दूसरों का अपमान करना, उनकी मजबूरी का उपहास करना, या किसी को मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट पहुँचाकर आनंद प्राप्त करना मानवता के विरुद्ध माना गया है। ऐसे कृत्य करने वाले लोग भले ही कुछ समय के लिए स्वयं को शक्तिशाली समझें, लेकिन समय का चक्र हमेशा एक समान नहीं रहता। परिस्थितियाँ बदलती हैं, और ऐसे व्यक्ति को कभी न कभी उसी दर्द का सामना करना पड़ता है, जो उसने दूसरों को दिया था। इसके विपरीत, जो लोग दूसरों के दुःख में साथ खड़े होते हैं, उनकी सहायता करते हैं और प्रेम तथा सम्मान का व्यवहार करते हैं, उन्हें समाज में आदर मिलता है और ईश्वर की कृपा भी प्राप्त होती है। अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, और इसी तरह बुरे कर्म भी अपना परिणाम अवश्य देते हैं। यही कारण है कि हमें हमेशा दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। किसी की पीड़ा पर हँसने के बजाय उसके दुःख को कम करने का प्रयास करना ही सच्ची मानवता है, और यही जीवन का सबसे बड़ा धर्म तथा सीख भी है। जो व्यक्ति दूसरों को दुःख देकर हँसता है, उसे होनी (भाग्य और कर्मफल) एक दिन दुःख अवश्य देती है, क्योंकि "जैसा करोगे, वैसा भरोगे" यह जीवन का शाश्वत सत्य है। कर्म का न्याय अटल है और वह हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देता है।
दूसरों का अपमान करना, उनकी मजबूरी का उपहास करना, या किसी को मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट पहुँचाकर आनंद प्राप्त करना मानवता के विरुद्ध माना गया है। ऐसे कृत्य करने वाले लोग भले ही कुछ समय के लिए स्वयं को शक्तिशाली समझें, लेकिन समय का चक्र हमेशा एक समान नहीं रहता। परिस्थितियाँ बदलती हैं, और ऐसे व्यक्ति को कभी न कभी उसी दर्द का सामना करना पड़ता है, जो उसने दूसरों को दिया था। इसके विपरीत, जो लोग दूसरों के दुःख में साथ खड़े होते हैं, उनकी सहायता करते हैं और प्रेम तथा सम्मान का व्यवहार करते हैं, उन्हें समाज में आदर मिलता है और ईश्वर की कृपा भी प्राप्त होती है। अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, और इसी तरह बुरे कर्म भी अपना परिणाम अवश्य देते हैं। यही कारण है कि हमें हमेशा दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। किसी की पीड़ा पर हँसने के बजाय उसके दुःख को कम करने का प्रयास करना ही सच्ची मानवता है, और यही जीवन का सबसे बड़ा धर्म तथा सीख भी है। जो व्यक्ति दूसरों को दुःख देकर हँसता है, उसे होनी (भाग्य और कर्मफल) एक दिन दुःख अवश्य देती है, क्योंकि "जैसा करोगे, वैसा भरोगे" यह जीवन का शाश्वत सत्य है। कर्म का न्याय अटल है और वह हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देता है।
- दूसरों का अपमान करना, उनकी मजबूरी का उपहास करना, या किसी को मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट पहुँचाकर आनंद प्राप्त करना मानवता के विरुद्ध माना गया है। ऐसे कृत्य करने वाले लोग भले ही कुछ समय के लिए स्वयं को शक्तिशाली समझें, लेकिन समय का चक्र हमेशा एक समान नहीं रहता। परिस्थितियाँ बदलती हैं, और ऐसे व्यक्ति को कभी न कभी उसी दर्द का सामना करना पड़ता है, जो उसने दूसरों को दिया था। इसके विपरीत, जो लोग दूसरों के दुःख में साथ खड़े होते हैं, उनकी सहायता करते हैं और प्रेम तथा सम्मान का व्यवहार करते हैं, उन्हें समाज में आदर मिलता है और ईश्वर की कृपा भी प्राप्त होती है। अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, और इसी तरह बुरे कर्म भी अपना परिणाम अवश्य देते हैं। यही कारण है कि हमें हमेशा दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। किसी की पीड़ा पर हँसने के बजाय उसके दुःख को कम करने का प्रयास करना ही सच्ची मानवता है, और यही जीवन का सबसे बड़ा धर्म तथा सीख भी है। जो व्यक्ति दूसरों को दुःख देकर हँसता है, उसे होनी (भाग्य और कर्मफल) एक दिन दुःख अवश्य देती है, क्योंकि "जैसा करोगे, वैसा भरोगे" यह जीवन का शाश्वत सत्य है। कर्म का न्याय अटल है और वह हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देता है।1
- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में इटली की कोई भागीदारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर इटली इस संघर्ष में शामिल होता, तो ट्रंप की 'निराशा' को समझाना बेहद मुश्किल होता।1
- Post by Sanjay kumar1
- जौनपुर जिले के बदलापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत पूरा रजवार में अनुसूचित जाति की बड़ी बस्ती में पानी न आने से लोगों में भारी आक्रोश है। तालाब के किनारे स्थित इस बस्ती के निवासियों के लिए भीषण गर्मी में पानी मिल पाना बहुत मुश्किल हो गया है। सरकार द्वारा गांव में पानी की टंकी बनवाई गई थी और घर-घर तक पानी पहुँचाने का संकल्प लिया गया था। हालांकि, अभी तक इस बस्ती में न तो टोटियाँ लगी हैं और न ही पानी की सप्लाई शुरू हो पाई है। इस स्थिति को लेकर लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। बस्ती के लोगों ने इकट्ठा होकर शासन-प्रशासन से टोटियाँ लगवाने और पानी की सप्लाई ठीक करवाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई और पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे तहसील में धरना देने को मजबूर होंगे।1
- अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस, 26 जून के अवसर पर, समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया है। मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन ने इस मौके पर ज़ोर दिया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए एक गंभीर चुनौती है। संगठन ने कहा कि केवल जागरूकता, शिक्षा और सामूहिक प्रयासों के ज़रिए ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है। इसके तहत, सभी नागरिकों से नशे के विरुद्ध एकजुट होकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देने की अपील की गई। लोगों से आग्रह किया गया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार, मित्रों तथा युवाओं को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। इस पहल का मूल संदेश है: "नशा छोड़ें, जीवन जोड़ें – स्वस्थ समाज, सुरक्षित भविष्य।"1
- भदोही के सुरियावां नगर स्थित पुरानी बाजार के वार्ड नंबर 10 में एक नंदी (बैल) पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा भाले से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस क्रूर हमले में भाला बैल के पेट को आर-पार कर गया, जिससे उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित कई संगठनों ने इस अमानवीय कृत्य के दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावर का पता लगाया जा सके। वहीं, घायल नंदी बैल का पशु चिकित्सकों की गहन निगरानी में उपचार जारी है।1