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राहुल मेहता ने 'वोट काउंटिंग फ्रॉड' पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि गोपनीय वोटिंग सिस्टम को वोटों की चोरी और धांधली के लिए ही शुरू किया गया था। उनके अनुसार, 1788 से 1884 के बीच, USA और दुनिया के लगभग सभी देशों में खुली वोटिंग प्रणाली प्रचलित थी, जिसके कारण वोटों की गिनती में धोखाधड़ी लगभग नगण्य थी। हालांकि, 1860 में ब्रिटिशों ने ऑस्ट्रेलिया में 'कॉन्फिडेंशियल वोटिंग सिस्टम' सिर्फ वोटों की गिनती में धोखाधड़ी को अंजाम देने के उद्देश्य से लागू किया था। इस कथित सफलता के बाद, दुनिया भर के अभिजात वर्ग के सदस्यों ने भी गोपनीय वोटिंग को अपनाने का फैसला किया। मेहता का दावा है कि ब्रिटिशों ने 1880 के दशक में भारत में भी गोपनीय वोटिंग लागू करने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण 1870 से 1936 तक भारत के सभी चुनावों में खुली वोटिंग का ही इस्तेमाल हुआ। उनका आरोप है कि ब्रिटिशों ने खुले मतदान प्रणाली को बदनाम करने के लिए शिक्षाविदों, पत्रकारों और राजनेताओं को पैसे दिए, जिसके परिणामस्वरूप 1936 में गोपनीय वोटिंग लागू की गई। इस कदम ने ब्रिटिशों को मतगणना में धोखाधड़ी के माध्यम से चुनावी नतीजे तय करने में सक्षम बना दिया। यह भी आरोप है कि जब तक वोटिंग खुली थी, कांग्रेस ने एक पार्टी के तौर पर कभी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया; पार्टी ने 1937 में ही चुनावों में हिस्सा लिया, जब ब्रिटिशों ने गोपनीय वोटिंग लागू कर दी और नतीजों को बदलने की शक्ति हासिल कर ली। उन्होंने दोनों प्रणालियों की तुलना करते हुए कहा है कि खुली वोटिंग में वोट डकैती और वोट खरीदना संभव हो सकता है, लेकिन इसमें बिना पता चले वोटों की चोरी करना असंभव है। इसके विपरीत, गोपनीय वोटिंग सिस्टम अमीर लोगों को वोट चुराने में मदद करता है और फिर 'क्या आपके पास वोटचोरी का सबूत है?' चिल्लाकर आम जनता को दबाता है। मेहता जोर देकर कहते हैं कि गोपनीय वोटिंग सिस्टम लगभग शून्य या कम मतगणना धोखाधड़ी सुनिश्चित नहीं कर सकता, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जिनके पास मतगणना एजेंट आदि के लिए कोई धन नहीं है। 'वोट काउंटिंग फ्रॉड' का एक विशिष्ट उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि यह तब होता है जब EVM या पेपर बैलेट काउंट में किसी कैंडिडेट A को 50 वोट मिलते हैं, लेकिन इंचार्ज उसे 100 वोट लिख देता है। इन चिंताओं को देखते हुए, RRP के घोषणापत्र में वैकल्पिक खुली वोटिंग के लिए एक जनमत संग्रह का प्रस्ताव है, जहाँ प्रत्येक मतदाता यह तय करने का अधिकार रखेगा कि वह अपना वोट सार्वजनिक (खुला) रखना चाहता है या गोपनीय।

8 hrs ago
user_Sonu Kumar
Sonu Kumar
गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार•
8 hrs ago

राहुल मेहता ने 'वोट काउंटिंग फ्रॉड' पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि गोपनीय वोटिंग सिस्टम को वोटों की चोरी और धांधली के लिए ही शुरू किया गया था। उनके अनुसार, 1788 से 1884 के बीच, USA और दुनिया के लगभग सभी देशों में खुली वोटिंग प्रणाली प्रचलित थी, जिसके कारण वोटों की गिनती में धोखाधड़ी लगभग नगण्य थी। हालांकि, 1860 में ब्रिटिशों ने ऑस्ट्रेलिया में 'कॉन्फिडेंशियल वोटिंग सिस्टम' सिर्फ वोटों की गिनती में धोखाधड़ी को अंजाम देने के उद्देश्य से लागू किया था। इस कथित सफलता के बाद, दुनिया भर के अभिजात वर्ग के सदस्यों ने भी गोपनीय वोटिंग को अपनाने का फैसला किया। मेहता का दावा है कि ब्रिटिशों ने 1880 के दशक में भारत में भी गोपनीय वोटिंग लागू करने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण 1870 से 1936 तक भारत के सभी चुनावों में खुली वोटिंग का ही इस्तेमाल हुआ। उनका आरोप है कि ब्रिटिशों ने खुले मतदान प्रणाली को बदनाम करने के लिए शिक्षाविदों, पत्रकारों और राजनेताओं को पैसे दिए, जिसके परिणामस्वरूप 1936 में गोपनीय वोटिंग लागू की गई। इस कदम ने ब्रिटिशों को मतगणना में धोखाधड़ी के माध्यम से चुनावी नतीजे तय करने में सक्षम बना दिया। यह भी आरोप है कि जब तक वोटिंग खुली थी, कांग्रेस ने एक पार्टी के तौर पर कभी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया; पार्टी ने 1937 में ही चुनावों में हिस्सा लिया, जब ब्रिटिशों ने गोपनीय वोटिंग लागू कर दी और नतीजों को बदलने की शक्ति हासिल कर ली। उन्होंने दोनों प्रणालियों की तुलना करते हुए कहा है कि खुली वोटिंग में वोट डकैती और वोट खरीदना संभव हो सकता है, लेकिन इसमें बिना पता चले वोटों की चोरी करना असंभव है। इसके विपरीत, गोपनीय वोटिंग सिस्टम अमीर लोगों को वोट चुराने में मदद करता है और फिर 'क्या आपके पास वोटचोरी का सबूत है?' चिल्लाकर आम जनता को दबाता है। मेहता जोर देकर कहते हैं कि गोपनीय वोटिंग सिस्टम लगभग शून्य या कम मतगणना धोखाधड़ी सुनिश्चित नहीं कर सकता, खासकर उन उम्मीदवारों के लिए जिनके पास मतगणना एजेंट आदि के लिए कोई धन नहीं है। 'वोट काउंटिंग फ्रॉड' का एक विशिष्ट उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि यह तब होता है जब EVM या पेपर बैलेट काउंट में किसी कैंडिडेट A को 50 वोट मिलते हैं, लेकिन इंचार्ज उसे 100 वोट लिख देता है। इन चिंताओं को देखते हुए, RRP के घोषणापत्र में वैकल्पिक खुली वोटिंग के लिए एक जनमत संग्रह का प्रस्ताव है, जहाँ प्रत्येक मतदाता यह तय करने का अधिकार रखेगा कि वह अपना वोट सार्वजनिक (खुला) रखना चाहता है या गोपनीय।

More news from दरभंगा and nearby areas
  • दरभंगा में शोरूम मैनेजर फैज की हत्या के संबंध में उनकी मां ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने पुलिस से सीधे तौर पर पूछा है कि उनके बेटे फैज की हत्या क्यों हुई और इस घटना के पीछे का असली कारण पुलिस को सामने लाना चाहिए। फैज की मां ने जोर देकर कहा है कि यह हत्या किसी भी प्रकार के लेनदेन के चलते नहीं हुई है।
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    दरभंगा में शोरूम मैनेजर फैज की हत्या के संबंध में उनकी मां ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने पुलिस से सीधे तौर पर पूछा है कि उनके बेटे फैज की हत्या क्यों हुई और इस घटना के पीछे का असली कारण पुलिस को सामने लाना चाहिए। फैज की मां ने जोर देकर कहा है कि यह हत्या किसी भी प्रकार के लेनदेन के चलते नहीं हुई है।
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter लहेरिअसारै, दरभंगा•
    1 hr ago
  • मुजफ्फरपुर में एक मेडिकल छात्र की एक्सीडेंट में दर्दनाक मौत हो गई है।
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    मुजफ्फरपुर में एक मेडिकल छात्र की एक्सीडेंट में दर्दनाक मौत हो गई है।
    user_RITIK RAJPUT
    RITIK RAJPUT
    Yoga instructor Aurai, Muzaffarpur•
    2 hrs ago
  • Post by Lalit Kashyap Tufan
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    Post by Lalit Kashyap Tufan
    user_Lalit Kashyap Tufan
    Lalit Kashyap Tufan
    Security Guard औराई, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    8 hrs ago
  • यह एक प्रेरक विचार है, जिसमें बताया गया है कि क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और जो व्यक्ति क्रोध पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह जीवन में सफल हो जाता है। इस संदेश में लोगों को गुस्से के बजाय समझदारी से काम लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि समझदारी ही जीवन की जीत की कुंजी है।
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    यह एक प्रेरक विचार है, जिसमें बताया गया है कि क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और जो व्यक्ति क्रोध पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह जीवन में सफल हो जाता है। इस संदेश में लोगों को गुस्से के बजाय समझदारी से काम लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि समझदारी ही जीवन की जीत की कुंजी है।
    user_Deepak Kumar
    Deepak Kumar
    Content Creator (YouTuber) बोखरा, सीतामढ़ी, बिहार•
    10 hrs ago
  • मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर आरोप सामने आया है, जहाँ एक महिला पर एक नाबालिग बच्चे को अपने घर में बंद करके उसकी छाती पर दांत से काटने का आरोप लगाया गया है।
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    मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर आरोप सामने आया है, जहाँ एक महिला पर एक नाबालिग बच्चे को अपने घर में बंद करके उसकी छाती पर दांत से काटने का आरोप लगाया गया है।
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    Crime Sach Khabar
    मुशहरी, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    20 hrs ago
  • बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार एक विशेष योगाभ्यास सत्र में शामिल हुए। इस दौरान, दोनों ने पूरी लगन से योगासन किए और अपनी क्षमतानुसार अधिकतम झुकने का प्रयास करते हुए दिखाई दिए।
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    बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार एक विशेष योगाभ्यास सत्र में शामिल हुए। इस दौरान, दोनों ने पूरी लगन से योगासन किए और अपनी क्षमतानुसार अधिकतम झुकने का प्रयास करते हुए दिखाई दिए।
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    31 min ago
  • दरभंगा में मदरसा से चार नाबालिग छात्रों को बरामद किया गया है, जिसके बाद मदरसा के मौलवी मोहम्मद कादिर के खिलाफ अशोक पेपर मिल थाना में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई बहादुरपुर थाना के दारोगा अबुजर हुसैन अंसारी के आवेदन पर की गई। दारोगा ने बताया कि एपीएम थाना क्षेत्र के बलुआहा गांव के मदरसा में इन चारों नाबालिग छात्रों के पैरों में लोहे की जंजीरें ताला लगाकर बांधी गई थीं। ये छात्र मौका पाकर मदरसा से भाग निकले और बहादुरपुर थाना क्षेत्र के सिनुआड़ा गांव पहुंच गए, जहाँ स्थानीय लोगों ने उन्हें देखकर बहादुरपुर थाना को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस गांव पहुंची, बच्चों को अपने कब्जे में लिया, उनके पैरों से ताले और जंजीरें खोलीं, और फिर उन्हें बाल सुधार गृह में भेज दिया। बच्चों ने पूछताछ में बताया कि मदरसा के मौलवी मोहम्मद कादिर उन्हें बुरी तरह पीटते थे और तरह-तरह की यातनाएं देते थे। उनसे शौचालय सहित मदरसा के भवन की भी सफाई करवाई जाती थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि इन सभी को प्रताड़ित भी किया जा रहा था, और उनके बाल मुड़वा दिए गए थे। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ बंधक बनाकर रखा गया था। ये सभी बच्चे मधुबनी जिला के अररिया संग्राम के रहने वाले हैं। फिलहाल, बच्चों को सिमरी थाना क्षेत्र के भराठी गांव में स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया है। बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुंजय कुमार ने इस पूरी जानकारी की पुष्टि की है।
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    दरभंगा में मदरसा से चार नाबालिग छात्रों को बरामद किया गया है, जिसके बाद मदरसा के मौलवी मोहम्मद कादिर के खिलाफ अशोक पेपर मिल थाना में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई बहादुरपुर थाना के दारोगा अबुजर हुसैन अंसारी के आवेदन पर की गई। दारोगा ने बताया कि एपीएम थाना क्षेत्र के बलुआहा गांव के मदरसा में इन चारों नाबालिग छात्रों के पैरों में लोहे की जंजीरें ताला लगाकर बांधी गई थीं।

ये छात्र मौका पाकर मदरसा से भाग निकले और बहादुरपुर थाना क्षेत्र के सिनुआड़ा गांव पहुंच गए, जहाँ स्थानीय लोगों ने उन्हें देखकर बहादुरपुर थाना को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस गांव पहुंची, बच्चों को अपने कब्जे में लिया, उनके पैरों से ताले और जंजीरें खोलीं, और फिर उन्हें बाल सुधार गृह में भेज दिया। बच्चों ने पूछताछ में बताया कि मदरसा के मौलवी मोहम्मद कादिर उन्हें बुरी तरह पीटते थे और तरह-तरह की यातनाएं देते थे। उनसे शौचालय सहित मदरसा के भवन की भी सफाई करवाई जाती थी।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इन सभी को प्रताड़ित भी किया जा रहा था, और उनके बाल मुड़वा दिए गए थे। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ बंधक बनाकर रखा गया था। ये सभी बच्चे मधुबनी जिला के अररिया संग्राम के रहने वाले हैं। फिलहाल, बच्चों को सिमरी थाना क्षेत्र के भराठी गांव में स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया है। बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुंजय कुमार ने इस पूरी जानकारी की पुष्टि की है।
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    27 min ago
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