चीख पड़े किसान! घाटमपुर में बेमौसम बारिश-ओलों ने रौंद डाली गेहूं की लहलहाती फसल कानपुर,4 अप्रैल 2026 - घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा विकासखंड अंतर्गत दर्जनो गांवों में हुई भीषण ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पतारा, पतरसा तेजपुर, मुइया, सरैया सहित कई गांवों में बेमौसम हुई इस आफत से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे अन्नदाताओं में चिंता और निराशा का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार दोपहर अचानक काले बादल छा गए और शुरू हुई तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे, जिसने खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल को तबाह कर दिया। किसानों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है और अब उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की जा रही है, ताकि इस संकट की घड़ी में किसानों को थोड़ी राहत मिल सके।
चीख पड़े किसान! घाटमपुर में बेमौसम बारिश-ओलों ने रौंद डाली गेहूं की लहलहाती फसल कानपुर,4 अप्रैल 2026 - घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा विकासखंड अंतर्गत दर्जनो गांवों में हुई भीषण ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
पतारा, पतरसा तेजपुर, मुइया, सरैया सहित कई गांवों में बेमौसम हुई इस आफत से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे अन्नदाताओं में चिंता और निराशा का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार दोपहर अचानक काले बादल
छा गए और शुरू हुई तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे, जिसने खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल को तबाह कर दिया। किसानों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर
आ रहा है और अब उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की जा रही है, ताकि इस संकट की घड़ी में किसानों को थोड़ी राहत मिल सके।
- कानपुर,4 अप्रैल 2026 - घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा विकासखंड अंतर्गत दर्जनो गांवों में हुई भीषण ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पतारा, पतरसा तेजपुर, मुइया, सरैया सहित कई गांवों में बेमौसम हुई इस आफत से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे अन्नदाताओं में चिंता और निराशा का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार दोपहर अचानक काले बादल छा गए और शुरू हुई तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे, जिसने खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल को तबाह कर दिया। किसानों का कहना है कि बारिश और ओलावृष्टि से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है और अब उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की जा रही है, ताकि इस संकट की घड़ी में किसानों को थोड़ी राहत मिल सके।4
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- कानपुर केशवपुरम के मेडिलाइफ हॉस्पिटल में संदिग्ध ट्रांसप्लांट का मामला हालत बिगड़ने पर महिला को दिल्ली के अस्पताल भेजा गया था गॉल ब्लैडर ऑपरेशन के नाम पर कराया गया था भर्ती ट्रांसप्लांट के बाद दिल्ली में महिला की हो गई मौत गिरफ्तार कुलदीप और राजेश ने पूछताछ में किया खुलासा कई जिलों के लोग थे नेटवर्क में शामिल, अवैध अस्पताल संचालित सीएमओ का दावा, अस्पताल को तीन महीने पहले किया गया था सील1
- ब्रेकिंग न्यूज़:🚨🇮🇷🇺🇲अमेरिकी वायु सेना का दूसरा लड़ाकू विमान, ए-10 वॉर्थोग, आज फारस की खाड़ी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। सौभाग्य से, पायलट को बचा लिया गया है और वह सुरक्षित है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह घटना लगभग उसी समय घटी जब ईरान के ऊपर एक एफ-15 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विवरण बहुत कम उपलब्ध हैं।1
- उत्तर प्रदेश के कानपुर में मानवता को शर्मसार करने वाला एक वीडियो वायरल हो रहा है, वीडियो में एक छोटा बच्चा जिसके पैरों में चप्पल तक नहीं है, सड़क किनारे बेहोश पड़ी अपनी मां के पास रो रहा है, वह बच्चा अपनी मां के चेहरे पर पानी छिड़क रहा है और उसे बिस्किट खिलाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह होश में आ जाए, सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि सड़क पर आने-जाने वाले और वहां खड़े लोग उस बच्चे की मदद करने या एम्बुलेंस बुलाने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे थे, यह दृश्य डिजिटल युग में इंसानी संवेदनाओं के खत्म होने का प्रमाण है.....Kpba1
- Post by Dileepverma1
- उन्नाव में अवैध खनन का खेल: बस्तीखेड़ा में धड़ल्ले से चल रहा मिट्टी खनन, राजस्व को लाखों का नुकसान उन्नाव। दही चौकी क्षेत्र के अंतर्गत बस्तीखेड़ा गांव में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी रोक-टोक के दिन-रात जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए मिट्टी का उत्खनन कर रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, खनन कार्य खुलेआम चल रहा है, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस अवैध कारोबार को कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। बस्तीखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रहे खनन से खेतों की उपजाऊ मिट्टी खत्म हो रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा, भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत भी खराब हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या खनन माफिया पर नकेल कसने में सफल हो पाता है या नहीं।1
- शनिवार को घाटमपुर तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में भारतीय किसान यूनियन किसान के जिला अध्यक्ष अल्पसंख्यक कलीम और अन्य कार्यकर्ताओं ने सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे और मानक विहीन शराब की दुकानों को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं। उन्होंने प्रशासन से इन मामलों में तुरंत कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा शिकायत पत्र में बताया गया है कि घाटमपुर की भूमि संख्या 313, जो राजस्व रिकॉर्ड में 'ऊसर' (बंजर) और सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज है, पर कुछ धनाढ्य व्यक्तियों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इस भूमि पर मां संतोषी का एक मंदिर भी स्थित है, जिसकी आस-पास की जमीन को भी कब्जे से नहीं बख्शा गया है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले की जांच कर सभी अवैध कब्जों को हटाने की अपील की है। मानक विहीन शराब की दुकानें बनी परेशानी का सबब इसके अतिरिक्त, कस्बे में संचालित कई शराब की दुकानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ये दुकानें नियमों का उल्लंघन करते हुए शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों के बेहद करीब चल रही हैं। इन दुकानों के पास शराबियों के जमावड़े के कारण महिलाओं, बच्चों और अन्य सभ्रांत व्यक्तियों को अक्सर छींटाकसी, अश्लीलता और मारपीट जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे आम जनमानस में भारी रोष है।स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि गांव सभा की संपत्ति को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए और शराब की दुकानों को मानकों के अनुरूप सार्वजनिक, धार्मिक और शिक्षण संस्थानों से उचित दूरी पर स्थापित किया जाए। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस पर त्वरित कार्रवाई करेगा।1