समतापूर्वक समाधि मरण उन्हीं का होता है जो साधना के साथ अपना जीवन जीते है - मुनिश्री विश्वसूर्य सागर नेमीनगर सांई कालोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजित वात्सल्य रत्नाकर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीष वचन देते हुए कहा समाधि उन लोगों की होती है जो शुरू से ही साधना में अपना जीवन जीते हैं, वही समतापूर्वक मरण करते हैं।समता हर किसी को नहीं आती है ।प्रारंभ से ही शरीर को कष्ट देने की आदत डाली है। वहीं समता पूर्वक समाधिमरण करते हैं।व्यक्ति को चारों प्रकार के आहार का त्याग करके भगवान के गुणों का ध्यान कर भगवान की भक्ति करना चाहिए ना कि हिंसा करना चाहिए।जैन दर्शन के फार्मूले हैं,जिस पर अमल करना चाहिए। कम खाने वाला मरता नहीं है, अधिक खाने वाला मर सकता है। जैन दर्शन सिर्फ धर्म ही नही सिखाता बल्कि स्वस्थ रहना भी सिखाता है। व्यक्ति को आत्मकल्याण का ज्ञान नहीं है, लेकिन आरंम सारम और घर गृहस्थी में पूरा ज्ञान है। साधु बिना नियम के आहार के लिए नहीं जाते हैं, लेकिन आप लोगों को विवेक लगाकर पडगाहन करना चाहिए।व्यक्ति रसना इंद्रिय का गुलाम है, उस पर नियंत्रण करना चाहिए। रसना इंद्रिय का त्याग रखना चाहिए। अगर आपका नियम रहता है तो व्यक्ति अशुभकर्म से बचता है, आकुलता नहीं रहती है। रस के त्याग से नियम का पालन भी होता है। गृहस्थ जीवन से ही संयम और त्याग के भाव होना चाहिए। ऐसा नहीं करते हैं तो जीवन दुर्गति में जाएगा। इस संसार में जहाँ असंयमी व्यक्ति की दुर्गति निश्चित है। व्यक्ति को उठने- बैठने में सावधानी रखना चाहिए, आपके कारण जीव जंतु की विरादना नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को बैठने के लिए ऐसी वस्तु का उपयोग करना चाहिए, जिससे तकलीफ भी न हो और ज्यादा आनंद भी न हो। व्यक्ति को साधना संयम पूर्वक करना चाहिए। सामायिक संकल्प लेकर करना चाहिए, उस दौरान कायक्लेस नहीं करना चाहिए। मन को एकाग्रचित करके नियमपूर्वक सामायिक करना चाहिए। शरीर को कष्ट देना सीखे, तभी आप संयम धारण करना सीखेंगे। मुनि महाराज समाधि नहीं कराते हैं जो लेने वाला है वही समाधि करता है, समाधि दिलाने वाला तो निमित्त है। वर्तमान ही भविष्य का निर्माता है, वर्तमान को संभाल कर रखें। वर्तमान को संभाला है तो भविष्य भी अच्छा ही मिलेगा। कष्ट का नाम ही संयम है। जो संयम के नाम पर ढोंग कर रहे वो आगे दुर्गति की तैयारी कर रहे है। जो सारी सुविधाए ले रहे है, वो ब्रह्मचारी नहीं है। कई ब्रह्मचारी ऐसे हैं जो न चिंतन कर रहे हैं न स्वाध्याय कर रहे हैं फिर काहे के ब्रह्मचारी। हम वस्तु का स्वरूप ही बताते हैं। जैसा वस्तु का स्वरूप है वैसे ही बताये उसे छुपाएं नहीं, वही सही वक्ता है। अंदर का तप वह है जो मन को निर्मल बनाता है। प्रायश्चित वह है जो एक बार गलती होने पर लिया जाता है। बार -बार एक ही गलती करने पर लिए जाने पर प्रायश्चित नहीं होता। प्रायश्चित लेने से परिणामों की विशुद्धि बढ़ती है। विनय अहंकार को नष्ट करता है। जिसमें विनय नहीं है, वह त्यागी नहीं। त्यागी -व्रती सहज, सरल और विनम्र रहता है। जिसके पास विनय नहीं है, उसके पास धर्म नहीं है। विनय करने वाला जीव अपने नियम का पालन करता है। वह कर्मों के बंध से बचता है। कहने से विनय नही आती है, विनयवान जीवन बनाना पड़ता है। विनयवान व्यक्ति को अहंकार नहीं छू पाता है। विनय अंतरंग का तप है यह संसार से निकालकर मोक्ष की यात्रा कराता है। विशुद्धि बढने पर ही कर्मों की निर्जरा होगी। आत्मा को हल्का करे हैं । संयम एक नौका है जो भव से पार लगाता है। संसार भी एक सागर है, इसमें डूबना है कि तैरना है। संयम धारण करोगे तो संसार रूपी सागर से पार हो जाओगे। वैय्यावृति सिर्फ साधुओं की नहीं अपने घर के बड़े -बुजुर्गों की भी की जाती है। बड़े बनकर आपको अपने से छोटों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। तभी आप बड़े कहलाएगे। जो जैन दर्शन को समझ लेता है वो अपने आपको संभाल लेता है। स्व का हित हो, स्व के बारे में ज्ञान हो वह स्वाध्याय है। स्वाध्याय अपनी विशुद्धि बढ़ाने के लिए होता है। स्वाध्याय में बैठकर आपस में चर्चा नहीं करना चाहिए। इच्छाओं को दबाये परिग्रह कम रखें। जो पुण्य से सामग्री मिली है उसमें विरक्ति रखें।परिग्रह बढ़ाए नही बल्कि कम करें या छोड़ें। नियम ,संयम से रहने वाला संसार से पार हो जाता है। विरक्त भाव की कमी आज- कल लोगों में है। कई ऐसे लोग हैं दुनिया में जिनके पास सब कुछ है लेकिन विरक्तिपूर्वक जीवन जी रहे है, निश्चित वह अपने आप कल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो रहे है। तप आत्मा को निर्मल बनाते हैं और सिद्धालय की यात्रा कराते हैं। आत्मा तपने से सिद्धालय की यात्रा करती है। ध्यान आत्मा को सिद्धालय में पहुंचाता है। निर्विकल्प होना ध्यान करना, निर्विकल्प होकर ही ध्यान आराधना करना चाहिए। मुनिश्री ने बारह तपो पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। अपने जीवन को त्याग, तपस्या और संयम के मार्ग पर अग्रसर करें। अगर आपको सिद्धालय की यात्रा करना है तो ध्यान के साथ ज्ञान को भी समझो।
समतापूर्वक समाधि मरण उन्हीं का होता है जो साधना के साथ अपना जीवन जीते है - मुनिश्री विश्वसूर्य सागर नेमीनगर सांई कालोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजित वात्सल्य रत्नाकर मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मुनिराज ने आशीष वचन देते हुए कहा समाधि उन लोगों की होती है जो शुरू से ही साधना में अपना जीवन जीते हैं, वही समतापूर्वक मरण करते हैं।समता हर किसी को नहीं आती है ।प्रारंभ से ही शरीर को कष्ट देने की आदत डाली है। वहीं समता पूर्वक समाधिमरण करते हैं।व्यक्ति को चारों प्रकार के आहार का त्याग करके भगवान के गुणों का ध्यान कर भगवान की भक्ति करना चाहिए ना कि हिंसा करना चाहिए।जैन दर्शन के फार्मूले हैं,जिस पर अमल करना चाहिए। कम खाने वाला मरता नहीं है, अधिक खाने वाला मर सकता है। जैन दर्शन सिर्फ धर्म ही नही सिखाता बल्कि स्वस्थ रहना भी सिखाता है। व्यक्ति को आत्मकल्याण का ज्ञान नहीं है, लेकिन आरंम सारम और घर गृहस्थी में पूरा ज्ञान है। साधु बिना नियम के आहार के लिए नहीं जाते हैं, लेकिन आप लोगों को विवेक लगाकर पडगाहन करना चाहिए।व्यक्ति रसना इंद्रिय का गुलाम है, उस पर नियंत्रण करना चाहिए। रसना इंद्रिय का त्याग रखना चाहिए। अगर आपका नियम रहता है तो व्यक्ति अशुभकर्म से बचता है, आकुलता नहीं रहती है। रस के त्याग से नियम का पालन भी होता है। गृहस्थ जीवन से ही संयम और त्याग के भाव होना चाहिए। ऐसा नहीं करते हैं तो जीवन दुर्गति में जाएगा। इस संसार में जहाँ असंयमी व्यक्ति की दुर्गति निश्चित है। व्यक्ति को उठने- बैठने में सावधानी रखना चाहिए, आपके कारण जीव जंतु की विरादना नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को बैठने के लिए ऐसी वस्तु का उपयोग करना चाहिए, जिससे तकलीफ भी न हो और ज्यादा आनंद भी न हो। व्यक्ति को साधना संयम पूर्वक करना चाहिए। सामायिक संकल्प लेकर करना चाहिए, उस दौरान कायक्लेस नहीं करना चाहिए। मन को एकाग्रचित करके नियमपूर्वक सामायिक करना चाहिए। शरीर को कष्ट देना सीखे, तभी आप संयम धारण करना सीखेंगे। मुनि महाराज समाधि नहीं कराते हैं जो लेने वाला है वही समाधि करता है, समाधि दिलाने वाला तो निमित्त है। वर्तमान ही भविष्य का निर्माता है, वर्तमान को संभाल कर रखें। वर्तमान को संभाला है तो भविष्य भी अच्छा ही मिलेगा। कष्ट का नाम ही संयम है। जो संयम के नाम पर ढोंग कर रहे वो आगे दुर्गति की तैयारी कर रहे है। जो सारी सुविधाए ले रहे है, वो ब्रह्मचारी नहीं है। कई ब्रह्मचारी ऐसे हैं जो न चिंतन कर रहे हैं न स्वाध्याय कर रहे हैं फिर काहे के ब्रह्मचारी। हम वस्तु का स्वरूप ही बताते हैं। जैसा वस्तु का स्वरूप है वैसे ही बताये उसे छुपाएं नहीं, वही सही वक्ता है। अंदर का तप वह है जो मन को निर्मल बनाता है। प्रायश्चित वह है जो एक बार गलती होने पर लिया जाता है। बार -बार एक ही गलती करने पर लिए जाने पर प्रायश्चित नहीं होता। प्रायश्चित लेने से परिणामों की विशुद्धि बढ़ती है। विनय अहंकार को नष्ट करता है। जिसमें विनय नहीं है, वह त्यागी नहीं। त्यागी -व्रती सहज, सरल और विनम्र रहता है। जिसके पास विनय नहीं है, उसके पास धर्म नहीं है। विनय करने वाला जीव अपने नियम का पालन करता है। वह कर्मों के बंध से बचता है। कहने से विनय नही आती है, विनयवान जीवन बनाना पड़ता है। विनयवान व्यक्ति को अहंकार नहीं छू पाता है। विनय अंतरंग का तप है यह संसार से निकालकर मोक्ष की यात्रा कराता है। विशुद्धि बढने पर ही कर्मों की निर्जरा होगी। आत्मा को हल्का करे हैं । संयम एक नौका है जो भव से पार लगाता है। संसार भी एक सागर है, इसमें डूबना है कि तैरना है। संयम धारण करोगे तो संसार रूपी सागर से पार हो जाओगे। वैय्यावृति सिर्फ साधुओं की नहीं अपने घर के बड़े -बुजुर्गों की भी की जाती है। बड़े बनकर आपको अपने से छोटों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। तभी आप बड़े कहलाएगे। जो जैन दर्शन को समझ लेता है वो अपने आपको संभाल लेता है। स्व का हित हो, स्व के बारे में ज्ञान हो वह स्वाध्याय है। स्वाध्याय अपनी विशुद्धि बढ़ाने के लिए होता है। स्वाध्याय में बैठकर आपस में चर्चा नहीं करना चाहिए। इच्छाओं को दबाये परिग्रह कम रखें। जो पुण्य से सामग्री मिली है उसमें विरक्ति रखें।परिग्रह बढ़ाए नही बल्कि कम करें या छोड़ें। नियम ,संयम से रहने वाला संसार से पार हो जाता है। विरक्त भाव की कमी आज- कल लोगों में है। कई ऐसे लोग हैं दुनिया में जिनके पास सब कुछ है लेकिन विरक्तिपूर्वक जीवन जी रहे है, निश्चित वह अपने आप कल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो रहे है। तप आत्मा को निर्मल बनाते हैं और सिद्धालय की यात्रा कराते हैं। आत्मा तपने से सिद्धालय की यात्रा करती है। ध्यान आत्मा को सिद्धालय में पहुंचाता है। निर्विकल्प होना ध्यान करना, निर्विकल्प होकर ही ध्यान आराधना करना चाहिए। मुनिश्री ने बारह तपो पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। अपने जीवन को त्याग, तपस्या और संयम के मार्ग पर अग्रसर करें। अगर आपको सिद्धालय की यात्रा करना है तो ध्यान के साथ ज्ञान को भी समझो।
- आष्टा में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई गई शीतला सप्तमी आष्टा। नगर में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं शीतला माता मंदिर पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने माता शीतला को बासोड़ा (ठंडा भोजन) का भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा करने से घर-परिवार को बीमारियों से रक्षा मिलती है। मंदिरों में महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से माता की पूजा-अर्चना की। शीतला सप्तमी के अवसर पर पूरे आष्टा नगर में धार्मिक वातावरण बना रहा।1
- कन्नौद अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय के परिसर मे भारी अव्यवस्था . कन्नौद, अनुविभागीय दण्डाधिकारी तथा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी कार्यालय परिसर मे बेतरिब तरिके से खडे दो पहिया और चार पहिया वाहनो के कारण यातायात अवरोध की स्थिति बन जाती है पैदल चलने को भी जगह नही रहती है, मंगलवार दोपहर 3 बजे जागरूक नागरिक ने बताया कि आश्चर्य की बात है अनुविभागीय अधिकारी की सरकारी गाडी निर्धारित स्थान पर सडक से एक तरफ खडी रहती है . लेकिन यहां दिन भर आने वाले वाहनो को बीच मे खडे करने से परेशानी होती है जबकि इसी परिसर जनपद पंचायत भूमि भवन पंजीयक रोज गार गारन्टी तहसील खाद्य . लोकसेवा महिला बाल विकास सहित कई विभाग है और अब तो अपर कलेक्टर भी प्रत्येक गुरुवार को कन्नौद मे बैठते है ऐसी स्थिति मे यहां बाहर गांव से और कन्नौद से ही आने वाले रहवासियो की काफी भीड रहती है लेकिन वाहन पार्किग का कोई स्थान निर्धारित नही होने से यहां आने वाले व्यक्ति परेशान हो जाते है जबकि अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय के पीछे रोजगार गारंटी के भवन के सामने काफी खाली जगह पडी है यदि वहां वाहन पार्किंग का स्थान निर्धारित करके बोर्ड लगा दिया जाये जिससे यहां वाहन खडे नही होगे1
- शाजापुर में खुले मैदान की सूखी घास में लगी आगः हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास भड़की लपटें; फायर ब्रिगेड ने आधे घंटे में पाया काबू शाजापुर (उज्जैन) 4 घंटे पहले शाजापुर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास एक खुले मैदान में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे अचानक आग लग गई। मैदान में मौजूद सूखी घास और झाड़ियों में लगी आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया था। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। चिंगारी की आवाज के साथ भड़की लपटेंस्थानीय निवासी नरेंद्र के अनुसार दोपहर में अचानक चिंगारी उठने जैसी आवाज सुनाई दी। बाहर देखने पर मैदान में जमा सूखी घास और पत्तियों में आग लगी हुई थी। देखते ही देखते लपटें फैलने लगीं, जिससे आसपास के रहवासियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल दमकल विभाग को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड का दस्ता मौके पर पहुंचा और पानी की बौछारें शुरू कीं। त्वरित कार्रवाई के चलते आग को मैदान से सटे रिहायशी घरों तक पहुंचने से पहले ही बुझा दिया गया। इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।आग लगने के कारणों की जांच जारी मैदान में आग किन परिस्थितियों में लगी, इसका आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक अंदेशा किसी जलती हुई वस्तु या शॉर्ट सर्किट के कारण घास में आग लगने का जताया जा रहा है।1
- अभी-अभी सुबह 11:30 के करीब थाना कालापीपल नंदिनी में दो पक्षों में विवाद हुआ ट्रैक्टर में गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ जिसमें स्थिति इतनी गंभीर हुई हिंदू मुस्लिम आमने-सामने पुलिस प्रशासन मुरादाबाद के नारे भी लगाए गए हैं लेकिन शाजापुर काला पीपल सुजालपुर सब दूर के पुलिस ने इस माहौल को कंट्रोल किया अभी माहौल शांत है देखते हैं आगे क्या होता है नई अपेंडेड के साथ फिर हम नई खबर देंगे अजब सिंह मीना पंचायती राज जिला ब्यौरा चीफ जिला शाजापुर3
- Post by Sajid Pathan1
- कालापीपल के नांदनी में वाहन हटाने के विवाद पर बवाल, दो युवकों की पिटाई के बाद ग्रामीणों ने किया चक्काजाम कालापीपल क्षेत्र के नांदनी गांव में वाहन हटाने को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार करीब 20 लोगों ने मिलकर दो युवकों के साथ मारपीट कर दी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि वाहन हटाने की बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। मारपीट में दो युवक घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सड़क पर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के कारण कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाइश देकर जाम खुलवाया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।1
- यह तस्वीर शहर के रेवा बाग स्थित स्वास्थ्य केंद्र की है। शाम करीब 5:30 बजे बच्चों को लगने वाली वैक्सीन का डब्बा लावारिस हालत में पड़ा मिला, जबकि केंद्र बंद होने का समय 6:30 बजे है। गौरतलब है कि इन वैक्सीन को विशेष तापमान में सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी संवेदनशील दवाओं को इस तरह असुरक्षित क्यों छोड़ा गया? यदि इस लापरवाही के कारण कल को किसी बच्चे के साथ कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?1
- वाहन हटाने के विवाद में मारपीट के बाद चक्काजामः नांदनी में 20 लोगों ने दो युवकों को पीटा; ग्रामीणों ने गुमटी तोड़ी, एक आरोपी गिरफ्तार शुजालपुर 3 घंटे पहले सड़क पर वाहन लेकर खड़े ग्रामीण। शुजालपुर के ढाबलाधीर जोड़ पर मंगलवार सुबह वाहन हटाने की बात को लेकर हुए विवाद ने उग्र रूप ले लिया। करीब 20 लोगों ने दो भाइयों के साथ मारपीट कर दी, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने नांदनी में चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 2 बजे पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जाम खोला जा सका।श्रीशंग मशीन निकालने को लेकर हुआ विवाद घायल श्रवण मेवाड़ा और महेश मेवाड़ा सुबह करीब 10 बजे थ्रेशिंग मशीन लेकर फसल निकालने ढाबलाधीर गांव जा रहे थे। ढाबला चायनी जोड़ पर रास्ते में खड़े वाहनों को हटाने के लिए कहने पर वहां मौजूद लोगों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि इस दौरान 20 से अधिक लोगों ने मिलकर दोनों भाइयों के साथ मारपीट की। अंजुमन कमेटी ईदगाह का दरवाजा भीड़ ने गिराया। गेट और गुमटी में की तोड़फोड़ मारपीट की घटना से आक्रोशित भीड़ ने बड़बेली जोड़ पर स्थित ईदगाह अंजुमन कमेटी परिसर का लोहे का गेट गिरा दिया। प्रदर्शनकारियों ने वहां रखी एक गुमटी में भीतोड़फोड़ की। ग्रामीणों का आरोप है कि जोड़ पर अवैध गुमटियां रखकर किए गए अतिक्रमण के कारण अक्सर वाहन खड़े रहते हैं, जिससे विवाद की स्थितियां निर्मित होती हैं। शेयर मौके पर चक्काजाम करते ग्रामीण। पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ा, अतिरिक्त बल तैनात एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। एसडीएम राजकुमार हलदर के अनुसार, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।घायल महेश मेवाड़ा (बाएं), श्रवण मेवाड़ा (दाएं) अतिक्रमण हटाने और सुरक्षा की मांग घायल श्रवण मेवाड़ा ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ढाबलाधीर जोड़ से अवैध अतिक्रमण हटाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पुलिस ने अभी अन्य आरोपियों के नामों का खुलासा नहीं किया है और मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है।1