तेज रफ्तार बाइक बनी मौत का कारण: 2 साल के मासूम को रौंदा तेज रफ्तार बाइक बनी मौत का कारण: 2 साल के मासूम को रौंदा यूपी (बांदा) कोतवाली देहात क्षेत्र के चिल्ली गांव में तेज रफ्तार बाइक ने दो साल के मासूम की जिंदगी छीन ली। घर के बाहर खेल रहे बच्चे को अनियंत्रित बाइक सवारों ने कुचल दिया। बताया जा रहा है कि एक ही बाइक पर सवार तीन युवक तेज रफ्तार में आए और बच्चे के ऊपर से बाइक निकालते हुए फरार हो गए। गंभीर हालत में परिजन बच्चे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे के पिता राहुल ने बताया कि बाइक की रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक नियंत्रण नहीं रख सका और बाइक बच्चे के पेट के ऊपर से निकल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। 🎤 बाइट: राहुल (पिता) 🎤 बाइट: डॉक्टर EMO
तेज रफ्तार बाइक बनी मौत का कारण: 2 साल के मासूम को रौंदा तेज रफ्तार बाइक बनी मौत का कारण: 2 साल के मासूम को रौंदा यूपी (बांदा) कोतवाली देहात क्षेत्र के चिल्ली गांव में तेज रफ्तार बाइक ने दो साल के मासूम की जिंदगी छीन ली। घर के बाहर खेल रहे बच्चे को अनियंत्रित बाइक सवारों ने कुचल दिया। बताया जा रहा है कि एक ही बाइक पर सवार तीन युवक तेज रफ्तार में आए और बच्चे के ऊपर से बाइक निकालते हुए फरार हो गए। गंभीर हालत में परिजन बच्चे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चे के पिता राहुल ने बताया कि बाइक की रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक नियंत्रण नहीं रख सका और बाइक बच्चे के पेट के ऊपर से निकल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। 🎤 बाइट: राहुल (पिता) 🎤 बाइट: डॉक्टर EMO
- #Apkiawajdigital गाजियाबाद/दिल्ली | रविवार, 15 मार्च 2026 विशेष संवाददाता: किसी माता-पिता के लिए इससे हृदयविदारक क्षण क्या होगा कि वे अपने ही जिगर के टुकड़े को 'अंतिम विदाई' देने के लिए अस्पताल ले जाएं, यह जानते हुए कि अब वह कभी वापस नहीं लौटेगा। गाजियाबाद के लोनी निवासी हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर बेजान पड़े थे, रविवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) पहुंचाए गए। यहां मेडिकल बोर्ड की देखरेख में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाकर 'इच्छा मृत्यु' (पैसिव यूथेनेशिया) देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। एक हादसे ने छीन ली थी मुस्कान घटना साल 2011 की है, जब हरीश चंडीगढ़ में पढ़ रहे थे। एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। तब से हरीश न बोल सके, न हिल सके। वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'कोमा' कहा जाता है। देश के बड़े से बड़े अस्पताल हरीश को दोबारा खड़ा करने में नाकाम रहे। 13 साल की तपस्या और खाली होती तिजोरी हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे को वापस पाने के लिए अपनी जिंदगी की हर पाई खर्च कर दी। मां ने 13 सालों तक साये की तरह अपने बेटे की सेवा की, उसे नहलाने से लेकर खिलाने तक का हर काम एक नवजात शिशु की तरह किया। लेकिन जब आर्थिक संसाधन पूरी तरह खत्म हो गए और हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा, तो भारी मन से माता-पिता ने 'इच्छा मृत्यु' का कठिन विकल्प चुना। "सबको माफ करना, सबसे माफी मांगना..." रविवार की सुबह जब एम्बुलेंस हरीश को एम्स ले जाने के लिए उनके घर पहुंची, तो पूरा मोहल्ला फफक कर रो पड़ा। माता-पिता ने रुंधे गले और कांपते हाथों से अपने बेटे को विदा किया। सोशल मीडिया पर भी यह विदाई वायरल हो रही है, जहां लोग कह रहे हैं— "हरीश, अब सब कष्टों से मुक्त होकर जाओ।" कानूनी प्रक्रिया के तहत विदाई भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है। हरीश का मामला भी इसी कानूनी दायरे में आता है। एम्स के डॉक्टरों की टीम और कानूनी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अब हरीश को शांतिपूर्ण मृत्यु की ओर ले जाया जा रहा है। संपादकीय टिप्पणी: हरीश राणा की कहानी केवल एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम और हमारे देश की महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच पिसते आम आदमी की दास्तां भी है। 13 साल तक एक बेजान शरीर में जान तलाशने वाले इस परिवार का धैर्य वंदनीय है।1
- बांदा में सपा ने मनाई मान्यवर काशीराम की 92वीं जयंती, दलित-वंचित समाज के अधिकारों पर दिया जोर यूपी बांदा के निजामी पैलेस में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज के महानायक मान्यवर काशीराम की 92वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा के युवा क्रांतिकारी अध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा ने की। मुख्य अतिथि पूर्व MLC तिलक चंद अहिरवार और मुख्य वक्ता प्रदेश सचिव मेघनाथ खंगार रहे। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने काशीराम जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके जीवन संघर्ष और दलित-वंचित समाज के उत्थान के लिए किए गए योगदान को याद किया। वक्ताओं ने सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में कृष्णा देवी पटेल, उमेश यादव, प्रमोद गुप्ता राजा, ईशान सिंह लवी, ओम नारायण त्रिपाठी, किरण यादव, रजनी यादव समेत सैकड़ों की संख्या में सपा नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- सरकारी योजनाओं का लाभ देने के एवज में अबैध वसूली1
- मौदहा हमीरपुर।पवित्र महीने रमजान के तीसरे अशरे में मस्जिदों में कुरान मुकम्मल का सिलसिला शुरू हो गया है। शनिवार को जहाँ रहमानिया मस्जिद में कुरान मुकम्मल और उपरौस की निजामियां जामा मस्जिद में शबीना का आयोजन किया गया तो वहीं रविवार को भी औलिया मस्जिद और मस्जिद हक्की बाबा में कुरान मुकम्मल किया गया जिसके बाद मस्जिद इंतेजामिया और मोहल्ले वालों ने हाफिजों को नकदी और उपहार देकर सम्मानित किया। रविवार देरशाम कस्बे के मोहल्ला हैदरिया स्थित औलिया मस्जिद (टिकरा वाली )में कुरान मुकम्मल हुआ जिसपर तरावीह की नमाज़ में कुरान सुनाने वाले हाफिज मुफ्ती सलमान मिस्बाही को मस्जिद इंतजामिया और मोहल्ले के युवाओं ने फूल माला पहना कर नकदी के साथ उपहार देकर विदा किया इस दौरान मुफ्ती सलमान सहित अन्य हाफिजों ने रमजान, ईद और कुरान पर विस्तार से खिताबत की और इस पाक महीने में मुल्क के अमन, चैन,तरक्की और भाईचारे की दुआएं मांगी। इस दौरान मस्जिद के इमाम हाफिज रफीक साहब सहित मस्जिद इंतेजामियां और मोहल्ले के लोगों का भरपूर सहयोग रहा। वहीं कस्बे के हैदरगंज स्थित मस्जिद हक्की बाबा में कुरान मुक्कमल हुआ। जिसके बाद कुरान मुक्कमल करने वाले हाफिज रेहान साहब का फ़ूल मालाओं से लादकर जोरदार स्वागत किया गया। तरावीह के उपरांत मस्जिद में आए मौलाना मुफ्ती शाहिद अली मिस्बाही ने अपनी तकरीर में क़ुरान व रमज़ान पर रौशनी डाली जिसके बाद फातहा हुई और सलातो सलाम पढ़ने के उपरांत क़ुरान मुक्कमल करने वाले हाफिज रेहान साहब को फ़ूल माला पहनाते हुए मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो गया।और लोगों ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से हाथ उठाकर बारगाहे रब में अपने गुनाहों की तौबा की।इस दौरान मोहल्ला सहित कस्बे के दूरदराज के मोहल्लों के लोगों ने भी शिरकत की।2
- “बिजली बचत और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घरों पर सोलर पैनल लगाने की सुविधा दी जा रही है।”“PM SURYA GHAR SOLAR SCHEME”1
- Post by Shyamu Kumar varma1
- मा.कांशीराम जी की जयंती पर सपा के द्वारा बहुजन समाज/ पीडीए दिवस समारोह का हुआ आयोजन।1
- #Apkiawajdigital फतेहपुर | रविवार, 15 मार्च 2026 गाजीपुर (फतेहपुर)। जनपद के गाजीपुर थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को शर्मसार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां एक तरफ नशे में धुत दबंग ने घर में घुसकर महिलाओं के साथ सरेआम बदसलूकी की, वहीं दूसरी ओर यूपी पुलिस ने न्याय देने के बजाय शिकायतकर्ता परिवार के ही 5 सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्या है पूरी घटना? प्राप्त विवरण के अनुसार, शनिवार (14 मार्च) की रात बिझौली निवासी संदीप तिवारी अत्यधिक नशे की हालत में प्रदीप शुक्ला के घर में घुस गया। आरोप है कि संदीप ने घर की महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता की। जब परिवार ने विरोध किया, तो आरोपी ने हंगामा शुरू कर दिया। घटना की सूचना तत्काल डायल-112 और स्थानीय थाने को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस के सामने भी आरोपी संदीप भारी नशे की स्थिति में पाया गया। मदद मांगने वालों पर ही गिरी गाज हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने पीड़ित महिलाओं के बयान के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय, शिकायत करने वाले शुक्ला पक्ष के लोगों को ही हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में विकास शुक्ला, विनोद शुक्ला, अभय शुक्ला, सुभाष शुक्ला और कल्लू शुक्ला के विरुद्ध आनन-फानन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ग्रामीणों में उबाल, उठ रहे सवाल क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर पुलिस ने वास्तविक अपराधी को संरक्षण क्यों दिया? घर की महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पुलिस का यह 'अजीबोगरीब' न्याय क्षेत्रवासियों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और अपराधियों के बजाय पीड़ितों को दंडित किया जाए, तो जनता न्याय की गुहार कहां लगाए?" उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग शुक्ला परिवार की महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध जांच और बेगुनाह सदस्यों की रिहाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या जिले के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर खाकी की धूमिल होती छवि को बचाते हैं या न्याय यूं ही फाइलों में दबा रहेगा। नोट: इस खबर के प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र में पुलिस प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ा है। विभाग की ओर से अभी तक इस 'एकतरफा' कार्रवाई पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।1
- नारायणी तहसील जिला बांदा उत्तर प्रदेश की गैस एजेंसी में लगी है भारी भीड़ भयंकर भीड़ लोक सिलेंडर लेकर पहुंचे स्टाफ भी परेशान1