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मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस मौसम अलर्ट के मद्देनजर, किसानों को हिदायत दी गई है कि वे अपने स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नज़र रखें और कृषि संबंधी सभी महत्वपूर्ण निर्णय, जैसे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन, इन्हीं पूर्वानुमानों के आधार पर सावधानीपूर्वक लें। मौसम में होने वाले ये बदलाव खेती-किसानी पर सीधा असर डाल सकते हैं।
Dilip Kumar Bharti
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस मौसम अलर्ट के मद्देनजर, किसानों को हिदायत दी गई है कि वे अपने स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नज़र रखें और कृषि संबंधी सभी महत्वपूर्ण निर्णय, जैसे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन, इन्हीं पूर्वानुमानों के आधार पर सावधानीपूर्वक लें। मौसम में होने वाले ये बदलाव खेती-किसानी पर सीधा असर डाल सकते हैं।
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- मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस मौसम अलर्ट के मद्देनजर, किसानों को हिदायत दी गई है कि वे अपने स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नज़र रखें और कृषि संबंधी सभी महत्वपूर्ण निर्णय, जैसे बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन, इन्हीं पूर्वानुमानों के आधार पर सावधानीपूर्वक लें। मौसम में होने वाले ये बदलाव खेती-किसानी पर सीधा असर डाल सकते हैं।1
- पन्ना जिले के अमानगंज क्षेत्र में रोजगार का गहरा संकट सामने आया है, जहाँ कई योजनाएं उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय लोगों के हाथों को काम नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर स्थिति के चलते मजदूर अपने गृह जिले पन्ना को छोड़कर बेहतर रोजगार की तलाश में अन्य स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं। यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इस विकट समस्या और मजदूरों के पलायन के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।1
- जेडीयू की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल ने किसानों के साथ मिलकर मंडलायुक्त से मुलाकात की और निष्पक्ष जांच की मांग की है।1
- धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक अजयपाल किला तक बनने वाली करीब 6.50 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना पिछले ढाई वर्षों से वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के अभाव में अधर में लटकी हुई है। यह सड़क श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि मकर संक्रांति, अमावस्या और पूर्णिमा सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर हजारों श्रद्धालु किले तक पहुंचते हैं। वर्तमान में किले तक पहुंचने के लिए केवल प्राचीन पत्थर की सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में अजयपाल किले का उल्लेख कर इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता बता चुके हैं। निविदा प्रक्रिया पूरी होने और 12 जनवरी 2024 को अनुबंध होने के बावजूद, निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह के प्रयासों से सड़क को स्वीकृति मिली थी, लेकिन ठेकेदार केपी राजा के अनुसार एनओसी नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया। नगर परिषद अध्यक्ष सीता सरोज गुप्ता ने बताया कि यह मामला विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। वहीं, सीएमओ संजय बाल्मीकी ने जानकारी दी है कि वन विभाग व टाइगर रिजर्व की पत्रावली का जवाब भेजा जा रहा है, जिससे जल्द एनओसी मिलने और निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने शासन से जल्द अनुमति जारी कर सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है, क्योंकि इस ढाई साल की देरी को आस्था और पर्यटन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।1
- बांदा में कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने अयोध्या में हुए कथित चंदा चोरी मामले के विरोध में एक 'सुबुद्धि पदयात्रा' का आयोजन किया। पार्टी पदाधिकारियों ने इस दौरान जोर देकर कहा कि भगवान श्री राम मंदिर के लिए एकत्रित किए गए चंदे में हुई कथित धांधली से करोड़ों लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है।1
- जनपद बांदा के खहरा ग्राम से छोटे बच्चों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें यह खुलासा किया गया है कि पूरा गांव एक महीने से शहर की कनेक्टिविटी से कटा हुआ है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार बच्चों की पढ़ाई तथा मजदूर किसानों की बात करती है, जो विकासशील बांदा की तस्वीर पर सवाल उठाता है। ग्रामवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई अधिकारियों को आवेदन दिए हैं, लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या पर सहानुभूति नहीं दिखाई है और कोई समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि क्षेत्र का ठेकेदार इतना प्रभावशाली है कि जब ग्रामीण विरोध करते हैं, तो वह थाना मटौंध को फोन कर पुलिस बुला लेता है। ग्रामवासियों के अनुसार, थाना पुलिस भी ठेकेदार का पक्ष लेती है और ग्रामीणों को जेल भेजने की धमकी देती है। इससे यह कहावत चरितार्थ होती है कि 'जिसकी लाठी उसी की भैंस', जहां पैसे वाले ठेकेदार की सुरक्षा में पूरा थाना मटौंध खड़ा है, जबकि गांव वालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। अब यह देखना बाकी है कि खहरा ग्राम के लोगों को अपनी इस समस्या से कब तक निजात मिल पाती है।3
- भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने न्यायालय द्वारा 'दरिंदो और दानव' कहे जाने वाले लोगों को जमानत दिए जाने का घोर विरोध किया है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि ऐसे व्यक्तियों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। भारतीय जन मोर्चा पार्टी के जितेंद्र राय ने मोदी सरकार से यह मांग की है कि ऐसे 'दरिंदो' को चौराहे पर गोली मारने का कानून तुरंत पारित किया जाए। उनका कहना है कि इस कानून के तहत मिलने वाली सजा को पूरे देश में सीधे प्रसारित किया जाना चाहिए, ताकि यह एक मजबूत उदाहरण बने और कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचने पर विवश हो।1
- बांदा शहर में हुई झमाझम बारिश के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। इस widespread जलभराव से आम जनमानस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1