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*खबर का असर: घायल बैल के लिए तत्काल पहुंची पशु मेडिकल यूनिट, मौके पर दिया गया उपचार* धरमजयगढ़ - बीआरसी भवन के पास पिछले चार दिनों से गंभीर रूप से घायल पड़े बैल की खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तत्काल असर देखने को मिला है। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बैल के उपचार के लिए पशु चिकित्सा मेडिकल यूनिट को मौके पर भेजा, जहां चिकित्सकीय टीम ने बैल की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल आवश्यक दवाइयां दीं और उपचार शुरू किया। घायल बैल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने पर भी विचार किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इधर, वार्ड पार्षद जानू सिदार भी मौके पर पहुंचे और घायल बैल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली तथा बैल के समुचित उपचार और आवश्यक देखभाल को लेकर पहल की। गौरतलब है कि बीआरसी भवन के कर्मचारियों द्वारा भी पिछले कई दिनों से घायल बैल के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जा रही थी। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की तत्परता से अब इस बेजुबान को उपचार मिलना शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि बैल को जल्द ही सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उसका समुचित उपचार कराया जाएगा।

19 hrs ago
user_ऋषभ तिवारी
ऋषभ तिवारी
पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
19 hrs ago

*खबर का असर: घायल बैल के लिए तत्काल पहुंची पशु मेडिकल यूनिट, मौके पर दिया गया उपचार* धरमजयगढ़ - बीआरसी भवन के पास पिछले चार दिनों से गंभीर रूप से घायल पड़े बैल की खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तत्काल असर देखने को मिला है। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बैल के उपचार के लिए पशु चिकित्सा

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मेडिकल यूनिट को मौके पर भेजा, जहां चिकित्सकीय टीम ने बैल की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल आवश्यक दवाइयां दीं और उपचार शुरू किया। घायल बैल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने पर भी विचार किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता

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के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इधर, वार्ड पार्षद जानू सिदार भी मौके पर पहुंचे और घायल बैल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली तथा बैल के समुचित उपचार और आवश्यक देखभाल को लेकर पहल की। गौरतलब है कि बीआरसी भवन के कर्मचारियों द्वारा भी पिछले कई दिनों

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से घायल बैल के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जा रही थी। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की तत्परता से अब इस बेजुबान को उपचार मिलना शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि बैल को जल्द ही सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उसका समुचित उपचार कराया जाएगा।

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  • *खबर का असर: घायल बैल के लिए तत्काल पहुंची पशु मेडिकल यूनिट, मौके पर दिया गया उपचार* धरमजयगढ़ - बीआरसी भवन के पास पिछले चार दिनों से गंभीर रूप से घायल पड़े बैल की खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तत्काल असर देखने को मिला है। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बैल के उपचार के लिए पशु चिकित्सा मेडिकल यूनिट को मौके पर भेजा, जहां चिकित्सकीय टीम ने बैल की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल आवश्यक दवाइयां दीं और उपचार शुरू किया। घायल बैल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने पर भी विचार किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इधर, वार्ड पार्षद जानू सिदार भी मौके पर पहुंचे और घायल बैल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली तथा बैल के समुचित उपचार और आवश्यक देखभाल को लेकर पहल की। गौरतलब है कि बीआरसी भवन के कर्मचारियों द्वारा भी पिछले कई दिनों से घायल बैल के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जा रही थी। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की तत्परता से अब इस बेजुबान को उपचार मिलना शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि बैल को जल्द ही सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उसका समुचित उपचार कराया जाएगा।
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    *खबर का असर: घायल बैल के लिए तत्काल पहुंची पशु मेडिकल यूनिट, मौके पर दिया गया उपचार*

धरमजयगढ़  - बीआरसी भवन के पास पिछले चार दिनों से गंभीर रूप से घायल पड़े बैल की खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तत्काल असर देखने को मिला है। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बैल के उपचार के लिए पशु चिकित्सा मेडिकल यूनिट को मौके पर भेजा, जहां चिकित्सकीय टीम ने बैल की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल आवश्यक दवाइयां दीं और उपचार शुरू किया।
घायल बैल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने पर भी विचार किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है।
इधर, वार्ड पार्षद जानू सिदार भी मौके पर पहुंचे और घायल बैल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली तथा बैल के समुचित उपचार और आवश्यक देखभाल को लेकर पहल की।
गौरतलब है कि बीआरसी भवन के कर्मचारियों द्वारा भी पिछले कई दिनों से घायल बैल के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जा रही थी। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की तत्परता से अब इस बेजुबान को उपचार मिलना शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि बैल को जल्द ही सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उसका समुचित उपचार कराया जाएगा।
    user_ऋषभ तिवारी
    ऋषभ तिवारी
    पत्रकार Udaipur (Dharamjaigarh), Raigarh•
    19 hrs ago
  • बारिश में भीगा शिक्षकों का आक्रोश: कोरबा में निकली ‘टेट मुक्ति रैली’, अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
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    बारिश में भीगा शिक्षकों का आक्रोश: कोरबा में निकली ‘टेट मुक्ति रैली’, अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
    user_Korba news
    Korba news
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    44 min ago
  • गर्लफ्रेंड ने सफेद कार पर किया था 3400 बार किस! पुलिस ने लगवाया पोछा एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे देखकर पुलिस भी चौंक गई है. दरअसल एक युवक की कार पर 3400 किसिंग के निशान मिले. इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने 5500 रुपये का चालान काट दिया है.
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    गर्लफ्रेंड ने सफेद कार पर किया था 3400 बार किस! पुलिस ने लगवाया पोछा

एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे देखकर पुलिस भी चौंक गई है. दरअसल एक युवक की कार पर 3400 किसिंग के निशान मिले. इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने 5500 रुपये का चालान काट दिया है.
    user_Kaniya Soni
    Kaniya Soni
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
  • सरकारी हैंड पंप में प्राइवेट बर लगाया गया है और यहां चारों तरफ रास्ता है आने जाने का मूवमेंट यहां पर जाली जीवन है इसको शासन प्रशासन शामिल करता हूं कि तत्काल कार्रवाईकिया जाए आप लोग देख सकते हैं चारों तरफ रास्ता है बीच में तो हेडफोन पर इसमें भी प्राइवेट स्टोर से बोर लगाया गया
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    सरकारी हैंड पंप में प्राइवेट बर लगाया गया है और यहां चारों तरफ रास्ता है आने जाने का मूवमेंट यहां पर जाली जीवन है इसको शासन प्रशासन शामिल करता हूं कि तत्काल कार्रवाईकिया जाए
आप लोग देख सकते हैं चारों तरफ रास्ता है बीच में तो हेडफोन पर इसमें भी प्राइवेट स्टोर से बोर लगाया गया
    user_Hira Ratan Sarthi
    Hira Ratan Sarthi
    Driver उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • कनकी मेला घूम कर आ रहा परिवार हुआ हादसे का शिकार मवेशी को बचाने में पलटा ऑटो
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    कनकी मेला घूम कर आ रहा परिवार हुआ हादसे का शिकार मवेशी को बचाने में पलटा ऑटो
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    23 hrs ago
  • सक्ती जिले के डोंगरीडीह महाकाल यादराम बाबा धाम में अनोखी परंपरा, यहां सोमवार नहीं रविवार को होता है जलाभिषेक, सक्ती जिले के डोंगरीडीह महाकाल यादराम बाबा धाम में अनोखी परंपरा, यहां सोमवार नहीं रविवार को होता है जलाभिषेक, सक्ती जिले के मालखरौदा स्थित डोंगरीडीह के महाकाल यादराम बाबा धाम में आस्था की अनोखी परंपरा देखने को मिली। जहां देशभर में भगवान शिव का जलाभिषेक सोमवार को किया जाता है, वहीं यहां सावन के हर रविवार को बाबा को जल चढ़ाया जाता है। सावन के अंतिम रविवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़े। भक्त भेड़ीकोना में बोरई और सोन नदी के संगम से जल भरकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचे। कई श्रद्धालु दंडवत करते हुए पहुंचे, जबकि एक कांवड़िया करीब 400 किलोमीटर दूर बैजनाथ धाम से जल लेकर महाकाल यादराम बाबा का अभिषेक करने पहुंचा। मंदिर संचालक धनीराम साहू के अनुसार रविवार को जल चढ़ाने की यह परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। यही वजह है कि सावन के प्रत्येक रविवार यहां मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है।
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    सक्ती जिले के डोंगरीडीह महाकाल यादराम बाबा धाम में अनोखी परंपरा, यहां सोमवार नहीं रविवार को होता है जलाभिषेक,
सक्ती जिले के डोंगरीडीह महाकाल यादराम बाबा धाम में अनोखी परंपरा, यहां सोमवार नहीं रविवार को होता है जलाभिषेक,
सक्ती जिले के मालखरौदा स्थित डोंगरीडीह के महाकाल यादराम बाबा धाम में आस्था की अनोखी परंपरा देखने को मिली। जहां देशभर में भगवान शिव का जलाभिषेक सोमवार को किया जाता है, वहीं यहां सावन के हर रविवार को बाबा को जल चढ़ाया जाता है। सावन के अंतिम रविवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़े।
भक्त भेड़ीकोना में बोरई और सोन नदी के संगम से जल भरकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचे। कई श्रद्धालु दंडवत करते हुए पहुंचे, जबकि एक कांवड़िया करीब 400 किलोमीटर दूर बैजनाथ धाम से जल लेकर महाकाल यादराम बाबा का अभिषेक करने पहुंचा।
मंदिर संचालक धनीराम साहू के अनुसार रविवार को जल चढ़ाने की यह परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। यही वजह है कि सावन के प्रत्येक रविवार यहां मेले जैसा माहौल देखने को मिलता है।
    user_Lala upadhyay
    Lala upadhyay
    Local News Reporter Sakti, Chhattisgarh•
    23 hrs ago
  • *शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण करने वाला आरोपी गिरफ्तार* 🚨 *खरसिया पुलिस ने आरोपी युवक को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में भेजा न्यायिक रिमांड पर* *25 अगस्त, रायगढ़* । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में जिले में महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे “अभियान संवेदना” के तहत खरसिया पुलिस ने युवती को शादी का प्रलोभन देकर लगातार शारीरिक शोषण करने के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक हरिनारायण उर्फ करण श्रीवास (21 वर्ष), खरसिया को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। *शादी का झांसा देकर बनाया शारीरिक संबंध* युवती (19 साल) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2022 से गांव के हरिनारायण श्रीवास से जान-पहचान थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। युवती के अनुसार, जब वह नाबालिग थी, 18 जनवरी 2024 को वह आरोपी के घर गई थी, जहां आरोपी ने उससे प्रेम करने और शादी करने का वादा करते हुए जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया। इसके बाद वर्ष 2025 में आरोपी उसे सोनबरसा क्षेत्र के जंगल में घुमाने के बहाने ले गया और वहां भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती के मुताबिक, 14 जून 2026 को आरोपी शादी का झांसा देकर उसे अपने रिस्तेदार के घर झारसुगुड़ा, ओडिशा ले गया, जहां भी उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को आरोपी युवती को रायगढ़ लेकर आया और किराये के मकान में रखा कुछ दिनों बाद आरोपी ने युवती से शादी करने से इनकार करते हुए उसकी जाति को लेकर अपशब्द कहे और मारपीट की। इसके बाद युवती 15 अगस्त 2026 को अपने गांव वापस आ गई। युवती ने डर के कारण घटना की जानकारी तत्काल अपनी मां को नहीं दी। 23 अगस्त 2026 को मां द्वारा पूछे जाने पर उसने पूरी घटना बताई और थाना खरसिया पहुंचकर आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। *रिपोर्ट मिलते ही आरोपी की तलाश में दी दबिश* युवती की रिपोर्ट पर थाना खरसिया में अपराध क्रमांक 445/2026, धारा 642(ड) एवं 65(1) बीएनएस एवं 4, 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने उसके गांव में दबिश दी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर थाना लाया, जहां पूछताछ के दौरान उसके द्वारा अपराध स्वीकार किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। *इनकी रही अहम भूमिका* एसडीओपी खरसिया श्री सतीश भार्गव के मार्गदर्शन पर महिला संबंधी अपराध में त्वरित कार्य कर आरोपी की पतासाजी एवं गिरफ्तारी की कार्रवाई में थाना प्रभारी खरसिया निरीक्षक सीताराम ध्रुव, उप निरीक्षक संध्या कोका, प्रधान आरक्षक रामनाथ बनर्जी एवं हमराह स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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    *शादी का झांसा देकर युवती का शारीरिक शोषण करने वाला आरोपी गिरफ्तार*
🚨 *खरसिया पुलिस ने आरोपी युवक को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में  भेजा न्यायिक रिमांड पर*
*25 अगस्त, रायगढ़* । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में जिले में महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई के लिए चलाए जा रहे “अभियान संवेदना” के तहत खरसिया पुलिस ने युवती को शादी का प्रलोभन देकर लगातार शारीरिक शोषण करने के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक हरिनारायण उर्फ करण श्रीवास (21 वर्ष), खरसिया को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
*शादी का झांसा देकर बनाया शारीरिक संबंध*
युवती (19 साल) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2022 से गांव के हरिनारायण श्रीवास से जान-पहचान थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। युवती के अनुसार, जब वह नाबालिग थी, 18 जनवरी 2024 को वह आरोपी के घर गई थी, जहां आरोपी ने उससे प्रेम करने और शादी करने का वादा करते हुए जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया।
इसके बाद वर्ष 2025 में आरोपी उसे सोनबरसा क्षेत्र के जंगल में घुमाने के बहाने ले गया और वहां भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती के मुताबिक, 14 जून 2026 को आरोपी शादी का झांसा देकर उसे अपने रिस्तेदार के घर झारसुगुड़ा, ओडिशा ले गया, जहां भी उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया।
इसके बाद 28 जुलाई 2026 को आरोपी युवती को रायगढ़ लेकर आया और किराये के मकान में रखा कुछ दिनों बाद आरोपी ने युवती से शादी करने से इनकार करते हुए उसकी जाति को लेकर अपशब्द कहे और मारपीट की। इसके बाद युवती 15 अगस्त 2026 को अपने गांव वापस आ गई।
युवती ने डर के कारण घटना की जानकारी तत्काल अपनी मां को नहीं दी। 23 अगस्त 2026 को मां द्वारा पूछे जाने पर उसने पूरी घटना बताई और थाना खरसिया पहुंचकर आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई।
*रिपोर्ट मिलते ही आरोपी की तलाश में दी दबिश*
युवती की रिपोर्ट पर थाना खरसिया में अपराध क्रमांक 445/2026, धारा 642(ड) एवं 65(1) बीएनएस एवं 4, 6 पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी की पतासाजी एवं गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने उसके गांव में दबिश दी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर थाना लाया, जहां पूछताछ के दौरान उसके द्वारा अपराध स्वीकार किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
*इनकी रही अहम भूमिका*
एसडीओपी खरसिया श्री सतीश भार्गव के मार्गदर्शन पर महिला संबंधी अपराध में त्वरित कार्य कर आरोपी की पतासाजी एवं गिरफ्तारी की कार्रवाई में थाना प्रभारी खरसिया निरीक्षक सीताराम ध्रुव, उप निरीक्षक संध्या कोका, प्रधान आरक्षक रामनाथ बनर्जी एवं हमराह स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    28 min ago
  • FIR के डेढ़ महीने बाद भी 'फरार' या 'फरमाइशी छूट'? लैलूंगा में पॉक्सो की फाइल धूल फांक रही, खाकी की सुस्ती पर उठे सवाल "13 साल की दिव्यांग नाबालिक बच्ची के साथ रेप" लैलूंगा/रायगढ़। 13 साल की दिव्यांग नाबालिग बच्ची से दरिंदगी, 10 जुलाई को दर्ज FIR (धारा 127(1), 76 BNS व 8 POCSO) और घटना को बीते 45 से ज्यादा दिन... लेकिन पुलिस की मुस्तैदी का आलम यह है कि मुख्य आरोपी श्याम लाल चौहान आज भी 'गायब' है। कानून की किताबों में POCSO मामलों को लेकर त्वरित गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दर्ज हैं, पर लैलूंगा पुलिस के कागजों में शायद 'इंतजार करो और देखो' की नई धारा जुड़ गई है। आखिर कानून के हाथ आरोपी की गर्दन तक पहुंचने में इतने ढीले क्यों पड़ रहे हैं? गोविंद मालाकार की भूमिका: मददगार या 'मार्गदर्शक'? मामले का सबसे दिलचस्प और उलझा हुआ पहलू है गोविंद मालाकार की एंट्री। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि वारदात के बाद आरोपी को गोविंद मालाकार के ठिकाने पर शरण दी गई और पिछले दरवाजे से सुरक्षित निकालने में मदद की गई। दूसरी तरफ, गोविंद के चाचा सुंदरलाल मालाकार का एक कथित वीडियो सामने लाकर यह समानांतर कहानी गढ़ी जा रही है कि भतीजे ने तो आरोपी को सीधे थाने ले जाकर 'सुपुर्द' कर दिया था। * अगर आरोपी को थाने में 'सरेंडर' करा दिया गया था, तो फिर वह पुलिस कस्टडी से कहां चला गया? * और अगर वह थाने नहीं पहुंचा, तो यह वीडियो बयान किस पटकथा का हिस्सा है? * क्या गोविंद मालाकार ने शरणदाता की भूमिका निभाई या वो वाकई एक 'जिम्मेदार नागरिक' थे? यह विरोधाभास साफ इशारा करता है कि साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जगह बयानों का गोलमाल खेल खेला जा रहा है। पंचायती इंसाफ: सिर्फ हमदर्दी के बोल या कागजी गोलमोल? दावा किया जा रहा है कि स्थानीय पंचायत पीड़ित परिवार के साथ खड़ी थी। लेकिन जब कागजी कार्रवाई का हिसाब मांगा जाता है, तो जवाब में सन्नाटा पसरा मिलता है: * लिखित बैठक और प्रस्ताव: क्या पीड़ित बच्ची के न्याय के लिए पंचायत की कोई आधिकारिक बैठक हुई या प्रस्ताव पास हुआ? * नोटिस और पंचनामा: क्या आरोपी पक्ष या उसके कथित मददगारों को कोई लिखित नोटिस दिया गया? क्या मौके का कोई कानूनी पंचनामा या पंचायत रिकॉर्ड तैयार हुआ? यदि कागजों पर कुछ दर्ज ही नहीं हुआ, तो यह पंचायती समर्थन महज मौखिक सांत्वना था या मामले को रफा-दफा करने का अनौपचारिक जरिया? जांच पर लगा 'रिश्वत और संरक्षण' का दाग डेढ़ महीने का लंबा वक्त, उलझे हुए बयान और पुलिस की खामोशी—यह सब मिलकर अब खाकी पर रिश्वतखोरी और राजनीतिक/स्थानीय संरक्षण के गंभीर आरोप मढ़ रहे हैं। एक दिव्यांग नाबालिग की चीख पर जब डेढ़ महीने तक गिरफ्तारी न हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि पुलिस आखिर किसकी ढाल बन रही है? क्या लैलूंगा पुलिस गोविंद मालाकार की भूमिका और आरोपी की फरारी के बीच के तारों को बेनकाब करने का साहस दिखाएगी, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा? जवाब का इंतजार अब सिर्फ पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखने वाले हर नागरिक को है। सारे सबूत संरक्षित रखा गया है
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    FIR के डेढ़ महीने बाद भी 'फरार' या 'फरमाइशी छूट'? लैलूंगा में पॉक्सो की फाइल धूल फांक रही, खाकी की सुस्ती पर उठे सवाल "13 साल की दिव्यांग नाबालिक बच्ची के साथ रेप"
लैलूंगा/रायगढ़। 13 साल की दिव्यांग नाबालिग बच्ची से दरिंदगी, 10 जुलाई को दर्ज FIR (धारा 127(1), 76 BNS व 8 POCSO) और घटना को बीते 45 से ज्यादा दिन... लेकिन पुलिस की मुस्तैदी का आलम यह है कि मुख्य आरोपी श्याम लाल चौहान आज भी 'गायब' है। कानून की किताबों में POCSO मामलों को लेकर त्वरित गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दर्ज हैं, पर लैलूंगा पुलिस के कागजों में शायद 'इंतजार करो और देखो' की नई धारा जुड़ गई है। आखिर कानून के हाथ आरोपी की गर्दन तक पहुंचने में इतने ढीले क्यों पड़ रहे हैं?
गोविंद मालाकार की भूमिका: मददगार या 'मार्गदर्शक'?
मामले का सबसे दिलचस्प और उलझा हुआ पहलू है गोविंद मालाकार की एंट्री। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि वारदात के बाद आरोपी को गोविंद मालाकार के ठिकाने पर शरण दी गई और पिछले दरवाजे से सुरक्षित निकालने में मदद की गई।
दूसरी तरफ, गोविंद के चाचा सुंदरलाल मालाकार का एक कथित वीडियो सामने लाकर यह समानांतर कहानी गढ़ी जा रही है कि भतीजे ने तो आरोपी को सीधे थाने ले जाकर 'सुपुर्द' कर दिया था।
* अगर आरोपी को थाने में 'सरेंडर' करा दिया गया था, तो फिर वह पुलिस कस्टडी से कहां चला गया?
* और अगर वह थाने नहीं पहुंचा, तो यह वीडियो बयान किस पटकथा का हिस्सा है?
* क्या गोविंद मालाकार ने शरणदाता की भूमिका निभाई या वो वाकई एक 'जिम्मेदार नागरिक' थे?
यह विरोधाभास साफ इशारा करता है कि साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जगह बयानों का गोलमाल खेल खेला जा रहा है।
पंचायती इंसाफ: सिर्फ हमदर्दी के बोल या कागजी गोलमोल?
दावा किया जा रहा है कि स्थानीय पंचायत पीड़ित परिवार के साथ खड़ी थी। लेकिन जब कागजी कार्रवाई का हिसाब मांगा जाता है, तो जवाब में सन्नाटा पसरा मिलता है:
* लिखित बैठक और प्रस्ताव: क्या पीड़ित बच्ची के न्याय के लिए पंचायत की कोई आधिकारिक बैठक हुई या प्रस्ताव पास हुआ?
* नोटिस और पंचनामा: क्या आरोपी पक्ष या उसके कथित मददगारों को कोई लिखित नोटिस दिया गया? क्या मौके का कोई कानूनी पंचनामा या पंचायत रिकॉर्ड तैयार हुआ?
यदि कागजों पर कुछ दर्ज ही नहीं हुआ, तो यह पंचायती समर्थन महज मौखिक सांत्वना था या मामले को रफा-दफा करने का अनौपचारिक जरिया?
जांच पर लगा 'रिश्वत और संरक्षण' का दाग
डेढ़ महीने का लंबा वक्त, उलझे हुए बयान और पुलिस की खामोशी—यह सब मिलकर अब खाकी पर रिश्वतखोरी और राजनीतिक/स्थानीय संरक्षण के गंभीर आरोप मढ़ रहे हैं। एक दिव्यांग नाबालिग की चीख पर जब डेढ़ महीने तक गिरफ्तारी न हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि पुलिस आखिर किसकी ढाल बन रही है?
क्या लैलूंगा पुलिस गोविंद मालाकार की भूमिका और आरोपी की फरारी के बीच के तारों को बेनकाब करने का साहस दिखाएगी, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा? जवाब का इंतजार अब सिर्फ पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखने वाले हर नागरिक को है।
सारे सबूत संरक्षित रखा गया है
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
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