मुज़फ्फरनगर से बड़ी खबर मुज़फ्फरनगर में पुलिस ऑफिस के घेराव के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र मलिक का बड़ा बयान सामने आया है। भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे धर्मेंद्र मलिक ने पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि “किसानों और आम जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर पुलिस यह समझती है कि दबाव बनाकर हम पीछे हट जाएंगे, तो यह उनकी गलतफहमी है। भाकियू अराजनैतिक अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तर तक संघर्ष करती रहेगी।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बयान के बाद पुलिस कार्यालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। 👉 अब देखना होगा कि धर्मेंद्र मलिक के इस बयान के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
मुज़फ्फरनगर से बड़ी खबर मुज़फ्फरनगर में पुलिस ऑफिस के घेराव के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र मलिक का बड़ा बयान सामने आया है। भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे धर्मेंद्र मलिक ने पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि “किसानों और आम जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। अगर पुलिस यह समझती है कि दबाव बनाकर हम पीछे हट जाएंगे, तो यह उनकी गलतफहमी है। भाकियू अराजनैतिक अन्याय के खिलाफ सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तर तक संघर्ष करती रहेगी।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बयान के बाद पुलिस कार्यालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना रहा, हालांकि मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। 👉 अब देखना होगा कि धर्मेंद्र मलिक के इस बयान के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
- स्वच्छ भारत की दोहरी तस्वीर: सधावली गांव में कूड़ा घर के बाहर गोबर के ढेर ने लगाया सवाल मुजफ्फरनगर (सदर), 4 जनवरी 2026 : सरकारी स्तर पर 'स्वच्छ भारत' के नारे को बुलंद किया जा रहा है, लेकिन मुजफ्फरनगर जनपद के सदर ब्लॉक के गांव सधावली में यह मिशन अपनी योजना के दूसरे चरण (SBM Phase 2) में भी धरातल पर कमजोर नजर आ रहा है। जिस कूड़ा घर (बिन) को साफ-सफाई का प्रतीक बनना था, उसके ही बाहर बिना किसी प्रबंधन के गोबर का बड़ा ढेर लगा हुआ है। न ही बिन पर लोहे का कोई दरवाजा लगा है, जिससे कूड़ा हवा के साथ उड़कर आसपास फैल रहा है। यह नजारा सवाल खड़ा करता है कि क्या स्वच्छता अभियान महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है ग्रामीणों का कहना है कि खुले में गोबर के इस ढेर और कूड़े की अनियंत्रित अवस्था से मक्खियां-मच्छर पनप रहे हैं, जो संक्रामक बीमारियों को फैलाने का कारण बन सकते हैं। खासकर, मौसम में चल रहे बदलाव और बढ़े हुए प्रदूषण के इस दौर में, ऐसी गंदगी लोगों के स्वास्थ्य के लिए और भी ज्यादा जोखिम पैदा करती है। गांव के एक युवा ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "स्वच्छ भारत की तस्वीरें तो अखबारों में छपती हैं, लेकिन हमारे गांव में बनी इस बिन का यह हाल है। बिना दरवाजे के यह बिन खुद एक कूड़े के ढेर जैसा लगता है।"1
- मुजफ्फरनगर श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष में श्री गुरु सिंह सभा द्वारा विशाल नगर कीर्तन गांधी कॉलोनी से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए शिव चौक पर सिख समाज के लोगों ने लगे स्टाल और नगर कीर्तन का किया स्वागत जिसमें पंच प्यारे और भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते हुए रोडवेज गुरुद्वारा पर हुआ समापन1
- मुज़फ्फरनगर!शहर की नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित आबकारी पुलिस चौकी पर शीत लहर के प्रकोप के बीच पुलिस कर्मी अलाव के सहारे पूरी तरह अलर्ट दिखाई दिए। आपको बता दें कि रविवार सुबह से ही मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शीत लहर का विकराल रूप ले लिया है। कड़ाके की ठंड से जहां आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं पुलिस कर्मी बढ़ती सर्दी के बावजूद अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात नज़र आ रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की यह सजगता प्रशंसनीय है। पुलिस प्रशासन द्वारा आवश्यक सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ❄️👮♂️1
- Post by Ssnews UTTAR PRDESH1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- गांव रेई में स्थित राजकीय हाईस्कूल का प्रथम वार्षिकोत्सव बडें ही धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ रोहाना गन्ना समिति के चैयरमैन अनिल त्यागी, प्रधानाध्यापिका अनिता चौधरी आदि ने दीप प्रज्वलित करके किया। छात्र छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया। मुख्य अतिथि के द्वारा मेधावियों को सम्मानित किया गया।3
- मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।2