मध्य प्रदेश के भितरवार में नगर परिषद की घोर लापरवाही के चलते वार्ड क्रमांक 10 स्थित शासकीय कॉलेज और सांदीपनि स्कूल का मार्ग 'अंतरराष्ट्रीय स्तर' के दलदल में बदल गया है, जहाँ छात्रों को रोज 'कीचड़ सफारी' का अनुभव करना पड़ रहा है। इस 'स्मार्ट मार्ग' पर संतुलन बिगड़ने से बुधवार को चार से पाँच छात्र कीचड़ में गिरकर लहूलुहान हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। लगभग 1200 छात्र, जिनमें 600 सांदीपनि स्कूल और 600 कॉलेज के हैं, प्रतिदिन इस 'नरकीय मार्ग' पर गिरते-उठते, अपने कपड़े खराब करते और खुद को घायल करते हुए शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हल्की सी फुहार पड़ने पर यहाँ बिछी खेतों की कच्ची मिट्टी मक्खन से भी ज़्यादा चिकनी हो जाती है, जिससे साइकिल और मोटरसाइकिल की तो एंट्री ही लगभग बंद है, और पैदल चलने वाले भी बड़ी मुश्किल से कत्थक नृत्य की मुद्रा में आगे बढ़ पाते हैं। प्रशासन इस पूरे मामले को आँखें मूँदकर ऐसे देख रहा है, मानो छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोई 'कमांडो ट्रेनिंग' दी जा रही हो। सांदीपनि विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने नगर परिषद को इस समस्या के समाधान के लिए अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन अधिकारियों की 'मोटी चमड़ी' पर बच्चों के सिर और घुटने फूटने की आवाज़ें भी उनके वातानुकूलित (AC) कमरों तक कोई असर नहीं कर पा रही हैं। इस पूरे मामले पर आक्रोश व्यक्त करते हुए प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने प्रशासनिक रवैये की कड़ी निंदा करते हुए सीधे शब्दों में कहा, "हम पिछले लंबे समय से इस नरकीय मार्ग की सुध लेने के लिए नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई जा चुकी है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के खातिर इस सड़क का निर्माण कराया जाए। लेकिन प्रशासन केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं और यहाँ हमारे मासूम बच्चे रोज़ गिरकर लहूलुहान हो रहे हैं। अगर नगर परिषद को लगता है कि हम ज्ञापन देना छोड़ देंगे, तो यह उनकी भूल है। हम छात्रों की सुरक्षा के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।" जनता नगर परिषद से चुभते हुए सवाल पूछ रही है कि जब यह मार्ग उनके अधीन है और टैक्स पूरा वसूला जा रहा है, तो सुविधाएँ शून्य क्यों हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि परिषद केवल कागजों पर विकास की खीर खा रही है, जबकि छात्र लहूलुहान होकर 'डिजिटल इंडिया' की राह नापते हुए भितरवार में 'कीचड़ सफारी' का मुफ्त आनंद लेने पर मजबूर हैं।
मध्य प्रदेश के भितरवार में नगर परिषद की घोर लापरवाही के चलते वार्ड क्रमांक 10 स्थित शासकीय कॉलेज और सांदीपनि स्कूल का मार्ग 'अंतरराष्ट्रीय स्तर' के दलदल में बदल गया है, जहाँ छात्रों को रोज 'कीचड़ सफारी' का अनुभव करना पड़ रहा है। इस 'स्मार्ट मार्ग' पर संतुलन बिगड़ने से बुधवार को चार से पाँच छात्र कीचड़ में गिरकर लहूलुहान हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। लगभग 1200 छात्र, जिनमें 600 सांदीपनि स्कूल और 600 कॉलेज के हैं, प्रतिदिन इस 'नरकीय मार्ग' पर गिरते-उठते, अपने कपड़े खराब करते और खुद को घायल करते हुए शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हल्की सी फुहार पड़ने पर यहाँ बिछी खेतों की कच्ची मिट्टी मक्खन से भी ज़्यादा चिकनी हो जाती है, जिससे साइकिल और मोटरसाइकिल की तो एंट्री ही लगभग बंद है, और पैदल चलने वाले भी बड़ी मुश्किल से कत्थक नृत्य की मुद्रा में आगे बढ़ पाते हैं। प्रशासन इस पूरे मामले को आँखें मूँदकर ऐसे देख रहा है, मानो छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोई 'कमांडो ट्रेनिंग' दी जा रही हो। सांदीपनि विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने नगर परिषद को इस समस्या के समाधान के लिए अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन अधिकारियों की 'मोटी चमड़ी' पर बच्चों के सिर और घुटने फूटने की आवाज़ें भी उनके वातानुकूलित (AC) कमरों तक कोई असर नहीं कर पा रही हैं। इस पूरे मामले पर आक्रोश व्यक्त करते हुए प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने प्रशासनिक रवैये की कड़ी निंदा करते हुए सीधे शब्दों में कहा, "हम पिछले लंबे समय से इस नरकीय मार्ग की सुध लेने के लिए नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई जा चुकी है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के खातिर इस सड़क का निर्माण कराया जाए। लेकिन प्रशासन केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं और यहाँ हमारे मासूम बच्चे रोज़ गिरकर लहूलुहान हो रहे हैं। अगर नगर परिषद को लगता है कि हम ज्ञापन देना छोड़ देंगे, तो यह उनकी भूल है। हम छात्रों की सुरक्षा के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।" जनता नगर परिषद से चुभते हुए सवाल पूछ रही है कि जब यह मार्ग उनके अधीन है और टैक्स पूरा वसूला जा रहा है, तो सुविधाएँ शून्य क्यों हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि परिषद केवल कागजों पर विकास की खीर खा रही है, जबकि छात्र लहूलुहान होकर 'डिजिटल इंडिया' की राह नापते हुए भितरवार में 'कीचड़ सफारी' का मुफ्त आनंद लेने पर मजबूर हैं।
- ग्वालियर जिले में पुलिस ने उन इनामी आरोपियों को आखिरकार अपनी गिरफ्त में ले लिया है जिन पर दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित था। ये आरोपी लंबे समय से कानून से बचने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनकी यह कोशिश नाकाम साबित हुई और वे पुलिस के शिकंजे में आ गए।1
- शिवपुरी जिले के नरवर में 14 महादेव मंदिर के पीछे स्थित एक खेत में उस समय हड़कंप मच गया जब एक 8 फुट लंबे अजगर ने एक बकरी पर हमला कर दिया। बकरी की तेज़ आवाज़ सुनकर मौके पर पहुंचे उसके मालिक अजगर को देखकर हैरान रह गए। सूचना मिलते ही नरवर के सर्प मित्र सलमान पठान को मौके पर बुलाया गया। सलमान पठान ने तुरंत कार्रवाई करते हुए, अत्यंत सावधानी और कुशलता से उस 8 फुट लंबे अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया। सांप को काबू में करने के बाद, उन्होंने मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों को सचेत करते हुए बताया कि इतने बड़े अजगर की पकड़ बेहद खतरनाक होती है और वह अपनी जकड़ से किसी भी जानवर या इंसान का दम घोंटकर उसकी जान ले सकता है। अजगर को रेस्क्यू करने के बाद, सलमान पठान ने उसे पास के सुरक्षित जंगल क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया। उनकी इस त्वरित कार्रवाई से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सलमान पठान ने यह भी बताया कि वे प्रतिदिन लगभग 10 से 15 सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू करते हैं और सांपों के अलावा कई अन्य जंगली जानवरों को भी जीवनदान देते हैं। उनकी इस निस्वार्थ सेवा और जीव प्रेम की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।1
- शिवपुरी जिले की नगर परिषद मगरौनी के वार्ड क्रमांक 7 में आवारा पशुओं और खूंखार सांडों का आतंक चरम पर है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों और राहगीरों का सड़क से गुजरना दूभर हो गया है और आए दिन हादसे होते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी गौशाला मौजूद होने के बावजूद, प्रशासनिक उदासीनता के चलते ये पशु सड़कों पर ही डेरा जमाए हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने नगर परिषद मगरौनी के आला अधिकारियों, कर्मचारियों और क्षेत्र के स्थानीय वार्ड पार्षद को कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया है। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है और यह समस्या जस की तस बनी हुई है। वार्डवासियों ने रोष जताते हुए कहा कि सड़कों के बीचों-बीच लड़ने वाले आवारा सांडों के कारण कई लोग चोटिल हो चुके हैं और वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से तत्काल यह मांग की है कि सड़कों पर घूम रहे इन आवारा पशुओं को गौशाला भिजवाया जाए, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।1
- करैरा पुलिस ने मानवता का परिचय देते हुए एक युवक की समय रहते मदद की, जो 8 जुलाई की शाम करीब 7 बजे सड़क किनारे बेहोशी की हालत में पड़ा मिला था। सूचना मिलते ही करैरा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और प्राथमिक जानकारी में यह सामने आया कि युवक को मिर्गी का दौरा पड़ा था। पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए युवक को सुरक्षित स्थान पर बैठाया और उसे प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई, जिसके कुछ देर बाद उसकी तबीयत में सुधार हुआ और उसे आवश्यक मदद भी दी गई। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस की इस तत्परता और संवेदनशील व्यवहार की सराहना की, क्योंकि समय पर मिली सहायता से किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने में मदद मिली। करैरा पुलिस की इस मानवीय पहल की पूरे क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।1
- ग्वालियर के मुरार क्षेत्र में व्यापारियों ने व्हाइट हाउस के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पारस जैन का ज़ोरदार स्वागत किया। यह स्वागत मुरार के व्यापारियों द्वारा किया गया।1
- मध्य प्रदेश के भितरवार में नगर परिषद की घोर लापरवाही के चलते वार्ड क्रमांक 10 स्थित शासकीय कॉलेज और सांदीपनि स्कूल का मार्ग 'अंतरराष्ट्रीय स्तर' के दलदल में बदल गया है, जहाँ छात्रों को रोज 'कीचड़ सफारी' का अनुभव करना पड़ रहा है। इस 'स्मार्ट मार्ग' पर संतुलन बिगड़ने से बुधवार को चार से पाँच छात्र कीचड़ में गिरकर लहूलुहान हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। लगभग 1200 छात्र, जिनमें 600 सांदीपनि स्कूल और 600 कॉलेज के हैं, प्रतिदिन इस 'नरकीय मार्ग' पर गिरते-उठते, अपने कपड़े खराब करते और खुद को घायल करते हुए शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हल्की सी फुहार पड़ने पर यहाँ बिछी खेतों की कच्ची मिट्टी मक्खन से भी ज़्यादा चिकनी हो जाती है, जिससे साइकिल और मोटरसाइकिल की तो एंट्री ही लगभग बंद है, और पैदल चलने वाले भी बड़ी मुश्किल से कत्थक नृत्य की मुद्रा में आगे बढ़ पाते हैं। प्रशासन इस पूरे मामले को आँखें मूँदकर ऐसे देख रहा है, मानो छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोई 'कमांडो ट्रेनिंग' दी जा रही हो। सांदीपनि विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने नगर परिषद को इस समस्या के समाधान के लिए अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन अधिकारियों की 'मोटी चमड़ी' पर बच्चों के सिर और घुटने फूटने की आवाज़ें भी उनके वातानुकूलित (AC) कमरों तक कोई असर नहीं कर पा रही हैं। इस पूरे मामले पर आक्रोश व्यक्त करते हुए प्राचार्य श्रीमती जयमंती मिंज ने प्रशासनिक रवैये की कड़ी निंदा करते हुए सीधे शब्दों में कहा, "हम पिछले लंबे समय से इस नरकीय मार्ग की सुध लेने के लिए नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। अनगिनत बार लिखित ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई जा चुकी है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के खातिर इस सड़क का निर्माण कराया जाए। लेकिन प्रशासन केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशा देख रहे हैं और यहाँ हमारे मासूम बच्चे रोज़ गिरकर लहूलुहान हो रहे हैं। अगर नगर परिषद को लगता है कि हम ज्ञापन देना छोड़ देंगे, तो यह उनकी भूल है। हम छात्रों की सुरक्षा के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।" जनता नगर परिषद से चुभते हुए सवाल पूछ रही है कि जब यह मार्ग उनके अधीन है और टैक्स पूरा वसूला जा रहा है, तो सुविधाएँ शून्य क्यों हैं। लोग आरोप लगा रहे हैं कि परिषद केवल कागजों पर विकास की खीर खा रही है, जबकि छात्र लहूलुहान होकर 'डिजिटल इंडिया' की राह नापते हुए भितरवार में 'कीचड़ सफारी' का मुफ्त आनंद लेने पर मजबूर हैं।1