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कुदरत के कहर के आगे मजबूत टावर भी धराशायी हो गए हैं। इस घटना को देखते हुए सभी को सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हमेशा खतरनाक नतीजे पेश करती है।
Bhajan lal sharma
कुदरत के कहर के आगे मजबूत टावर भी धराशायी हो गए हैं। इस घटना को देखते हुए सभी को सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हमेशा खतरनाक नतीजे पेश करती है।
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- बीदासर में शनिवार को एक रेतीले बवंडर ने दस्तक दी, जिसके चलते क्षेत्र का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।1
- आज अपने जयपुर आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के कई ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से अपने विचार रखे। इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पर उनका तीखा हमला रहा। बेनीवाल ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में मदन राठौड़ को आड़े हाथों लिया और उन पर सीधे सियासी तीर छोड़े। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वे जनहित के मुद्दों पर किसी भी तरह की नरमी बरतने वाले नहीं हैं।1
- सरकार जल्द ही प्लास्टिक के नए नोट जारी करने जा रही है। इन प्लास्टिक के नोटों की मुख्य विशेषता यह होगी कि वे न तो आसानी से गलेंगे और न ही फटेंगे, जिससे उनकी टिकाऊपन बढ़ेगी।1
- चिड़ावा स्थित पंडित गणेशनारायण बावलिया महाराज मंदिर में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत एक भव्य महा-आरती का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने सामूहिक रूप से जल संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और अभियान के प्रदेश सहसंयोजक प्रेम सिंह बाजौर ने जल संरक्षण में जनभागीदारी की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने भविष्य में संभावित जल संकट को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि जल संरक्षण को एक जनआंदोलन का रूप देना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, अभियान के प्रदेश संयोजक मुकेश दाधीच ने जानकारी दी कि पूरे प्रदेश में जल संवर्धन, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इस अवसर पर पूर्व सांसद नरेंद्र खीचड़, ओबीसी आयोग के सदस्य पवन मावण्डिया, अभियान के जिला समन्वयक विशंभर पूनियां, भाजपा नगर अध्यक्ष नरेंद्र गिरधर, और पूर्व प्रधान कैलाश मेघवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- चूरू जिले की तारानगर तहसील के धीरवास बड़ा गांव की ढाणियों में 4 मई 2026 की रात आए तूफान से कई विद्युत पोल टूट गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी विद्युत विभाग ने अभी तक इन टूटे हुए पोलों को ठीक नहीं किया है। इस बड़ी लापरवाही के कारण पिछले एक महीने से ग्रामीण इस भीषण गर्मी में बिना बिजली के अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने टूटे हुए पोलों की सूचना कई बार विद्युत विभाग के अधिकारी एईएन साहब को दी है, लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। धीरवास बड़ा के कृष्ण कुमार S/O हेमराज सिहाग ने बताया कि साहवा जाने वाले स्टेट हाइवे के पास उनके खेत में लगा विद्युत पोल तूफान से टूट गया है, जिससे बिजली की सप्लाई बंद है और करंट दौड़ते हुए बिजली के तार जमीन पर पड़े हुए हैं। उन्होंने कई बार एईएन और कर्मचारियों को फोन कर अवगत कराया, फिर भी पोल नहीं बदला गया, जिससे खेत में बिजली न होने से उन्हें भारी परेशानी हो रही है। इसी तरह, गांव में रेड़ी के रास्ते पर मोहन थालोड़ की ढाणी में भी पिछले एक महीने से दो विद्युत पोल टूटे पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद विभाग ने टूटे हुए पोलों को नहीं बदला है, जिससे ये टूटे पोल और लटकते ढीले तार कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, और राहगीरों व बच्चों के लिए भारी खतरा पैदा कर रहे हैं। बिजली न होने से ढाणियों में पंखे-कूलर बंद पड़े हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का गर्मी से बुरा हाल है। इस लापरवाही से धीरवास बड़ा की ढाणियों के दर्जनों परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम से अविलंब नए पोल लगाने और बिजली व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की है, क्योंकि भीषण गर्मी के इस दौर में जिम्मेदारी की यह अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है।1
- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुदरत के कहर के कारण 96 लोगों की जान जाने की दुखद खबर सामने आई है। इस गंभीर स्थिति में, लोगों से सावधानी बरतते हुए यात्रा करने, अपने घरों से सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने, मौसम विभाग की हिदायतों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने का आग्रह किया गया है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यही बचाव का एकमात्र तरीका है।1
- कुदरत के कहर के आगे मजबूत टावर भी धराशायी हो गए हैं। इस घटना को देखते हुए सभी को सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हमेशा खतरनाक नतीजे पेश करती है।1