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सिटी थाने के पास चाय की गुमटी पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, पुलिस पर उठे सवाल नीमच शहर के मनासा नाका क्षेत्र में सिटी थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित एक चाय की गुमटी को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। रहवासियों का कहना है कि यहां देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है और नशाखोरी की गतिविधियां होती हैं। गुरुवार रात रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद भी हुआ, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों ने पुलिस और नगर पालिका से गुमटी व अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई कर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
सिटी थाने के पास चाय की गुमटी पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, पुलिस पर उठे सवाल नीमच शहर के मनासा नाका क्षेत्र में सिटी थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित एक चाय की गुमटी को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। रहवासियों का कहना है कि यहां देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है और नशाखोरी की गतिविधियां होती हैं। गुरुवार रात रुपए के लेनदेन को लेकर विवाद भी हुआ, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों ने पुलिस और नगर पालिका से गुमटी व अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई कर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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- "मैं नीमच हूँ… और मेरे फेफड़े काटे जा रहे हैं!" जंगलों की खामोश चीख, जवाब कौन देगा? नमस्कार… मैं नीमच हूँ… वही नीमच, जिसकी पहचान कभी नीम के पेड़ों, घने जंगलों और हरियाली से होती थी। लेकिन आज ऐसा लगता है जैसे मेरे फेफड़े धीरे-धीरे काटे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के कई वीडियो सामने आ रहे हैं। इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि होना जरूरी है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि यदि इनमें सच्चाई है, तो जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों है? और यदि ये भ्रामक हैं, तो उनका खंडन क्यों नहीं किया गया? नीमच, मनासा, जावद, जीरन, रतनगढ़ और रामपुरा के वन क्षेत्रों को लेकर समय-समय पर अवैध कटाई और अतिक्रमण की शिकायतें उठती रही हैं। आखिर जंगलों की निगरानी कौन कर रहा है? कितनी वन भूमि सुरक्षित है? कितने अवैध कटान रोके गए? और कितनों पर कार्रवाई हुई? याद रखिए… पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं होते। यही पेड़ बारिश लाते हैं, भूजल बचाते हैं और हमें जीवन देने वाली ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। जब एक जंगल उजड़ता है, तो केवल पेड़ नहीं गिरते, बल्कि भविष्य भी कमजोर होता है। यह किसी पर आरोप लगाने की कोशिश नहीं, बल्कि सच सामने लाने की एक अपील है। यदि जंगल सुरक्षित हैं तो तथ्य जनता के सामने रखे जाएँ। और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ पेड़ों का नहीं… सवाल नीमच की पहचान, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का है। मैं नीमच हूँ… और मैं पूछ रहा हूँ—क्या मेरे जंगल बचेंगे? 🌿1
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