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नरसिंहपुर में 'नईदुनिया हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम के दौरान शासकीय जिला अस्पताल के डॉ. गुलाब खतरकर ने फोन के माध्यम से नागरिकों से सीधे बात की और उनकी मौसमी बीमारियों से जुड़ी शंकाओं का समाधान किया। डॉ. खतरकर ने नागरिकों के सवालों के जवाब देते हुए मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार जैसी बीमारियों से बचाव और उनके उचित उपचार के बारे में उपयोगी जानकारी साझा की। इस पहल के माध्यम से उन्होंने लोगों को मौसमी बीमारियों के प्रति सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया।
Kailash gupta tv 24
नरसिंहपुर में 'नईदुनिया हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम के दौरान शासकीय जिला अस्पताल के डॉ. गुलाब खतरकर ने फोन के माध्यम से नागरिकों से सीधे बात की और उनकी मौसमी बीमारियों से जुड़ी शंकाओं का समाधान किया। डॉ. खतरकर ने नागरिकों के सवालों के जवाब देते हुए मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार जैसी बीमारियों से बचाव और उनके उचित उपचार के बारे में उपयोगी जानकारी साझा की। इस पहल के माध्यम से उन्होंने लोगों को मौसमी बीमारियों के प्रति सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया।
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- नरसिंहपुर के सुभाष वार्ड स्थित रेस्ट हाउस परिसर में विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल द्वारा सेवा सप्ताह के अंतर्गत एक सराहनीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और सेवा के माध्यम से जनकल्याण की भावना को मजबूत करना रहा। स्थानीय क्षेत्रवासियों ने इस पहल की खूब सराहना की और इसे जरूरतमंद लोगों के लिए बेहद उपयोगी बताया। शिविर के दौरान जिला अस्पताल के एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बृजेश पटेल और उनकी टीम ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक उपचार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी परामर्श दिया। शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे स्थानीय नागरिकों के रक्तचाप (बीपी) और रक्त शर्करा (शुगर) की निःशुल्क जांच की गई और साथ ही मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी वितरित की गईं। इस आयोजन को लेकर विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष शुभम गुप्ता और डॉ. बृजेश पटेल ने अपनी बात रखी। विहिप-बजरंग दल के पदाधिकारियों ने संकल्प दोहराया कि उनका संगठन सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों के लिए निरंतर समर्पित है और भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।3
- मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान का शुभारंभ हो गया है।1
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में भारतीय किसान यूनियन टिकैत संगठन के किसानों ने मोर्चा खोलते हुए हल्ला बोल दिया है।1
- जबलपुर के रिमझा करमेता स्थित सेंट अलायसियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दलित कर्मचारियों के कथित धर्मांतरण के आरोपों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्कूल परिसर में लगे वाटर फिल्टर की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। फिल्टर की जांच के दौरान उसमें काई, फफूंद और मृत कीड़े होने का दावा किया गया है। मौके पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी इस संबंध में अवगत कराया गया, जिन्होंने फिल्टर का निरीक्षण किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह छात्रों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही का मामला है और इस पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसी दौरान कुछ छात्रों के कथित बयानों का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बच्चों ने दावा किया है कि स्कूल में राम नवमी जैसे हिंदू पर्व नहीं मनाए जाते हैं और उन्हें तिलक, कलावा तथा धार्मिक लॉकेट पहनने से रोका जाता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए इसकी भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि स्कूल में कार्यरत कुछ दलित कर्मचारियों पर कथित रूप से धर्मांतरण का दबाव बनाया गया, उन्हें चर्च आने के लिए कहा गया और ऐसा न करने पर अपमानित कर नौकरी से निकाल दिया गया। इसके अलावा, शिकायत करने पर उन्हें धमकियां भी दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और सरकारी भूमि के उपयोग व लीज की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की मांग की है।2
- जबलपुर के नेपियर टाउन स्थित जबलपुर हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है। ओमती (भरतीपुर) क्षेत्र के निवासी ज्ञानचंद सोनकर के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मरीज की हालत में सुधार होने और सभी सामान्य जांच रिपोर्ट आने के बावजूद उन्हें अचानक वेंटिलेटर पर रख दिया गया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और परिचितों ने जमकर हंगामा किया और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कमजोरी की शिकायत के बाद ज्ञानचंद सोनकर को इलाज के लिए जबलपुर हॉस्पिटल के आईसीयू बेड नंबर-13 पर भर्ती कराया गया था। मरीज के बेटे मोहन सोनकर का आरोप है कि मंगलवार रात करीब 8 बजे उनके पिता ने खुद कहा था कि वे बेहतर महसूस कर रहे हैं और घर जाना चाहते हैं, जिसे पास खड़े अस्पताल कर्मियों ने सुन लिया। इसके तुरंत बाद सफाई कर्मियों ने आईसीयू में सफाई का बहाना बनाकर परिजनों को 10 मिनट के लिए बाहर भेज दिया। परिजनों का आरोप है कि जब वे वापस आईसीयू में पहुंचे, तो उनके पिता को वेंटिलेटर पर रखा जा चुका था, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने अचानक कार्डियक अरेस्ट आने की बात कहकर मरीज की हालत गंभीर होने की सूचना दी। परिजनों का दावा है कि मरीज के सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट और बाकी सभी जरूरी मेडिकल रिपोर्ट्स पूरी तरह सामान्य थीं। परिवार ने सवाल उठाया है कि जब मरीज बातचीत कर रहा था, तो अचानक ऐसी कौन सी स्थिति बनी कि उन्हें कुछ ही मिनटों में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा। फिलहाल ज्ञानचंद सोनकर की हालत चिंताजनक बनी हुई है और परिवार का आरोप है कि उन्हें उपचार की सही जानकारी नहीं दी जा रही है। आक्रोशित परिजनों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, आईसीयू के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने और डॉक्टरों के रिकॉर्ड की समीक्षा करने की मांग की है। इस पूरे मामले में अब तक जबलपुर हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।4
- जबलपुर में धर्म संगठन को बचाने के लिए पालनहार से एक बेहद भावुक गुहार लगाई गई है। इस प्रार्थना में पालनहार से विनती की गई है कि वे अब इस धर्म संगठन की रक्षा करें और अपने चरणों से लगा लें। पूरे समर्पण भाव के साथ 'राधे राधे' का जाप करते हुए ईश्वर से रक्षा की कामना की गई है, क्योंकि अब केवल उन्हीं का एकमात्र सहारा बचा है।1
- नरसिंहपुर में गांव का माहौल खराब कर रहे सामाजिक तत्वों और बढ़ते नशे के कारोबार के खिलाफ ग्रामीणों ने सीधे कलेक्टर से शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ सामाजिक तत्व लगातार गांव का माहौल बिगाड़ रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में नशे का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति से परेशान होकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मिलकर इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है और उचित कार्रवाई की मांग की है।1
- मध्य प्रदेश में किसानों की मांगों को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी सिलसिले में नरसिंहपुर में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले जुटे हजारों किसानों ने अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। कृषि उपज मंडी परिसर में धरना देने के बाद किसानों ने सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ शहर की सड़कों पर विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला। इस बड़े आंदोलन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम पूरे दिन अलर्ट पर रही। कृषि उपज मंडी में जमा हुए किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों की प्रमुख मांगों में मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी, फसलों का लाभकारी मूल्य, समय पर खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और फसल बीमा की विसंगतियों का समाधान शामिल है। धरना स्थल पर ही एसडीएम ने मुख्यमंत्री के नाम किसानों का ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद किसान ट्रैक्टर मार्च निकालने के अपने फैसले पर अड़े रहे और कृषि उपज मंडी से गांधी चौक तक रैली निकाली। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और प्रशासन ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। किसान नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा और पूरे मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष विमलेश पटेल, किसान नेता देवेंद्र पाठक और संघ के प्रवक्ता लोकेश पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।3
- मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायत नकटुआ में नाली निर्माण कार्य के कारण आम लोगों का जीवन दूभर हो गया है। बीते जून महीने से चल रहे इस कार्य की वजह से क्षेत्र के एक मुख्य मार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया गया है। इसके चलते स्कूली विद्यार्थियों से लेकर अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों तक को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कब्रिस्तान से केंद्रीय विद्यालय होते हुए नेशनल हाईवे 44 तक जाने वाला यह मुख्य मार्ग पिछले एक महीने से बंद पड़ा है। निर्माण कार्य के दौरान सड़क पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर (टापू) बना दिए गए हैं, जिसके कारण मुक्तिधाम और कब्रिस्तान तक लोगों का पहुंचना बिल्कुल नामुमकिन हो गया है। इस वजह से स्थानीय लोग बेहद मजबूर होकर दूसरे मुक्तिधाम और कब्रिस्तानों का रुख करने को विवश हैं।1