पडरौना में रावण दहन का भव्य नजारा, ऐतिहासिक भीड़ से खचाखच भरा रामलीला मैदान राजदरबार की परंपराओं और विधि-विधान के साथ हुआ रावण दहन, रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा आसमान आई कैन न्यूज / पडरौना, कुशीनगर। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व पडरौना के ऐतिहासिक राजदरबार रामलीला मैदान में भव्यता और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों बाद इस बार उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के चेहरे पर उत्साह और उमंग दिखाई दी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया था। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रतिवर्ष पडरौना राजदरबार के रामलीला मैदान में रावण दहन का आयोजन किया जाता है। रावण दहन से पहले निभाई गई राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह है कि रावण दहन से पूर्व राजदरबार परिवार द्वारा पारंपरिक विधि-विधान का निर्वहन किया जाता है। राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह एवं राजदरबार परिवार के सदस्य धार्मिक परंपराओं के अनुसार रावण के पास पहुंचते हैं और उसके ज्ञान एवं विद्वता से जुड़ी प्रतीकात्मक परंपरा का निर्वहन करते हैं। यह परंपरा एक गहरा संदेश देती है कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान भी अपने अहंकार और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। ज्ञान कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि उसके साथ अहंकार जुड़ जाए तो उसका पतन निश्चित है। इसके बाद जैसे ही रावण के पुतले को अग्नि दी गई, पटाखों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। आसमान में बिखरती रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने ऐसा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया कि उपस्थित जनसमूह की निगाहें आसमान पर टिक गईं। मानो आतिशबाजी के चमकते सितारे भी संदेश दे रहे हों कि जीवन में अहंकार नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और सदाचार का प्रकाश होना चाहिए। मेले की जलेबी का स्वाद और बचपन की यादों ने बढ़ाई रौनक रामलीला मैदान में लगे विशाल मेले का आकर्षण भी देखते ही बन रहा था। बच्चों के खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, मिठाइयों की दुकानें और तरह-तरह के व्यंजनों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। विशेष रूप से मेले की गरमागरम जलेबी का आनंद ही कुछ अलग था। लोग जलेबी खाते भी नजर आए और अपने परिवार के लिए खरीदकर घर ले जाते भी दिखाई दिए। मेले की यह परंपरा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सामाजिक एकता और बचपन की अनमोल यादों को भी जीवंत करती है। रावण तो हर साल जलता है, लेकिन क्या हमारे भीतर का अहंकार भी जलता है? विजयादशमी का वास्तविक संदेश केवल रावण के पुतले को जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और असत्य को समाप्त करना है। रावण विद्वान था, शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। आइए, अब सुनते हैं कि पडरौना राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार रावण दहन के बाद राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह ने उपस्थित जनसमूह को क्या संदेश दिया। देखिए आई कैन न्यूज की विशेष रिपोर्ट।
पडरौना में रावण दहन का भव्य नजारा, ऐतिहासिक भीड़ से खचाखच भरा रामलीला मैदान राजदरबार की परंपराओं और विधि-विधान के साथ हुआ रावण दहन, रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा आसमान आई कैन न्यूज / पडरौना, कुशीनगर। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व पडरौना के ऐतिहासिक राजदरबार रामलीला मैदान में भव्यता और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों बाद इस बार उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के चेहरे पर उत्साह और उमंग दिखाई दी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया था। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रतिवर्ष पडरौना राजदरबार के रामलीला मैदान में रावण दहन का आयोजन किया जाता है। रावण दहन से पहले निभाई गई राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह है कि रावण दहन से पूर्व राजदरबार परिवार द्वारा पारंपरिक विधि-विधान का निर्वहन किया जाता है। राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह एवं राजदरबार परिवार के सदस्य धार्मिक परंपराओं के अनुसार रावण के पास पहुंचते हैं और उसके ज्ञान एवं विद्वता से जुड़ी प्रतीकात्मक परंपरा का निर्वहन करते हैं। यह परंपरा एक गहरा संदेश देती है कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान भी अपने अहंकार और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। ज्ञान कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि उसके साथ अहंकार जुड़ जाए तो उसका पतन निश्चित है। इसके बाद जैसे ही रावण के पुतले को अग्नि दी गई, पटाखों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। आसमान में बिखरती रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने ऐसा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया कि उपस्थित जनसमूह की निगाहें आसमान पर टिक गईं। मानो आतिशबाजी के चमकते सितारे भी संदेश दे रहे हों कि जीवन में अहंकार नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और सदाचार का प्रकाश होना चाहिए। मेले की जलेबी का स्वाद और बचपन की यादों ने बढ़ाई रौनक रामलीला मैदान में लगे विशाल मेले का आकर्षण भी देखते ही बन रहा था। बच्चों के खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, मिठाइयों की दुकानें और तरह-तरह के व्यंजनों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। विशेष रूप से मेले की गरमागरम जलेबी का आनंद ही कुछ अलग था। लोग जलेबी खाते भी नजर आए और अपने परिवार के लिए खरीदकर घर ले जाते भी दिखाई दिए। मेले की यह परंपरा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सामाजिक एकता और बचपन की अनमोल यादों को भी जीवंत करती है। रावण तो हर साल जलता है, लेकिन क्या हमारे भीतर का अहंकार भी जलता है? विजयादशमी का वास्तविक संदेश केवल रावण के पुतले को जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और असत्य को समाप्त करना है। रावण विद्वान था, शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। आइए, अब सुनते हैं कि पडरौना राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार रावण दहन के बाद राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह ने उपस्थित जनसमूह को क्या संदेश दिया। देखिए आई कैन न्यूज की विशेष रिपोर्ट।
- पडरौना में रावण दहन का भव्य नजारा, ऐतिहासिक भीड़ से खचाखच भरा रामलीला मैदान राजदरबार की परंपराओं और विधि-विधान के साथ हुआ रावण दहन, रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा आसमान आई कैन न्यूज / पडरौना, कुशीनगर। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व पडरौना के ऐतिहासिक राजदरबार रामलीला मैदान में भव्यता और उल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों बाद इस बार उमड़ी ऐतिहासिक भीड़ ने आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के चेहरे पर उत्साह और उमंग दिखाई दी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया था। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रतिवर्ष पडरौना राजदरबार के रामलीला मैदान में रावण दहन का आयोजन किया जाता है। रावण दहन से पहले निभाई गई राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह है कि रावण दहन से पूर्व राजदरबार परिवार द्वारा पारंपरिक विधि-विधान का निर्वहन किया जाता है। राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह एवं राजदरबार परिवार के सदस्य धार्मिक परंपराओं के अनुसार रावण के पास पहुंचते हैं और उसके ज्ञान एवं विद्वता से जुड़ी प्रतीकात्मक परंपरा का निर्वहन करते हैं। यह परंपरा एक गहरा संदेश देती है कि रावण जैसा प्रकांड विद्वान भी अपने अहंकार और अधर्म के कारण विनाश को प्राप्त हुआ। ज्ञान कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि उसके साथ अहंकार जुड़ जाए तो उसका पतन निश्चित है। इसके बाद जैसे ही रावण के पुतले को अग्नि दी गई, पटाखों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गूंज उठा। आसमान में बिखरती रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने ऐसा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया कि उपस्थित जनसमूह की निगाहें आसमान पर टिक गईं। मानो आतिशबाजी के चमकते सितारे भी संदेश दे रहे हों कि जीवन में अहंकार नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और सदाचार का प्रकाश होना चाहिए। मेले की जलेबी का स्वाद और बचपन की यादों ने बढ़ाई रौनक रामलीला मैदान में लगे विशाल मेले का आकर्षण भी देखते ही बन रहा था। बच्चों के खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, मिठाइयों की दुकानें और तरह-तरह के व्यंजनों ने लोगों को खूब आकर्षित किया। विशेष रूप से मेले की गरमागरम जलेबी का आनंद ही कुछ अलग था। लोग जलेबी खाते भी नजर आए और अपने परिवार के लिए खरीदकर घर ले जाते भी दिखाई दिए। मेले की यह परंपरा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सामाजिक एकता और बचपन की अनमोल यादों को भी जीवंत करती है। रावण तो हर साल जलता है, लेकिन क्या हमारे भीतर का अहंकार भी जलता है? विजयादशमी का वास्तविक संदेश केवल रावण के पुतले को जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ, अन्याय और असत्य को समाप्त करना है। रावण विद्वान था, शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। आइए, अब सुनते हैं कि पडरौना राजदरबार की ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार रावण दहन के बाद राज्यसभा सांसद कुंवर आरपीएन सिंह ने उपस्थित जनसमूह को क्या संदेश दिया। देखिए आई कैन न्यूज की विशेष रिपोर्ट।1
- *कुशीनगर के राज दरबार में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी पर्व* *कुशीनगर के राज दरबार में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी पर्व* *कुशीनगर।* जनपद कुशीनगर के ऐतिहासिक राज दरबार में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विजयादशमी का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दशहरे के पावन अवसर पर राज दरबार परिसर में भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध की लीला का मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक उमड़ पड़े। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। पुतला दहन होते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर राज दरबार में पारंपरिक शस्त्र पूजन भी किया गया। क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। मेले में बच्चों के लिए झूले, खिलौने और खान-पान की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहीं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। आयोजकों ने बताया कि राज दरबार की यह दशहरा परंपरा दशकों पुरानी है और हर साल इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। एंकर: कुशीनगर के राज दरबार में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। रावण दहन देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया गया। कुशीनगर: राज दरबार में धूमधाम से मना विजयादशमी, रावण दहन देख गूंजे जय श्रीराम के जयकारे4
- गम्भीरिया के राम घाट पर धूमधाम से मना विजयादशमी पर्व, रावण दहन के साथ दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश बांसी नदी के तट पर लगा पारंपरिक मेला, भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने की अपील पडरौना-कुशीनगर विकास खंड विशुनपुरा अंतर्गत ग्राम सभा गम्भीरिया स्थित बांसी नदी के राम घाट पर मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान रावण के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया गया। मेले में पहुंचे लोगों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ दशहरा पर्व मनाया। रावण दहन के माध्यम से लोगों को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया गया। पूरे क्षेत्र में विजयादशमी को लेकर उत्साह का माहौल रहा।इस अवसर पर राम-जानकी मंदिर के महंत गोपाल दास ने कहा कि विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर समाज को धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया था। यह पर्व हमें अपने भीतर की बुराइयों को दूर कर अच्छे विचारों और संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा देता है।उन्होंने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अहंकार, अन्याय और अधर्म का त्याग करने का भी संदेश देता है। प्रत्येक व्यक्ति को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाते हुए समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।राम घाट पर आयोजित मेले में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। रावण दहन के कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने तथा बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा दी गई। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ ही सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेले के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। बांसी चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार भारी पुलिस बल के साथ क्षेत्र में भ्रमणशील रहे। पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी, जिससे मेले और रावण दहन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।इस मौके पर ग्राम प्रधान बबलू कुशवाहा, प्रधान प्रतिनिधि भीम सिंह, प्रधान प्रतिनिधि वशिष्ठ पाण्डेय, अनिल यादव, रमेश पाल, पूर्व प्रधान प्रत्याशी बेइली देवी, प्रधान पद के प्रत्याशी जोगिंदर साहनी, अशोक कुशवाहा, सोहन पटेल, राजू तिवारी, उपेंद्र चौरसिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।4
- कुशीनगर। मंगलवार को नगर पंचायत सेवरही में धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के पर शोभा यात्रा व कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि सुरेश चंद्र भारती मंडल प्रभारी, वरिष्ठ नेता बसपा अमरजीत प्रसाद, भंते अमरजीत भारती, विधानसभा अध्यक्ष तमकुही शिवमंगल गौतम, हरेंद्र कुमार भारती, मैनेजर भारती, विशाल कुमार, आदि, भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।1
- कुत्ते को बचाने में गई किशोर की जान, नटवा जंगल में दर्दनाक सड़क हादसा, एक की मौत दो घायल महराजगंज।* जिले के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के नटवा जंगल में बुधवार सुबह करीब 9 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कुत्ते को बचाने के चक्कर में बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें एक किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार महदेवा उर्फ बलुआभार निवासी तीन युवक एक ही बाइक पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। नटवा जंगल के पास अचानक सड़क पर कुत्ता आ गया। कुत्ते को बचाने के प्रयास में बाइक चालक ने संतुलन खो दिया और बाइक सड़क पर गिरकर घिसट गई। हादसा इतना भयानक था कि एक युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान किशन (16 वर्ष) पुत्र धर्मेंद्र निवासी महदेवा उर्फ बलुआभार के रूप में हुई है। वहीं घायलों की पहचान जितेंद्र पुत्र गोरखनाथ और सागर पुत्र धर्मेंद्र के रूप में हुई है। घटना की सूचना पर स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घायलों को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से जितेंद्र की हालत गंभीर देखते हुए उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया। वहीं सागर को हल्की-फुल्की चोटें आई हैं, जिसका इलाज चल रहा है। सूचना मिलते ही श्यामदेउरवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे शव को घर ले जाने की जिद पर अड़े रहे। इस हादसे के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है। 16 वर्षीय किशन की असमय मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि किशन बहुत ही होनहार था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि यह हादसा तेज रफ्तार और ट्रिपल सवारी के कारण हुआ है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | बाराबंकी, उत्तर प्रदेश दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में थप्पड़ मारने का आरोप, दारोगा पुलिस लाइन भेजे गए; जांच के आदेश वर्दी की सख्ती पर उठे सवाल, वायरल वीडियो के बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई! बाराबंकी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में दारोगा पर लोगों को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित दारोगा को पुलिस लाइन भेज दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश भी दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान कुछ लोग पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे। इसी दौरान उन्हें रोकने के प्रयास में दारोगा पर थप्पड़ मारने का आरोप लगा। घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद पुलिस की कार्यशैली और मौके पर अपनाए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। सुरक्षा जरूरी, लेकिन व्यवहार भी मर्यादित होना चाहिए प्रतिमा विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहा है, तो उसे रोकना आवश्यक है। लेकिन सुरक्षा के नाम पर बल प्रयोग या कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही जरूरी है। अब सबकी नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में दारोगा ने कथित तौर पर ऐसा व्यवहार किया। फिलहाल, संबंधित दारोगा को पुलिस लाइन भेजे जाने की कार्रवाई की गई है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 📍 स्थान: बाराबंकी, उत्तर प्रदेश नोट: वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।1
- तेज रफ्तार कार के पेड़ से टकराने से 7 घायल इलाज के दौरान 4 लोगों की मृत्यु कुशीनगर में थाना कसया क्षेत्रान्तर्गत दिनांक 19.10.2026 की रात्रि 23.45 बजे एक तेज रफ्तार कार के पेड़ से टकराने पर कार में सवार 07 व्यक्ति घायल हो गए, जिन्हें इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 04 लोगों की मृत्यु हो गई है। उक्त संबंध में पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में *क्षेत्राधिकारी कसया डा0 अजय कुमार सिंह* की बाइट –1
- तेज रफ्तार कार के पेड़ से टकराने से 7 घायल इलाज के दौरान 4 लोगों की मृत्यु कुशीनगर में थाना कसया क्षेत्रान्तर्गत दिनांक 19.10.2026 की रात्रि 23.45 बजे एक तेज रफ्तार कार के पेड़ से टकराने पर कार में सवार 07 व्यक्ति घायल हो गए, जिन्हें इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 04 लोगों की मृत्यु हो गई है। उक्त संबंध में पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में *क्षेत्राधिकारी कसया डा0 अजय कुमार सिंह* की बाइट –1