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भाजपा नेता अश्विनी चौबे के घर पर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उनका बयान लेने के लिए मीडिया पहुँच गई। इस दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अश्विनी चौबे ने बिहार पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि जिस लड़के ने अपनी पिस्तौल फेंक दी, वह आरोपी कैसे हो सकता है, जबकि बिहार पुलिस उसे आरोपी बताने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में भाजपा नेता अश्विनी चौबे ने सम्राट चौधरी को भी जमकर भला-बुरा कहा। उन्होंने भरत तिवारी का समर्थन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति जनता के दुख-दर्द को समझता है और पीने के पानी के लिए आवाज उठाता है, वह आखिर आरोपी कैसे हो सकता है।

2 hrs ago
user_Vimal Kashyap
Vimal Kashyap
Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
2 hrs ago

भाजपा नेता अश्विनी चौबे के घर पर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उनका बयान लेने के लिए मीडिया पहुँच गई। इस दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अश्विनी चौबे ने बिहार पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि जिस लड़के ने अपनी पिस्तौल फेंक दी, वह आरोपी कैसे हो सकता है, जबकि बिहार पुलिस उसे आरोपी बताने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में भाजपा नेता अश्विनी चौबे ने सम्राट चौधरी को भी जमकर भला-बुरा कहा। उन्होंने भरत तिवारी का समर्थन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति जनता के दुख-दर्द को समझता है और पीने के पानी के लिए आवाज उठाता है, वह आखिर आरोपी कैसे हो सकता है।

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  • राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) धौलपुर के अध्यक्ष संजीव मागो के मार्गदर्शन में, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव और एडीजे रेखा यादव ने गुरुवार को महिला अधिकारिता विभाग द्वारा निर्भया योजना के तहत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, सचिव ने केंद्र में महिलाओं एवं बालिकाओं को प्रदान की जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आगंतुक पंजी, केस रजिस्टर, परामर्श रजिस्टर और चिकित्सा सहायता से संबंधित अभिलेखों की जांच कर लंबित एवं निस्तारित प्रकरणों की समीक्षा की, साथ ही यह निर्देश दिए कि प्रत्येक मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए। रेखा यादव ने केंद्र में उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सहायता, विधिक परामर्श, निःशुल्क अधिवक्ता, अस्थायी आश्रय, पुलिस समन्वय एवं एफआईआर सहायता जैसी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया, जिसमें उन्होंने स्वच्छता, सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि पीड़िताओं की गरिमा एवं निजता का हर हाल में संरक्षण किया जाए। निरीक्षण के समय केंद्र में चार बालिकाएं एवं एक महिला मौजूद मिलीं, जिनसे सचिव ने व्यक्तिगत रूप से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने उन्हें सकारात्मक जीवन अपनाने, परिवार के साथ समन्वय बनाकर रहने और किसी भी प्रकार के गलत कार्य से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, उन्हें उनके विधिक अधिकारों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक शिप्रा पचौरी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्टेनो राहुल डंडौतिया सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
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    राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) धौलपुर के अध्यक्ष संजीव मागो के मार्गदर्शन में, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव और एडीजे रेखा यादव ने गुरुवार को महिला अधिकारिता विभाग द्वारा निर्भया योजना के तहत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर का आकस्मिक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान, सचिव ने केंद्र में महिलाओं एवं बालिकाओं को प्रदान की जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आगंतुक पंजी, केस रजिस्टर, परामर्श रजिस्टर और चिकित्सा सहायता से संबंधित अभिलेखों की जांच कर लंबित एवं निस्तारित प्रकरणों की समीक्षा की, साथ ही यह निर्देश दिए कि प्रत्येक मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए। रेखा यादव ने केंद्र में उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सहायता, विधिक परामर्श, निःशुल्क अधिवक्ता, अस्थायी आश्रय, पुलिस समन्वय एवं एफआईआर सहायता जैसी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया, जिसमें उन्होंने स्वच्छता, सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि पीड़िताओं की गरिमा एवं निजता का हर हाल में संरक्षण किया जाए।

निरीक्षण के समय केंद्र में चार बालिकाएं एवं एक महिला मौजूद मिलीं, जिनसे सचिव ने व्यक्तिगत रूप से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने उन्हें सकारात्मक जीवन अपनाने, परिवार के साथ समन्वय बनाकर रहने और किसी भी प्रकार के गलत कार्य से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, उन्हें उनके विधिक अधिकारों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक शिप्रा पचौरी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के स्टेनो राहुल डंडौतिया सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • भरतपुर जिले के सेवर थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात धौलपुर से जयपुर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला यात्री की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हुए। दुर्घटना के समय बस में करीब 40 से 45 यात्री सवार थे। हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों के साथ पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। यह हादसा मंगलवार रात करीब 11 बजे गांव दारापुर स्थित पंजाबी नगला के पास हुआ था। सूचना मिलते ही सेवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायल यात्रियों को एंबुलेंस की मदद से आरबीएम अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में उपचार के दौरान धौलपुर जिले के मानपुर निवासी गुड्डी देवी को मृत घोषित कर दिया गया। बुधवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतका के बेटे ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि बस में सफर के दौरान ड्राइवर और कंडक्टर के बीच किराए को लेकर लगातार विवाद चल रहा था। बेटे का आरोप है कि दोनों ने शराब पी रखी थी और उनकी आपसी कहासुनी के बीच चालक ने लापरवाही से बस चलाते हुए नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण बस पलट गई। उसने यह भी बताया कि उसकी मां धौलपुर से जयपुर इलाज के लिए जा रही थीं, लेकिन इस हादसे में उनकी जान चली गई।
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    भरतपुर जिले के सेवर थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात धौलपुर से जयपुर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला यात्री की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल हुए। दुर्घटना के समय बस में करीब 40 से 45 यात्री सवार थे। हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद स्थानीय लोगों के साथ पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

यह हादसा मंगलवार रात करीब 11 बजे गांव दारापुर स्थित पंजाबी नगला के पास हुआ था। सूचना मिलते ही सेवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायल यात्रियों को एंबुलेंस की मदद से आरबीएम अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में उपचार के दौरान धौलपुर जिले के मानपुर निवासी गुड्डी देवी को मृत घोषित कर दिया गया। बुधवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

मृतका के बेटे ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने बताया कि बस में सफर के दौरान ड्राइवर और कंडक्टर के बीच किराए को लेकर लगातार विवाद चल रहा था। बेटे का आरोप है कि दोनों ने शराब पी रखी थी और उनकी आपसी कहासुनी के बीच चालक ने लापरवाही से बस चलाते हुए नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण बस पलट गई। उसने यह भी बताया कि उसकी मां धौलपुर से जयपुर इलाज के लिए जा रही थीं, लेकिन इस हादसे में उनकी जान चली गई।
    user_TNANEWS24 Rajkumar Sain
    TNANEWS24 Rajkumar Sain
    Carpenter सेपऊ, धौलपुर, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • अंबाह नगर में हीरो माता मंदिर और श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर लंबे समय से जारी जलभराव की समस्या को लेकर गुरुवार को स्थानीय श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। मंदिर परिसर में जुटे लोगों ने अंबाह नगर पालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि सड़क पर लगातार पानी भरे रहने से मंदिर आने वाले भक्तों, राहगीरों और श्मशान घाट जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है, और कई शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इस मामले की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें तीन दिन के भीतर जल निकासी तथा सड़क की समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया। इस दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अनुपस्थित थे, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित तीन दिन में समस्या हल नहीं हुई तो जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही नगर पालिका प्रशासन की होगी।
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    अंबाह नगर में हीरो माता मंदिर और श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर लंबे समय से जारी जलभराव की समस्या को लेकर गुरुवार को स्थानीय श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। मंदिर परिसर में जुटे लोगों ने अंबाह नगर पालिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं ने बताया कि सड़क पर लगातार पानी भरे रहने से मंदिर आने वाले भक्तों, राहगीरों और श्मशान घाट जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है, और कई शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

इस मामले की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें तीन दिन के भीतर जल निकासी तथा सड़क की समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया। इस दौरान लोगों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अनुपस्थित थे, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि निर्धारित तीन दिन में समस्या हल नहीं हुई तो जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही नगर पालिका प्रशासन की होगी।
    user_Aditya Sarwan
    Aditya Sarwan
    Local News Reporter अंबाह, मुरैना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • धौलपुर जिले के राजाखेड़ा कस्बे में सोमवार को हुई तीन अलग-अलग फायरिंग की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है। इन घटनाओं के बाद से ही स्थानीय व्यापारियों और आमजन में असुरक्षा की भावना व्याप्त है। बदमाशों की गिरफ्तारी को लेकर व्यापार मंडल ने पुलिस और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बदमाशों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने गुरुवार सुबह पुलिस चौकी टाउन के पास इकट्ठा होकर स्वेच्छिक रूप से अपने बाजार बंद रखे। इसके बाद उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रिंस जैन ने बताया कि व्यापारियों ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि बाइक सवार अज्ञात बदमाश अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद न होने के कारण ऐसे आपराधिक तत्व खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। व्यापारियों ने प्रशासन से तुरंत बदमाशों को पकड़ने और कस्बे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
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    धौलपुर जिले के राजाखेड़ा कस्बे में सोमवार को हुई तीन अलग-अलग फायरिंग की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और भय का माहौल पैदा कर दिया है। इन घटनाओं के बाद से ही स्थानीय व्यापारियों और आमजन में असुरक्षा की भावना व्याप्त है। बदमाशों की गिरफ्तारी को लेकर व्यापार मंडल ने पुलिस और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बदमाशों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने गुरुवार सुबह पुलिस चौकी टाउन के पास इकट्ठा होकर स्वेच्छिक रूप से अपने बाजार बंद रखे। इसके बाद उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रिंस जैन ने बताया कि व्यापारियों ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि बाइक सवार अज्ञात बदमाश अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद न होने के कारण ऐसे आपराधिक तत्व खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। व्यापारियों ने प्रशासन से तुरंत बदमाशों को पकड़ने और कस्बे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
    user_Jaypal Singh
    Jaypal Singh
    Local News Reporter राजाखेड़ा, धौलपुर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • पत्रकार श्रीकांत प्रत्युज ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रीकांत प्रत्युज का कहना है कि इस पूरे मामले के असली खलनायक एसपी हैं। उन्होंने दावा किया कि गोली चलाने वाले मुख्य आरोपी नहीं हैं, बल्कि असली दोषी वह व्यक्ति है जिसने ट्रिगर दबाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही उन्होंने इस घटना में एसडीएम की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए कहा कि असली लड़ाई उसी की थी और वे इस मामले को लेकर एसडीएम से मिलने जाएंगे। श्रीकांत प्रत्युज ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार भरत तिवारी एनकाउंटर के बारे में सुना, तो वे भरत से पूरी तरह अनजान थे। हालांकि, जैसे-जैसे उनके पास वीडियो आने लगे और उन्होंने उन्हें देखना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि भरत एक क्रांतिकारी लड़का था। श्रीकांत प्रत्युज ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को क्यों मारा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार के पीछे किसी अन्य भ्रष्टाचार का हाथ है, जिसकी पुष्टि उन्होंने खुद की है।
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    पत्रकार श्रीकांत प्रत्युज ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रीकांत प्रत्युज का कहना है कि इस पूरे मामले के असली खलनायक एसपी हैं। उन्होंने दावा किया कि गोली चलाने वाले मुख्य आरोपी नहीं हैं, बल्कि असली दोषी वह व्यक्ति है जिसने ट्रिगर दबाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही उन्होंने इस घटना में एसडीएम की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए कहा कि असली लड़ाई उसी की थी और वे इस मामले को लेकर एसडीएम से मिलने जाएंगे।

श्रीकांत प्रत्युज ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार भरत तिवारी एनकाउंटर के बारे में सुना, तो वे भरत से पूरी तरह अनजान थे। हालांकि, जैसे-जैसे उनके पास वीडियो आने लगे और उन्होंने उन्हें देखना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि भरत एक क्रांतिकारी लड़का था। श्रीकांत प्रत्युज ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को क्यों मारा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार के पीछे किसी अन्य भ्रष्टाचार का हाथ है, जिसकी पुष्टि उन्होंने खुद की है।
    user_Vimal Kashyap
    Vimal Kashyap
    Artist धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजाखेड़ा क्षेत्र की आशा सहयोगिनियों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी श्रीमती सुशीला मीणा को ज्ञापन सौंपकर बजट 2026-27 में घोषित मानदेय वृद्धि के आदेश जारी करने तथा बकाया मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की। आशा सहयोगिनियों ने बताया कि राज्य बजट 2026-27 में 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसके आदेश जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही, उन्हें प्रत्येक माह की 5 तारीख तक मिलने वाला निर्धारित मानदेय भी समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आशा सहयोगिनियों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले बजट में भी मानदेय वृद्धि के आदेश करीब तीन माह की देरी से जारी हुए थे। वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह ₹4,508 मानदेय दिया जा रहा है, जबकि संशोधित दर के अनुसार प्रतिमाह ₹4,959 मिलना चाहिए। उन्होंने बकाया अंतर राशि (एरियर) का भुगतान भी जल्द कराने की मांग की। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि आशा सॉफ्टवेयर के माध्यम से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि किस्तों में जारी की जा रही है, जिससे उन्हें पूरा भुगतान समय पर प्राप्त नहीं हो पाता। उन्होंने प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान करने की मांग करते हुए बताया कि मार्च 2026 का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन फरवरी 2026 की प्रोत्साहन राशि अभी भी लंबित है। आशा सहयोगिनियों ने सभी लंबित बिलों का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की। इस दौरान चंद्रकला, सरिता परमार, आशा पचौरी, प्रीति, लाडो बघेल, ममता देवी, पार्वती, गीता श्रीवास्तव, मुन्नी देवी, राधा श्रीवास्तव, मीरा रानी, मधु गुप्ता, मालती और सुनीता सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां मौजूद रहीं।
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    राजाखेड़ा क्षेत्र की आशा सहयोगिनियों ने बुधवार को उपखंड अधिकारी श्रीमती सुशीला मीणा को ज्ञापन सौंपकर बजट 2026-27 में घोषित मानदेय वृद्धि के आदेश जारी करने तथा बकाया मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की। आशा सहयोगिनियों ने बताया कि राज्य बजट 2026-27 में 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसके आदेश जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही, उन्हें प्रत्येक माह की 5 तारीख तक मिलने वाला निर्धारित मानदेय भी समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आशा सहयोगिनियों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले बजट में भी मानदेय वृद्धि के आदेश करीब तीन माह की देरी से जारी हुए थे। वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह ₹4,508 मानदेय दिया जा रहा है, जबकि संशोधित दर के अनुसार प्रतिमाह ₹4,959 मिलना चाहिए। उन्होंने बकाया अंतर राशि (एरियर) का भुगतान भी जल्द कराने की मांग की।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि आशा सॉफ्टवेयर के माध्यम से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि किस्तों में जारी की जा रही है, जिससे उन्हें पूरा भुगतान समय पर प्राप्त नहीं हो पाता। उन्होंने प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान करने की मांग करते हुए बताया कि मार्च 2026 का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन फरवरी 2026 की प्रोत्साहन राशि अभी भी लंबित है। आशा सहयोगिनियों ने सभी लंबित बिलों का शीघ्र भुगतान कराने की मांग की। इस दौरान चंद्रकला, सरिता परमार, आशा पचौरी, प्रीति, लाडो बघेल, ममता देवी, पार्वती, गीता श्रीवास्तव, मुन्नी देवी, राधा श्रीवास्तव, मीरा रानी, मधु गुप्ता, मालती और सुनीता सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां मौजूद रहीं।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • जनता का धैर्य टूट रहा है, और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। विकास के दावों के बीच बढ़ता जनाक्रोश अब व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन समय रहते नहीं चेते, तो जनता का यह मौन विद्रोह सत्ता पर भारी पड़ सकता है। लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास होता है; जब यह विश्वास कमजोर होता है, तो विरोध केवल नारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेने लगता है। आज यह तस्वीर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में उभर रही है। कहीं युवा सड़क निर्माण की मांग को लेकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो कहीं ग्रामीण धरने पर बैठे हैं, और लोग पानी, बिजली तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसे केवल विकास कार्यों में देरी नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास का संकेत माना जा रहा है। इन आंदोलनों की अगुवाई युवा पीढ़ी कर रही है, जो बदलाव चाहती है, सवाल पूछती है और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है। जब ज्ञापन, आवेदन, जनसुनवाई और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिलता, तब आंदोलन एक मजबूरी बन जाता है। ऐसे आंदोलनों को मात्र विरोध समझकर नजरअंदाज करना दूरदर्शिता नहीं होगी। सरकारी योजनाओं की घोषणा तो तेजी से होती है, लेकिन उनका जमीनी क्रियान्वयन अक्सर निराशाजनक रहता है। ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते, अधूरे निर्माण महीनों-वर्षों तक लटके रहते हैं, और जो कार्य पूरे होते भी हैं, उनकी गुणवत्ता पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में आ जाती है। इससे जनता में यह धारणा बनती है कि जवाबदेही की कोई व्यवस्था नहीं बची है। भ्रष्टाचार भी इस अविश्वास को और गहरा कर रहा है। यदि एक नागरिक को अपनी जायज मांग मनवाने के लिए धरना देना पड़े, सड़क पर उतरना पड़े या अनूठे प्रदर्शन करने पड़ें, तो यह केवल उसकी पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का प्रमाण है। जनप्रतिनिधियों को भी आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि जनता अब केवल चुनावी वादों पर नहीं, बल्कि पूरे पाँच वर्षों के परिणामों पर हिसाब मांगती है। आज का मतदाता जागरूक है और उसकी चुप्पी भी लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। सरकार और प्रशासन के पास अभी भी इस स्थिति को सुधारने का अवसर है। अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई हो, लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए, तथा जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। ये कदम जनता का विश्वास वापस दिला सकते हैं। अन्यथा, यह बढ़ता असंतोष कल बड़े जनविद्रोह का रूप ले सकता है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब जनता का धैर्य टूटता है, तो बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है, और उसकी अदालत में केवल वादे नहीं, बल्कि काम बोलते हैं।
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    जनता का धैर्य टूट रहा है, और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। विकास के दावों के बीच बढ़ता जनाक्रोश अब व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि जनप्रतिनिधि और प्रशासन समय रहते नहीं चेते, तो जनता का यह मौन विद्रोह सत्ता पर भारी पड़ सकता है। लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास होता है; जब यह विश्वास कमजोर होता है, तो विरोध केवल नारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेने लगता है। आज यह तस्वीर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में उभर रही है।

कहीं युवा सड़क निर्माण की मांग को लेकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं, तो कहीं ग्रामीण धरने पर बैठे हैं, और लोग पानी, बिजली तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसे केवल विकास कार्यों में देरी नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास का संकेत माना जा रहा है। इन आंदोलनों की अगुवाई युवा पीढ़ी कर रही है, जो बदलाव चाहती है, सवाल पूछती है और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है। जब ज्ञापन, आवेदन, जनसुनवाई और अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिलता, तब आंदोलन एक मजबूरी बन जाता है। ऐसे आंदोलनों को मात्र विरोध समझकर नजरअंदाज करना दूरदर्शिता नहीं होगी।

सरकारी योजनाओं की घोषणा तो तेजी से होती है, लेकिन उनका जमीनी क्रियान्वयन अक्सर निराशाजनक रहता है। ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते, अधूरे निर्माण महीनों-वर्षों तक लटके रहते हैं, और जो कार्य पूरे होते भी हैं, उनकी गुणवत्ता पहली बारिश में ही सवालों के घेरे में आ जाती है। इससे जनता में यह धारणा बनती है कि जवाबदेही की कोई व्यवस्था नहीं बची है। भ्रष्टाचार भी इस अविश्वास को और गहरा कर रहा है। यदि एक नागरिक को अपनी जायज मांग मनवाने के लिए धरना देना पड़े, सड़क पर उतरना पड़े या अनूठे प्रदर्शन करने पड़ें, तो यह केवल उसकी पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का प्रमाण है। जनप्रतिनिधियों को भी आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि जनता अब केवल चुनावी वादों पर नहीं, बल्कि पूरे पाँच वर्षों के परिणामों पर हिसाब मांगती है। आज का मतदाता जागरूक है और उसकी चुप्पी भी लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।

सरकार और प्रशासन के पास अभी भी इस स्थिति को सुधारने का अवसर है। अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए, भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई हो, लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए, तथा जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। ये कदम जनता का विश्वास वापस दिला सकते हैं। अन्यथा, यह बढ़ता असंतोष कल बड़े जनविद्रोह का रूप ले सकता है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब जनता का धैर्य टूटता है, तो बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है, और उसकी अदालत में केवल वादे नहीं, बल्कि काम बोलते हैं।
    user_User7480
    User7480
    Ambah, Morena•
    5 hrs ago
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