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पन्ना जिले के अमानगंज क्षेत्र में रोजगार का गहरा संकट सामने आया है, जहाँ कई योजनाएं उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय लोगों के हाथों को काम नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर स्थिति के चलते मजदूर अपने गृह जिले पन्ना को छोड़कर बेहतर रोजगार की तलाश में अन्य स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस विकट समस्या और मजदूरों के पलायन के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
Sitaram rai
पन्ना जिले के अमानगंज क्षेत्र में रोजगार का गहरा संकट सामने आया है, जहाँ कई योजनाएं उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय लोगों के हाथों को काम नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर स्थिति के चलते मजदूर अपने गृह जिले पन्ना को छोड़कर बेहतर रोजगार की तलाश में अन्य स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस विकट समस्या और मजदूरों के पलायन के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
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- अजयगढ़ क्षेत्र में रेलवे विभाग द्वारा रेलवे लाइन निर्माण के दौरान बनाई गई परिवर्तित सड़क अधूरी छोड़ दिए जाने से ग्रामीणों को बरसात में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह अधूरी सड़क बारिश के चलते कीचड़ और जलभराव से भर गई है, जिससे पैदल चलना भी अत्यंत कठिन हो गया है। दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर इस दलदली रास्ते में फंस रहे हैं, और स्कूली बच्चों, किसानों, बुजुर्गों व मरीजों को विशेष रूप से कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे विभाग ने सड़क निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह कार्य आज भी अधूरा है। ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि रवि रावत ने बताया कि इस संबंध में रेलवे अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गई हैं, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बरसात में सड़क पर फिसलकर कई लोग चोटिल हो चुके हैं, और आपातकालीन स्थितियों में एम्बुलेंस को भी गांव तक पहुंचने में दिक्कतें आती हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे विभाग से तत्काल अधूरी परिवर्तित सड़क का निर्माण पूरा कराने की मांग की है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।1
- पन्ना जिले के अजयगढ़ में स्थित ऐतिहासिक अजयपाल किले (अजयगढ़ दुर्ग) तक पहुंचने वाली सड़क का निर्माण पिछले ढाई साल से रुका हुआ है। इसे एक गंभीर और निराशाजनक मुद्दा बताया गया है, जो इस गौरवशाली इतिहास और क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को बाधित कर रहा है। पूर्व खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह के प्रयासों से डीएमएफ (DMF) फंड से सड़क निर्माण के लिए ₹6.50 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर काम आगे नहीं बढ़ पाया है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बाधा वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) है, क्योंकि यह पहाड़ी और किला वन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। नियमों के अनुसार वन विभाग की अनुमति अनिवार्य है, और पिछले ढाई साल से फाइल विभागों के बीच घूम रही है, जिस कारण काम पूरी तरह रुका हुआ है। इस अनदेखी से पर्यटन और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में अजयगढ़ किले की ऐतिहासिक विरासत की सराहना की थी। मकर संक्रांति पर यहां एक बड़ा मेला लगता है, जिसमें अजयपाल महाराज के दर्शन के लिए लाखों लोग आते हैं। अच्छी सड़क न होने के कारण बुजुर्गों, बच्चों और आम पर्यटकों को इस दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ने में काफी कठिनाई होती है। जब तक नगर पालिका, जिला प्रशासन और वन विभाग आपस में समन्वय स्थापित कर इस प्रोजेक्ट को दिल्ली या भोपाल स्तर से मंजूरी नहीं दिलवाते, तब तक यह महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक धरोहर विकास की राह ताकती रहेगी।1
- पन्ना में पहली ही बारिश ने नगर पालिका की मानसून पूर्व तैयारियों की पोल खोल दी है। वार्ड क्रमांक 12 में नालियों की समय पर सफाई न होने के कारण बारिश का पानी सीधे स्थानीय निवासियों के घरों में घुस गया, जिससे उनका जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से नालियों की सफाई के लिए कई बार गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी शिकायतों के बावजूद समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस लापरवाही के चलते हुई जलभराव की स्थिति से नागरिकों में नगर पालिका की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा आक्रोश है। यह घटना नगर पालिका के मानसून पूर्व तैयारियों के बड़े-बड़े दावों पर सवाल उठाती है और पहली ही बारिश ने व्यवस्थाओं की कड़वी हकीकत उजागर कर दी है।3
- मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस मौसम अलर्ट के मद्देनजर, किसानों को हिदायत दी गई है कि वे अपने स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नज़र रखें और कृषि संबंधी सभी महत्वपूर्ण निर्णय, जैसे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन, इन्हीं पूर्वानुमानों के आधार पर सावधानीपूर्वक लें। मौसम में होने वाले ये बदलाव खेती-किसानी पर सीधा असर डाल सकते हैं।1
- शुभ मंगलवार को मिनी वृंदावन धाम पन्ना में भगवान जुगल किशोर महाराज जी के दर्शन प्राप्त हुए। 07 जुलाई 2026 को यह शुभ अवसर आया, जब भक्तों को भगवान जुगल किशोर महाराज जी के दर्शन कर आनंद का अनुभव मिला। जय श्री कृष्णा।1
- भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने न्यायालय द्वारा 'दरिंदो और दानव' कहे जाने वाले लोगों को जमानत दिए जाने का घोर विरोध किया है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि ऐसे व्यक्तियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। भारतीय जन मोर्चा पार्टी के जितेंद्र राय ने मोदी सरकार से यह मांग की है कि ऐसे 'दरिंदो' को चौराहे पर गोली मारने का कानून तुरंत पारित किया जाए। उनका कहना है कि इस कानून के तहत मिलने वाली सजा को पूरे देश में सीधे प्रसारित किया जाना चाहिए, ताकि यह एक मजबूत उदाहरण बने और कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचने पर विवश हो।1
- पन्ना जिले में हुई पहली तेज बारिश ने जिला चिकित्सालय की लचर व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपए के रखरखाव और मेंटेनेंस बजट का दावा किए जाने के बावजूद, अस्पताल की बदहाल स्थिति सामने आ गई, जिससे इन दावों पर सवाल खड़े हो गए।1
- यह शीर्षक किसी बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना की ओर इशारा कर रहा है। अमूमन ऐसी घटनाएं किसी गलतफहमी, ब्लैकमेलिंग, या शादी के ऐन वक्त पर किसी पुरानी तस्वीर/वीडियो के सामने आ जाने के कारण होती हैं, जिससे मानसिक तनाव इस कदर बढ़ जाता है कि व्यक्ति ऐसा आत्मघाती कदम उठा लेता है। चूंकि आपके संदेश में केवल एक न्यूज़ हेडलाइन (शीर्षक) है, इसलिए इस घटना के बारे में कुछ बातें स्पष्ट नहीं हैं।1
- मंगलवार को बांदा में कांग्रेस ने अयोध्या के राम मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ तीव्र आक्रोश मार्च निकाला। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय से माता महेश्वरी देवी चौक तक जुलूस निकाला, जहाँ उन्होंने "दान चोर, गद्दी छोड़" और "चौकीदार चोर है" जैसे नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। सभा को संबोधित करते हुए, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर से जुड़े इस कथित दान घोटाले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आस्था के नाम पर एकत्र की गई राशि के उपयोग पर भी सवाल उठते हैं, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर "बड़े जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास" न्याय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस दौरान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए और यदि किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े ऐसे किसी भी मामले में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।1