logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

रिकॉर्ड समय में बहाल हुए पांगी के तमाम संपर्क मार्ग, विभागों और प्रशासन की मुस्तैदी से लौटी रफ्तार हाल ही में हुई भारी बर्फबारी ने जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया था। लगातार कई घंटों तक हुई बर्फबारी के चलते मुख्य मार्गों सहित आंतरिक संपर्क सड़कें मोटी बर्फ की चादर में दब गई थीं। परिणामस्वरूप आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और घाटी के विभिन्न गांव एक-दूसरे से कट गए थे। लोगों को आवश्यक वस्तुओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बर्फबारी के बाद स्थिति ऐसी बन गई थी कि कई ग्रामीणों को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। मरीजों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण थे। सार्वजनिक परिवहन सेवा भी पूरी तरह बंद हो गई थी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ गई और लोगों पर आर्थिक बोझ भी पड़ा। हालांकि इस बार लोक निर्माण विभाग (PWD) और सीमा सड़क संगठन (BRO) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पहले से ही व्यापक तैयारी कर रखी थी। मौसम विभाग की संभावित बर्फबारी की चेतावनी के बाद मशीनरी, स्नो कटर, जेसीबी और आवश्यक उपकरणों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात कर दिया गया था। कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया था ताकि बर्फबारी रुकते ही तुरंत कार्रवाई शुरू की जा सके। जैसे ही मौसम साफ हुआ, विभागों की टीमें युद्धस्तर पर सड़कों से बर्फ हटाने में जुट गईं। मुख्य मार्गों को प्राथमिकता देते हुए कार्य आरंभ किया गया, ताकि घाटी का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से शीघ्र बहाल किया जा सके। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से आंतरिक संपर्क मार्गों पर भी कार्य किया गया। कई स्थानों पर बर्फ की मोटी परत और फिसलन के कारण मशीनरी संचालन में कठिनाई आई, लेकिन कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहकर कार्य जारी रखा। बताया जा रहा है कि दिन-रात की अथक मेहनत के बाद रिकॉर्ड समय में पांगी के लगभग सभी मुख्य एवं संपर्क मार्गों को बहाल कर दिया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पांगी का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र और अत्यधिक ठंड कार्य को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। उपमंडल प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम के दौरान चौबीस घंटे सक्रिय रहा। अधिकारियों द्वारा लगातार विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की जाती रही। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और जल शक्ति विभाग के साथ समन्वय बनाए रखा गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मार्ग बहाली के साथ-साथ आवश्यक सेवाएं भी जल्द से जल्द सामान्य हो सकें। मार्ग बहाल होते ही घाटी में जनजीवन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से होने लगी है, स्कूलों और कार्यालयों में उपस्थिति बढ़ने लगी है और लोगों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है। बस सेवा को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे आम जनता को और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग, बीआरओ और पांगी प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार विभागों ने जिस तत्परता, समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इसी प्रकार की पूर्व तैयारी और सक्रियता से काम किया जाएगा, ताकि बर्फबारी जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद आम जनता को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। कुल मिलाकर, कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद विभागों और प्रशासन की संयुक्त मेहनत ने यह साबित कर दिया कि बेहतर योजना, त्वरित निर्णय और समर्पित टीमवर्क से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। पांगी घाटी के लोगों के लिए यह राहत और विश्वास का क्षण है, जिसने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा मजबूत किया है।

1 day ago
user_PANGI NEWS 24
PANGI NEWS 24
Social Media Manager Pangi, Chamba•
1 day ago

रिकॉर्ड समय में बहाल हुए पांगी के तमाम संपर्क मार्ग, विभागों और प्रशासन की मुस्तैदी से लौटी रफ्तार हाल ही में हुई भारी बर्फबारी ने जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया था। लगातार कई घंटों तक हुई बर्फबारी के चलते मुख्य मार्गों सहित आंतरिक संपर्क सड़कें मोटी बर्फ की चादर में दब गई थीं। परिणामस्वरूप आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और घाटी के विभिन्न गांव एक-दूसरे से कट गए थे। लोगों को आवश्यक वस्तुओं, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बर्फबारी के बाद स्थिति ऐसी बन गई थी कि कई ग्रामीणों को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। मरीजों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण थे। सार्वजनिक परिवहन सेवा भी पूरी तरह बंद हो गई थी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ गई और लोगों पर आर्थिक बोझ भी पड़ा। हालांकि इस बार लोक निर्माण विभाग (PWD) और सीमा सड़क संगठन (BRO) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए पहले से ही व्यापक तैयारी कर रखी थी। मौसम विभाग की संभावित बर्फबारी की चेतावनी के बाद मशीनरी, स्नो कटर, जेसीबी और आवश्यक उपकरणों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात कर दिया गया था। कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया था ताकि बर्फबारी रुकते ही तुरंत कार्रवाई शुरू की जा सके। जैसे ही मौसम साफ हुआ, विभागों की टीमें युद्धस्तर पर सड़कों से बर्फ हटाने में जुट गईं। मुख्य मार्गों को प्राथमिकता देते हुए कार्य आरंभ किया गया, ताकि घाटी का संपर्क बाहरी क्षेत्रों से शीघ्र बहाल किया जा सके। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से आंतरिक संपर्क मार्गों पर भी कार्य किया गया। कई स्थानों पर बर्फ की मोटी परत और फिसलन के कारण मशीनरी संचालन में कठिनाई आई, लेकिन कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहकर कार्य जारी रखा। बताया जा रहा है कि दिन-रात की अथक मेहनत के बाद रिकॉर्ड समय में पांगी के लगभग सभी मुख्य एवं संपर्क मार्गों को बहाल कर दिया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पांगी का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र और अत्यधिक ठंड कार्य को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। उपमंडल प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम के दौरान चौबीस घंटे सक्रिय रहा। अधिकारियों द्वारा लगातार विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की जाती रही। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और जल शक्ति विभाग के साथ समन्वय बनाए रखा गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मार्ग बहाली के साथ-साथ आवश्यक सेवाएं भी जल्द से जल्द सामान्य हो सकें। मार्ग बहाल होते ही घाटी में जनजीवन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से होने लगी है, स्कूलों और कार्यालयों में उपस्थिति बढ़ने लगी है और लोगों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है। बस सेवा को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे आम जनता को और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग, बीआरओ और पांगी प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार विभागों ने जिस तत्परता, समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इसी प्रकार की पूर्व तैयारी और सक्रियता से काम किया जाएगा, ताकि बर्फबारी जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद आम जनता को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। कुल मिलाकर, कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद विभागों और प्रशासन की संयुक्त मेहनत ने यह साबित कर दिया कि बेहतर योजना, त्वरित निर्णय और समर्पित टीमवर्क से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। पांगी घाटी के लोगों के लिए यह राहत और विश्वास का क्षण है, जिसने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा मजबूत किया है।

More news from Chamba and nearby areas
  • बालिकाओं में आत्मविश्वास जगाने वाली रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा पहल की सराहना, भटियात में विकास परियोजनाओं पर 150 करोड़ व्यय - विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया। चंबा, (ककीरा), फरवरी 12। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम को बालिकाओं में आत्मविश्वास, साहस और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने वाली सराहनीय पहल बताया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में हर बालिका को चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य है। कार्यक्रम का आयोजन और सम्मान। समग्र शिक्षा अभियान के तहत शस्त्रांग इंडियन मॉडर्न मार्शल आर्ट (सिम्मा) द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककीरा में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलदीप सिंह पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 2025-26 सत्र में मार्शल आर्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी बालिकाओं को सम्मानित किया। स्कूली छात्राओं ने मार्शल आर्ट प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। जल शक्ति परियोजनाओं पर प्रगति। विधानसभा अध्यक्ष ने भटियात क्षेत्र के विकास कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जल शक्ति मंडल चुवाड़ी के अंतर्गत 350 करोड़ की विकास परियोजनाओं पर अब तक 150 करोड़ व्यय हो चुके हैं। भटियात के दूरस्थ गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए 125 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रथम चरण के 45 करोड़ के कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। ग्राम पंचायतों ककीरा कस्बा, जरेई, तारागढ़, गडाना, चलामा, होबार, खडेड़ा और कुढ़ी में 86 करोड़ से 87 परियोजनाएं प्रगति पर हैं। अन्य विकास कार्य। ककीरा और तारागढ़-डंगोरी पेयजल योजनाओं पर 47.50 करोड़ व्यय हो रहा है। बकलोह कैंट मल निकासी योजना तथा सलोरका, कमलाड़ी, घटासनी, अपर मामुल, बस स्टैंड ककीरा और बाई का बाग में भूमि संरक्षण के लिए 12.29 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। सड़क निर्माण में प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने ककीरा, घटासनी व तारागढ़ में 12 संपर्क मार्गों पर प्रगति बताई, जिसमें 5 के FRA स्वीकृत व 7 के सर्वे पूर्ण हैं। कालाफाट, कटलू-बैल्ला व डंगाडी-बाई का बाग मार्गों की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं। क्षेत्रीय विकास का जिक्र। पठानिया ने कहा कि गत तीन वर्षों में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बिजली व स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्रवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने विद्यालय की बहुआयामी गतिविधियों के लिए 21 हजार रुपये देने की घोषणा की। प्रमुख उपस्थित लोग। कार्यक्रम में सदस्य निदेशक राज्य वन निगम कृष्ण चंद चेला, पूर्व अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस विजय कंवर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष तरुण मल्होत्रा, पूर्व महासचिव राजीव कौशल, पूर्व उपाध्यक्ष नगर पंचायत सुरेंद्र चाढ़क, उपमंडल दंडाधिकारी मनीष सोनी, डीएसपी शेर सिंह, उपनिदेशक शिक्षा विकास महाजन, वन मंडल अधिकारी रजनीश महाजन, बीडीओ अनिल गुराडा, एईएन परवेश ठाकुर, नरेंद्र चौधरी, राकेश ठाकुर, सिम्मा अध्यक्ष विक्रम सिंह थापा सहित अधिकारी, छात्र-छात्राएं व ग्रामीण उपस्थित रहे।
    1
    बालिकाओं में आत्मविश्वास जगाने वाली रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा पहल की सराहना, भटियात में विकास परियोजनाओं पर 150 करोड़ व्यय - विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया।
चंबा, (ककीरा), फरवरी 12। 
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम को बालिकाओं में आत्मविश्वास, साहस और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने वाली सराहनीय पहल बताया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में हर बालिका को चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य है।
कार्यक्रम का आयोजन और सम्मान।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत शस्त्रांग इंडियन मॉडर्न मार्शल आर्ट (सिम्मा) द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ककीरा में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलदीप सिंह पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 2025-26 सत्र में मार्शल आर्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी बालिकाओं को सम्मानित किया। स्कूली छात्राओं ने मार्शल आर्ट प्रदर्शन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
जल शक्ति परियोजनाओं पर प्रगति।
विधानसभा अध्यक्ष ने भटियात क्षेत्र के विकास कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जल शक्ति मंडल चुवाड़ी के अंतर्गत 350 करोड़ की विकास परियोजनाओं पर अब तक 150 करोड़ व्यय हो चुके हैं। भटियात के दूरस्थ गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए 125 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रथम चरण के 45 करोड़ के कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। ग्राम पंचायतों ककीरा कस्बा, जरेई, तारागढ़, गडाना, चलामा, होबार, खडेड़ा और कुढ़ी में 86 करोड़ से 87 परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
अन्य विकास कार्य।
ककीरा और तारागढ़-डंगोरी पेयजल योजनाओं पर 47.50 करोड़ व्यय हो रहा है। बकलोह कैंट मल निकासी योजना तथा सलोरका, कमलाड़ी, घटासनी, अपर मामुल, बस स्टैंड ककीरा और बाई का बाग में भूमि संरक्षण के लिए 12.29 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। सड़क निर्माण में प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने ककीरा, घटासनी व तारागढ़ में 12 संपर्क मार्गों पर प्रगति बताई, जिसमें 5 के FRA स्वीकृत व 7 के सर्वे पूर्ण हैं। कालाफाट, कटलू-बैल्ला व डंगाडी-बाई का बाग मार्गों की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं।
क्षेत्रीय विकास का जिक्र।
पठानिया ने कहा कि गत तीन वर्षों में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बिजली व स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से क्षेत्रवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने विद्यालय की बहुआयामी गतिविधियों के लिए 21 हजार रुपये देने की घोषणा की।
प्रमुख उपस्थित लोग।
कार्यक्रम में सदस्य निदेशक राज्य वन निगम कृष्ण चंद चेला, पूर्व अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस विजय कंवर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष तरुण मल्होत्रा, पूर्व महासचिव राजीव कौशल, पूर्व उपाध्यक्ष नगर पंचायत सुरेंद्र चाढ़क, उपमंडल दंडाधिकारी मनीष सोनी, डीएसपी शेर सिंह, उपनिदेशक शिक्षा विकास महाजन, वन मंडल अधिकारी रजनीश महाजन, बीडीओ अनिल गुराडा, एईएन परवेश ठाकुर, नरेंद्र चौधरी, राकेश ठाकुर, सिम्मा अध्यक्ष विक्रम सिंह थापा सहित अधिकारी, छात्र-छात्राएं व ग्रामीण उपस्थित रहे।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager Pangi, Chamba•
    1 hr ago
  • चंबा “बजट पर बरसे सुधीर शर्मा: धर्मशाला विधायक ने चंबा में सरकार को घेरा, बोले- जनता को सिर्फ घोषणाओं का झांसा”। जिला मुख्यालय चंबा में धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने बजट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए बजट को जनहित से दूर बताया। सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार ने बजट में आम जनता को राहत देने के बजाय केवल कागजी घोषणाएं की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए ठोस प्रावधान नहीं किए गए और कई अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है। विधायक ने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान है, लेकिन सरकार बजट के जरिए लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बजट में किए गए वादों को जल्द जमीन पर उतारा जाए, ताकि प्रदेश के लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आगामी समय में सरकार के खिलाफ जनहित की लड़ाई को और तेज करने की बात भी कही। प्रेस कॉन्फ्रेंस सुधीर शर्मा विधायक धर्मशाला।
    1
    चंबा “बजट पर बरसे सुधीर शर्मा: धर्मशाला विधायक ने चंबा में सरकार को घेरा, बोले- जनता को सिर्फ घोषणाओं का झांसा”।
जिला मुख्यालय चंबा में धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने बजट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए बजट को जनहित से दूर बताया।
सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार ने बजट में आम जनता को राहत देने के बजाय केवल कागजी घोषणाएं की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए ठोस प्रावधान नहीं किए गए और कई अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
विधायक ने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान है, लेकिन सरकार बजट के जरिए लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बजट में किए गए वादों को जल्द जमीन पर उतारा जाए, ताकि प्रदेश के लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आगामी समय में सरकार के खिलाफ जनहित की लड़ाई को और तेज करने की बात भी कही।
प्रेस कॉन्फ्रेंस सुधीर शर्मा विधायक धर्मशाला।
    user_Mohd Ashiq
    Mohd Ashiq
    Journalist Chamba, Himachal Pradesh•
    12 hrs ago
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने झूठे वादों से केवल युवाओं को ठगने का काम किया है।
    1
    नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने झूठे वादों से केवल युवाओं को ठगने का काम किया है।
    user_THE MR7
    THE MR7
    डोडा, डोडा, जम्मू और कश्मीर•
    11 hrs ago
  • Post by Ram chand
    1
    Post by Ram chand
    user_Ram chand
    Ram chand
    Nurse मनाली, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Dessa road ki kya hallat ha social activists Arshad na kya kaha
    1
    Dessa road ki kya hallat ha social activists Arshad na kya kaha
    user_Kewal Singh
    Kewal Singh
    भगवाह, डोडा, जम्मू और कश्मीर•
    20 hrs ago
  • जोगिंदर नगर की भूतपूर्व सैनिक लीग ने मनाया अपना 52वां स्थापना दिवस।
    1
    जोगिंदर नगर की भूतपूर्व सैनिक लीग ने मनाया अपना 52वां स्थापना दिवस।
    user_Ankit Kumar
    Ankit Kumar
    Local News Reporter जोगिंदरनगर, मंडी, हिमाचल प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सुजानपुर सुजानपुर होली मेला ग्राउंड को एक व्यक्ति को बेचने के फरमान पर होली मेला बचाओ संघर्ष समिति आक्रोश में है और प्रशासन का यह फैसला बदल जाए इसको लेकर एक मांग पत्र उपमंडल एवं मेला अधिकारी को दिया गया है होली मेला बचाओ संघर्ष समिति सुजानपुर के प्रधान अरुण जैन ने मेले के भीतर दुकानदारी लगाने वालों के साथ मिलकर एक मांग पत्र मिला एवं उपमंडल अधिकारी विकास शुक्ला को दिया है उन्होंने बताया कि सुजानपुर प्रशासन द्वारा इस बार होली मेला ग्राउंड को एक ही व्यक्ति को बेचने का फरमान जारी किया गया है जो गलत हैं हम सभी सुजानपुर के नागरिक प्रशासन द्वारा होली मेला ग्राउंड को किसी एक व्यक्ति ही के नाम पर आवंटन का हम सुजानपुर वासी पुरजोर विरोध करते हैं उन्होंने बताया कि प्रशाशन के इस निर्णय से छोटे दुकानदारों का उत्पीडन होगा तथा जो गरीब लोग पूरा साल भर इस मेले का इंतज़ार करते हैं ताकि इस मेले से अपनी रोजी रोटी का प्रबंध कर सकें। सभी लोग हतास व निराश हैं, महाराजा संसार चंद द्वारा शुरू किया गया यह मेला एक ऐतिहासिक मेला है तथा इस मेले को शुरू करने का एक तात्पर्य यह था कि लोग अपने उत्पादों को बेच सकें ताकि उनकी रोजी रोटी साल भर चलती रहे मगर इस तुगलकी फरमान से सबकी आशाएं निराशाओं में बदल रही हैं। प्रशाशन से पुरजोर अनुरोध है कि जैसे बिगत वर्षों में प्लाट आवंटन का जो नियम था उसे जारी रहने दें। अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो प्रशाशन के खिलाफ सुजानपुर होली मेला बचाओ संघर्ष समिति धरना प्रदर्शन करेगी जिसकी पूरी जुम्मेवरी प्रशाशन की होगी
    1
    सुजानपुर
सुजानपुर होली मेला ग्राउंड को एक व्यक्ति को बेचने के फरमान पर होली मेला बचाओ संघर्ष समिति आक्रोश में है और प्रशासन का यह फैसला बदल जाए इसको लेकर एक मांग पत्र उपमंडल एवं मेला अधिकारी को दिया गया है होली मेला बचाओ संघर्ष समिति सुजानपुर के प्रधान अरुण जैन ने मेले के भीतर दुकानदारी लगाने वालों के साथ मिलकर एक मांग पत्र मिला एवं उपमंडल अधिकारी विकास शुक्ला को दिया है उन्होंने बताया कि सुजानपुर प्रशासन द्वारा इस बार होली मेला ग्राउंड को एक ही व्यक्ति को बेचने का फरमान जारी किया गया है जो गलत हैं हम सभी सुजानपुर के नागरिक प्रशासन द्वारा होली मेला ग्राउंड को किसी एक व्यक्ति ही के नाम पर आवंटन का हम सुजानपुर वासी पुरजोर विरोध करते हैं उन्होंने बताया कि प्रशाशन के इस निर्णय से छोटे दुकानदारों का उत्पीडन होगा तथा जो गरीब लोग पूरा साल भर इस मेले का इंतज़ार करते हैं ताकि इस मेले से अपनी रोजी रोटी का प्रबंध कर सकें। सभी लोग हतास व निराश हैं, महाराजा संसार चंद द्वारा शुरू किया गया यह मेला एक ऐतिहासिक मेला है तथा इस मेले को शुरू करने का एक तात्पर्य यह था कि लोग अपने उत्पादों को बेच सकें ताकि उनकी रोजी रोटी साल भर चलती रहे मगर इस तुगलकी फरमान से सबकी आशाएं निराशाओं में बदल रही हैं। प्रशाशन से पुरजोर अनुरोध है कि जैसे बिगत वर्षों में प्लाट आवंटन का जो नियम था उसे जारी रहने दें। अगर हमारी मांग नहीं मानी गई तो प्रशाशन के खिलाफ सुजानपुर होली मेला बचाओ संघर्ष समिति धरना प्रदर्शन करेगी जिसकी पूरी जुम्मेवरी प्रशाशन की होगी
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    15 min ago
  • जब परंपरा ही सुरक्षा बन जाए और विश्वास ही शक्ति: पांगी घाटी के समाल पर्व की दिव्य गाथा पांगी घाटी (चंबा): दुर्गम हिमालयी अंचल पांगी घाटी में आस्था केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन का अभिन्न सुरक्षा कवच है। यहां सुरक्षा किसी बाहरी साधन से नहीं, बल्कि परंपराओं और विश्वासों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। यही कारण है कि पांगी में मनाया जाने वाला समाल पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है। पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। इसकी शुरुआत शौर गांव से होती है और अंतिम आयोजन साच क्षेत्र में संपन्न होता है। विशेष बात यह है कि यह पर्व किलाड़ क्षेत्र में नहीं मनाया जाता, जो इसकी विशिष्ट सांस्कृतिक सीमा को दर्शाता है। दैवीय कन्या की लोककथा: समाल पर्व की आधारशिला समाल पर्व का मूल एक प्राचीन लोकगाथा से जुड़ा है, जो पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से संजोई गई है। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व साच क्षेत्र में एक परिवार में एक दैवीय कन्या का जन्म हुआ। पांगी की कठोर सर्दियों और भारी बर्फबारी के बीच वृद्ध माता-पिता के कारण घर का समस्त कार्य उसी कन्या के जिम्मे था। वह अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ थी, पर उसकी एक शर्त थी—वह “जूठा पानी” (खाने के बर्तनों से निकला गंदा पानी) नहीं उठाएगी। एक दिन परिस्थितियोंवश उसे यह कार्य भी करना पड़ा। लोककथा कहती है कि जब वह जूठा पानी बाहर फेंकने गई, तो फिर कभी घर नहीं लौटी। परिवारजन खोजते हुए जंगल की ओर पहुंचे तो देखा कि वह एक बड़े पत्थर के नीचे बैठी है। उसने स्पष्ट शब्दों में घर लौटने से इंकार कर दिया और कहा कि अब उसका निवास वही स्थान है। परिवारजन कुछ समय तक उसे भोजन पहुंचाते रहे। एक दिन बर्फबारी और वृद्धावस्था के कारण वे स्वयं नहीं जा सके और एक युवक को भेजा। किंवदंती के अनुसार उस युवक ने दुष्कर्म का प्रयास किया। तब उस दैवीय कन्या ने पक्षी का रूप धारण किया और वहां से उड़कर कुल्लू के भेखली नामक स्थान पर जा बसी। आज भी वहां उसका भव्य मंदिर विद्यमान है। लोक-मान्यता है कि समाल पर्व के दौरान एक दिन वह दैवीय शक्ति अपने मूल गांव लौटती है, और उसके अगले दिन साच क्षेत्र में समाल पर्व का मुख्य आयोजन होता है। अनुष्ठानिक ज्यामिति: जब घर बनते हैं जीवित सुरक्षा कवच समाल पर्व के दौरान पांगी के जनजातीय घर आध्यात्मिक किले में परिवर्तित हो जाते हैं। घरों के मुख्य द्वार, खिड़कियों, सीढ़ियों और प्रवेश मार्गों पर विशेष पवित्र चिह्न बनाए जाते हैं। इन चिह्नों के निर्माण में उपयोग होता है: चोक – सफेद पत्थर का चूर्ण कांटेदार जंगली गुलाब की टहनियां – नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक शाशो – पवित्र सफेद पत्थरों का समूह, जिससे प्राचीनकाल में अग्नि प्रज्वलित की जाती थी कैली – मिट्टी या चूने का लेप इन प्रतीकों को फर्श से छत तक जाने वाले मार्गों और प्रत्येक दहलीज पर अंकित किया जाता है। यह मात्र सजावट नहीं, बल्कि एक अनुष्ठानिक प्रक्रिया है। हर आकृति का एक आध्यात्मिक अर्थ है, भले ही उसका आकार गांव-गांव में भिन्न हो। स्थानीय विश्वास के अनुसार ये चिह्न: राक्षसी और नकारात्मक ऊर्जाओं को घर में प्रवेश से रोकते हैं घर और परिवेश की पवित्रता बनाए रखते हैं प्रकृति-देवताओं और पूर्वजों का आशीर्वाद आमंत्रित करते हैं यह परंपरा “अनुष्ठानिक ज्यामिति” का जीवंत उदाहरण है—एक ऐसी मौन भाषा, जो पुस्तकों में नहीं, बल्कि पीढ़ियों की स्मृति में सुरक्षित है। सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता समाल पर्व केवल आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक भी है। पांच दिनों तक गांवों में विशेष आयोजन होते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से लोक परंपराओं को जीवित रखा जाता है। यह पर्व जनजातीय समाज को उनकी जड़ों से जोड़ता है। आधुनिकता और वैश्वीकरण के दौर में जहां कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, वहीं पांगी घाटी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को न केवल सुरक्षित रखा है, बल्कि उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया है। आस्था जो दीवारों पर उकेरी जाती है पांगी की यह परंपरा यह संदेश देती है कि सांस्कृतिक विरासत केवल संग्रहालयों या शोधग्रंथों में नहीं बसती। यहां आस्था दीवारों पर उकेरी जाती है, दहलीजों पर अंकित की जाती है और जीवन के हर आयाम में जिया जाती है। पत्थर, कांटे, राख और मिट्टी—ये साधारण तत्व मिलकर असाधारण आध्यात्मिक संरचना का निर्माण करते हैं। यह एक ऐसा विश्वास है, जो सुरक्षा का आश्वासन देता है और सामुदायिक आत्मविश्वास को सुदृढ़ करता है। निष्कर्ष समाल पर्व पांगी घाटी की जनजातीय विरासत, पूर्वजों की ज्ञान-परंपरा और पर्वतीय विश्वास की अमिट छाप है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जब परंपरा जीवित रहती है, तो समाज सुरक्षित और सशक्त बना रहता है। पांगी में परंपरा केवल अतीत नहीं—वह वर्तमान की शक्ति और भविष्य की सुरक्षा है।
    1
    जब परंपरा ही सुरक्षा बन जाए और विश्वास ही शक्ति: पांगी घाटी के समाल पर्व की दिव्य गाथा
पांगी घाटी (चंबा): दुर्गम हिमालयी अंचल पांगी घाटी में आस्था केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन का अभिन्न सुरक्षा कवच है। यहां सुरक्षा किसी बाहरी साधन से नहीं, बल्कि परंपराओं और विश्वासों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। यही कारण है कि पांगी में मनाया जाने वाला समाल पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है।
पांच दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ। इसकी शुरुआत शौर गांव से होती है और अंतिम आयोजन साच क्षेत्र में संपन्न होता है। विशेष बात यह है कि यह पर्व किलाड़ क्षेत्र में नहीं मनाया जाता, जो इसकी विशिष्ट सांस्कृतिक सीमा को दर्शाता है।
दैवीय कन्या की लोककथा: समाल पर्व की आधारशिला
समाल पर्व का मूल एक प्राचीन लोकगाथा से जुड़ा है, जो पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से संजोई गई है। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व साच क्षेत्र में एक परिवार में एक दैवीय कन्या का जन्म हुआ। पांगी की कठोर सर्दियों और भारी बर्फबारी के बीच वृद्ध माता-पिता के कारण घर का समस्त कार्य उसी कन्या के जिम्मे था।
वह अत्यंत कर्तव्यनिष्ठ थी, पर उसकी एक शर्त थी—वह “जूठा पानी” (खाने के बर्तनों से निकला गंदा पानी) नहीं उठाएगी। एक दिन परिस्थितियोंवश उसे यह कार्य भी करना पड़ा। लोककथा कहती है कि जब वह जूठा पानी बाहर फेंकने गई, तो फिर कभी घर नहीं लौटी।
परिवारजन खोजते हुए जंगल की ओर पहुंचे तो देखा कि वह एक बड़े पत्थर के नीचे बैठी है। उसने स्पष्ट शब्दों में घर लौटने से इंकार कर दिया और कहा कि अब उसका निवास वही स्थान है। परिवारजन कुछ समय तक उसे भोजन पहुंचाते रहे।
एक दिन बर्फबारी और वृद्धावस्था के कारण वे स्वयं नहीं जा सके और एक युवक को भेजा। किंवदंती के अनुसार उस युवक ने दुष्कर्म का प्रयास किया। तब उस दैवीय कन्या ने पक्षी का रूप धारण किया और वहां से उड़कर कुल्लू के भेखली नामक स्थान पर जा बसी। आज भी वहां उसका भव्य मंदिर विद्यमान है।
लोक-मान्यता है कि समाल पर्व के दौरान एक दिन वह दैवीय शक्ति अपने मूल गांव लौटती है, और उसके अगले दिन साच क्षेत्र में समाल पर्व का मुख्य आयोजन होता है।
अनुष्ठानिक ज्यामिति: जब घर बनते हैं जीवित सुरक्षा कवच
समाल पर्व के दौरान पांगी के जनजातीय घर आध्यात्मिक किले में परिवर्तित हो जाते हैं। घरों के मुख्य द्वार, खिड़कियों, सीढ़ियों और प्रवेश मार्गों पर विशेष पवित्र चिह्न बनाए जाते हैं।
इन चिह्नों के निर्माण में उपयोग होता है:
चोक – सफेद पत्थर का चूर्ण
कांटेदार जंगली गुलाब की टहनियां – नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक
शाशो – पवित्र सफेद पत्थरों का समूह, जिससे प्राचीनकाल में अग्नि प्रज्वलित की जाती थी
कैली – मिट्टी या चूने का लेप
इन प्रतीकों को फर्श से छत तक जाने वाले मार्गों और प्रत्येक दहलीज पर अंकित किया जाता है। यह मात्र सजावट नहीं, बल्कि एक अनुष्ठानिक प्रक्रिया है। हर आकृति का एक आध्यात्मिक अर्थ है, भले ही उसका आकार गांव-गांव में भिन्न हो।
स्थानीय विश्वास के अनुसार ये चिह्न:
राक्षसी और नकारात्मक ऊर्जाओं को घर में प्रवेश से रोकते हैं
घर और परिवेश की पवित्रता बनाए रखते हैं
प्रकृति-देवताओं और पूर्वजों का आशीर्वाद आमंत्रित करते हैं
यह परंपरा “अनुष्ठानिक ज्यामिति” का जीवंत उदाहरण है—एक ऐसी मौन भाषा, जो पुस्तकों में नहीं, बल्कि पीढ़ियों की स्मृति में सुरक्षित है।
सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता
समाल पर्व केवल आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक भी है। पांच दिनों तक गांवों में विशेष आयोजन होते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से लोक परंपराओं को जीवित रखा जाता है।
यह पर्व जनजातीय समाज को उनकी जड़ों से जोड़ता है। आधुनिकता और वैश्वीकरण के दौर में जहां कई परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं, वहीं पांगी घाटी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को न केवल सुरक्षित रखा है, बल्कि उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया है।
आस्था जो दीवारों पर उकेरी जाती है
पांगी की यह परंपरा यह संदेश देती है कि सांस्कृतिक विरासत केवल संग्रहालयों या शोधग्रंथों में नहीं बसती। यहां आस्था दीवारों पर उकेरी जाती है, दहलीजों पर अंकित की जाती है और जीवन के हर आयाम में जिया जाती है।
पत्थर, कांटे, राख और मिट्टी—ये साधारण तत्व मिलकर असाधारण आध्यात्मिक संरचना का निर्माण करते हैं। यह एक ऐसा विश्वास है, जो सुरक्षा का आश्वासन देता है और सामुदायिक आत्मविश्वास को सुदृढ़ करता है।
निष्कर्ष
समाल पर्व पांगी घाटी की जनजातीय विरासत, पूर्वजों की ज्ञान-परंपरा और पर्वतीय विश्वास की अमिट छाप है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जब परंपरा जीवित रहती है, तो समाज सुरक्षित और सशक्त बना रहता है।
पांगी में परंपरा केवल अतीत नहीं—वह वर्तमान की शक्ति और भविष्य की सुरक्षा है।
    user_PANGI NEWS 24
    PANGI NEWS 24
    Social Media Manager Pangi, Chamba•
    3 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.