UN में भारत का 'बजट प्रहार': पाकिस्तान की पूरी भीख से दोगुना है अकेले कश्मीर का विकास बजट #Apkiawajdigital जिनेवा/नई दिल्ली | विशेष संवाददाता संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी औकात और आईना दोनों दिखा दिए हैं। भारतीय राजनयिक अरुणिमा सिंह ने पाकिस्तान के कश्मीर राग पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का वार्षिक विकास बजट, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले पूरे 'बेलआउट पैकेज' से दोगुने से भी अधिक है। 'विकास बनाम दिवालियापन' की तुलना जिनेवा में आयोजित सत्र के दौरान अरुणिमा सिंह ने आंकड़ों के साथ पाकिस्तान की बदहाली पर प्रहार किया। उन्होंने कहा: तुलना: जहाँ पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने चंद अरब डॉलर के कर्ज (IMF बेलआउट) के लिए झोली फैलाए खड़ा है, वहीं भारत अकेले जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य पर उससे कहीं बड़ी राशि खर्च कर रहा है। तंज: "यह कड़वा सच स्वीकार करना पाकिस्तान के लिए कठिन हो सकता है कि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था की मदद से बड़ा हमारा एक राज्य का बजट है।" आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने अपनी जनता को गरीबी में धकेल दिया है और उसका पूरा ध्यान केवल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां हो रहा अभूतपूर्व विकास पाकिस्तान की हताशा का असली कारण है। अरुणिमा सिंह के संबोधन के मुख्य अंश: "पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। एक तरफ वह मानवाधिकारों की बात करता है और दूसरी तरफ अपने ही देश में अल्पसंख्यकों का दमन करता है। जम्मू-कश्मीर में शांति और समृद्धि का नया युग शुरू हो चुका है, जिसे पाकिस्तान के झूठे विमर्श (Narrative) से बदला नहीं जा सकता।" वैश्विक मंच पर गूँज भारत के इस 'आर्थिक प्रहार' ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान की स्थिति को और कमजोर कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक भारत के इस साहसी और तथ्यों पर आधारित जवाब की सराहना हो रही है। इस बयान ने साबित कर दिया है कि भारत अब केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर भी पाकिस्तान को पछाड़ने की ताकत रखता है।
UN में भारत का 'बजट प्रहार': पाकिस्तान की पूरी भीख से दोगुना है अकेले कश्मीर का विकास बजट #Apkiawajdigital जिनेवा/नई दिल्ली | विशेष संवाददाता संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी औकात और आईना दोनों दिखा दिए हैं। भारतीय राजनयिक अरुणिमा सिंह ने पाकिस्तान के कश्मीर राग पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का वार्षिक विकास बजट, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले पूरे 'बेलआउट पैकेज' से दोगुने से भी अधिक है। 'विकास बनाम दिवालियापन' की तुलना जिनेवा में आयोजित सत्र के दौरान अरुणिमा सिंह ने आंकड़ों के साथ पाकिस्तान की बदहाली पर प्रहार किया। उन्होंने कहा: तुलना: जहाँ पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने चंद अरब डॉलर के कर्ज (IMF बेलआउट) के लिए झोली फैलाए खड़ा है, वहीं भारत अकेले जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य पर उससे कहीं बड़ी राशि खर्च कर रहा है। तंज: "यह कड़वा सच स्वीकार करना पाकिस्तान के लिए कठिन हो सकता है कि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था की मदद से बड़ा हमारा एक राज्य का बजट है।" आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने अपनी जनता को गरीबी में धकेल दिया है और उसका पूरा ध्यान केवल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां हो रहा अभूतपूर्व विकास पाकिस्तान की हताशा का असली कारण है। अरुणिमा सिंह के संबोधन के मुख्य अंश: "पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। एक तरफ वह मानवाधिकारों की बात करता है और दूसरी तरफ अपने ही देश में अल्पसंख्यकों का दमन करता है। जम्मू-कश्मीर में शांति और समृद्धि का नया युग शुरू हो चुका है, जिसे पाकिस्तान के झूठे विमर्श (Narrative) से बदला नहीं जा सकता।" वैश्विक मंच पर गूँज भारत के इस 'आर्थिक प्रहार' ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान की स्थिति को और कमजोर कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक भारत के इस साहसी और तथ्यों पर आधारित जवाब की सराहना हो रही है। इस बयान ने साबित कर दिया है कि भारत अब केवल सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर भी पाकिस्तान को पछाड़ने की ताकत रखता है।
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- जनपद महोबा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। किसान यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा। किसानों ने बताया कि उन्हें सिंचाई, बिजली, खाद और बीज की उपलब्धता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर सुविधाएं नहीं मिलने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान यूनियन ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। वहीं जिला अधिकारी ने किसान प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया है कि उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। अगर मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो किसान यूनियन ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।1
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