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लखनऊ अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई परिवार उजड़ गए। इस भयावह घटना के बाद, चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है और चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, जबकि मामले में SIT जांच अभी भी जारी है। हालांकि, इतने सारे कदमों के बावजूद, कई बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। लोगों के मन में प्रश्न है कि आखिर आग से बचाव के लिए NOC किसने दी थी और फायर सेफ्टी की आखिरी जांच कब हुई थी? यदि नियम-कानून मौजूद थे, तो फिर फायर सिस्टम कैसे विफल हो गया? सबसे गंभीर चिंता यह भी है कि क्या इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ छोटे अधिकारियों तक ही सीमित कर दी जाएगी, जबकि सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई, जिससे हादसे मौत के जाल में बदल गए। आज लखनऊ इस पूरे मामले पर जवाब मांग रहा है। एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या जांच इस त्रासदी के असली जिम्मेदारों तक पहुंच पाएगी, या फिर यह पूरा मामला कुछ निलंबनों और मुआवजे तक ही सिमट कर रह जाएगा। पंद्रह जिंदगियां बुझ गई हैं, लेकिन क्या सिर्फ चार निलंबन से न्याय मिल पाएगा? यह भी पूछा जा रहा है कि इस हादसे के लिए असली दोषी कौन है — भवन संचालक, फायर विभाग, LDA, या पूरा प्रशासनिक तंत्र?

8 hrs ago
user_Gaurav Srivastava
Gaurav Srivastava
News Anchor सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
8 hrs ago

लखनऊ अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई परिवार उजड़ गए। इस भयावह घटना के बाद, चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है और चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, जबकि मामले में SIT जांच अभी भी जारी है। हालांकि, इतने सारे कदमों के बावजूद, कई बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। लोगों के मन में प्रश्न है कि आखिर आग से बचाव के लिए NOC किसने दी थी और फायर सेफ्टी की आखिरी जांच कब हुई थी? यदि नियम-कानून मौजूद थे, तो फिर फायर सिस्टम कैसे विफल हो गया? सबसे गंभीर चिंता यह भी है कि क्या इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ छोटे अधिकारियों तक ही सीमित कर दी जाएगी, जबकि सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई, जिससे हादसे मौत के जाल में बदल गए। आज लखनऊ इस पूरे मामले पर जवाब मांग रहा है। एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या जांच इस त्रासदी के असली जिम्मेदारों तक पहुंच पाएगी, या फिर यह पूरा मामला कुछ निलंबनों और मुआवजे तक ही सिमट कर रह जाएगा। पंद्रह जिंदगियां बुझ गई हैं, लेकिन क्या सिर्फ चार निलंबन से न्याय मिल पाएगा? यह भी पूछा जा रहा है कि इस हादसे के लिए असली दोषी कौन है — भवन संचालक, फायर विभाग, LDA, या पूरा प्रशासनिक तंत्र?

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  • रायबरेली के ऊंचाहार स्थित मां गंगा के गोकना घाट धाम पर आज एकादशी के शुभ अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तों ने गंगा स्नान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गंगा को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
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    रायबरेली के ऊंचाहार स्थित मां गंगा के गोकना घाट धाम पर आज एकादशी के शुभ अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तों ने गंगा स्नान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गंगा को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
    user_Anubhav Singh
    Anubhav Singh
    सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • रायबरेली के सलोन कोतवाली क्षेत्र स्थित रसूलपुर गाँव में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्होंने दिनदहाड़े एक खड़ी दीवार को ढहा दिया। दीवार तोड़ने की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वायरल हो रहा यह वीडियो तीन दिन पुराना बताया जा रहा है। मामले में पुलिस द्वारा चार नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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    रायबरेली के सलोन कोतवाली क्षेत्र स्थित रसूलपुर गाँव में दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्होंने दिनदहाड़े एक खड़ी दीवार को ढहा दिया। दीवार तोड़ने की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

वायरल हो रहा यह वीडियो तीन दिन पुराना बताया जा रहा है। मामले में पुलिस द्वारा चार नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
    user_Yash kumar
    Yash kumar
    सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • एक घटना सामने आई है जिसमें एक पुजारी ने एक भिखारी को लात मारी। इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त वास्तव में कौन है – वह पुजारी जिसने लात मारी, या वह भिखारी जिसने यह लात खाई?
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    एक घटना सामने आई है जिसमें एक पुजारी ने एक भिखारी को लात मारी। इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त वास्तव में कौन है – वह पुजारी जिसने लात मारी, या वह भिखारी जिसने यह लात खाई?
    user_फौजी जय सिंह यादव
    फौजी जय सिंह यादव
    Lawyer Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    17 hrs ago
  • रायबरेली जिले के ऊंचाहार में स्थानीय प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के सख्त आदेश पर, ऊंचाहार नगर पंचायत के कलवारन टोला मोहल्ले में अवैध रूप से किए गए एक निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान, नायब तहसीलदार शंभू शरण पांडेय स्वयं मजिस्ट्रेट के रूप में मौके पर मौजूद रहे, ताकि सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनी रहे। उनकी देखरेख में, भारी पुलिस बल की उपस्थिति में पहुंचे दस्ते ने जेसीबी (बुलडोजर) का उपयोग कर अवैध निर्माण को गिरा दिया। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके के अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
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    रायबरेली जिले के ऊंचाहार में स्थानीय प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के सख्त आदेश पर, ऊंचाहार नगर पंचायत के कलवारन टोला मोहल्ले में अवैध रूप से किए गए एक निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।

इस कार्रवाई के दौरान, नायब तहसीलदार शंभू शरण पांडेय स्वयं मजिस्ट्रेट के रूप में मौके पर मौजूद रहे, ताकि सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनी रहे। उनकी देखरेख में, भारी पुलिस बल की उपस्थिति में पहुंचे दस्ते ने जेसीबी (बुलडोजर) का उपयोग कर अवैध निर्माण को गिरा दिया। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके के अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
    user_Harinarayan Tiwari
    Harinarayan Tiwari
    Court reporter Unchahar, Rae Bareli•
    6 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक खेत अचानक जंग के मैदान में तब्दील हो गया। बिसौली कोतवाली के परसेरा गांव में हुई इस घटना के दौरान लाठी-डंडों और पत्थरों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। इस मारपीट और बीच-बचाव की कोशिश में कई लोग जख्मी हुए हैं।
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    उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक खेत अचानक जंग के मैदान में तब्दील हो गया। बिसौली कोतवाली के परसेरा गांव में हुई इस घटना के दौरान लाठी-डंडों और पत्थरों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। इस मारपीट और बीच-बचाव की कोशिश में कई लोग जख्मी हुए हैं।
    user_Rakesh Rawat
    Rakesh Rawat
    गौरीगंज, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • लखनऊ अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई परिवार उजड़ गए। इस भयावह घटना के बाद, चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है और चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, जबकि मामले में SIT जांच अभी भी जारी है। हालांकि, इतने सारे कदमों के बावजूद, कई बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। लोगों के मन में प्रश्न है कि आखिर आग से बचाव के लिए NOC किसने दी थी और फायर सेफ्टी की आखिरी जांच कब हुई थी? यदि नियम-कानून मौजूद थे, तो फिर फायर सिस्टम कैसे विफल हो गया? सबसे गंभीर चिंता यह भी है कि क्या इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ छोटे अधिकारियों तक ही सीमित कर दी जाएगी, जबकि सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई, जिससे हादसे मौत के जाल में बदल गए। आज लखनऊ इस पूरे मामले पर जवाब मांग रहा है। एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या जांच इस त्रासदी के असली जिम्मेदारों तक पहुंच पाएगी, या फिर यह पूरा मामला कुछ निलंबनों और मुआवजे तक ही सिमट कर रह जाएगा। पंद्रह जिंदगियां बुझ गई हैं, लेकिन क्या सिर्फ चार निलंबन से न्याय मिल पाएगा? यह भी पूछा जा रहा है कि इस हादसे के लिए असली दोषी कौन है — भवन संचालक, फायर विभाग, LDA, या पूरा प्रशासनिक तंत्र?
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    लखनऊ अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई परिवार उजड़ गए। इस भयावह घटना के बाद, चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है और चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है, जबकि मामले में SIT जांच अभी भी जारी है।

हालांकि, इतने सारे कदमों के बावजूद, कई बड़े सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। लोगों के मन में प्रश्न है कि आखिर आग से बचाव के लिए NOC किसने दी थी और फायर सेफ्टी की आखिरी जांच कब हुई थी? यदि नियम-कानून मौजूद थे, तो फिर फायर सिस्टम कैसे विफल हो गया? सबसे गंभीर चिंता यह भी है कि क्या इस त्रासदी की जिम्मेदारी सिर्फ छोटे अधिकारियों तक ही सीमित कर दी जाएगी, जबकि सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई, जिससे हादसे मौत के जाल में बदल गए।

आज लखनऊ इस पूरे मामले पर जवाब मांग रहा है। एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या जांच इस त्रासदी के असली जिम्मेदारों तक पहुंच पाएगी, या फिर यह पूरा मामला कुछ निलंबनों और मुआवजे तक ही सिमट कर रह जाएगा। पंद्रह जिंदगियां बुझ गई हैं, लेकिन क्या सिर्फ चार निलंबन से न्याय मिल पाएगा? यह भी पूछा जा रहा है कि इस हादसे के लिए असली दोषी कौन है — भवन संचालक, फायर विभाग, LDA, या पूरा प्रशासनिक तंत्र?
    user_Gaurav Srivastava
    Gaurav Srivastava
    News Anchor सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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