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रायसिंहनगर में बस स्टैंड के पास बर्फ बेचने वाले एक व्यक्ति ने क्षेत्र से कचरा हटाने की अपील की है।
Subhash chander
रायसिंहनगर में बस स्टैंड के पास बर्फ बेचने वाले एक व्यक्ति ने क्षेत्र से कचरा हटाने की अपील की है।
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- श्रीगंगानगर के SD कॉलेज में सप्लीमेंट्री परीक्षा में आने वाले छात्रों को अगली कक्षा में प्रवेश नहीं दिए जाने के फरमान को लेकर जमकर बवाल हुआ। कॉलेज प्रशासन के इस कदम का छात्र संगठन NSUI ने जोरदार विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने NSUI कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। NSUI ने कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया और आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।1
- श्रीगंगानगर शहर के व्यस्त एसएसबी रोड पर नगर परिषद के प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है, जहाँ शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के प्रयास धरातल पर दम तोड़ते नज़र आ रहे हैं। यह मुख्य सड़क आज एक डंपिंग यार्ड जैसी दिख रही है, क्योंकि राहगीरों के लिए लगाई गई बैठने की व्यवस्था खुद कचरे के ढेर में बदल चुकी है। सड़क किनारे लगी एक हरे रंग की सार्वजनिक बेंच, जिस पर 'स्वच्छ भारत' का संदेश बड़े अक्षरों में लिखा है, बदहाली का शिकार है। बेंच के नीचे, चारों ओर और ठीक पीछे प्लास्टिक, सड़े हुए खाने-पीने के सामान और घरेलू मलबे का विशाल ढेर लगा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि इस बेंच पर बैठना तो दूर, बदबू के कारण यहाँ से सामान्य रूप से गुज़रना भी मुश्किल हो गया है। नालों की स्थिति भी खराब है और कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं है। स्थानीय जनता अब सीधे नगर परिषद से सवाल कर रही है कि क्या 'स्वच्छ भारत अभियान' केवल बेंचों पर नारे लिखने तक ही सीमित रह गया है। लाखों रुपए खर्च करके लगाई गई ये बेंचें अब प्रशासनिक लापरवाही के कारण कचरा पॉइंट बन गई हैं। नगर परिषद के अधिकारियों की इस पूरे मामले पर चुप्पी हैरान करने वाली है। आम जनता को इस बदबू और बीमारी के खतरे से बचाने के लिए और इन सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की ज़रूरत बताई गई है।3
- हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में स्थित श्री सिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर में बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर बाबा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।1
- G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो सम्मान मिला है, वह चुनिंदा वैश्विक नेताओं को ही प्राप्त हुआ है। पोस्ट के अनुसार, यह विशेष सम्मान डोनाल्ड ट्रंप को नहीं मिला, और न ही उनके लिए रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया गया था। लेखक ने संयुक्त राज्य अमेरिका के इस निर्णय का स्वागत किया है और आशा व्यक्त की है कि वे अपने वचन पर कायम रहेंगे।1
- राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित कोलायत को गुरु तीर्थ के रूप में जाना जाता है। यह स्थान महर्षि कपिल मुनि जी की पावन धरा मानी जाती है।1
- दोस्तों, नेशनल हाईवे पर आपको अचानक कोई ऐसा दृश्य दिख सकता है, जो आपको और आपके परिवार को दया की दरिया में डुबो सकता है, लेकिन यह धोखा भी हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ आपकी दयालुता आपको किसी बड़ी मुश्किल में डाल सकती है।1
- राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में नर्सेज के लिए फिल्म “भारत भाग्य विधाता” का विशेष प्रदर्शन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य नर्सेज को सिनेमाघरों में परिवार सहित फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित करना था, जो आमतौर पर अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं। कार्यक्रम का आयोजन फिल्म के निदेशक और राष्ट्रीय नर्सेज एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा किया गया। उन्होंने नर्सेज के साथ फिल्म देखी और उन्हें इस पहल से जुड़ने के लिए धन्यवाद दिया। फिल्म में उन नर्सेज के समर्पण, त्याग, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दर्शाया गया है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए मरीजों की सेवा की।1
- राजस्थान के श्रीकोलायत क्षेत्र में स्थित शीशा भैरूजी मंदिर के पास 471 बीघा में फैले पवित्र ओरण क्षेत्र में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्य पूरा हो गया है। पूर्व प्रधान जयवीरसिंह भाटी के नेतृत्व में ग्रामीणों और भामाशाहों के जनसहयोग से चलाए गए तालाब खुदाई अभियान को एक माह के भीतर सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस अभियान पर 20 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ओरण क्षेत्र में मौजूद सैकड़ों वर्ष पुराने तालाब को पुनर्जीवित करना और उसकी वर्षा जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाना था। लंबे समय से उपेक्षित पड़े इस तालाब की सफाई और गहरीकरण होने से अब आगामी बरसात में बड़ी मात्रा में पानी का संचय हो सकेगा, जिससे क्षेत्र के वन्यजीवों, पशुधन और समग्र पर्यावरण को लाभ मिलने की उम्मीद है। पूर्व प्रधान जयवीरसिंह भाटी ने इस कार्य को क्षेत्र की धार्मिक आस्था, संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के प्रतीक ओरण के संरक्षण के रूप में देखा। भाटी ने बताया कि अब अगले चरण में इस ओरण क्षेत्र को एक आदर्श चारागाह के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, ओरण भूमि पर लगभग 30 परिवारों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने की प्रक्रिया भी जारी है, जिसके लिए संबंधित लोगों को 20 जून तक भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक सहयोग से इस भूमि को पुनः सार्वजनिक उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के लिए विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, आगामी योजना में सीसा भैरूजी मंदिर और आसपास के ओरण क्षेत्र को धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव है। इस पहल से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। ग्रामीणों का मानना है कि वर्षों बाद ओरण क्षेत्र में हुआ यह बड़ा कार्य जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की एक प्रेरणादायक पहल भी है।1