थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह ने कुर्की बरियावन बाजार कस्बा में पैदल गस्त भ्रमण कर स्थानीय लोगों को सुरक्षा भरोसा कि सम्मनपुर पुलिस आपके साथ 24 घंटे तैयार है कुकी बनियावान बाजार में रोड किनारे अतिक्रमण हुआ तो होगी कड़ी कार्रवाई दिनेश कुमार सिंह थानाध्यक्ष सम्मनपुर सिकंदरपुर अंबेडकरनगर रिपोर्ट मोहम्मद रजा हैदर पुलिस अधीक्षक अंबेडकरनगर प्राची सिंह अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी हरेंद्र कुमार अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी श्यामदेव सीओ सिटी नितिश तिवारी के के निर्देश पर थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह ने उपनिरीक्षक धीरज कुशवाहा अपनी टीम के साथ सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आगामी त्यौहार त्योहारों को शांतिपूर्वक करवाने के लिए कुर्की बरियावन कस्बा बाजार में पैदल भ्रमण कर ग्रस्त कर स्थानीय लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया कि सम्मनपुर पुलिस आपके साथ 24 घंटे तैयार है आगामी त्यौहार को लेकर शांतिपूर्वक करवाने के लिए पुलिस टीम के साथ कुर्की बरियावन कस्बा बाजार में पैदल भ्रमणकर स्थानीय लोगों से अपील की शांतिपूर्वक आगामी त्यौहारों मनाएंगे यदि किसी को समस्या हो तत्काल स्थानीय थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह हल्का प्रभारी उप निरीक्षक धीरज कुशवाहा सिपाही या 112 को सूचना दें इस दौरान उपनिरीक्षक धीरज कुशवाहा सतीश यादव आदि पुलिसकर्मीमौजूद थे
थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह ने कुर्की बरियावन बाजार कस्बा में पैदल गस्त भ्रमण कर स्थानीय लोगों को सुरक्षा भरोसा कि सम्मनपुर पुलिस आपके साथ 24 घंटे तैयार है कुकी बनियावान बाजार में रोड किनारे अतिक्रमण हुआ तो होगी कड़ी कार्रवाई दिनेश कुमार सिंह थानाध्यक्ष सम्मनपुर सिकंदरपुर अंबेडकरनगर रिपोर्ट मोहम्मद रजा हैदर पुलिस अधीक्षक अंबेडकरनगर प्राची सिंह अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी हरेंद्र कुमार अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी श्यामदेव सीओ सिटी नितिश तिवारी के के निर्देश पर थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह ने उपनिरीक्षक धीरज कुशवाहा अपनी टीम के साथ सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आगामी त्यौहार त्योहारों को शांतिपूर्वक
करवाने के लिए कुर्की बरियावन कस्बा बाजार में पैदल भ्रमण कर ग्रस्त कर स्थानीय लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया कि सम्मनपुर पुलिस आपके साथ 24 घंटे तैयार है आगामी त्यौहार को लेकर शांतिपूर्वक करवाने के लिए पुलिस टीम के साथ कुर्की बरियावन कस्बा बाजार में पैदल भ्रमणकर स्थानीय लोगों से अपील की शांतिपूर्वक आगामी त्यौहारों मनाएंगे यदि किसी को समस्या हो तत्काल स्थानीय थानाध्यक्ष सम्मनपुर दिनेश कुमार सिंह हल्का प्रभारी उप निरीक्षक धीरज कुशवाहा सिपाही या 112 को सूचना दें इस दौरान उपनिरीक्षक धीरज कुशवाहा सतीश यादव आदि पुलिसकर्मीमौजूद थे
- विश्व हिन्दू परिषद का हल्ला बोल किया प्रदर्शन1
- Post by India news 37 ( वैभव सिंह ब्यूरो चीफ) अंबेडकर नगर1
- Post by रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर1
- अम्बेडकर नगर: केवटला मठ प्रकरण में नया मोड़, ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद बदला रुख बसखारी (अम्बेडकर नगर)। विकासखंड बसखारी के ग्राम सभा केवटला स्थित केवटला मठ से जुड़े परिवार रजिस्टर नकल प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव अशोक राजभर व मठ के पुजारी मनीष यादव के विरुद्ध दर्ज मुकदमे को लेकर उठे विवाद के बीच अब प्रशासन का रुख बदलता नजर आ रहा है। मनीष यादव को निर्दोष बताते हुए 50 से अधिक ग्रामीणों का समूह क्षेत्राधिकारी (सीओ) टांडा कार्यालय पहुंचा और अपना पक्ष रखा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच के निर्दोष लोगों को फंसाया जा रहा है। क्षेत्राधिकारी टांडा ने ग्रामीणों की बात गंभीरता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है और गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुजारी मनीष यादव व ग्राम पंचायत सचिव अशोक राजभर की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी बताया कि मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान अब संदेह की सुई पूर्व ग्राम पंचायत सचिव अंकुर शर्मा की ओर घूमती दिखाई दे रही है। हस्ताक्षर मिलान की प्रक्रिया में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इसी बीच ग्रामीणों ने मठ की जमीन के कथित विक्रय का मुद्दा भी उठाया। इस पर क्षेत्राधिकारी ने कहा कि यदि ऐसा पाया गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मठ के लिए ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया शुरू कर उसे संरक्षित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हरिशंकर दास उर्फ बुलबुली बाबा का नाम एक से अधिक जनपदों के परिवार रजिस्टर में दर्ज है। इस पर क्षेत्राधिकारी ने ग्रामीणों से लिखित शिकायत मांगी है। शिकायत प्राप्त होने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। केवटला मठ प्रकरण अब बहुआयामी रूप ले चुका है, जिसमें परिवार रजिस्टर, भूमि विवाद एवं प्रशासनिक प्रक्रिया सभी पहलू जांच के दायरे में हैं। प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बीच अब सभी की निगाहें आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।1
- ज़माना चाँद पर पहुँच गया और हमारे गाँव की सड़कें आज भी आज़ादी का इंतज़ार कर रही हैं। कच्ची राहें और टूटते सपने... आखिर कब तक? 🛤️🥀1
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश दिनांक: 18 अप्रैल 2026 स्थान: हरैया, बस्ती हरैया (बस्ती)। उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ 'निपुण भारत' मिशन के तहत परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जनपद के विकास खंड हरैया अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मझौवा बाबू से आई एक तस्वीर ने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। यहाँ मध्याह्न भोजन (MDM) पकाने के लिए किसी लकड़ी या गैस का नहीं, बल्कि उस ब्लैकबोर्ड (श्यामपट्ट) का इस्तेमाल किया गया, जिस पर बच्चों का भविष्य लिखा जाना था। सिलेंडर है तो धुआं क्यों? सरकार ने हर विद्यालय में रसोई गैस सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि पर्यावरण बचा रहे और बच्चों को स्वच्छ माहौल में भोजन मिले। लेकिन मझौवा बाबू विद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर चूल्हे पर रोटियां सेंकी जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि क्या गैस सिलेंडर रिफिल कराने के पैसे डकारे जा रहे हैं या फिर जिम्मेदारों की सुस्ती इस कदर हावी है कि उन्हें चूल्हे का धुआं नजर नहीं आता? शिक्षा के 'हथियार' की आहुति हैरानी की बात तो यह है कि चूल्हा जलाने के लिए सूखी लकड़ियों के बजाय विद्यालय के ब्लैकबोर्ड को फाड़कर आग के हवाले कर दिया गया। जिस श्यामपट्ट पर शिक्षक ककहरा सिखाते थे, वह आज चूल्हे में जलकर राख हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि विद्यालय प्रशासन के लिए शिक्षा के उपकरणों की क्या अहमियत है। गंदगी का अंबार: स्कूल या तबेला? विद्यालय की अव्यवस्था यहीं खत्म नहीं होती। क्लासरूम के अंदर फैला पुआल और चारों तरफ पसरी गंदगी स्वच्छ भारत अभियान के दावों की पोल खोल रही है। जिस परिसर में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहां गंदगी का साम्राज्य जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। बड़ा सवाल: > "अगर गैस खत्म थी, तो लकड़ी का इंतजाम क्यों नहीं हुआ? और अगर कुछ नहीं मिला, तो क्या सीधे बच्चों की पढ़ाई के संसाधनों को ही जला देना एकमात्र विकल्प था?" मूकदर्शक बना विभाग इस पूरे प्रकरण में विद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह मौन हैं। नियमों की धज्जियां उड़ती देख भी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की चुप्पी यह इशारा करती है कि शायद मिलीभगत का खेल ऊपर तक है। अब देखना यह है कि इस वायरल तस्वीर और खबर के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मझौवा बाबू विद्यालय के लापरवाह जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजी घोड़ों के बीच इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।1
- Post by हरिशंकर पांडेय1
- अजीत मिश्रा (खोजी) संपादकीय: हरदोई के कछौना थाने से आई शर्मनाक तस्वीरें हरदोई। "पुलिस मित्र" - यह स्लोगन अक्सर थानों की दीवारों पर चमकता हुआ दिखाई देता है, लेकिन वास्तविकता की धरातल पर यह कितना खोखला है, इसकी बानगी हरदोई जिले के कछौना थाने में देखने को मिली। जब अपनी जमीन के विवाद की गुहार लेकर एक बुजुर्ग, राजेश, न्याय की चौखट पर पहुँचे, तो उन्हें न्याय की जगह 'मां-बहन की गालियाँ' और 'धक्के' मिले। दरोगा की दबंगई और मानवता का कत्ल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो दिल दहला देने वाला है। एक जिम्मेदार पद पर बैठा दरोगा, एक बुजुर्ग के प्रति अपशब्दों की बौछार कर रहा है। गालियाँ ऐसी कि रूह कांप जाए। क्या खाकी वर्दी का उद्देश्य केवल अपनी शक्ति का प्रदर्शन असहायों पर करना रह गया है? वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह बुजुर्ग को धक्के मारकर थाने से बाहर निकाला जा रहा है, मानो वह कोई अपराधी हो। व्यवस्था पर सवालिया निशान उत्तर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था और 'मिशन शक्ति' जैसे अभियानों की बात करती है, लेकिन कछौना जैसी घटनाएँ प्रशासन के दावों की पोल खोल देती हैं। सवाल यह है: क्या एक बुजुर्ग को अपनी बात रखने का हक नहीं है? सवाल यह भी: क्या वर्दी पहनने के बाद किसी को मर्यादा लांघने का लाइसेंस मिल जाता है? देर आए, पर क्या दुरुस्त आए? मामला गरमाने और वीडियो वायरल होने के बाद दरोगा को निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। लेकिन क्या निलंबन काफी है? निलंबन एक अस्थायी प्रक्रिया है। असली न्याय तब होगा जब ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई दूसरा 'वर्दीधारी' किसी गरीब या बुजुर्ग की पगड़ी उछालने से पहले सौ बार सोचे। निष्कर्ष पुलिस विभाग को आत्मचिंतन की आवश्यकता है। यदि जनता का पुलिस पर से विश्वास उठ गया, तो समाज में अराजकता फैलने में देर नहीं लगेगी। हरदोई की यह घटना केवल एक बुजुर्ग का अपमान नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का अपमान है जिसे हम 'न्याय' कहते हैं। वक्त आ गया है कि खाकी की गरिमा को गालियों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।1