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बिजली विभाग की मनमानी से भड़का आक्रोश, जमदेही सबस्टेशन पर ग्रामीणों का हल्लाबोल अघोषित कटौती से किसान बेहाल, घंटों गुल रहती है बिजली; विभागीय लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों ने किया घेराव, पुलिस बुलानी पड़ी
AMLA NEWS
बिजली विभाग की मनमानी से भड़का आक्रोश, जमदेही सबस्टेशन पर ग्रामीणों का हल्लाबोल अघोषित कटौती से किसान बेहाल, घंटों गुल रहती है बिजली; विभागीय लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों ने किया घेराव, पुलिस बुलानी पड़ी
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- बिजली विभाग की मनमानी से भड़का आक्रोश, जमदेही सबस्टेशन पर ग्रामीणों का हल्लाबोल अघोषित कटौती से किसान बेहाल, घंटों गुल रहती है बिजली; विभागीय लापरवाही के खिलाफ ग्रामीणों ने किया घेराव, पुलिस बुलानी पड़ी1
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर द्वारा 15 अगस्त तक मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) एवं मछलियों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद, आमला नगर सहित जिले के कई बाजारों में खुलेआम मछलियों की बिक्री जारी है। प्रशासनिक आदेशों की इस अनदेखी और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बारिश का मौसम मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। मत्स्य संपदा के संरक्षण, प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और जलाशयों में मछलियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से शासन हर वर्ष इस अवधि में मत्स्याखेट और मछली विक्रय पर प्रतिबंध लागू करता है। इसके बावजूद, आमला के बाजारों में मछलियों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, जिससे प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रतिबंध का सख्ती से पालन नहीं कराया गया तो शासन का संरक्षण अभियान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। लोगों ने मत्स्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाकर अवैध रूप से मछली पकड़ने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि बैतूल जिले में 15 अगस्त तक मत्स्याखेट एवं मछलियों के विक्रय पर प्रतिबंध प्रभावी है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान भी है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं तथा प्रतिबंध का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।2
- मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा संचालित 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत मुलताई थाना पुलिस ने नगर के विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराकर उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। उप निरीक्षक मोनिका पटले एवं थाना स्टाफ ने नवीन स्कूल पहुंचकर छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभाव, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणाम, सामाजिक एवं पारिवारिक नुकसान तथा नशे से दूर रहने के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि नशा व्यक्ति के भविष्य, शिक्षा और जीवन को बर्बाद कर देता है, इसलिए सभी को इससे दूर रहकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से किसी भी प्रकार के नशे के प्रलोभन से बचने, अपने मित्रों और परिवार को भी जागरूक करने तथा संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। मुलताई थाना पुलिस ने बताया कि 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत आगामी दिनों में भी क्षेत्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सके एवं समाज में नशामुक्ति का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।1
- Post by Namdev gujre Khabar bhart news1
- भीमपुर विकासखण्ड क्षेत्र के ग्राम पलस्या में लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजार में मध्यप्रदेश पुलिस विभाग के निर्देशन पर झल्लार पुलिस ने 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान चलाया। इस अभियान के तहत बाजार में आए आसपास के ग्रामीणों को नशे से होने वाले अपराध और मानवीय दुष्परिणामों की विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने लोगों को नशे से दूर रहने का संकल्प भी दिलाया। इस दौरान, गांव में इस अभियान को प्रत्येक घर तक पहुंचाने की अपील की गई। ग्राम पलस्या के हाट-बाजार में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करना था। पुलिस ने न केवल नशे के दुष्परिणामों के बारे में बताया, बल्कि लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित भी किया।1
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आमला विकासखंड की उप तहसील बोरदेही स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में पर्याप्त बेड नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों की संख्या के मुकाबले अस्पताल में बेड की व्यवस्था बेहद कम है। कई बार मरीजों को फर्श पर या अन्य अस्पतालों में रेफर होने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर और भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि परिसर में साफ-सफाई और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे सांप और बिच्छू निकलने का खतरा बना रहता है। ऐसे हालात में मरीजों और उनके परिजनों में हमेशा भय का माहौल रहता है। क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बेडों की संख्या बढ़ाई जाए, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा अस्पताल परिसर की सुरक्षा और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए। अब सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग समय रहते इस ओर ध्यान देगा, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?1