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Every great prophecy, from Nostradamus to the Bhavishya Malika, heralds the arrival of one world-changer : Sant Rampal Ji Maharaj. The Vision: A world united by humanity, beyond the barriers of religion. The Goal: Bringing Heaven to Earth through True Knowledge. Save the Date: May 1, 2, & 3, 2026 Join the movement for a peaceful world! #WorldPeace #PeaceOnEarth #Humanity #SpiritualAwakening #TrueGuru #SantRampalJiMaharaj

7 hrs ago
user_VIKESH DAS
VIKESH DAS
Farmer Nuaon, Kaimur (Bhabua)•
7 hrs ago

Every great prophecy, from Nostradamus to the Bhavishya Malika, heralds the arrival of one world-changer : Sant Rampal Ji Maharaj. The Vision: A world united by humanity, beyond the barriers of religion. The Goal: Bringing Heaven to Earth through True Knowledge. Save the Date: May 1, 2, & 3, 2026 Join the movement for a peaceful world! #WorldPeace #PeaceOnEarth #Humanity #SpiritualAwakening #TrueGuru #SantRampalJiMaharaj

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  • कैमूर। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'नल-जल योजना' कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड में दम तोड़ती नजर आ रही है। चिलबिली पंचायत के ग्राम माथा चक में पिछले दो महीनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे गांव में भीषण जल संकट गहरा गया है। स्थिति यह है कि पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है और ग्रामीण नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। वही जलापूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण टंकी का गेट वाल खराब होना बताया जा रहा है। टंकी ऑपरेटर सूरजबली बिंद के अनुसार, यह समस्या पिछले दो महीनों से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जूनियर इंजीनियर (JE), स्थानीय मुखिया और जिला परिषद प्रतिनिधियों को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हर बार केवल मरम्मत का आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है। वही गांव की महिलाओं का कहना है कि पानी के अभाव में घर का चूल्हा-चौका करना भी दूषित हो गया है। सबसे बुरा हाल बच्चों का है, जो पढ़ाई छोड़कर शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक बर्तनों के साथ लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। पानी की किल्लत के कारण कई घरों में समय पर भोजन नहीं बन पा रहा है और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। वही शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण ग्रामीण नदी और अन्य असुरक्षित स्रोतों से पानी लाने को विवश हैं। दूषित जल के सेवन से गांव में हैजा, कॉलरा और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बच्चों की तबीयत पहले ही खराब होने लगी है। "हम प्रशासन से अपनी मांग रख कर के थक चुके हैं। अगर जल्द ही गेट वाल की मरम्मत कराकर जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, पानी चाहिए।" आपको बताता हुए चलें कि साफ तौर पर देखा जा रहा है कि एक तरफ सरकार हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ माथा चक जैसे गांवों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मानवीय संकट पर कब जागता है।
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    कैमूर। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'नल-जल योजना' कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड में दम तोड़ती नजर आ रही है। चिलबिली पंचायत के ग्राम माथा चक में पिछले दो महीनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे गांव में भीषण जल संकट गहरा गया है। स्थिति यह है कि पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है और ग्रामीण नदी का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। वही जलापूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण टंकी का गेट वाल खराब होना बताया जा रहा है। टंकी ऑपरेटर सूरजबली बिंद के अनुसार, यह समस्या पिछले दो महीनों से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जूनियर इंजीनियर (JE), स्थानीय मुखिया और जिला परिषद प्रतिनिधियों को कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। हर बार केवल मरम्मत का आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है। वही गांव की महिलाओं का कहना है कि पानी के अभाव में घर का चूल्हा-चौका करना भी दूषित हो गया है। सबसे बुरा हाल बच्चों का है, जो पढ़ाई छोड़कर शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक बर्तनों के साथ लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। पानी की किल्लत के कारण कई घरों में समय पर भोजन नहीं बन पा रहा है और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। वही शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण ग्रामीण नदी और अन्य असुरक्षित स्रोतों से पानी लाने को विवश हैं। दूषित जल के सेवन से गांव में हैजा, कॉलरा और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बच्चों की तबीयत पहले ही खराब होने लगी है। "हम प्रशासन से अपनी मांग रख कर के थक चुके हैं। अगर जल्द ही गेट वाल की मरम्मत कराकर जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, पानी चाहिए।" आपको बताता हुए चलें कि साफ तौर पर देखा जा रहा है कि एक तरफ सरकार हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ माथा चक जैसे गांवों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मानवीय संकट पर कब जागता है।
    user_Satyam Kumar Upadhyay
    Satyam Kumar Upadhyay
    Local News Reporter Bhabua, Patna•
    1 hr ago
  • Post by Om Prakash Tiwari
    1
    Post by Om Prakash Tiwari
    user_Om Prakash Tiwari
    Om Prakash Tiwari
    Newspaper advertising department Bhabua, Kaimur (Bhabua)•
    6 hrs ago
  • Post by VIKESH DAS
    1
    Post by VIKESH DAS
    user_VIKESH DAS
    VIKESH DAS
    Farmer Nuaon, Kaimur (Bhabua)•
    7 hrs ago
  • Post by Ansarul Haque khan
    1
    Post by Ansarul Haque khan
    user_Ansarul Haque khan
    Ansarul Haque khan
    Reporter चैनपुर, कैमूर (भभुआ), बिहार•
    3 hrs ago
  • Post by आजाद जमावादी
    1
    Post by आजाद जमावादी
    user_आजाद जमावादी
    आजाद जमावादी
    Local News Reporter चैनपुर, कैमूर (भभुआ), बिहार•
    4 hrs ago
  • *भारतीय स्वाधीनता संग्राम के 1857 के विद्रोह में बिहार और बाबू वीर कुंवर सिंह जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, उनके बारे में पूरे देश को जानना चाहिए।* *उनके ‘लॉन्ग मार्च’ और विपरीत परिस्थितियों में भी जगदीशपुर में आज़ादी का झंडा फहराना भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।* *उस दिन की स्मृति में मनाया जाने वाला विजयोत्सव आज भी प्रत्येक देशवासी को गौरवान्वित करता है।*
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    *भारतीय स्वाधीनता संग्राम के 1857 के विद्रोह में बिहार और बाबू वीर कुंवर सिंह जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, उनके बारे में पूरे देश को जानना चाहिए।*
*उनके ‘लॉन्ग मार्च’ और विपरीत परिस्थितियों में भी जगदीशपुर में आज़ादी का झंडा फहराना भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।*
*उस दिन की स्मृति में मनाया जाने वाला विजयोत्सव आज भी प्रत्येक देशवासी को गौरवान्वित करता है।*
    user_राष्ट्र नमन प्रेस
    राष्ट्र नमन प्रेस
    Local Politician चेनारी, रोहतास, बिहार•
    33 min ago
  • 🎥 न्यूज़ स्क्रिप्ट – “सूरत स्टेशन पर बिहार के मजदूरों का बुरा हाल” नमस्कार, आप देख रहे हैं Awaz-e-Bharat आज हम बात कर रहे हैं उस दर्द की, जो हजारों किलोमीटर दूर अपने घर से निकलकर रोज़ी-रोटी कमाने आए बिहार के मजदूर झेल रहे हैं। 📍 गुजरात के सूरत रेलवे स्टेशन पर इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो दिल दहला देने वाली हैं। भीषण गर्मी, भीड़ का दबाव, और बुनियादी सुविधाओं की कमी—इन सबके बीच बिहार के मजदूर बेहाल नजर आ रहे हैं। 👷‍♂️ ये वही मजदूर हैं जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए बिहार से सूरत आते हैं। लेकिन जब घर लौटने का वक्त आता है, तो रेलवे स्टेशन पर उन्हें घंटों—कभी-कभी पूरे दिन—इंतजार करना पड़ता है। 🚉 प्लेटफॉर्म पर बैठने की जगह नहीं, पानी की किल्लत, और टिकट कन्फर्म न होने की परेशानी… कई मजदूर जमीन पर सोने को मजबूर हैं। 😔 कुछ मजदूरों का कहना है कि— "हम कमाने आए थे, लेकिन यहां तो जीना भी मुश्किल हो गया है…" 📢 सवाल ये उठता है कि— क्या मजदूरों की जिंदगी इतनी सस्ती है? क्या सरकार और रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि इनकी सुविधा का ध्यान रखा जाए? ⚠️ हर साल त्योहारों या छुट्टियों के समय यही हाल देखने को मिलता है, लेकिन हालात सुधारने के लिए ठोस कदम अब तक क्यों नहीं उठाए गए? 👉 जरूरत है बेहतर ट्रेन व्यवस्था, 👉 पर्याप्त पानी और शेड की सुविधा, 👉 और मजदूरों के लिए विशेष इंतजाम की। 🎯 आखिरकार, देश की अर्थव्यवस्था को खड़ा रखने में इन मजदूरों का सबसे बड़ा योगदान है। आवाज़ उठाइए, क्योंकि मजदूर की इज्जत ही देश की असली ताकत है। मैं हूँ [आपका नाम], Awaz-e-Bharat के साथ। धन्यवाद।
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    🎥 न्यूज़ स्क्रिप्ट – “सूरत स्टेशन पर बिहार के मजदूरों का बुरा हाल”
नमस्कार, आप देख रहे हैं Awaz-e-Bharat
आज हम बात कर रहे हैं उस दर्द की, जो हजारों किलोमीटर दूर अपने घर से निकलकर रोज़ी-रोटी कमाने आए बिहार के मजदूर झेल रहे हैं।
📍 गुजरात के सूरत रेलवे स्टेशन पर इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वो दिल दहला देने वाली हैं।
भीषण गर्मी, भीड़ का दबाव, और बुनियादी सुविधाओं की कमी—इन सबके बीच बिहार के मजदूर बेहाल नजर आ रहे हैं।
👷‍♂️ ये वही मजदूर हैं जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए बिहार से सूरत आते हैं।
लेकिन जब घर लौटने का वक्त आता है, तो रेलवे स्टेशन पर उन्हें घंटों—कभी-कभी पूरे दिन—इंतजार करना पड़ता है।
🚉 प्लेटफॉर्म पर बैठने की जगह नहीं, पानी की किल्लत, और टिकट कन्फर्म न होने की परेशानी…
कई मजदूर जमीन पर सोने को मजबूर हैं।
😔 कुछ मजदूरों का कहना है कि—
"हम कमाने आए थे, लेकिन यहां तो जीना भी मुश्किल हो गया है…"
📢 सवाल ये उठता है कि—
क्या मजदूरों की जिंदगी इतनी सस्ती है?
क्या सरकार और रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि इनकी सुविधा का ध्यान रखा जाए?
⚠️ हर साल त्योहारों या छुट्टियों के समय यही हाल देखने को मिलता है,
लेकिन हालात सुधारने के लिए ठोस कदम अब तक क्यों नहीं उठाए गए?
👉 जरूरत है बेहतर ट्रेन व्यवस्था,
👉 पर्याप्त पानी और शेड की सुविधा,
👉 और मजदूरों के लिए विशेष इंतजाम की।
🎯 आखिरकार, देश की अर्थव्यवस्था को खड़ा रखने में इन मजदूरों का सबसे बड़ा योगदान है।
आवाज़ उठाइए, क्योंकि मजदूर की इज्जत ही देश की असली ताकत है।
मैं हूँ [आपका नाम],
Awaz-e-Bharat के साथ।
धन्यवाद।
    user_Awaaz -e-Bharat
    Awaaz -e-Bharat
    Chand, Kaimur (Bhabua)•
    23 hrs ago
  • Post by Om Prakash Tiwari
    1
    Post by Om Prakash Tiwari
    user_Om Prakash Tiwari
    Om Prakash Tiwari
    Newspaper advertising department Bhabua, Kaimur (Bhabua)•
    22 hrs ago
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