जमीन की नकल अब जेब पर पड़ेगी भारी! ₹1 की कॉपी के लिए ₹100 का प्रस्ताव, तत्काल नकल पर ₹5 हजार तक शुल्क Rewari Update News हरियाणा में जमीन की रजिस्ट्री, जमाबंदी, कोर्ट केस और निशानदेही से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित नकल लेने वालों को आने वाले समय में बड़ा झटका लग सकता है। राजस्व विभाग ने नकल शुल्क में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार करते हुए प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जो नकल अभी महज 1 रुपये में उपलब्ध हो जाती है, उसके लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित करने की तैयारी है। वहीं सामान्य दस्तावेजों की प्रति लेने के लिए भी पेज के हिसाब से शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। वर्तमान व्यवस्था में एक पेज की नकल के लिए करीब 6 रुपये और दो पेज तक 3 रुपये प्रति पेज तथा दो से अधिक पेज के लिए 2 रुपये प्रति पेज शुल्क लिया जाता है, जबकि प्रस्तावित दरों में प्रत्येक पेज के लिए 10 रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। सबसे अधिक चर्चा तत्काल नकल की प्रस्तावित नई व्यवस्था को लेकर है, क्योंकि अभी तत्काल नकल के लिए कोई अलग शुल्क निर्धारित नहीं है, लेकिन नए प्रस्ताव में इसके लिए सीधे 5,000 रुपये तक शुल्क लेने की योजना बताई गई है। राजस्व विभाग की ओर से इस संबंध में सभी डीसी को पत्र भेजकर उनकी राय और सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद जिलों की तहसीलों एवं उप-तहसीलों से भी रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार की दलील है कि राजस्व कार्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते हैं जिनमें दस्तावेजों की नकल की वास्तविक आवश्यकता नहीं होती, जिससे कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार बढ़ता है और कार्यालयी प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। विभाग का मानना है कि शुल्क में संशोधन से अनावश्यक आवेदनों में कमी आएगी और जरूरतमंद लोग ही आवश्यक दस्तावेजों के लिए आवेदन करेंगे। हालांकि प्रस्ताव सामने आते ही वकीलों, किसानों और प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारियों के बीच इसे लेकर असंतोष भी देखने को मिल रहा है। उनका तर्क है कि जमीन से संबंधित मामलों में नकल कोई वैकल्पिक दस्तावेज नहीं, बल्कि कई प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य रिकॉर्ड होती है। किसान को बैंक ऋण, फसल संबंधी मामलों, मुआवजे, सरकारी योजनाओं, जमीन की खरीद-फरोख्त या पारिवारिक विवादों में बार-बार राजस्व रिकॉर्ड की प्रतियां निकालनी पड़ती हैं। ऐसे में शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल सकती है। प्रस्ताव में तत्काल नकल के लिए 5,000 रुपये की राशि को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी जमीन की बिक्री, बैंक संबंधी प्रक्रिया या कानूनी मामले में दस्तावेज तत्काल चाहिए हों तो इतनी बड़ी रकम देना आम व्यक्ति के लिए मुश्किल हो सकता है। प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल शुल्क बढ़ाने के बजाय सरकार को राजस्व कार्यालयों में सेवाओं की गति और डिजिटल सुविधाओं को बेहतर करना चाहिए। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो जाएं और नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए तो कार्यालयों में भीड़ और कर्मचारियों पर दबाव दोनों कम हो सकते हैं। प्रस्तावित बदलाव में सामान्य नकल के अलावा पेजवार शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई दे रही है। एक पेज की प्रति के लिए प्रस्तावित शुल्क 10 रुपये बताया गया है, जबकि तत्काल सेवा के लिए अलग से 5,000 रुपये तक की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। यानी यदि प्रस्ताव लागू होता है तो सामान्य नकल की तुलना में तत्काल सेवा का खर्च कई गुना अधिक होगा। राजस्व विभाग की ओर से फिलहाल इसे अंतिम निर्णय के रूप में लागू नहीं किया गया है, बल्कि सभी जिलों से सुझाव मांगे गए हैं। ऐसे में अंतिम शुल्क क्या होगा और किन दस्तावेजों पर कितनी दर लागू होगी, यह सरकार की आगामी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा। विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नकल शुल्क में बदलाव का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अनावश्यक आवेदनों को नियंत्रित करना और राजस्व कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना है। दूसरी ओर किसानों और आम नागरिकों की मांग है कि किसी भी तरह की शुल्क वृद्धि लागू करने से पहले जमीन से जुड़े वास्तविक जरूरतमंद लोगों की परेशानी को ध्यान में रखा जाए। खासकर छोटे किसानों, ग्रामीण परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ऐसी सेवाओं पर भारी शुल्क अतिरिक्त बोझ बन सकता है। अब निगाहें जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। अगर प्रस्तावित दरों को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी नकल हासिल करने की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है और सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्हें बार-बार जमाबंदी, रजिस्ट्री, कोर्ट केस या अन्य राजस्व दस्तावेजों की प्रतियां निकालने की जरूरत पड़ती है।
जमीन की नकल अब जेब पर पड़ेगी भारी! ₹1 की कॉपी के लिए ₹100 का प्रस्ताव, तत्काल नकल पर ₹5 हजार तक शुल्क Rewari Update News हरियाणा में जमीन की रजिस्ट्री, जमाबंदी, कोर्ट केस और निशानदेही से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित नकल लेने वालों को आने वाले समय में बड़ा झटका लग सकता है। राजस्व विभाग ने नकल शुल्क में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार करते हुए प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जो नकल अभी महज 1 रुपये में उपलब्ध हो जाती है, उसके लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित करने की तैयारी है। वहीं सामान्य दस्तावेजों की प्रति लेने के लिए भी पेज के हिसाब से शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। वर्तमान व्यवस्था में एक पेज की नकल के लिए करीब 6 रुपये और दो पेज तक 3 रुपये प्रति पेज तथा दो से अधिक पेज के लिए 2 रुपये प्रति पेज शुल्क लिया जाता है, जबकि प्रस्तावित दरों में प्रत्येक पेज के लिए 10 रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। सबसे अधिक चर्चा तत्काल नकल की प्रस्तावित नई व्यवस्था को लेकर है, क्योंकि अभी तत्काल नकल के लिए कोई अलग शुल्क निर्धारित नहीं है, लेकिन नए प्रस्ताव में इसके लिए सीधे 5,000 रुपये तक शुल्क लेने की योजना बताई गई है। राजस्व विभाग की ओर से इस संबंध में सभी डीसी को पत्र भेजकर उनकी राय और सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद जिलों की तहसीलों एवं उप-तहसीलों से भी रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार की दलील है कि राजस्व कार्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते हैं जिनमें दस्तावेजों की नकल की वास्तविक आवश्यकता नहीं होती, जिससे कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार बढ़ता है और कार्यालयी प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। विभाग का मानना है कि शुल्क में संशोधन से अनावश्यक आवेदनों में कमी आएगी और जरूरतमंद लोग ही आवश्यक दस्तावेजों के लिए आवेदन करेंगे। हालांकि प्रस्ताव सामने आते ही वकीलों, किसानों और प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारियों के बीच इसे लेकर असंतोष भी देखने को मिल रहा है। उनका तर्क है कि जमीन से संबंधित मामलों में नकल कोई वैकल्पिक दस्तावेज नहीं, बल्कि कई प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य रिकॉर्ड होती है। किसान को बैंक ऋण, फसल संबंधी मामलों, मुआवजे, सरकारी योजनाओं, जमीन की खरीद-फरोख्त या पारिवारिक विवादों में बार-बार राजस्व रिकॉर्ड की प्रतियां निकालनी पड़ती हैं। ऐसे में शुल्क में कई गुना बढ़ोतरी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डाल सकती है। प्रस्ताव में तत्काल नकल के लिए 5,000 रुपये की राशि को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी जमीन की बिक्री, बैंक संबंधी प्रक्रिया या कानूनी मामले में दस्तावेज तत्काल चाहिए हों तो इतनी बड़ी रकम देना आम व्यक्ति के लिए मुश्किल हो सकता है। प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल शुल्क बढ़ाने के बजाय सरकार को राजस्व कार्यालयों में सेवाओं की गति और डिजिटल सुविधाओं को बेहतर करना चाहिए। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो जाएं और नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए तो कार्यालयों में भीड़ और कर्मचारियों पर दबाव दोनों कम हो सकते हैं। प्रस्तावित बदलाव में सामान्य नकल के अलावा पेजवार शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई दे रही है। एक पेज की प्रति के लिए प्रस्तावित शुल्क 10 रुपये बताया गया है, जबकि तत्काल सेवा के लिए अलग से 5,000 रुपये तक की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। यानी यदि प्रस्ताव लागू होता है तो सामान्य नकल की तुलना में तत्काल सेवा का खर्च कई गुना अधिक होगा। राजस्व विभाग की ओर से फिलहाल इसे अंतिम निर्णय के रूप में लागू नहीं किया गया है, बल्कि सभी जिलों से सुझाव मांगे गए हैं। ऐसे में अंतिम शुल्क क्या होगा और किन दस्तावेजों पर कितनी दर लागू होगी, यह सरकार की आगामी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा। विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नकल शुल्क में बदलाव का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अनावश्यक आवेदनों को नियंत्रित करना और राजस्व कार्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना है। दूसरी ओर किसानों और आम नागरिकों की मांग है कि किसी भी तरह की शुल्क वृद्धि लागू करने से पहले जमीन से जुड़े वास्तविक जरूरतमंद लोगों की परेशानी को ध्यान में रखा जाए। खासकर छोटे किसानों, ग्रामीण परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ऐसी सेवाओं पर भारी शुल्क अतिरिक्त बोझ बन सकता है। अब निगाहें जिला स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। अगर प्रस्तावित दरों को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा में जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी नकल हासिल करने की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है और सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्हें बार-बार जमाबंदी, रजिस्ट्री, कोर्ट केस या अन्य राजस्व दस्तावेजों की प्रतियां निकालने की जरूरत पड़ती है।
- Haryanvi gayak Ankit Baliyan ki hatyakand Revadi Haryana1
- गांव सुलैला स्कूल के सामने जलभराव, पानी में चलने को मजबूर बच्चे और ग्रामीण फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के गांव सुलैला में सरकारी स्कूल के सामने मुख्य रास्ते पर जलभराव से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गलियों और नालियों का पानी सड़क पर जमा हो रहा है, जिसकी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। बच्चों को रोज इसी पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि आए दिन बाइक फिसलने की घटनाएं भी हो रही हैं। ग्रामीणों का दावा है कि जलभराव के कारण करीब 40 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं आ पाते। ग्रामीणों ने पंचायत या पीडब्ल्यूडी से जल्द जल निकासी और रास्ते की मरम्मत कराने की मांग की है।1
- Deepa colony1
- सिहाली कलां में 200 मीटर सड़क बदहाल, गहरे गड्ढों से हादसे का खतरा मुंडावर। उपखण्ड क्षेत्र के गांव सिहाली कलां में गांव के छोर से कुंदनदास मंदिर मार्ग तक करीब 200 मीटर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख रास्ता है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। इसी मार्ग से विद्यार्थी विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने के लिए आवागमन करते हैं। इसके अलावा यह सड़क भिवाड़ी, टपूकड़ा और तिजारा क्षेत्र को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीण समाजसेवी देवेंद्र सिंह चौहान, कैप्टन रणधीर सिंह, सूबेदार दिलीप सिंह, राजू पंच, जयसिंह, रोहतास सिंह, सुनील, विजेंदर सिंह, इसब खान, मोहर सिंह थानेदार, मिन्नी ठेकेदार, प्रदीप, लक्ष्मण, सियाराम, धर्मेंद्र और शक्ति सिंह के अनुसार इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से एक-दो बार नहीं, बल्कि अनेक बार शिकायत एवं मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।1
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- अब क्या होगा सब सरकार ही | ऐसा काम करने लगी...............1
- गुरुग्राम मे टोल प्लाजा पर फास्ट टैग स्कैन न होने पर ड्राइवर से मारपीट, वीडियो हुआ वायरल गुरुग्राम मे टोल प्लाजा पर फास्ट टैग स्कैन न होने पर ड्राइवर से मारपीट, वीडियो हुआ वायरल1
- जोगीपुर रोड पर गंदगी के ढेर, 29 अगस्त को सीएम के सामने उठेगा मुद्दा नूंह शहर के जोगीपुर रोड पर गंदगी के ढेर से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एडवोकेट ताहिर हुसैन देवला ने आज बृहस्पतिवार 8 बजे बताया कि यह सड़क शहर की आधी आबादी के लिए सुबह-शाम घूमने का प्रमुख रास्ता है। क्रिकेट अकादमी बनने के बाद यहां आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है, लेकिन जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ। अब वार्ड और कस्बे के जिम्मेदार लोग 29 अगस्त को मुख्यमंत्री के सामने यह मुद्दा उठाएंगे।1