हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक भीषण सड़क हादसा हुआ है, जहाँ तीसा क्षेत्र से साच पास की ओर जा रही एक इनोवा गाड़ी कालाबन के पास 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में गाड़ी में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई है। एसपी विजय कुमार सकलानी ने स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना होकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, वाहन पर नियंत्रण खो देने से यह दुर्घटना हुई। मृतक सभी लोग हिमाचल घूमने आए पर्यटक थे, जिन्होंने डलहौजी में एक इनोवा टैक्सी बुक की थी। डलहौजी में ही उनकी मुलाकात एक अन्य पर्यटक परिवार से हुई, जिसके बाद दोनों परिवारों ने बर्फीले पहाड़ों का दीदार करने के लिए मिलकर गाड़ी साझा की और साच पास के लिए निकले थे। यह इलाका हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहाँ संपर्क के लिए सही नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं है। शाम तक जब गाड़ी वापस नहीं लौटी और पुलिस चौकी में उसकी वापसी की एंट्री नहीं हुई, तो लोगों की चिंता बढ़ गई, जिसके बाद तलाश शुरू हुई और कालाबन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पता चला। पुलिस और प्रशासन ने हादसे की मुख्य वजहों में रास्ते में बर्फ और पाला जमने के कारण कार का फिसलना, देर रात होने से ड्राइवर को नींद की झपकी आना, या अचानक किसी मैकेनिकल खराबी की संभावना जताई है। यह हादसा शुक्रवार, 29 मई की रात को बैरागढ़ पुलिस चेक पोस्ट पार करने के बाद हुआ था, लेकिन इलाका पथरीला, दुर्गम और अंधेरा होने के कारण रात में बचाव कार्य शुरू नहीं किया जा सका। आज (31 मई, रविवार) सुबह 8:00 बजे से तीसा और बैरागढ़ पुलिस के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। बैरागढ़ कमेटी ने स्थानीय लोगों से मदद की भावुक अपील की है, जिसके बाद लोग चट्टानों और गहरी खाई में रस्सियों के सहारे ह्यूमन चेन बनाकर शवों को सड़क तक लाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी बचाव और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद साझा की जाएगी। फिलहाल, मृतकों के परिवारों को घटना की सूचना दे दी गई है, हालांकि गहरी खाई के कारण यह अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक भीषण सड़क हादसा हुआ है, जहाँ तीसा क्षेत्र से साच पास की ओर जा रही एक इनोवा गाड़ी कालाबन के पास 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में गाड़ी में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई है। एसपी विजय कुमार सकलानी ने स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना होकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, वाहन पर नियंत्रण खो देने से यह दुर्घटना हुई। मृतक सभी लोग हिमाचल घूमने आए पर्यटक थे, जिन्होंने डलहौजी में एक इनोवा टैक्सी बुक की थी। डलहौजी में ही उनकी मुलाकात एक अन्य पर्यटक परिवार से हुई, जिसके बाद दोनों परिवारों ने बर्फीले पहाड़ों का दीदार करने के लिए मिलकर गाड़ी साझा की और साच पास के लिए निकले थे। यह इलाका हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहाँ संपर्क के लिए सही नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं है। शाम तक जब गाड़ी वापस नहीं लौटी और पुलिस चौकी में उसकी वापसी की एंट्री नहीं हुई, तो लोगों की चिंता बढ़ गई, जिसके बाद तलाश शुरू हुई और कालाबन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त वाहन का पता चला। पुलिस और प्रशासन ने हादसे की मुख्य वजहों में रास्ते में बर्फ और पाला जमने के कारण कार का फिसलना, देर रात होने से ड्राइवर को नींद की झपकी आना, या अचानक किसी मैकेनिकल खराबी की संभावना जताई है। यह हादसा शुक्रवार, 29 मई की रात को बैरागढ़ पुलिस चेक पोस्ट पार करने के बाद हुआ था, लेकिन इलाका पथरीला, दुर्गम और अंधेरा होने के कारण रात में बचाव कार्य शुरू नहीं किया जा सका। आज (31 मई, रविवार) सुबह 8:00 बजे से तीसा और बैरागढ़ पुलिस के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। बैरागढ़ कमेटी ने स्थानीय लोगों से मदद की भावुक अपील की है, जिसके बाद लोग चट्टानों और गहरी खाई में रस्सियों के सहारे ह्यूमन चेन बनाकर शवों को सड़क तक लाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी बचाव और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद साझा की जाएगी। फिलहाल, मृतकों के परिवारों को घटना की सूचना दे दी गई है, हालांकि गहरी खाई के कारण यह अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
- उत्तराखंड में जोशीमठ के पास बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा और हैरान कर देने वाला भीषण ट्रैफिक जाम देखा गया है। यात्रा में अत्यधिक भीड़ के कारण लोग कई-कई घंटों तक धूप में फंसे रहे। बार-बार यह सलाह दी जाती है कि मई-जून के पीक सीज़न में, खासकर वीकेंड पर, पहाड़ों पर जाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ों पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं होतीं और रास्ते भर दुकानों पर पीने का पानी या भोजन सामग्री जैसी चीजें हर जगह उपलब्ध नहीं होतीं। जाम में फंसने पर गाड़ी को वापस मोड़ना भी संभव नहीं होता। इसके बावजूद, लोग इन चेतावनियों को मानने को तैयार नहीं होते और पढ़े-लिखे तथा समझदार होने के बाद भी, खासकर शनिवार और रविवार को, बिना सोचे-समझे निकल पड़ते हैं। फिर जब वे घंटों जाम में फंसे रहते हैं, तो व्यवस्थाओं और सिस्टम को दोष देते हैं।1
- कटनी में जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कटनी सहेली एवं जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन ने मंगलवार को माधव नगर गेट के सामने स्थित बजरंगबली जी मंदिर में विशाल मां भंडारा और शरबत वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। भीषण गर्मी और लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, संगठन के सदस्यों और महिला शक्ति ने पूरे उत्साह, अनुशासन तथा सेवा भावना के साथ इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप दिया, जिससे यह सेवा, समर्पण और संगठन शक्ति का अद्भुत संगम बन गया। इस दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कटनी जिले के समाजसेवी बसंती यादव, शिवराज गोस्वामी, राजेंद्र शर्मा, देशराज, बालकिशन नामदेव, बसंत भैया के बेटे सहित सैकड़ों की संख्या में महिला मित्र मंडली, ग्रुप के सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला शक्ति का योगदान विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ ग्रुप की अध्यक्ष और महिला सदस्यों ने तपती धूप में श्रद्धालुओं को शरबत वितरित कर मानव सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने पूरी व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संभालते हुए यह प्रमाणित किया कि समाज सेवा, धार्मिक आस्था और संगठन को मजबूत बनाने में महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं के लिए मां भंडारे तथा शरबत वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिसकी स्थानीय नागरिकों ने जमकर सराहना की। आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मानव सेवा, सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और संगठन को और अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम के अंत में, सभी सदस्यों ने भगवान बजरंगबली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की, और यह सेवा, सहयोग तथा सामाजिक समर्पण की भावना से आयोजित कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना।4
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- मैहर में अचानक मौसम का मिजाज बदला है, जिससे चिलचिलाती गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी की मार झेल रहे मैहरवासियों को आज बादलों के छाने और ठंडी हवाएं चलने से सुहाने मौसम का अनुभव हुआ। मौसम में इस बदलाव के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली और उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।2
- जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज, रविवार, 31 मई 2026 को प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हुए। इस अवसर पर भक्तों ने 'जय हो माई की' का जयघोष किया।2
- जिला कलेक्टर के निर्देश पर एक वार्डन को शो काज नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर के सीधे आदेश पर की गई।1
- चंद घंटों के एक अबोध बच्चे के सामने ही उसकी माँ का गला रेतकर उसे तड़प-तड़पकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। वह मासूम बच्चा, जो केवल अपनी माँ को ही जानता है और उसी का दूध पीकर अपना पेट भरता है, असहाय होकर अपनी तड़पती माँ को 'माँ-माँ' कहकर पुकारता रहा, जबकि माँ की जान तड़प-तड़पकर निकल रही थी। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि यह कैसी निर्दयता है और यह कैसा त्योहार है, जहाँ गर्दनें काटकर जश्न मनाया जा रहा है।1
- पूरा पटेल समाज मनीष पटेल के लिए न्याय की मांग कर रहा है। उनकी स्पष्ट चेतावनी है कि यदि मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलता है, तो 'शुद्ध प्रदेश' में शासन-प्रशासन पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। समाज का कहना है कि जातिवाद के आधार पर एफ.आई.आर. दर्ज की जा रही हैं, जिसके खिलाफ आवाज उठाई गई है। पटेल समाज ने दृढ़ संकल्प लिया है कि जब तक मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इस मांग के समर्थन में "पटेल एकता जिंदाबाद जिंदाबाद जय सरदार पटेल" के नारे भी लगाए गए हैं।1