अपूर्वा मदर एंड चाइल्ड केयर एंड IVF सेंटर, बलिया में महिला दिवस के अवसर पर निःशुल्क शिविर उत्तर प्रदेश जनपद बलिया में अपूर्वा मदर एंड चाइल्ड केयर एंड IVF सेंटर जगदीशपुर बलिया उत्तरप्रदेश द्वारा निःशुल्क महिला दिवस पर निःशुल्क परामर्श, निःशुल्क अल्ट्रासाउंड, निःशुल्क दवाइयां, व्यक्तिगत उपचार योजना, IVF पैकेज पर विशेष छूट खून जांच 50 प्रतिशत छूट दी जा रही है। डॉक्टरों की जानकारी:* - डॉ. दीपक सिंह एम. बी. बी. एस.डी. नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ - डॉ. अपूर्वा सिंह एमबीबीएस एमएस स्त्री एवं बासपन रोग विशेषज्ञ *सेंटर की सेवाएं:* - निःशुल्क परामर्श - निःशुल्क अल्ट्रासाउंड - निःशुल्क दवाइयां - व्यक्तिगत उपचार योजना - IVF पैकेज पर विशेष छूट - खून जांच 50% छूट *डॉक्टरों के बयान:* - डॉ. दीपक सिंह: "महिला दिवस पर हम महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।" - डॉ. अपूर्वा सिंह: "हमारी टीम महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए समर्पित है और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
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- जोधपुर। हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में केशरीनंदन बालाजी के सान्निध्य में हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या पर भव्य संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक विनोद सोनी और सुनील सोनी ने बताया कि यह भव्य धार्मिक आयोजन 18 मार्च 2026, बुधवार को शाम 7:30 बजे से आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन जोधपुर के जूनी मंडी स्थित गंगश्याम जी मंदिर के बाहर किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर सुंदरकांड पाठ और भक्ति संध्या का लाभ उठाएंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में भजन-कीर्तन और संगीतमय सुंदरकांड पाठ के माध्यम से भक्तिमय वातावरण बनाया जाएगा। वहीं रात्रि 12 बजे हिंदू नववर्ष के स्वागत में भव्य आतिशबाजी भी की जाएगी। इस धार्मिक आयोजन के निवेदक पंचेटिया भगवा ग्रुप हैं, जबकि जय शंकर युवा ग्रुप जालोरी गेट और हरि ओम सत्संग समिति, श्रीराम भवन मेहरों का चौक का भी विशेष सहयोग रहेगा। आयोजकों ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर हिंदू नववर्ष के इस पावन पर्व को भक्ति और उल्लास के साथ मनाने का आह्वान किया है।1
- चंदौसी कोल्ड ट्रेडर्स एसोसिएशन के द्वारा मंडी की पुनर्स्थापना पिछले 50 वर्ष पहले हुई थी उन समस्त पदाधिकारी को सम्मानित किया गया। और इस स्थापना दिवस को धूमधाम से मनाया गया। कोयला व्यापारियों का कहना है कि 50 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी चंदासी कोयला मंडी की मूलभूत जो जरूरत है उस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही। व्यापारियों का कहना है कि चंदा सी कोयला मंडी में मजदूरों के लिए कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है ना तो साफ सफाई है और ना ही जल का कोई प्रबंध है। बार-बार सरकार से अपील की जाती है परंतु सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही।1
- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 55 वर्षीय अमरजीत मौर्य पर सातवीं शादी की तैयारी का आरोप लगा है। इस शादी का विरोध किसी और ने नहीं बल्कि उनके नाबालिग बेटे ने किया है। बेटे ने थाने में शिकायत देकर पुलिस से गुहार लगाई है कि उसके पिता को सातवीं शादी करने से रोका जाए।1
- आगरा दीवानी कोर्ट में तारीख पर पहुंचे एक हिंदूवादी नेता के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ित सौरभ शर्मा का आरोप है कि गोकशों से मिली हुई एक महिला वकील ने टकराने के बहाने उनके साथ मारपीट की। उनका कहना है कि यह पूरी घटना सुनियोजित साजिश के तहत कराई गई। सौरभ शर्मा के अनुसार उन्होंने वर्ष 2025 में गौकशी के कई मामलों में मुकदमे दर्ज कराए थे और दो गौवंश का मीट भी बरामद कराया था। उनका आरोप है कि जिन लोगों पर उन्होंने कार्रवाई कराई थी, वही लोग लंबे समय से गौकशी में लिप्त हैं और कुछ थाने के हिस्ट्रीशीटर भी हैं। फिलहाल मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।1
- Post by Pawan Gupta1
- Post by Dharmendra Kumar2
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- के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ,नई दिल्ली ने स्वीकार किया है कि वाराणसी में सारनाथ स्थल बाबू जगत सिंह के द्वारा कराए गए उत्खनन से सर्वप्रथम प्रकाश में आया है। 10.02.2026 को सारनाथ परिसर में नए संशोधित शिलापट्ट को लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि बाबू जगत सिंह ने 18वीं सदी के उत्तरार्ध में सारनाथ क्षेत्र में उत्खनन संबंधी कार्य को आरंभ कराया था । लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में यह तथ्य दबा रहा । विगत वर्षों में जगत सिंह रॉयल फैमिली प्रोजेक्ट शोध समिति के अथक परिश्रम और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर अब इसे आधिकारिक मान्यता मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारतीय इतिहास लेखन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 26.12.2024 को सारनाथ परिसर में धर्मराजिका शिलापट्ट को भी संशोधित कर नया शिलापट्ट लगाया गया है। बाबू जगत सिंह शोध समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह के अनुसार यह कार्य भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संपन्न हुआ है। बाबू जगत सिंह रॉयल फैमिली शोध समिति ने उन प्रमाणित दस्तावेजों को ,भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के समक्ष रखा है, जिसके आधार पर औपनिवेशिक शासन के समय से चली आ रही गलत मान्यता अब समाप्त हुई है। शिलापट्ट परिवर्तन कार्य में काशी के विद्वानों, विश्वविद्यालयों , महाविद्यालयों,जवाहरलाल नेहरू एवं कोलकाता विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा पटना विश्वविद्यालय आदि के वर्तमान एवं अवकाश प्राप्त प्रवक्ताओं का हमें योगदान मिला है। वाराणसी गाइड एसोसिएशन एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली का भी हमें समर्थन मिला साथ ही काशी के धर्म गुरुओं,इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया, डिजिटल तथा आकाशवाणी का भी हमें समर्थन मिला है। उक्त योगदान और समर्थन के लिए हम आप सभी को हृदय से नमन करते हैं। इस निर्णय से वाराणसी सहित पूरे देश में प्रसन्नता की लहर है। बाबू जगत सिंह की छठवीं पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने कहा -"यह हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद आप सभी के सहयोग व समर्थन का ही परिणाम है कि आज उनके ऐतिहासिक योगदान को देश ने स्वीकारा है ।यह केवल हमारे परिवार व समिति के लिए ही नहीं अपितु वाराणसी के साथ ही देश की ऐतिहासिक विरासत के लिए भी गर्व का विषय है । श्री सिंह ने कहा हमारा शोध निरंतर जारी है, आगे शीघ्र ही कुछ नए तथ्य प्रकाश में आएंगे, देश को उससे अवगत कराया जाएगा। पत्रकार वार्ता के दौरान शोध समिति के सदस्य, अधिवक्ता त्रिपुरारी शंकर , प्रोफेसर राणा पीबी सिंह ,अरविंद कुमार सिंह एडवोकेट ,अशोक आनंद, डॉ (मेजर )अरविंद कुमार सिंह, राजेंद्र कुमार दुबे वरिष्ठ पत्रकार, मनीष खत्री अवनीधर, एहसन अहमद, विकास एवं शमीम उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि सत्य और प्रमाणों पर आधारित, शोध अंततः अपना स्थान बना ही लेता है। इतिहासकारों का मत है कि इस निर्णय से न केवल सारनाथ के इतिहास को नया आयाम मिला है , अपितु स्थानीय नायकों के योगदान को भी राष्ट्रीय परिपेक्ष में पुन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सचमुच यह शोध भारतीय इतिहास के पन्नों में सच्चाई की नींव डालने जैसा है। प्रदीप नारायण सिंह ने आह्वान किया कि उपरोक्त अनुक्रम में नालंदा, भरूच, अमरावती इत्यादि स्थलों पर इतिहासकारों, शोधकर्ताओं को प्राथमिक ऐतिहासिक साक्ष्य के आधार पर नवीन शोध की आवश्यकता है।1