एक ओर जहाँ आधुनिकता के इस दौर में लोग लकड़ी, स्टील और प्लास्टिक से बने तैयार फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चारपाई बुनने की पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे समय में भी कुछ बुजुर्ग कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हाथ से रस्सियों को एक-एक कर मज़बूत तरीके से बुनना आसान काम नहीं है, इसमें वर्षों का अनुभव, धैर्य और अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है। आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य से दूर होती जा रही है, जिससे यह कला संकट में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गाँवों में लगभग हर घर में चारपाई होती थी और कारीगरों की अच्छी माँग रहती थी, लेकिन आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते चलन ने इस व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके बावजूद, कुछ समर्पित कारीगर आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। चारपाई बुनने की यह कला केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की एक महत्वपूर्ण पहचान भी है, जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है।
एक ओर जहाँ आधुनिकता के इस दौर में लोग लकड़ी, स्टील और प्लास्टिक से बने तैयार फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चारपाई बुनने की पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे समय में भी कुछ बुजुर्ग कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हाथ से रस्सियों को एक-एक कर मज़बूत तरीके से बुनना आसान काम नहीं है, इसमें वर्षों का अनुभव, धैर्य और अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है। आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य से दूर होती जा
रही है, जिससे यह कला संकट में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गाँवों में लगभग हर घर में चारपाई होती थी और कारीगरों की अच्छी माँग रहती थी, लेकिन आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते चलन ने इस व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके बावजूद, कुछ समर्पित कारीगर आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। चारपाई बुनने की यह कला केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की एक महत्वपूर्ण पहचान भी है, जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है।
- सुल्तानपुर जनपद के जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुईली में रविवार को उत्साह और जनसहभागिता का अनूठा माहौल देखने को मिला। जयसिंहपुर सदर विधायक राज प्रसाद उपाध्याय (राजबाबू) की मौजूदगी में ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को पूरे ध्यान और उत्साह के साथ सुना। इस कार्यक्रम में गांव के बुजुर्ग, युवा और महिलाओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई। विधायक राज प्रसाद उपाध्याय ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम सिर्फ एक प्रसारण नहीं, बल्कि देशवासियों से सीधा संवाद है, जो समाज को नई दिशा और सकारात्मक सोच देने का कार्य करता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्र निर्माण में जुटे आम लोगों के कार्यों का जिक्र सुनकर मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। विधायक राजबाबू ने आगे कहा कि ग्राम मुईली की जागरूक जनता का यह स्नेह और सहभागिता दर्शाती है कि गांव-गांव तक विकास और जनजुड़ाव की सोच मजबूत हो रही है। इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी विधायक से बातचीत की। कार्यक्रम के समापन पर विधायक ने यह दोहराया कि “समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही हमारी प्राथमिकता है और जनता के विश्वास के साथ यह संकल्प लगातार मजबूत हो रहा है।” ग्राम मुईली में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जनभागीदारी और संवाद ही मजबूत लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।1
- एक ओर जहाँ आधुनिकता के इस दौर में लोग लकड़ी, स्टील और प्लास्टिक से बने तैयार फर्नीचर को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं चारपाई बुनने की पारंपरिक कला धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। ऐसे समय में भी कुछ बुजुर्ग कारीगर अपनी मेहनत और हुनर के दम पर इस पुरानी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हाथ से रस्सियों को एक-एक कर मज़बूत तरीके से बुनना आसान काम नहीं है, इसमें वर्षों का अनुभव, धैर्य और अथक परिश्रम की आवश्यकता होती है। आज की युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य से दूर होती जा रही है, जिससे यह कला संकट में दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गाँवों में लगभग हर घर में चारपाई होती थी और कारीगरों की अच्छी माँग रहती थी, लेकिन आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते चलन ने इस व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके बावजूद, कुछ समर्पित कारीगर आज भी अपने पुश्तैनी हुनर को बचाने के लिए जुटे हुए हैं। चारपाई बुनने की यह कला केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की एक महत्वपूर्ण पहचान भी है, जिसे संरक्षित किया जाना बेहद आवश्यक है।2
- उत्तर प्रदेश के सुगौटी दामोदरपुर ग्राम सभा में स्थानीय महिलाएं सफाईकर्मी का काम करने को मजबूर हैं, जबकि नियुक्त सफाई कर्मचारी अपनी मनमानी करते हुए कर्तव्य से विमुख नजर आ रहे हैं। महिलाओं को गांव की गंदगी साफ करते देखा गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सफाईकर्मी गांव में आते हैं, दुकान पर चाय पीकर चले जाते हैं, और इस पूरी प्रक्रिया में प्रधान भी कथित तौर पर उन्हें चाय पिलाकर रवाना कर देते हैं। प्रशासन के कानों तक जूं तक नहीं रेंग रही है, जिसके कारण पूरे गांव में गंदगी फैली हुई है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या पर तुरंत कार्रवाई करने और मनमानी करने वाले सफाई कर्मचारियों को हटाने की अपील की है। विशेष रूप से, माननीय योगी जी से इस मामले की जल्द सुनवाई और उचित समाधान निकालने का आग्रह किया गया है ताकि सुगौटी दामोदरपुर की महिलाएं इस असहनीय स्थिति से मुक्ति पा सकें।3
- मुंबई, रायगढ़ और अलीबाग क्षेत्र में, सकार कोलीवाडा के भीतर 'धनवंती' नामक नाव पर काम किया जाता था।1
- समाजवादी पार्टी के नेता जितेंद्र वर्मा उर्फ बाजीगर वर्मा के नेतृत्व में सपा कार्यकर्ताओं ने लंभुआ, सुल्तानपुर में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान, कार्यकर्ताओं ने मेला बाग से एक जुलूस निकाला और उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुँचकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के माध्यम से सपा कार्यकर्ताओं ने महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, बिजली संकट, किसानों की समस्याओं और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।1
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के सराय अकील इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया जब घर से खाना लेकर निकली एक महिला का शव एक बगीचे में संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। इस खबर के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, और यह घटना एक महिला हत्याकांड के तौर पर देखी जा रही है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।1
- उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी जी के स्पष्ट वक्तव्य के बावजूद, सुल्तानपुर के दोस्तपुर और लम्भुआ में पत्रकारों को सच दिखाने से रोका जा रहा है। आरोप है कि जिले के आला अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ दमनात्मक तरीके अपना रहे हैं, जिसके कारण 'आजादी नाम की कोई चीज नहीं' रह गई है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पत्रकार साफ तौर पर घटनाओं को प्रस्तुत करना चाहते हैं।1
- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित कचहरी परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बंदर ने एक वकील के हाथ से लगभग 2 लाख रुपये से भरा बैग छीन लिया और पेड़ पर चढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिवक्ता के साथ मौजूद व्यक्ति जैसे ही बैग लेकर बाहर निकला था, बंदर ने झपट्टा मारकर बैग छीन लिया। इसके बाद बंदर ने पेड़ पर बैठकर बैग से नोट निकालकर नीचे फेंकना शुरू कर दिया, जिसे उठाने के लिए देखते ही देखते आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और नोट लूटने की होड़ मच गई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस अनोखी घटना को प्रदेश में खराब मौसम के बीच पानी की बरसात के बाद अब 'नोटों की बरसात' के रूप में देखा जा रहा है।1