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महिलाओं को ,केमिकल सिंदूर से हो रहा है नुकसान आप इस वीडियो को पूरा देखने के बाद घर पर ही सिंदूर बना सकते हो।
आईरा समाचार बीकानेर
महिलाओं को ,केमिकल सिंदूर से हो रहा है नुकसान आप इस वीडियो को पूरा देखने के बाद घर पर ही सिंदूर बना सकते हो।
- Bhomaram meghwalKolayat🙏on 11 April
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- “झुंझुनूं को रेलवे जंक्शन बनाने की मांग ने पकड़ी रफ्तार, जन संघर्ष अभियान का भव्य शुभारंभ” झुंझुनूं। शेखावाटी अंचल में रेल विकास की बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर गुरुवार को झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर “झुंझुनूं मांगे रेलवे जंक्शन” जन संघर्ष अभियान का भव्य आगाज हुआ। शेखावाटी रेल विकास संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कड़कड़ाती सर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक संगठन एवं विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अभियान की शुरुआत स्टेशन अधीक्षक कैलाश चन्द्र सोनी को रेलमंत्री, रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) एवं मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के नाम ज्ञापन सौंपकर की गई। समिति की ओर से ज्ञापन सौंपते समय स्टेशन अधीक्षक का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया गया तथा मिठाई भेंट कर अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झुंझुनूं जिला भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन रेलवे सुविधाओं के अभाव में आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है। अब जनभागीदारी के साथ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक झुंझुनूं को उसका हक नहीं मिल जाता। शेखावाटी रेल विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि ज्ञापन में कुल 25 सूत्री मांगें रखी गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग झुंझुनूं रेलवे स्टेशन को रेलवे जंक्शन घोषित करने की है। इसके साथ ही झुंझुनूं को बिसाऊ, मण्डावा, खेतड़ी, सादुलपुर, उदयपुरवाटी, नीमकाथाना, सालासर, लोहार्गल एवं शाकम्भरी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक, औद्योगिक और पर्यटन केंद्रों से नई रेल लाइनों के माध्यम से जोड़ने की मांग शामिल है। अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में झुंझुनूं से सीमित रेल सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए ज्ञापन में झुंझुनूं से होकर दिल्ली, हरिद्वार, अहमदाबाद, सूरत, पुणे, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, वैष्णो देवी कटरा, जोधपुर, उदयपुर सिटी एवं श्रीगंगानगर जैसे प्रमुख शहरों के लिए नई सीधी रेल सेवाएं शुरू करने की मांग की गई है। उनका कहना था कि इन रेल सेवाओं के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। कार्यक्रम के दौरान समिति में दूसरी पीढ़ी के सदस्यों के रूप में सीए जिम्मी सुमन कुमार मोदी एवं संजय श्रीकिशन बिलोटिया के जुड़ने पर उनका सम्मान किया गया। वक्ताओं ने इसे आंदोलन के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि जब युवा और नई पीढ़ी इस संघर्ष से जुड़ेगी, तब इसकी आवाज और अधिक मजबूती से सरकार तक पहुंचेगी। कार्यक्रम में महासचिव डॉ. मनोज सिंह ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे झुंझुनूं जिले की जनता की आवाज है। रिटायर्ड स्टेशन अधीक्षक अनवर हुसैन भीमसर ने तकनीकी तथ्यों के साथ बताया कि झुंझुनूं को जंक्शन बनाए जाने की पूरी संभावनाएं हैं और यदि इच्छाशक्ति हो तो यह कार्य कठिन नहीं है। इस अवसर पर अग्रवाल समाज समिति के अध्यक्ष गणेश कुमार हलवाई, लायंस क्लब के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र सिंह शेखावत, सचिव कृष्ण गोपाल गुप्ता, वैश्य सेना के उपाध्यक्ष रघुनाथ प्रसाद पोद्दार, भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष जिम्मी मोदी, भामाशाह विश्वनाथ टीबड़ा, शिक्षाविद् डॉ. शशि मोरोलिया, मुस्लिम न्याय मंच के संयोजक इमरान बड़गुजर, अलकुरेश वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद मोहसिन कुरैशी सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। इसके अलावा जयराज जांगिड़, संजय बिलोटिया, अनिल शर्मा, विनोद खन्ना, मनीष बगड़िया, सुरेन्द्र अग्रवाल, भजन गायक रवि तुलस्यान, शिवचरण पुरोहित, फैयाज अली खान नूआं, श्रवण कुमार गोयनका, भोपाल सिंह पटवारी, विनोद कुमार पुजारी, इकबाल खान तथा इत्तेहादुल मुस्लिमीन सोसायटी के जिला उपाध्यक्ष नासिर छींपा, कार्यालय सचिव शाहीन कुरैशी, यूनिट अध्यक्ष नौशाद मिर्जा, आशिक फारूकी, तौफिक रंगरेज, एजाज खान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में समिति ने ऐलान किया कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में जन संपर्क, धरना-प्रदर्शन और जन जागरण के माध्यम से झुंझुनूं को रेलवे जंक्शन बनाने की मांग को और अधिक मजबूती से उठाया जाएगा, ताकि सरकार तक जिले की एकजुट आवाज पहुंच सके।1
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- नववर्ष पर झुंझुनू के मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों से गूंज उठा शहर झुंझुनू। नववर्ष के पहले दिन झुंझुनू शहर में धार्मिक आस्था और उल्लास का भव्य दृश्य देखने को मिला। साल की शुरुआत भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना से करने की परंपरा के चलते शहर के प्रमुख मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और पूरा शहर भक्ति, श्रद्धा व जयकारों के स्वर में डूबा नजर आया। नए साल की सुबह झुंझुनू के विभिन्न मंदिरों के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। सुबह की आरतियों में विशेष रौनक देखने को मिली। मंदिर परिसरों में घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान से नए वर्ष में सुख, शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। कई परिवारों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर नववर्ष की शुभ शुरुआत की। शहर के बगड़ रोड स्थित श्री गणेश मंदिर में नववर्ष के अवसर पर विशेष भीड़ देखने को मिली। मंदिर में सुबह करीब छह बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर सुबह तक बनी रहीं। प्रथम पूज्य देव भगवान गणेश के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने भगवान को लड्डू, दुर्वा और पुष्प अर्पित कर नए साल के लिए मंगलकामनाएं कीं। मंदिर परिसर में “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कई श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचे और सामूहिक आरती में भाग लिया। इसी तरह खेतानों के मोहल्ले में स्थित प्रसिद्ध श्याम मंदिर में भी नववर्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बाबा श्याम के दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने गुलाब के फूल, फूलों की मालाएं और प्रसाद अर्पित कर बाबा से आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं का मानना है कि नववर्ष के दिन बाबा श्याम के दर्शन करने से पूरे साल उनकी कृपा बनी रहती है। इसी आस्था के चलते झुंझुनू शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त मंदिर पहुंचे। इसके अलावा शहर के अन्य मंदिरों—जैसे हनुमान मंदिर, शिव मंदिर और दुर्गा मंदिर—में भी नववर्ष के मौके पर श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रही। सुबह की विशेष पूजा और आरती में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कई मंदिरों में फूलों और रोशनी से विशेष सजावट की गई, जिससे मंदिरों की सुंदरता और भी बढ़ गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग नए साल की शुरुआत ईश्वर के चरणों में शीश नवाकर करते नजर आए। मंदिरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों और स्वयंसेवकों द्वारा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। दर्शन को सुव्यवस्थित करने के लिए कतारों की व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष ध्यान रखा गया। कई मंदिरों में पेयजल, प्रसाद वितरण और प्राथमिक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के लिहाज से भी मंदिर परिसरों में पर्याप्त इंतजाम किए गए। स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं की सहायता करते नजर आए और भीड़ को नियंत्रित करने में सहयोग करते रहे। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। कुल मिलाकर, नववर्ष के पहले दिन झुंझुनू शहर में धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक जीवनशैली के बावजूद लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराएं आज भी उतनी ही मजबूत हैं। भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ लोगों ने नए साल की सकारात्मक, शुभ और मंगलमय शुरुआत की।1