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अंबेडकरनगर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट होने से अचानक हड़कंप मच गया। अस्पताल के एमसीबी बॉक्स से अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद वहां मौजूद मरीजों के बीच भारी अफरा-तफरी फैल गई।
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अंबेडकरनगर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट होने से अचानक हड़कंप मच गया। अस्पताल के एमसीबी बॉक्स से अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद वहां मौजूद मरीजों के बीच भारी अफरा-तफरी फैल गई।
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- महाराष्ट्र में एफडीए (FDA) छापे की अफवाह सुनते ही डेयरी संचालकों द्वारा सड़क पर हजारों लीटर दूध बहाने का सनसनीखेज सच सामने आया है। दरअसल, ये डेयरी वाले सिंथेटिक दूध बनाने के काले कारोबार में लिप्त थे। पोल खुलने के डर से उन्होंने हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहा दिया, ताकि वे पकड़े न जा सकें। ये मिलावटखोर अब तक बाजार में 2.3 करोड़ लीटर फर्जी दूध बेच चुके हैं। इस सिंथेटिक दूध को बनाने में डिटर्जेंट पाउडर और सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे कैंसर पैदा करने वाले घातक केमिकल मिलाए जा रहे थे। यह लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले तथाकथित "अन्नदाता और दूध-दाता" का असली चेहरा है। दूध में की जा रही यह मिलावट लोगों के लिए एक धीमा जहर साबित हो रही है और हजारों बीमारियों की वजह बन रही है। इस घिनौने खेल के खिलाफ खड़े होने वाले महाराष्ट्र एफडीए के अधिकारी तुकाराम मुंडे जी जैसे अधिकारियों को पूरा समर्थन मिल रहा है।1
- अंबेडकरनगर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट होने से अचानक हड़कंप मच गया। अस्पताल के एमसीबी बॉक्स से अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद वहां मौजूद मरीजों के बीच भारी अफरा-तफरी फैल गई।1
- अम्बेडकर नगर के अकबरपुर नगर पालिका की घोर लापरवाही शहजादपुर के तिरंगा चौराहा नेकी घर के बगल वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सांसों पर भारी पड़ रही है। इस इलाके में खुले में ही पूरे शहर का कचरा डंप कर कूड़े का पहाड़ बनाया जा रहा है, जिसे बाद में यहीं से गाड़ियों में लोड करके बाहर ले जाया जाता है। इस व्यवस्था के कारण चारों तरफ घुटन भरी दुर्गंध फैल गई है और मक्खियों के जबरदस्त हमले ने स्थानीय नागरिकों का सांस लेना भी मुश्किल कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिन-रात फैलती इस बदबू ने उनका जीना पूरी तरह दूभर कर दिया है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि लोगों का घरों के अंदर बैठना मुश्किल हो गया है और बच्चों को स्कूल भेजना एक सजा बन चुका है। मुख्य मार्ग से गुजरने वाले आम राहगीर और स्कूली बच्चे लगातार इस जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। गंदगी, कीड़े-मकोड़े और लगातार बढ़ते प्रदूषण ने इस पूरे इलाके को गंभीर बीमारियों का अड्डा बना दिया है। स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले प्रशासन पर स्थानीय लोग तीखा गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कूड़े के इस अस्थायी कबाड़खाने ने इलाके की गरिमा और जनता के स्वास्थ्य को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। प्रशासन से मांग की गई है कि इस डंपिंग साइट को तुरंत यहां से हटाया जाए, कूड़े के लिए कोई वैकल्पिक स्थायी जगह तय की जाए और पूरे इलाके की सघन सफाई कराई जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह लापरवाही पूरे शहर के लिए एक बहुत बड़ी समस्या का रूप ले लेगी।3
- अंबेडकर नगर के सम्मन पुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कुर्की बाजार के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ है, जहां सवारियों से भरी एक सीएनजी ऑटो रिक्शा सड़क के किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्राली में जा घुसी। इस हादसे के कारण ऑटो सवार करीब 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और सभी यात्रियों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि दुर्घटना के वक्त ऑटो रिक्शा चालक मोबाइल पर बात कर रहा था। मोबाइल पर बात करने के चक्कर में उसका ऑटो से नियंत्रण खो गया और अनियंत्रित गाड़ी सीधे जाकर सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्राली में घुस गई।1
- पहले और अब की धान रोपाई में आए मजेदार अंतर को दर्शाता हुआ एक नया कॉमेडी वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में धान रोपाई के इसी बदलाव को बेहद हंसाने वाले अंदाज में पेश किया गया है।1
- अंबेडकर नगर जिला अस्पताल के एक्सरे विभाग के पास अचानक एक इलेक्ट्रिक एमसीबी से धुआं निकलने लगा और वह आग में तब्दील हो गया। इस दौरान वहां एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के लिए बड़ी संख्या में मरीज मौजूद थे, जिससे वहां हड़कंप मच गया और लोग भागते हुए नजर आए। एमसीबी में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी इस आग पर वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए काबू पा लिया। इस घटना के बाद अब अस्पताल में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।1
- उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां बौंडी थाना क्षेत्र में एक मगरमच्छ ने 12 साल के बच्चे को जिंदा खा लिया। यह घटना तब हुई जब धान की रोपाई के बाद बच्चा नदी में हाथ-पैर धोने के लिए गया था। इसी दौरान नदी में घात लगाए मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया और उसे अपने जबड़े में दबोच लिया। मगरमच्छ की गिरफ्त से खुद को छुड़ाने के लिए बच्चे ने काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन मगरमच्छ ने उसे नहीं छोड़ा। उसने दो-तीन बार बच्चे को उछालकर पानी में पटका और फिर उसे गहरे पानी में खींच ले गया, जहां देखते ही देखते मगरमच्छ बच्चे को निगल गया।1