ट के अनुसार, अयोध्या मर्यादा और आस्था की पावन नगरी है, और यहाँ के निवासियों ने कभी प्रभु श्रीराम जी के सम्मान के विपरीत कोई कार्य नहीं किया है। इसलिए, यह स्पष्ट कहा गया है कि आरोप केवल उन्हीं लोगों पर लगाए जाएं जिन्होंने मंदिर में रुपये और आभूषण चुराए हैं, और पूरी अयोध्या पर आरोप लगाना बंद किया जाए। लेखक ने आरोप लगाया है कि इस 'डकैती' के लिए ट्रस्ट में बैठे 'जिम्मेदार लोग' ही दोषी हैं, जिनके 'संरक्षण' में यह घटना हुई। उन पर 'गुर्गों की भर्ती' करने और राम मंदिर का पैसा व चढ़ावा चोरी करने का भी आरोप है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये 'ट्रस्ट में बैठे हुए डकैत और चोर' ही अपमानित किए जाने चाहिए, न कि सम्पूर्ण अयोध्या और उसके निवासी। इस दुखद घटना से अयोध्यावासी स्वयं बहुत दुखी और परेशान हैं, और इसे 'ट्रस्टियों और उनके चमचों' द्वारा 'चढ़ावा चोरी का काला अध्याय' बताया गया है, जिसने 'अयोध्या की आत्मा को पीड़ा' पहुँचाई है। प्रभु श्रीराम जी से यही विनती है कि यह पूरा घटनाक्रम परत दर परत खुले और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की 'बिलबिलाहट' पर टिप्पणी करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि उन्हें इसलिए 'पेट में दर्द' हो रहा है क्योंकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी ने इस 'चढ़ावा चोरी' और 'आभूषण की डकैती' को उजागर किया है। इन 'अंधभक्त कंपनी' को 'आहत' और 'अनर्गल प्रलाप' करते हुए बताया गया है, लेकिन जोर देकर कहा गया है कि इस 'अनर्गल प्रलाप' से सच दबने वाला नहीं है। दावा किया गया है कि 'पूरे 140 करोड़ भारतीय' जान चुके हैं कि चोरी किसने की और किसने कराई। इसे 'प्रभु श्रीराम जी की माया और आशीर्वाद' बताया गया है कि चढ़ावा चोरी को खोलने का सौभाग्य श्री अखिलेश यादव जी को मिला है, और उन पर प्रभु श्रीराम जी की कृपा है। पोस्ट का निष्कर्ष यह है कि अयोध्या पवित्र है और अयोध्यावासी निर्दोष हैं, जबकि असली दोषी वे हैं जिन्होंने 'आस्था के मंदिर को अपनी लूट का अड्डा बनाने का दुस्साहस किया है'।
प्रभु श्रीराम के मंदिर में हुई कथित 'डाकाजनी' और 'चढ़ावा चोरी' की घटना के बाद, सभी देशवासियों और राम भक्तों से अयोध्यावासियों को बदनाम न करने की अपील की गई है। पोस्ट के अनुसार, अयोध्या मर्यादा और आस्था की पावन नगरी है, और यहाँ के निवासियों ने कभी प्रभु श्रीराम जी के सम्मान के विपरीत कोई कार्य नहीं किया है। इसलिए, यह स्पष्ट कहा गया है कि आरोप केवल उन्हीं लोगों पर लगाए जाएं जिन्होंने मंदिर में रुपये और आभूषण चुराए हैं, और पूरी अयोध्या पर आरोप लगाना बंद किया जाए। लेखक ने आरोप लगाया है कि इस 'डकैती' के लिए ट्रस्ट में बैठे 'जिम्मेदार लोग' ही दोषी हैं, जिनके 'संरक्षण' में यह घटना हुई। उन पर 'गुर्गों की भर्ती' करने और राम मंदिर का पैसा व चढ़ावा चोरी करने का भी आरोप है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये 'ट्रस्ट में बैठे हुए डकैत और चोर' ही अपमानित किए जाने चाहिए, न कि सम्पूर्ण अयोध्या और उसके निवासी। इस दुखद घटना से अयोध्यावासी स्वयं बहुत दुखी और परेशान हैं, और इसे 'ट्रस्टियों और उनके चमचों' द्वारा 'चढ़ावा चोरी का काला अध्याय' बताया गया है, जिसने 'अयोध्या की आत्मा को पीड़ा' पहुँचाई है। प्रभु श्रीराम जी से यही विनती है कि यह पूरा घटनाक्रम परत दर परत खुले और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की 'बिलबिलाहट' पर टिप्पणी करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि उन्हें इसलिए 'पेट में दर्द' हो रहा है क्योंकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी ने इस 'चढ़ावा चोरी' और 'आभूषण की डकैती' को उजागर किया है। इन 'अंधभक्त कंपनी' को 'आहत' और 'अनर्गल प्रलाप' करते हुए बताया गया है, लेकिन जोर देकर कहा गया है कि इस 'अनर्गल प्रलाप' से सच दबने वाला नहीं है। दावा किया गया है कि 'पूरे 140 करोड़ भारतीय' जान चुके हैं कि चोरी किसने की और किसने कराई। इसे 'प्रभु श्रीराम जी की माया और आशीर्वाद' बताया गया है कि चढ़ावा चोरी को खोलने का सौभाग्य श्री अखिलेश यादव जी को मिला है, और उन पर प्रभु श्रीराम जी की कृपा है। पोस्ट का निष्कर्ष यह है कि अयोध्या पवित्र है और अयोध्यावासी निर्दोष हैं, जबकि असली दोषी वे हैं जिन्होंने 'आस्था के मंदिर को अपनी लूट का अड्डा बनाने का दुस्साहस किया है'।
- आज 5 जुलाई 2026 को बाराबंकी में शाम दोपहर 5:00 बजे के लगभग रिमझिम बारिश हुई, जिससे वहाँ का मौसम सुहाना हो गया। हालांकि, यह सुहाना मौसम बना रहेगा या अगले दिन विकराल धूप और गर्मी देखने को मिल सकती है, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस मौसम रिपोर्ट को लखनऊ टीम और आज सुबह टाइम्स टीम लखनऊ के लिए लाल चंद सोनी ने कवर किया है।1
- अयोध्या में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संत समाज, विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में एकजुट होकर सामने आया है। संत समाज ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराना गलत है, और उन्होंने चंपत राय को सच्चा सनातनी बताते हुए उनका समर्थन किया है। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस मामले में बड़ा दावा किया है, जिसमें उन्होंने कॉल डिटेल्स का हवाला देते हुए कहा कि अखिलेश यादव और टिन्नू यादव के बीच 980 बार बातचीत हुई थी। परमहंस आचार्य ने विपक्ष पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि VHP, RSS और BJP निर्दोष हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि श्री राम मंदिर के मामलों में किसी भी प्रकार का सरकारी दखल नहीं होना चाहिए।1
- अयोध्या राम मंदिर में राम रतन धन की चोरी का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर पत्रकारों ने संत से तीखे सवाल किए। हालांकि, पत्रकारों के इन तीखे सवालों का संत के पास कोई जवाब नहीं था।1
- कई सीवर चैंबर ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रहे हैं, जिससे चारों ओर गंदा पानी फैल गया है। इस स्थिति के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- अयोध्या में श्रीराम मंदिर से चढ़ावे और आभूषणों की चोरी की घटना के बाद, इस पर हो रही टिप्पणियों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई है। अयोध्यावासियों ने स्पष्ट किया है कि अयोध्या मर्यादा, आस्था और प्रभु श्रीराम की पवित्र नगरी है, और उन्होंने कभी भी भगवान के सम्मान के विरुद्ध कार्य नहीं किया। देशवासियों और रामभक्तों से हाथ जोड़कर यह अपील की गई है कि वे अयोध्यावासियों को दोष न दें, बल्कि केवल उन लोगों पर आरोप लगाएं जिन्होंने मंदिर में चोरी की और रुपये व आभूषण चुराए, और पूरी अयोध्या को बदनाम करना बंद करें। प्रतिक्रिया में कहा गया है कि इस डकैती के लिए ट्रस्ट में बैठे लोग ही जिम्मेदार और दोषी हैं, जिनके संरक्षण में यह घटना हुई। आरोप लगाया गया है कि इन्हीं लोगों ने अपने व्यक्तियों की भर्ती कर चढ़ावा चुराया है, और उन्हें ही 'ट्रस्ट में बैठे डकैत और चोर' कहकर अपमानित किया जाना चाहिए। हालांकि, पूरी अयोध्या और उसके निवासियों पर किसी भी प्रकार की गलत टिप्पणी से बचने का आग्रह किया गया है। अयोध्यावासियों ने इस दुखद घटना पर गहरा दुख और परेशानी व्यक्त की है, उनका कहना है कि ट्रस्टियों और उनके 'चमचों' ने अयोध्या की पवित्र धरती पर चढ़ावा चोरी का काला अध्याय जोड़कर अयोध्या की आत्मा को पीड़ा पहुंचाई है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की गई है कि पूरा घटनाक्रम परत दर परत सामने आए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाजी के संबंध में कहा गया है कि कुछ लोग इस बात से परेशान हैं कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चढ़ावा चोरी का मामला उजागर किया है। 'अंधभक्त कंपनी' को आहत बताया गया है, जो अनर्गल प्रलाप कर रही है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे प्रलाप से सच्चाई दबने वाली नहीं है। दावा किया गया है कि 140 करोड़ भारतीय अब जान चुके हैं कि चोरी किसने की और किसने कराई, और इसे प्रभु श्रीराम की माया बताया गया है कि चोरी उजागर करने का सौभाग्य अखिलेश यादव को मिला। अंत में फिर से दोहराया गया है कि अयोध्या पवित्र है और अयोध्यावासी निर्दोष हैं। दोषी वे हैं जिन्होंने आस्था के मंदिर को लूट का अड्डा बनाने का दुस्साहस किया है।1
- आज महाराजगंज शहर में भारी बारिश और तेज़ हवाओं के कारण लोगों को परिवहन में काफी दिक्कतें और परेशानियाँ देखने को मिलीं।1
- अयोध्या के जिला अस्पताल में शासन का वह फरमान, जिसके तहत मेडिकल परीक्षण कंप्यूटर पर करने का आदेश दिया गया है, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के साथ-साथ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए भी बड़ी समस्या बन गया है। अस्पताल में न तो पर्याप्त कंप्यूटर हैं और न ही उन्हें संचालित करने के लिए ऑपरेटर, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सक की शिकायत पर आवश्यक व्यवस्था का आश्वासन दिया है, लेकिन फिलहाल एहतियाती तौर पर मेडिको लीगल प्रक्रिया संपादित की जा रही है। शासन ने पारदर्शिता और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लक्ष्य से अस्पताल की सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने की पहल की है। इसी क्रम में, पर्चा बनाने से लेकर जांच तक सब ऑनलाइन हो रहा है। अगले चरण में मेडिको लीगल को भी ऑनलाइन और डिजिटलाइज्ड करने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी ओपीडी को मिला मेडिको लीगल रजिस्टर जब्त कर लिया है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर राजेश सिंह के मौखिक आदेश पर यह रजिस्टर अलमारी में बंद कर दिया गया है, और चिकित्सकों को पुलिस मेडिकल परीक्षण, मुलजिम का ब्यौरा तथा चोटों (इंजरी) को कंप्यूटर पर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब इमरजेंसी ओपीडी में कंप्यूटर तो है, लेकिन कोई कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात नहीं है। इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे डॉक्टर आशुतोष प्रताप सिंह ने बताया कि कंप्यूटर और ऑपरेटर की अनुपस्थिति के कारण मेडिकल परीक्षण के लिए उन्हें इमरजेंसी से बाहर जाना पड़ रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि दोपहर लगभग 2:30 बजे कोतवाली नगर से पांच मुलजिमों को न्यायालय में पेश करने के लिए लाया गया था, जिनका मेडिकल परीक्षण और उसकी कार्रवाई कंप्यूटर पर दर्ज करने के लिए उन्हें अस्पताल प्रबंधक राजेंद्र तिवारी के पास जाना पड़ा। ऑपरेटर न होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लग गया, जिसके चलते इमरजेंसी ओपीडी में आने वाले अन्य मरीजों को इंतजार करना पड़ा। इस नई व्यवस्था से चिकित्सकों के सामने यह दुविधा खड़ी हो गई है कि वे मरीजों का उपचार करें या कंप्यूटर ऑपरेटर का काम संभालें। अधीक्षक डॉक्टर अजय चौधरी ने स्वीकार किया है कि यह समस्या जिला अस्पताल प्रशासन के संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी ओपीडी में दो चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाएगी और कंप्यूटर ऑपरेटर की तैनाती के लिए पत्राचार किया जाएगा। अस्थायी समाधान के तौर पर, अभी वार्ड बॉय से कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य लेते हुए पर्चे बनवाए जा रहे हैं।1
- आज लखनऊ प्रेस क्लब में राष्ट्रीय स्वर्णकार महासभा ने एक विशेष समारोह 'तोहफा' का आयोजन किया, जिसमें कुल 41 मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चला। इस खास आयोजन की रिपोर्टिंग हजरतगंज स्थित आज सुबह टाइम टीम ने की, जिसमें लाल चंद सोनी ने अपनी रिपोर्टिंग प्रस्तुत की।1