टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठी मांग अम्बेडकरनगर। तहसील टांडा क्षेत्र में स्थित दो प्राचीन धार्मिक स्थलों—ग्राम सभा केवटला का केवटला मठ और ग्राम हरेया का प्राचीन राम चौरा मंदिर—इन दिनों जमीन विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों मामलों में एक ओर धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण का सवाल खड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ मामले में बाबा मनीष दास ने आरोप लगाया है कि हरिशंकर दास उर्फ बुलबुली बाबा द्वारा मठ की जमीन अपने नाम दर्ज कराकर गाटा संख्या 308ख, 310, 311, 782घ सहित कई अन्य गाटों की बिक्री की जा रही है। बाबा मनीष दास का कहना है कि मठ की भूमि धार्मिक एवं सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसे निजी रूप से बेचा नहीं जा सकता। उन्होंने कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि जांच के दौरान मूल विवादित गाटा संख्या का उल्लेख करने के बजाय अन्य गाटों का हवाला देकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। इस प्रकरण में लेखपाल विपिन कुमार वर्मा की भूमिका भी विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गलत रिपोर्टों के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया। बाबा मनीष दास ने यह भी आरोप लगाया कि सही रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव और बाबा मनीष दास के विरुद्ध गैरजमानती मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर ग्राम हरेया स्थित प्राचीन राम चौरा मंदिर की लगभग 34 एकड़ बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। मंदिर के महंत हरीलाल दास ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित गाटा संख्या 1040 और 1036क की भूमि पर दबंगों और भू-माफियाओं ने कब्जा कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित कर लिए हैं। शिकायत के अनुसार मंदिर परिसर और धर्मशाला तक को कब्जे और अवैध गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। महंत हरीलाल दास का आरोप है कि जब भी वे कब्जे का विरोध करते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने तहसील, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और शासन स्तर तक कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। दोनों मामलों में एक समानता यह दिखाई दे रही है कि धार्मिक संपत्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं और ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ में ग्रामीण मठ की जमीन बचाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, जबकि राम चौरा मंदिर प्रकरण में महंत भू-माफियाओं के खौफ में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इन दोनों संवेदनशील मामलों में क्या रुख अपनाता है और क्या धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों को विवादों एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से टांडा तहसील के दो मठों पर संकट: कहीं जमीन बिक्री का आरोप, कहीं भू-माफियाओं का कब्जा केवटला मठ और राम चौरा मंदिर विवाद ने खोली प्रशासनिक कार्यप्रणाली की परतें धार्मिक संपत्तियों पर बढ़ते विवाद से ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की उठी मांग अम्बेडकरनगर। तहसील टांडा क्षेत्र में स्थित दो प्राचीन धार्मिक स्थलों—ग्राम सभा केवटला का केवटला मठ और ग्राम हरेया का प्राचीन राम चौरा मंदिर—इन दिनों जमीन विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों मामलों में एक ओर धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण का सवाल खड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ मामले में बाबा मनीष दास ने आरोप लगाया है कि हरिशंकर दास उर्फ बुलबुली बाबा द्वारा मठ की जमीन अपने नाम दर्ज कराकर गाटा संख्या 308ख, 310, 311, 782घ सहित कई अन्य गाटों की बिक्री की जा रही है। बाबा मनीष दास का कहना है कि मठ की भूमि धार्मिक एवं सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिसे निजी रूप से बेचा नहीं जा सकता। उन्होंने कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि जांच के दौरान मूल विवादित गाटा संख्या का उल्लेख करने के बजाय अन्य गाटों का हवाला देकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। इस प्रकरण में लेखपाल विपिन कुमार वर्मा की भूमिका भी विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गलत रिपोर्टों के कारण विवाद लगातार बढ़ता गया। बाबा मनीष दास ने यह भी आरोप लगाया कि सही रिपोर्ट लगाने के नाम पर उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में ग्राम पंचायत सचिव और बाबा मनीष दास के विरुद्ध गैरजमानती मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर ग्राम हरेया स्थित प्राचीन राम चौरा मंदिर की लगभग 34 एकड़ बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। मंदिर के महंत हरीलाल दास ने मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित गाटा संख्या 1040 और 1036क की भूमि पर दबंगों और भू-माफियाओं ने कब्जा कर व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित कर लिए हैं। शिकायत के अनुसार मंदिर परिसर और धर्मशाला तक को कब्जे और अवैध गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया है। महंत हरीलाल दास का आरोप है कि जब भी वे कब्जे का विरोध करते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने तहसील, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और शासन स्तर तक कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। दोनों मामलों में एक समानता यह दिखाई दे रही है कि धार्मिक संपत्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं और ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केवटला मठ में ग्रामीण मठ की जमीन बचाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं, जबकि राम चौरा मंदिर प्रकरण में महंत भू-माफियाओं के खौफ में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इन दोनों संवेदनशील मामलों में क्या रुख अपनाता है और क्या धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों को विवादों एवं अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
- उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्राचीन केवटला मठ की जमीन को लेकर विवाद गरमा गया है। यहाँ एक लेखपाल पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण और बाबा मनीष दास मठ की जमीन बेचने की कथित साजिश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के माधवपुर गांव में एक स्कूल के सामने दर्जनों गोवंश के मृत शरीर मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर जयसिंहपुर पुलिस मौके पर पहुंची और इन अज्ञात मौतों की जांच में जुट गई है।4
- पंजाब में बिहार के लड़कों को बेरहमी से पीटा गया है। यह पहली बार नहीं है, बल्कि बिहार या उत्तर प्रदेश के लोगों को अक्सर छोटी गलतियों के लिए कठोर दंड मिलता है। पुलिस पर भी ऐसे मामलों में बिहार के लड़कों को दोषी ठहराने का आरोप है।1
- अंबेडकर नगर के अल्लापुर ब्लॉक के ग्राम सभा इटावा में डांस के दौरान डीजे रोहित की जान चली गई। बताया जा रहा है कि कुछ लोग डांस करते हुए बेकाबू हो गए, जिसके बाद यह घटना हुई।1
- उत्तर प्रदेश के धम्मौर में दबंगों ने एक दलित विधवा की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर निर्माण शुरू कर दिया है। स्थगन आदेश के बावजूद पुलिस सुनवाई नहीं कर रही, जिससे परेशान महिला को जातिसूचक गालियाँ और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।1
- basti pratapgarh kala ki rood jo ashok inter college se pratapgarh kala main jati hai wo rood bhout he jada kharab hai please isko thik karwaya jaye1
- सुल्तानपुर के मुडिला बाजार स्थित राम जानकी मंदिर परिसर में भव्य संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। अयोध्या और प्रयाग से पधारे कथा व्यास पंडित अमरनाथ शास्त्री व मानस माधुरी सुनीता शास्त्री के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो दिया। इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का अनुपम संगम बताया गया।1