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झाड़-फूंक की आड़ में मौलवी पर गं*दी हरकत का आ*रोप! मजार में मचा बवाल, ग्रामीणों ने कर दी पि*टाई
BHOLA KUMAR
झाड़-फूंक की आड़ में मौलवी पर गं*दी हरकत का आ*रोप! मजार में मचा बवाल, ग्रामीणों ने कर दी पि*टाई
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- झाझा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन को लेकर तैयारी पूरी, निशांत कुमार का भव्य स्वागत तेतरहट मननपुर मोड़ पर। लखीसराय जिला से रिपोर्टर साहिल राज आगाज टाइम झाझा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन को लेकर तैयारी पूरी, निशांत कुमार का भव्य स्वागत तेतरहट मननपुर मोड़ पर। लखीसराय। जमुई जिले के झाझा में रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री यहां लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा के अनावरण समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और परिवहन मंत्री दामोदर रावत के भी मौजूद रहने की बात कही गई है। इधर, कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का तेतरहाट स्थित तेतरहाट मननपुर मोड़ के समीप पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान फूल-माला एवं बुके देकर उनका अभिनंदन किया गया। स्वागत कार्यक्रम में मुखिया दीपक सिंह, उमेश मालाकार, मुरारी मेहता, किशोर कुमार, रघुनाथ साव पूर्व मुखिया तेतरहाटसहित पार्टी के कई सदस्य एवं समर्थक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के आगमन और प्रतिमा अनावरण समारोह को लेकर झाझा में लोगों के बीच भी उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।4
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- बरनडी नदी में दर्दनाक हादसा: स्नान करने गए पांच बच्चे डूबे, तीन की मौत फलका थाना क्षेत्र में सुबह-सुबह हुआ दर्दनाक हादसा, तीन मासूमों की मौत से मोरसंडा गांव में पसरा मातम; ग्रामीणों ने नदी में बैरिकेडिंग और पुल निर्माण की उठाई मांग कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र के मोरसंडा पंचायत अंतर्गत मोरसंडा गांव के समीप सोमवार की सुबह बरनडी नदी में एक दर्दनाक हादसा हो गया। करीब छह बजे नदी में स्नान करने गए पांच बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांचों बच्चों को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी थी। हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मोरसंडा गांव मातम में डूब गया। मृतकों की पहचान सत्यम कुमार (11 वर्ष), पिता चिरंजीव कुमार साह, दिव्यांशु कुमार (10 वर्ष), पिता विजय कुमार तथा अमन कुमार (11 वर्ष), पिता मनोज साह के रूप में हुई है। बताया गया कि सत्यम दो भाइयों में छोटा था। अपने मासूम बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर तरफ करुण क्रंदन का माहौल बना हुआ है। वहीं नदी में डूबने के बाद सुजीत कुमार (14 वर्ष), पिता मनोज साह और आशीष कुमार (16 वर्ष), पिता अमरेश साह को स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों बच्चों के सुरक्षित बचने से जहां लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे बरनडी नदी में स्नान करने के बाद नदी के समीप स्थित शिव मंदिर में जल चढ़ाकर पूजा करने जाने वाले थे। इसी दौरान यह दर्दनाक हादसा हो गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंदिर में पूजा करने की तैयारी कर रहे बच्चों के परिवारों को कुछ ही देर में ऐसी हृदयविदारक खबर सुननी पड़ेगी। घटना की सूचना मिलते ही फलका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे ने खड़े किए कई सवाल बरनडी नदी में आए दिन लोगों के स्नान और अन्य कार्यों के लिए पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के खतरनाक और गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि क्षेत्र में आवागमन और सुरक्षा की दृष्टि से बरनडी नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से नदी पर पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। तीन मासूमों की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं के बाद सिर्फ संवेदना जताई जाती रहेगी और नदी की सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी? मोरसंडा गांव में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन हादसे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नदी में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने मासूम बच्चों को इस तरह न खोना पड़े।1
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