देश के सभी नागरिकों से एक सवाल है, जवाब भी आप सभी लोगों के पास है, जरा सोचो समझो *साथियों*, आज मैं एक गंभीर प्रश्न के साथ खड़ा हूँ। ⚖️ *क्या कभी कोई ऐसी सरकार बन पाएगी जो सबके लिए 'एक देश, एक नियम' लागू कर सकें ?* ✍️ अपने विचार नीचे कमेंट में साझा करें। 🙏 🕉️ क्या 'जनसेवा' अब केवल सत्ता का व्यक्तिगत लाभ बनकर रह गई है? 🕉️ *क्या जनता में से कुछ देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति नि:स्वार्थ भाव रखते हुए स्वेच्छा से नेता बनने के लिए आगे आएंगे, जो बिना वेतन और पेंशन के कार्य करें ?* ⚠️ विडंबना देखिए: 📍 जनप्रतिनिधि जनता के टैक्स से वेतन और पेंशन लेते हैं। 📍 लेकिन जिम्मेदारी के वक्त वे 'पूर्णकालिक कर्मचारी' की परिभाषा से बाहर हो जाते हैं। 📍 माननीय जनप्रतिनिधि वेतन के साथ पेंशन और सभी खर्चों के लिए भत्ते तथा इसके बाद भी निजी फायदों के लिए व्यवसाय और वकालत जैसे धन अर्जन करने वाले कार्य करते हैं। 📍 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जब तक संसद कानून न बनाए, इन्हें निजी व्यवसाय (वकालत आदि) से नहीं रोका जा सकता। ♻️ *हैरानी की बात यह है कि जब अपने हितों की बात आती है, तो सभी दल एकजुट होकर कानून बना लेते हैं। लेकिन वही नियम सामान्य सरकारी कर्मचारियों और जनता पर लागू नहीं होते।* ⚖️ क्या वाकई इसे ही हम 'सबका साथ, सबका विकास' कहेंगे?
देश के सभी नागरिकों से एक सवाल है, जवाब भी आप सभी लोगों के पास है, जरा सोचो समझो *साथियों*, आज मैं एक गंभीर प्रश्न के साथ खड़ा हूँ। ⚖️ *क्या कभी कोई ऐसी सरकार बन पाएगी जो सबके लिए 'एक देश, एक नियम' लागू कर सकें ?* ✍️ अपने विचार नीचे कमेंट में साझा करें। 🙏 🕉️ क्या 'जनसेवा' अब केवल सत्ता का व्यक्तिगत लाभ बनकर रह गई है? 🕉️ *क्या जनता में से कुछ देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति नि:स्वार्थ भाव रखते हुए स्वेच्छा से नेता बनने के लिए आगे आएंगे, जो बिना वेतन और पेंशन के कार्य करें ?* ⚠️ विडंबना देखिए: 📍 जनप्रतिनिधि जनता के टैक्स से वेतन और पेंशन लेते हैं। 📍 लेकिन जिम्मेदारी के
वक्त वे 'पूर्णकालिक कर्मचारी' की परिभाषा से बाहर हो जाते हैं। 📍 माननीय जनप्रतिनिधि वेतन के साथ पेंशन और सभी खर्चों के लिए भत्ते तथा इसके बाद भी निजी फायदों के लिए व्यवसाय और वकालत जैसे धन अर्जन करने वाले कार्य करते हैं। 📍 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जब तक संसद कानून न बनाए, इन्हें निजी व्यवसाय (वकालत आदि) से नहीं रोका जा सकता। ♻️ *हैरानी की बात यह है कि जब अपने हितों की बात आती है, तो सभी दल एकजुट होकर कानून बना लेते हैं। लेकिन वही नियम सामान्य सरकारी कर्मचारियों और जनता पर लागू नहीं होते।* ⚖️ क्या वाकई इसे ही हम 'सबका साथ, सबका विकास' कहेंगे?
- *साथियों*, आज मैं एक गंभीर प्रश्न के साथ खड़ा हूँ। ⚖️ *क्या कभी कोई ऐसी सरकार बन पाएगी जो सबके लिए 'एक देश, एक नियम' लागू कर सकें ?* ✍️ अपने विचार नीचे कमेंट में साझा करें। 🙏 🕉️ क्या 'जनसेवा' अब केवल सत्ता का व्यक्तिगत लाभ बनकर रह गई है? 🕉️ *क्या जनता में से कुछ देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति नि:स्वार्थ भाव रखते हुए स्वेच्छा से नेता बनने के लिए आगे आएंगे, जो बिना वेतन और पेंशन के कार्य करें ?* ⚠️ विडंबना देखिए: 📍 जनप्रतिनिधि जनता के टैक्स से वेतन और पेंशन लेते हैं। 📍 लेकिन जिम्मेदारी के वक्त वे 'पूर्णकालिक कर्मचारी' की परिभाषा से बाहर हो जाते हैं। 📍 माननीय जनप्रतिनिधि वेतन के साथ पेंशन और सभी खर्चों के लिए भत्ते तथा इसके बाद भी निजी फायदों के लिए व्यवसाय और वकालत जैसे धन अर्जन करने वाले कार्य करते हैं। 📍 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जब तक संसद कानून न बनाए, इन्हें निजी व्यवसाय (वकालत आदि) से नहीं रोका जा सकता। ♻️ *हैरानी की बात यह है कि जब अपने हितों की बात आती है, तो सभी दल एकजुट होकर कानून बना लेते हैं। लेकिन वही नियम सामान्य सरकारी कर्मचारियों और जनता पर लागू नहीं होते।* ⚖️ क्या वाकई इसे ही हम 'सबका साथ, सबका विकास' कहेंगे?2
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- Post by Avdhesh jatav Jay Bheem1
- आज तारीख 6 को aaj main Purnagiri ke darshan karne ke bad Nepal Siddh ji ke darshan karne Gaya vahan per Kafi Achcha mahsus Kiya aur Bhakti Archana mein le raha aur vahan per Kafi sankhya mein bhaktgan pahunche4
- Post by Saurabh Singh2
- खेत में चारा काटते समय महिला को सर्पदंश से मौके पर मौत, मचा हड़कंप मैनपुरी। जनपद मैनपुरी के थाना बेवर क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर गढ़ी में शुक्रवार की शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब खेत में चारा काटने गई एक महिला की सर्पदंश से मौत हो गई। घटना से गांव में हड़कंप मच गया और परिजनों में कोहराम मच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम फतेहपुर गढ़ी निवासी श्रीमती मीरा देवी (52 वर्ष) पत्नी स्वर्गीय राजेंद्र सिंह यादव शुक्रवार की शाम करीब 5 बजे अपने खेत पर पशुओं के लिए चारा काटने गई थीं। इसी दौरान खेत में मौजूद एक विषैले सर्प ने उन्हें काट लिया। सर्पदंश के बाद महिला की हालत तेजी से बिगड़ गई और कुछ ही देर में उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। महिला को बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी निरीक्षक बेवर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भर कर जिला पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं अचानक हुई इस दुखद घटना से मृतका के परिवार में मातम छा गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।1
- कोला मोड़ पर दबंगों का कहर: महिलाओं से अभद्रता का विरोध करने पर मारपीट, गाड़ी का शीशा तोड़ा 🛑 📍 जलालाबाद क्षेत्र में दबंगों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। महिलाओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर दबंग युवकों ने एक परिवार के साथ मारपीट कर दी और पिकअप गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया। पीड़ित ज्ञानेंद्र पुत्र वेदराम, निवासी ग्राम कुइया कटेंया, जो कि अनुसूचित जाति से हैं, ने थाना जलालाबाद में तहरीर देकर बताया कि वह अपनी पिकअप गाड़ी से जा रहे थे। जब वह कोला मोड़ के पास पहुंचे तो वहां मौजूद सचिन, अंशू और शिवम पुत्र रामकिशोर, निवासी याकूबपुर, ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए आई लव यू कहकर छेड़छाड़ शुरू कर दी। पीड़ित द्वारा इसका विरोध करने पर आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गंदी-गंदी गालियां दीं और पीड़ित व उसके परिवार पर हमला कर दिया। इस दौरान मारपीट में पीड़ित, उसके भाई और भाभी को गंभीर चोटें आईं। दबंगों ने पिकअप गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया। पीड़ित ने मामले की लिखित तहरीर थाना जलालाबाद में देकर कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो दबंगों के हौसले और बढ़ सकते हैं। 👉 अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।1
- Post by Avdhesh jatav Jay Bheem1